मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी अप्रैल से जुलाई 2026 के शैक्षणिक केलेंडर के पाठ्यक्रम के अनुरूप इस पोस्ट में कक्षा 12 वीं के हिंदी, अंग्रेजी, के अतिरिक्त मुख्य रूप से कृषि संकाय (एलीमेंट्स ऑफ़ साइंस, फसल उत्पादन,पशु पालन ) हेतु शैक्षणिक केलेंडर अनुसार अप्रैल से जुलाई माह का पाठ्यक्रम एवं उस पर आधारित आगामी बोर्ड परीक्षा 2027 हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न -उत्तर दिए गए हैं शिक्षक भी इस शिक्षण सामग्री अनुरूप महत्वपूर्ण प्रश्न -उत्तर को उत्तर सहित स्टूडेंट्स को नोट करा सकते हैं I

कृषि के लिए उपयोगी विज्ञान एवं गणित के मूल तत्व के लिए अप्रैल 2026 से जुलाई 2026 तक का पाठ्यक्रम
- प्रकाश परिभाषा, गुण छाया, ग्रहण लेंस, मानव नेत्र एवं प्रकाशीय यंत्र
- चुम्बकत्व– परिभाषा, प्रकार, गुण एवं संबंधित तत्व
3.ऊष्मा– विशिष्ट ऊष्मा, गुप्त ऊष्मा, न्यूटन का शीतलीकरण का नियम
4.विद्युत– विद्युत आवेश, विद्युत बल रेखाएं
प्रायोगिक कार्य इन इकाइयों से संबंधित प्रयोग
5.कृषि मौसम विज्ञान—इकाईयों से संबंधित मौसम के तत्व–वर्षा, तापमान, आर्द्रता, सूर्य प्रकाश आदि, मौसम विज्ञान आधारित उपकरण एवं संघनन
6.कार्बनिक रसायन—कार्बनिक यौगिक का महत्व, वर्गीकरण एवं उपयोग
प्रायोगिक कार्य– इन इकाईयों से संबंधित प्रयोग
7.हाइड्रोकार्बन परिभाषा, वर्गीकरण
कृषि के लिए उपयोगी विज्ञान एवं गणित के मूल तत्व अप्रैल से जुलाई तक के पाठ्यक्रम आधारित बोर्ड परीक्षा 2027 हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न -उत्तर
1 अंक वाले प्रश्न (कुल 10 प्रश्न -उत्तर)
(अ) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
- प्रश्न: स्वस्थ मानव नेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी कितनी होती है?
- (क) 25 सेमी
- (ख) 50 सेमी
- (ग) अनन्त
- (घ) 10 सेमी
- उत्तर: (क) 25 सेमी
- प्रश्न: बायोगैस (गोबर गैस) का मुख्य घटक कौन सा हाइड्रोकार्बन है?
- (क) एथेन
- (ख) मीथेन
- (ग) एथिलीन
- (घ) एसिटिलीन
- उत्तर: (ख) मीथेन
(ब) सही जोड़ी बनाइए (Matching) प्रश्न -उत्तर
प्रश्न: कॉलम ‘अ’ का कॉलम ‘ब’ से सही मिलान कीजिए:
| कॉलम ‘अ’ | कॉलम ‘ब’ |
|---|---|
| 1. चुम्बकीय आघूर्ण का मात्रक | (A) कैलोरीमीटर |
| 2. विशिष्ट ऊष्मा का मापन | (B) एम्पियर-मीटर² |
| 3. वायुमंडलीय आर्द्रता | (C) कूलाम |
| 4. विद्युत आवेश का मात्रक | (D) हाइग्रोमीटर |
- उत्तर (सही मिलान):
1 (B), 2 (A), 3 (D), 4 (C)
(स) रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks)
- प्रश्न: न्यूटन का शीतलीकरण का नियम केवल तब लागू होता है जब वस्तु और वातावरण के बीच ताप का अंतर _________ हो।
- उत्तर: बहुत कम (या 30°C से कम)
- प्रश्न: पानी की विशिष्ट ऊष्मा का मान सबसे अधिक _________ कैलोरी/ग्राम°C होता है।
- उत्तर: 1
(द) एक शब्द/वाक्य में उत्तर
- प्रश्न: सरल हाइड्रोकार्बन का सामान्य नाम क्या है जिनमें केवल एकल बंध होते हैं?
- उत्तर: एल्केन (या पैराफिन)
- प्रश्न: बादलों का हवा में तैरना मौसम विज्ञान की किस क्रिया (संघनन के रूप) के अंतर्गत आता है?
- उत्तर: कोहरा/बादल बनना (जलवाष्प का संघनन)
2 अंक वाले प्रश्न एवं उत्तर (कुल 6 प्रश्न) प्रश्न -उत्तर
- प्रश्न: प्रकाश के विक्षेपण (Dispersion of Light) से क्या तात्पर्य है?
- उत्तर: जब सूर्य का श्वेत प्रकाश किसी प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो वह अपने अवयवी सात रंगों में विभाजित हो जाता है। इस परिघटना को प्रकाश का वर्ण विक्षेपण कहते हैं।
- प्रश्न: स्थायी और अस्थायी चुम्बक में दो प्रमुख अंतर लिखिए।
- उत्तर:
- (i) स्थायी चुम्बक का चुम्बकत्व शीघ्र नष्ट नहीं होता (यह स्टील से बनते हैं), जबकि अस्थायी चुम्बक का चुम्बकत्व विद्युत धारा बंद करते ही नष्ट हो जाता है (यह नर्म लोहे से बनते हैं)।
- (ii) स्थायी चुम्बक की चुम्बकीय शक्ति निश्चित होती है, जबकि अस्थायी चुम्बक की शक्ति धारा बढ़ाकर बदली जा सकती है।
- उत्तर:
- प्रश्न: गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखिए।
- उत्तर: नियत ताप पर किसी पदार्थ की अवस्था परिवर्तन (जैसे बर्फ से पानी बनना) के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को गुप्त ऊष्मा कहते हैं। इसका SI मात्रक जूल/किग्रा (या कैलोरी/ग्राम) है।
- प्रश्न: विद्युत बल रेखाओं के दो प्रमुख गुण लिखिए।
- उत्तर:
- (i) ये रेखाएं धन आवेश से प्रारंभ होकर ऋण आवेश पर समाप्त होती हैं।
- (ii) दो विद्युत बल रेखाएं कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
- उत्तर:
- प्रश्न: कृषि मौसम विज्ञान (Agricultural Meteorology) की परिभाषा लिखिए।
- उत्तर: विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत मौसम और जलवायु के तत्वों (वर्षा, तापमान, आर्द्रता आदि) का कृषि, फसलों और पशुपालन पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाता है, उसे कृषि मौसम विज्ञान कहते हैं।
- प्रश्न: कार्बनिक यौगिकों के दो मुख्य लक्षण या विशेषताएं लिखिए।
- उत्तर:
- (i) इनमें अनिवार्य रूप से कार्बन तत्व उपस्थित होता है और ये सहसंयोजक बंध बनाते हैं।
- (ii) इनके गलनांक और क्वथनांक अकार्बनिक यौगिकों की तुलना में कम होते हैं।
- उत्तर:
3 अंक वाले प्रश्न एवं उत्तर (कुल 6 प्रश्न) प्रश्न -उत्तर
- प्रश्न: निकट दृष्टि दोष (Myopia) क्या है? इसके कारण और निवारण के उपाय लिखिए।
- उत्तर:
- परिभाषा: इस दोष से पीड़ित व्यक्ति को पास की वस्तुएं स्पष्ट दिखाई देती हैं, परंतु दूर की वस्तुएं स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं।
- कारण: नेत्र लेंस की वक्रता बढ़ जाना या नेत्र गोलक का लंबा हो जाना।
- निवारण: इसके उपचार के लिए उचित फोकस दूरी वाले अवतल लेंस (Concave Lens) के चश्मे का उपयोग किया जाता है।
- उत्तर:
- प्रश्न: न्यूटन के शीतलीकरण नियम (Newton’s Law of Cooling) को समझाइए तथा इसकी सीमाएं लिखिए।
- उत्तर: इस नियम के अनुसार, किसी गर्म वस्तु के ठंडे होने की दर (ऊष्मा हानि की दर) वस्तु और उसके चारों ओर के वातावरण के ताप के अंतर के समानुपाती होती है।
- सीमाएं:
- वस्तु और वातावरण के बीच ताप का अंतर बहुत अधिक नहीं होना चाहिए।
- ऊष्मा की हानि केवल विकिरण द्वारा होनी चाहिए।
- प्रयोग के दौरान आसपास की हवा शांत होनी चाहिए।
- सीमाएं:
- उत्तर: इस नियम के अनुसार, किसी गर्म वस्तु के ठंडे होने की दर (ऊष्मा हानि की दर) वस्तु और उसके चारों ओर के वातावरण के ताप के अंतर के समानुपाती होती है।
- प्रश्न: संघनन (Condensation) किसे कहते हैं? कृषि के लिए उपयोगी इसके किन्हीं दो रूपों (जैसे ओस, पाला) को समझाइए।
- उत्तर: वायु में उपस्थित जलवाष्प के ठंडा होकर द्रव या ठोस रूप में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं।
- ओस (Dew): रात में पृथ्वी की सतह ठंडी होने पर हवा की जलवाष्प पानी की बूंदों के रूप में पत्तियों पर जमा हो जाती है।
- पाला (Frost): जब तापमान 0°C से नीचे गिर जाता है, तो जलवाष्प बूंदों के बजाय बर्फ के छोटे कणों में बदल जाती है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाती है।
- उत्तर: वायु में उपस्थित जलवाष्प के ठंडा होकर द्रव या ठोस रूप में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं।
- प्रश्न: समजातीय श्रेणी (Homologous Series) किसे कहते हैं? इसकी तीन विशेषताएं लिखिए।
- उत्तर: कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रेणी जिनके रासायनिक गुण समान होते हैं और किन्हीं दो लगातार सदस्यों के बीच \(-CH_2-\) समूह का अंतर होता है।
- विशेषताएं:
- श्रेणी के सभी सदस्यों को एक ही सामान्य सूत्र (जैसे एल्केन का \(C_{n}H_{2n+2}\)) द्वारा दर्शाया जा सकता है।
- प्रत्येक उत्तरवर्ती सदस्य के अणुभार में 14 का अंतर होता है।
- इनके रासायनिक गुणों में समानता होती है।
- विशेषताएं:
- उत्तर: कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रेणी जिनके रासायनिक गुण समान होते हैं और किन्हीं दो लगातार सदस्यों के बीच \(-CH_2-\) समूह का अंतर होता है।
- प्रश्न: वर्षामापी (Rain Gauge) क्या है? इसका रेखाचित्र बनाते हुए कार्यविधि संक्षेप में लिखिए।
- उत्तर: यह मौसम विज्ञान का एक उपकरण है जिसका उपयोग किसी निश्चित समय में हुई वर्षा की मात्रा मापने के लिए किया जाता है।
- कार्यविधि: इसमें एक बेलनाकार पात्र के ऊपर एक कीप लगी होती है। वर्षा का पानी कीप से होकर अंदर रखे कांच के मापक जार में इकट्ठा होता है। जार पर मिलीमीटर (mm) में अंकित पैमानों को पढ़कर वर्षा की माप दर्ज की जाती है।
- उत्तर: यह मौसम विज्ञान का एक उपकरण है जिसका उपयोग किसी निश्चित समय में हुई वर्षा की मात्रा मापने के लिए किया जाता है।
- प्रश्न: हाइड्रोकार्बन किसे कहते हैं? संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में तीन अंतर लिखिए।
- उत्तर: केवल कार्बन और हाइड्रोजन तत्वों से मिलकर बने यौगिकों को हाइड्रोकार्बन कहते हैं।लक्षणसंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन)असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन/एल्काइन)बंध प्रकारकार्बन परमाणुओं के बीच एकल बंध (\(-C-C-\)) होता है।कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि-बंध या त्रि-बंध होता है।क्रियाशीलताये कम क्रियाशील होते हैं।ये अधिक क्रियाशील होते हैं।उदाहरणमीथेन (\(CH_{4}\)), एथेन (\(C_{2}H_{6}\))एथिलीन (\(C_{2}H_{4}\)), एसिटिलीन (\(C_{2}H_{2}\))
4 अंक वाले प्रश्न एवं उत्तर (कुल 6 प्रश्न) प्रश्न -उत्तर
- प्रश्न: मानव नेत्र की संरचना का नामांकित चित्र बनाइए तथा इसके किन्हीं तीन मुख्य भागों (कॉर्निया, आइरिस, रेटिना) के कार्य लिखिए।
- उत्तर:(परीक्षा में मानव नेत्र का गोलाकार स्वच्छ चित्र बनाएं)
- मुख्य भागों के कार्य:
- कॉर्निया (Cornia): आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश का अधिकांश भाग यहीं से अपवर्तित होता है।
- आइरिस (Iris): यह आंख के रंग को निर्धारित करता है और पुतली के आकार को नियंत्रित कर आंख में जाने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करता है।
- रेटिना (Retina): यह आंख का पर्दा है जहां वस्तु का वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनता है और यह प्रकाश संकेतों को मस्तिष्क तक भेजता है।
- मुख्य भागों के कार्य:
- उत्तर:(परीक्षा में मानव नेत्र का गोलाकार स्वच्छ चित्र बनाएं)
- प्रश्न: चुम्बकीय बल रेखाएं क्या हैं? इनके चार महत्वपूर्ण गुण चित्र सहित समझाइए।
- उत्तर: चुम्बकीय क्षेत्र में खींचा गया वह काल्पनिक निष्कोण वक्र जिसके किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को बताती है।
- चार गुण:
- ये रेखाएं चुम्बक के बाहर उत्तरी ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिणी ध्रुव (S) में प्रवेश करती हैं और अंदर S से N की ओर जाती हैं (बंद वक्र बनाती हैं)।
- दो चुम्बकीय बल रेखाएं कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
- ध्रुवों के पास ये रेखाएं घनी होती हैं, जो वहां तीव्र चुम्बकीय क्षेत्र को दर्शाती हैं।
- ये खींची हुई रबर की डोरी की तरह लंबाई में सिकुड़ने का प्रयास करती हैं, इसलिए विपरीत ध्रुवों में आकर्षण होता है।
- चार गुण:
- उत्तर: चुम्बकीय क्षेत्र में खींचा गया वह काल्पनिक निष्कोण वक्र जिसके किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को बताती है।
- प्रश्न: स्थिर विद्युत के अंतर्गत “कूलाम का व्युत्क्रम वर्ग का नियम” लिखिए तथा इसका गणितीय सूत्र स्थापित कीजिए।
- उत्तर:नियम:

- प्रश्न: कृषि को प्रभावित करने वाले मौसम के चार प्रमुख तत्व (वर्षा, तापमान, आर्द्रता, सूर्य प्रकाश) का फसलों पर प्रभाव विस्तार से समझाइए।
- उत्तर:
- वर्षा: फसलों की सिंचाई का प्राकृतिक स्रोत है। समय पर वर्षा से पैदावार अच्छी होती है, लेकिन अतिवृष्टि (बाढ़) या अनावृष्टि (सूखा) फसलों को बर्बाद कर देती है।
- तापमान: बीजों के अंकुरण, पौधों की वृद्धि और प्रकाश संश्लेषण के लिए एक निश्चित अनुकूल तापमान आवश्यक है। अत्यधिक पाला या गर्मी पौधों को सुखा देती है।
- आर्द्रता (हवा में नमी): हवा में उचित नमी वाष्पोत्सर्जन को संतुलित रखती है। बहुत अधिक आर्द्रता होने पर फसलों में कीट और फफूंद जनित रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है।
- सूर्य प्रकाश: पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ही अपना भोजन (प्रकाश संश्लेषण) बनाते हैं। प्रकाश की अवधि (Duration) फसलों के पकने और फूल आने की प्रक्रिया को तय करती है।
- उत्तर:
- प्रश्न: कृषि में कार्बनिक यौगिकों के महत्व और उपयोग पर एक विस्तृत लेख लिखिए (कोई चार बिंदु)।
- उत्तर: कृषि क्षेत्र में कार्बनिक यौगिक रीढ़ की हड्डी की तरह हैं:
- खाद और उर्वरक के रूप में: यूरिया [\(CO(NH_2)_2\)] एक प्रमुख नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक उर्वरक है जो पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक है। गोबर की खाद और कम्पोस्ट भी पूर्णतः कार्बनिक होते हैं।
- कीटनाशक एवं शाकनाशी: फसलों को कीड़ों और खरपतवार से बचाने के लिए उपयोग होने वाले रसायन (जैसे- बी.एच.सी, ऑर्गेनोफॉस्फेट्स) कार्बनिक यौगिक ही हैं।
- प्लास्टिक और मल्चिंग: आधुनिक कृषि में ड्रिप सिंचाई की पाइपें और खेतों में नमी रोकने के लिए प्रयुक्त मल्चिंग फिल्म पॉलीथीन (कार्बनिक बहुलक) की बनी होती हैं।
- वृद्धि नियंत्रक (हार्मोन): पौधों की वृद्धि बढ़ाने या फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए प्रयुक्त ऑक्सिन, एथिलीन आदि कार्बनिक यौगिक हैं।
- उत्तर: कृषि क्षेत्र में कार्बनिक यौगिक रीढ़ की हड्डी की तरह हैं:
- प्रश्न: एथिलीन (\(C_{2}H_{4}\)) गैस बनाने की प्रयोगशाला विधि का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत कीजिए: (i) रासायनिक समीकरण (ii) नामांकित चित्र (iii) कोई दो उपयोग।
- उत्तर:
- विधि सिद्धांत: प्रयोगशाला में एथिल अल्कोहल (\(C_{2}H_{5}OH\)) को सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (\(H_{2}SO_{4}\)) के साथ 160°C से 170°C पर गर्म करने पर एथिलीन गैस बनती है।
- (i) रासायनिक समीकरण:
\(C_2H_5OH \xrightarrow[160^\circ C-170^\circ C]{\text{सांद्र } H_2SO_4} C_2H_4 \uparrow + H_2O\) - (ii) नामांकित चित्र: (परीक्षा में गोल पेंदी का फ्लस्क, बर्नर, निकास नली और जल विस्थापन विधि द्वारा गैस जार में एकत्र होती एथिलीन गैस का स्वच्छ चित्र बनाएं)।
- (iii) दो प्रमुख उपयोग:
- हरे और कच्चे फलों (जैसे आम, केला) को कृत्रिम रूप से पकाने में।
- मस्टर्ड गैस जैसी युद्ध गैसें और पॉलिथीन प्लास्टिक बनाने में।
- उत्तर:
फसल उत्पादन एवं उद्यान शास्त्र के लिए अप्रैल 2026 से जुलाई 2026 तक का पाठ्यक्रम
जल निकास– परिभाषा, महत्व, आवश्यक विधियां एवं प्रणालियां व प्रभाव
पादप पोषण– पोषक तत्व उनका वर्गीकरण, महत्व व कमी के लक्षण, संबंधित…
प्रायोगिक कार्य
- खाद–परिभाषा वर्गीकरण एवं खाद तैयार करने की विधियां
- उर्वरक–परिभाषा वर्गीकरण एवं विभिन्न रासायनिक व जैव उर्वरक
- पौध संरक्षण—परिभाषा, महत्व एवं आवश्यकता, खरपतवार अध्ययन एवं नियंत्रण
पौध संरक्षण—कीट एवं रोगों का अध्ययन व नियंत्रण की विधियां, जैविक कीट नाशियों का अध्ययन, इकाईयों से संबंधित प्रयोग
फसलों की खेती—धान, सोयाबीन, मूंग, उड़द व अरहर की खेती
फसल उत्पादन एवं उद्यान शास्त्र के अप्रैल से जुलाई तक के पाठ्यक्रम आधारित बोर्ड परीक्षा 2027 हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न -उत्तर
1 अंक वाले प्रश्न (कुल 10 प्रश्न-उत्तर)
(अ) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
- प्रश्न: पौधों के लिए ‘नाइट्रोजन’ किस प्रकार का पोषक तत्व है?
- (क) मुख्य या प्राथमिक पोषक तत्व
- (ख) द्वितीयक पोषक तत्व
- (ग) सूक्ष्म पोषक तत्व
- (घ) इनमें से कोई नहीं
- उत्तर: (क) मुख्य या प्राथमिक पोषक तत्व
- प्रश्न: धान की फसल में लगने वाला प्रसिद्ध ‘खैरा रोग’ किस तत्व की कमी से होता है?
- (क) नाइट्रोजन
- (ख) जस्ता (जिंक)
- (ग) लोहा
- (घ) पोटेशियम
- उत्तर: (ख) जस्ता (जिंक)
(ब) सही जोड़ी बनाइए (Matching)
प्रश्न: कॉलम ‘अ’ का कॉलम ‘ब’ से सही मिलान कीजिए:
| कॉलम ‘अ’ | कॉलम ‘ब’ |
|---|---|
| 1. अमोनियम सल्फेट | (A) जैव उर्वरक (Bio-fertilizer) |
| 2. राइजोबियम | (B) अभिशरण प्रणाली (Herringbone System) |
| 3. जल निकास की प्रणाली | (C) पूर्ण जड़ परजीवी खरपतवार |
| 4. ओरोबैंकी (Orobanche) | (D) रासायनिक उर्वरक |
- उत्तर (सही मिलान):
1 (D), 2 (A), 3 (B), 4 (C)
(स) रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks)
- प्रश्न: भूमि की सतह से अतिरिक्त जल को बाहर निकालना _________ जल निकास कहलाता है।
- उत्तर: पृष्ठीय (या सतही)
- प्रश्न: यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा _________ प्रतिशत होती है।
- उत्तर: 46%
(द) एक शब्द/वाक्य में उत्तर
- प्रश्न: किसी एक पूर्णतः जैविक कीटनाशी (Bio-pesticide) का नाम लिखिए जो नीम से बनता है।
- उत्तर: अजीडिरैक्टिन (या नीम का तेल / नीम्बिसिडिन)
- प्रश्न: सोयाबीन की फसल का वानस्पतिक (वैज्ञानिक) नाम क्या है?
- उत्तर: ग्लाइसिन मैक्स (Glycine max)
2 अंक वाले प्रश्न एवं उत्तर (कुल 6 प्रश्न)
- प्रश्न: जल निकास (Drainage) की परिभाषा लिखिए।
- उत्तर: फसलों की उत्तम पैदावार के लिए भूमि की सतह या उप-सतह से अनावश्यक (अतिरिक्त) जल को कृत्रिम रूप से बाहर निकालने की क्रिया को जल निकास कहते हैं।
- प्रश्न: पादप पोषण (Plant Nutrition) किसे कहते हैं?
- उत्तर: पौधों द्वारा अपने जीवन चक्र को पूरा करने, वृद्धि करने और चयापचय क्रियाओं के लिए भूमि, वायु तथा जल से आवश्यक पोषक तत्वों को ग्रहण करने की प्रक्रिया को पादप पोषण कहते हैं।
- प्रश्न: खाद (Manure) और उर्वरक (Fertilizer) में दो मुख्य अंतर लिखिए।
- उत्तर:
- (i) खाद एक प्राकृतिक कार्बनिक पदार्थ है जो गोबर या पेड़-पौधों के सड़ने से बनता है, जबकि उर्वरक कारखानों में तैयार होने वाले अकार्बनिक रासायनिक पदार्थ हैं।
- (ii) खाद में सभी पोषक तत्व अल्प मात्रा में होते हैं, जबकि उर्वरक में विशेष पोषक तत्व (जैसे N, P, K) अधिक मात्रा में होते हैं।
- उत्तर:
- प्रश्न: जैव उर्वरक (Bio-fertilizer) क्या हैं? दो उदाहरण दीजिए।
- उत्तर: ये ऐसे सूक्ष्मजीवों (जीवाणु, कवक या नीले-हरे शैवाल) से युक्त प्राकृतिक उत्पाद हैं जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करके या भूमि के फॉस्फोरस को घोलकर पौधों को सुलभ कराते हैं।
- उदाहरण: राइजोबियम (Rhizobium), एज़ेटोबैक्टर (Azotobacter)।
- उत्तर: ये ऐसे सूक्ष्मजीवों (जीवाणु, कवक या नीले-हरे शैवाल) से युक्त प्राकृतिक उत्पाद हैं जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करके या भूमि के फॉस्फोरस को घोलकर पौधों को सुलभ कराते हैं।
- प्रश्न: पौध संरक्षण (Plant Protection) की परिभाषा और इसकी आवश्यकता क्यों है?
- उत्तर: फसलों को हानिकारक कीटों, रोगों, खरपतवारों और प्रतिकूल मौसम से बचाकर सुरक्षित रखने के उपायों को पौध संरक्षण कहते हैं। फसलों को आर्थिक नुकसान से बचाने और भरपूर उत्पादन लेने के लिए इसकी अत्यधिक आवश्यकता है।
- प्रश्न: खरपतवार (Weeds) किसे कहते हैं? कोई दो उदाहरण लिखिए।
- उत्तर: खेतों में मुख्य फसल के साथ बिना बोए उग आने वाले ऐसे अवांछित पौधे, जो स्थान, प्रकाश और पोषक तत्वों के लिए मुख्य फसल से प्रतियोगिता करते हैं और उपज घटाते हैं, खरपतवार कहलाते हैं।
- उदाहरण: बथुआ, मोथा, गाजरघास।
- उत्तर: खेतों में मुख्य फसल के साथ बिना बोए उग आने वाले ऐसे अवांछित पौधे, जो स्थान, प्रकाश और पोषक तत्वों के लिए मुख्य फसल से प्रतियोगिता करते हैं और उपज घटाते हैं, खरपतवार कहलाते हैं।
3 अंक वाले प्रश्न एवं उत्तर (कुल 6 प्रश्न)
- प्रश्न: जल निकास का फसलों एवं भूमि पर क्या प्रभाव पड़ता है? किन्हीं तीन बिंदुओं में समझाइए।
- उत्तर:
- मृदा वायु का संचार: भूमि से अतिरिक्त जल निकलने पर मिट्टी के छिद्रों में हवा (ऑक्सीजन) का संचार बढ़ता है, जिससे जड़ों का विकास अच्छा होता है।
- तापमान संतुलन: उचित जल निकास से भूमि का तापमान अनुकूल बना रहता है, जिससे बीज अंकुरण सही समय पर होता है।
- लाभदायक जीवाणुओं की क्रियाशीलता: मिट्टी में हवा मिलने से नाइट्रोजन स्थिर करने वाले जीवाणु अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
- उत्तर:
- प्रश्न: पौधों में ‘नाइट्रोजन’ और ‘फॉस्फोरस’ तत्व का महत्व एवं उनकी कमी के एक-एक लक्षण लिखिए।
- उत्तर:
- नाइट्रोजन (N):
- महत्व: यह पौधों की वानस्पतिक वृद्धि और हरे रंग (क्लोरोफिल) के लिए आवश्यक है।
- कमी के लक्षण: पौधों की पुरानी और नीचे की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं।
- फॉस्फोरस (P):
- महत्व: यह जड़ों के विकास, दाने बनने और फसलों के जल्दी पकने में सहायक है।
- कमी के लक्षण: पत्तियां और तने गहरे हरे या बैंगनी रंग के दिखाई देने लगते हैं।
- नाइट्रोजन (N):
- उत्तर:
- प्रश्न: कम्पोस्ट खाद (Compost Manure) बनाने की ‘इंदौर विधि’ और ‘बेंगलोर विधि’ में तीन मुख्य अंतर लिखिए।
- उत्तर:अंतर का आधारइंदौर विधिबेंगलोर विधिप्रक्रियायह एक वायवीय (Aerobic – हवा की उपस्थिति) विधि है।यह एक अवायवीय (Anaerobic – हवा की अनुपस्थिति) विधि है।पलटाईइसमें कचरे को निश्चित समय पर 2-3 बार पलटना पड़ता है।इसमें कचरे को गड्ढे में भरकर बंद कर दिया जाता है, पलटाई की जरूरत नहीं होती।समयइसमें खाद 3 से 4 महीने में तैयार हो जाती है।इसमें खाद तैयार होने में 5 से 6 महीने का समय लगता है।
- प्रश्न: नाइट्रोजन युक्त, फॉस्फोरस युक्त और पोटेशियम युक्त रासायनिक उर्वरकों का वर्गीकरण करते हुए प्रत्येक का एक-एक उदाहरण व उनमें पाए जाने वाले तत्व का प्रतिशत लिखिए।
- उत्तर:
- नाइट्रोजन धारी उर्वरक: ये पौधों को नाइट्रोजन प्रदान करते हैं। उदाहरण: यूरिया (46% नाइट्रोजन)।
- फास्फेटिक उर्वरक: ये पौधों को फास्फोरस प्रदान करते हैं। उदाहरण: सिंगल सुपर फॉस्फेट – SSP (16% फॉस्फोरस या \(P_{2}O_{5}\))।
- पोटाश धारी उर्वरक: ये पौधों को पोटेशियम प्रदान करते हैं। उदाहरण: म्यूटेट ऑफ पोटाश – MOP (60% पोटेशियम या \(K_{2}O\))।
- उत्तर:
- प्रश्न: खरपतवार नियंत्रण की यांत्रिक या भौतिक विधियों (Mechanical Methods) को संक्षेप में समझाइए।
- उत्तर: खरपतवारों को भौतिक बल या कृषि यंत्रों द्वारा नष्ट करना यांत्रिक नियंत्रण कहलाता है। इसके प्रमुख तरीके निम्नलिखित हैं:
- हाथ से उखाड़ना (Hand Pulling): फसलों के बीच उगे खरपतवारों को हाथ से जड़ सहित उखाड़ फेंकना।
- निराई-गुड़ाई (Hoeing): खुरपी या कल्टीवेटर की सहायता से मिट्टी को खोदकर खरपतवारों को काटना।
- मल्चिंग (Mulching): खेत की खाली सतह को सूखी घास या प्लास्टिक फिल्म से ढक देना, जिससे सूर्य का प्रकाश न मिलने पर खरपतवार नहीं उग पाते।
- उत्तर: खरपतवारों को भौतिक बल या कृषि यंत्रों द्वारा नष्ट करना यांत्रिक नियंत्रण कहलाता है। इसके प्रमुख तरीके निम्नलिखित हैं:
- प्रश्न: फसलों को रोगों से बचाने के लिए उपयोग की जाने वाली ‘जैविक नियंत्रण विधि’ (Biological Control) को समझाइए।
- उत्तर: इस विधि में हानिकारक कीटों या फसलों के रोगों को नष्ट करने के लिए किसी रासायनिक दवा के स्थान पर प्रकृति में उपलब्ध उनके शत्रु जीवों (मित्र कीटों, जीवाणुओं या कवकों) का प्रयोग किया जाता है।
- उदाहरण: फसलों में हानिकारक फफूंद जनित रोगों को रोकने के लिए ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) नामक मित्र कवक का प्रयोग करना। कपास या टमाटर में इल्लियों के नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्रामा (Trichogramma) मित्र कीट के अंडे छोड़ना। इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीं होता।
- उत्तर: इस विधि में हानिकारक कीटों या फसलों के रोगों को नष्ट करने के लिए किसी रासायनिक दवा के स्थान पर प्रकृति में उपलब्ध उनके शत्रु जीवों (मित्र कीटों, जीवाणुओं या कवकों) का प्रयोग किया जाता है।
4 अंक वाले प्रश्न एवं उत्तर (कुल 6 प्रश्न)
- प्रश्न: जल निकास की प्रमुख प्रणालियों (Systems of Drainage) – प्राकृतिक, हेरिंगबोन और ग्रिडिरॉन प्रणाली का सचित्र वर्णन कीजिए।
- उत्तर: खेतों से पानी निकालने के लिए नालियों के जाल को व्यवस्थित करने की मुख्य तीन प्रणालियां हैं:
- प्राकृतिक प्रणाली (Natural System): इसमें नालियां भूमि के ढाल के अनुसार स्वतः प्राकृतिक रूप से बनाई जाती हैं। यह ऊबड़-खाबड़ खेतों के लिए उपयुक्त है।
- हेरिंगबोन प्रणाली (Herringbone System): इसमें खेत के बीचों-बीच एक मुख्य (बड़ी) नाली होती है और दोनों तरफ से आकर सहायक छोटी नालियां तिरछी होकर इस मुख्य नाली में मिलती हैं। यह देखने में मछली की रीढ़ की हड्डी जैसी लगती है।
- ग्रिडिरॉन प्रणाली (Gridiron System): इसमें मुख्य नाली खेत के निचले किनारे पर होती है, और सभी सहायक नालियां खेत के ऊपरी हिस्से से समानांतर आकर समकोण पर मुख्य नाली से जुड़ती हैं। इसमें कम जगह खराब होती है।
(परीक्षा में इन तीनों प्रणालियों के रेखाचित्र अवश्य बनाएं)
- उत्तर: खेतों से पानी निकालने के लिए नालियों के जाल को व्यवस्थित करने की मुख्य तीन प्रणालियां हैं:
- प्रश्न: आवश्यक पादप पोषक तत्वों के वर्गीकरण की विस्तृत तालिका बनाइए (मुख्य, द्वितीयक और सूक्ष्म तत्व)।
- उत्तर: पौधों के लिए कुल 17 आवश्यक पोषक तत्व माने गए हैं, जिनका वर्गीकरण नीचे दी गई तालिका के अनुसार है:श्रेणीपोषक तत्व का प्रकारतत्वों के नाम व संकेत1. मुख्य या वृहद तत्व
(अधिक मात्रा में आवश्यक)(अ) संरचनात्मक तत्वकार्बन (C), हाइड्रोजन (H), ऑक्सीजन (O)(ब) प्राथमिक पोषक तत्वनाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटेशियम (K)(स) द्वितीयक पोषक तत्वकैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), सल्फर (S)2. सूक्ष्म पोषक तत्व
(बहुत कम मात्रा में आवश्यक)ट्रेस तत्व (Trace Elements)लोहा (Fe), जस्ता/जिंक (Zn), मैंगनीज (Mn), तांबा/कॉपर (Cu), बोरॉन (B), मोलिब्डेनम (Mo), क्लोरीन (Cl), निकेल (Ni)
- उत्तर: पौधों के लिए कुल 17 आवश्यक पोषक तत्व माने गए हैं, जिनका वर्गीकरण नीचे दी गई तालिका के अनुसार है:श्रेणीपोषक तत्व का प्रकारतत्वों के नाम व संकेत1. मुख्य या वृहद तत्व
- प्रश्न: हरी खाद (Green Manure) किसे कहते हैं? इसके लाभ तथा हरी खाद के लिए उपयुक्त किन्हीं दो फसलों के नाम व उनकी पलटाई का समय लिखिए।
- उत्तर:परिभाषा: भूमि में जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन बढ़ाने के लिए किसी दलहनी फसल को खेत में उगाकर, फूल आने से पहले की अवस्था में ही हल चलाकर मिट्टी में दबाकर सड़ाने की क्रिया को हरी खाद कहते हैं।
- हरी खाद के लाभ:
- इससे मिट्टी को प्रचुर मात्रा में नाइट्रोजन और जीवांश (ह्यूमस) प्राप्त होता है।
- मिट्टी की जल धारण क्षमता और भौतिक दशा में सुधार होता है।
- उपयुक्त फसलें: सनई (Crotalaria juncea) और ढैंचा (Sesbania aculeata)।
- पलटाई का समय: जब फसल लगभग 6 से 8 सप्ताह (45-50 दिन) की हो जाए और उसमें फूल आने शुरू होने वाले हों, तब उसे मिट्टी में पलट देना चाहिए।
- हरी खाद के लाभ:
- उत्तर:परिभाषा: भूमि में जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन बढ़ाने के लिए किसी दलहनी फसल को खेत में उगाकर, फूल आने से पहले की अवस्था में ही हल चलाकर मिट्टी में दबाकर सड़ाने की क्रिया को हरी खाद कहते हैं।
- प्रश्न: धान (Rice) की खेती का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत कीजिए: (i) वानस्पतिक नाम एवं कुल (ii) दो उन्नत किस्में (iii) बीज दर एवं बोने का समय (iv) प्रति हेक्टेयर उपज।
- उत्तर:
- (i) वानस्पतिक नाम एवं कुल: ओराइजा सैटाइवा (Oryza sativa), कुल – पोएसी / ग्रामिनी (Poaceae)।
- (ii) दो उन्नत किस्में: आई.आर.-64 (IR-64), जया, साकेत-4, पूसा बासमती।
- (iii) बीज दर एवं बोने का समय:
- बीज दर: सीधी बुवाई के लिए 40-50 किग्रा/हेक्टेयर; रोपाई विधि (Transplanting) के लिए 30-35 किग्रा/हेक्टेयर।
- समय: जून से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक (खरीफ सीजन)।
- (iv) उपज: सिंचित और उन्नत वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर लगभग 40 से 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर धान प्राप्त होता है।
- उत्तर:
- प्रश्न: सोयाबीन की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के आधार पर कीजिए: (i) वानस्पतिक नाम एवं कुल (ii) दो प्रमुख रोग एवं उनका नियंत्रण (iii) खाद एवं उर्वरक की मात्रा (iv) प्रति हेक्टेयर उपज।
- उत्तर:
- (i) वानस्पतिक नाम एवं कुल: ग्लाइसिन मैक्स (Glycine max), कुल – फैबेसी / लेगुमिनेसी (Fabaceae)।
- (ii) दो प्रमुख रोग एवं नियंत्रण:
- 1. यलो मोज़ेक वायरस (पीला मोज़ेक): पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। नियंत्रण: रोग फैलाने वाली सफेद मक्खी को मारने के लिए इमिडाक्लोप्रिड दवा का छिड़काव करें।
- 2. कॉलर रॉट (जड़ सड़न): पौधे सूखने लगते हैं। नियंत्रण: बुवाई से पहले बीजों को थायरम या ट्राइकोडर्मा से उपचारित करें।
- (iii) खाद एवं उर्वरक: चूंकि यह दलहनी फसल है, इसलिए इसे नाइट्रोजन की कम आवश्यकता होती है। प्रति हेक्टेयर: 20-25 किग्रा नाइट्रोजन, 60 किग्रा फास्फोरस और 40 किग्रा पोटाश देना चाहिए।
- (iv) उपज: लगभग 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।
- उत्तर:
- प्रश्न: अरहर (Pigeon Pea) अथवा मूंग की खेती की उन्नत तकनीक को निम्नलिखित बिंदुओं में समझाइए: (i) वानस्पतिक नाम (ii) बीज दर एवं दूरी (iii) एक प्रमुख कीट एवं उसका नियंत्रण (iv) उपज।
- उत्तर:(यहाँ अरहर की खेती का विवरण दिया जा रहा है)
- (i) वानस्पतिक नाम: कजानस कजान (Cajanus cajan), कुल – फैबेसी (Fabaceae)।
- (ii) बीज दर एवं दूरी:
- बीज दर: 12 से 15 किग्रा प्रति हेक्टेयर।
- दूरी: कतार से कतार की दूरी 60-75 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 20-25 सेमी रखनी चाहिए।
- (iii) प्रमुख कीट एवं नियंत्रण:
- फली भेदक कीट (Pod Borer/इल्ली): यह कीट अरहर की फलियों में छेद करके दानों को खा जाता है।
- नियंत्रण: फूल आने और फली बनते समय ‘क्विनालफॉस’ या ‘क्लोरपायरीफॉस’ रासायनिक दवा या जैविक एन.पी.वी. (NPV) का छिड़काव करना चाहिए।
- (iv) उपज: उन्नत प्रबंधन से लगभग 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर सूखा दाना प्राप्त होता है।
- उत्तर:(यहाँ अरहर की खेती का विवरण दिया जा रहा है)
पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय एवं मुर्गी पालन के लिए अप्रैल 2026 से जुलाई 2026 तक का पाठ्यक्रम
- आहार एवं पोषण– पशु आहार के अवयव उनके कार्य, वर्गीकरण, संगठन एवं सि…
चारे - आहार एवं पोषण–साइलेज एवं परिभाषा संगठन, गुण एवं निर्माण विधि
- पशु चिकित्सा संबंधी औषधि व उपकरण, पहचान व उपयोग
प्रायोगिक कार्य इन इकाइयों से संबंधित प्रयोग - पशुओं के सामान्य रोग–वर्गीकरण खुरपका–मुंहपका व पशु प्लेग रोग
पशुओं के सामान्य रोग–लंगड़ी, गलघोटू, एन्थ्रेक्स एवं थनैला रोग
इन इकाईयों से संबंधित प्रयोग
पशुओं की जांच—अर्थ, उद्देश्य एवं विधियां, गुणांकन पत्र तैयार करना
मछली पालन एवं प्रबंध
प्रायोगिक कार्य– इकाई से संबंधित
पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय एवं मुर्गी पालन अप्रैल से जुलाई तक के पाठ्यक्रम आधारित बोर्ड परीक्षा 2027 हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न -उत्तर
1 अंक वाले प्रश्न (कुल 10 प्रश्न-उत्तर)
(अ) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
- प्रश्न: साइलेज (Silage) बनाते समय गड्ढे या बुर्ज (Silo) में किस प्रकार का किण्वन (Fermentation) होना चाहिए?
- (क) वायवीय (Oxygen की उपस्थिति में)
- (ख) अवायवीय (Oxygen की अनुपस्थिति में)
- (ग) अम्लीय किण्वन नहीं होना चाहिए
- (घ) इनमें से कोई नहीं
- उत्तर: (ख) अवायवीय (Oxygen की अनुपस्थिति में)
- प्रश्न: पशुओं का ‘खुरपका-मुँहपका’ (FMD) रोग किसके संक्रमण के कारण फैलता है?
- (क) जीवाणु (Bacteria)
- (ख) विषाणु (Virus)
- (ग) फफूंद (Fungi)
- (घ) परजीवी (Parasite)
- उत्तर: (ख) विषाणु (Virus)
(ब) सही जोड़ी बनाइए (Matching)
प्रश्न: कॉलम ‘अ’ का कॉलम ‘ब’ से सही मिलान कीजिए:
| कॉलम ‘अ’ | कॉलम ‘ब’ |
|---|---|
| 1. एंथ्रेक्स (Anthrax) | (A) थन और गादी की सूजन |
| 2. थनैला रोग (Mastitis) | (B) पशु प्लेग (Rinderpest) |
| 3. जीभ पकड़ने का चिमटा | (C) जहरी बुखार (जीवाणु जनित) |
| 4. पोकनी या वेधन रोग | (D) बुल्स होल्डर (Bull Holder) |
- उत्तर (सही मिलान):
1 → (C), 2 → (A), 3 → (D), 4 → (B)
(स) रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks) [1]
- प्रश्न: अच्छी साइलेज का pH मान आमतौर पर _________ के बीच होना चाहिए।
- उत्तर: 3.5 से 4.2 (अम्लीय)
- प्रश्न: पशु चिकित्सा में घाव को धोने या रोगाणु रहित करने के लिए साधारणतः _________ (लाल दवा) का उपयोग किया जाता है।
- उत्तर: पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO₄)
(द) एक शब्द/वाक्य में उत्तर
- प्रश्न: पशुओं के पेट में गैस बनने (आफरा या ब्लॉट) पर गैस निकालने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
- उत्तर: ट्रोकार कैनुला (Trocar Cannula)
- प्रश्न: ‘गलघोटू’ (Hemorrhagic Septicemia) रोग के जीवाणु का नाम क्या है?
- उत्तर: पास्च्युरेला बोविसेप्टिका (Pasteurella boviseptica)
2 अंक वाले प्रश्न एवं उत्तर (कुल 6 प्रश्न)
- प्रश्न: पशु आहार में ‘कार्बोहाइड्रेट’ के दो मुख्य कार्य लिखिए।
- प्रश्न: साइलेज (Silage) की परिभाषा लिखिए।
- उत्तर: हरे चारे को उसकी रसीली और पोषक अवस्था में हवा रहित गड्ढों (Silo) में दबाकर, किण्वन क्रिया द्वारा सुरक्षित रखे गए चारे को साइलेज कहते हैं। इसे चारे का ‘अचार’ भी कहा जाता है।
- प्रश्न: पशु चिकित्सा में ‘बर्डिजो कैस्ट्रेटर’ (Burdizzo Castrator) का क्या उपयोग है?
- उत्तर: यह नर पशुओं (जैसे बछड़े या सांड) को बिना खून बहाए, उनकी अंडग्रंथि की नसों को दबाकर बंध्याकरण (Castration) करने का एक मुख्य उपकरण है। इसके बाद बैल शांत स्वभाव के हो जाते हैं।
- प्रश्न: नीला थोथा (Copper Sulphate) के दो पशु चिकित्सीय उपयोग लिखिए।
- उत्तर:
- (i) पशुओं के पेट के कीड़े (कृमि) मारने के लिए इसका हल्का घोल पिलाया जाता है।
- (ii) खुरपका-मुँहपका रोग में पशुओं के पैरों के घावों को धोने (फुट बाथ) के लिए उपयोग होता है।
- उत्तर:
- प्रश्न: संक्रामक रोग (Infectious Diseases) किसे कहते हैं? दो उदाहरण दीजिए।
- उत्तर: ऐसे रोग जो सूक्ष्मजीवों (जैसे जीवाणु, विषाणु) द्वारा एक बीमार पशु से स्वस्थ पशु के सीधे संपर्क, हवा, पानी या चारे के माध्यम से तेजी से फैलते हैं।
- उदाहरण: गलघोटू, पशु प्लेग।
- उत्तर: ऐसे रोग जो सूक्ष्मजीवों (जैसे जीवाणु, विषाणु) द्वारा एक बीमार पशु से स्वस्थ पशु के सीधे संपर्क, हवा, पानी या चारे के माध्यम से तेजी से फैलते हैं।
- प्रश्न: पशुओं में ‘आफरा’ या पेट फूलना रोग के दो मुख्य लक्षण लिखिए।
- उत्तर:
- (i) पशु की बाईं कोख (पेट का हिस्सा) गैस भरने के कारण ढोल की तरह फूल जाती है।
- (ii) पशु को सांस लेने में तकलीफ होती है, वह बार-बार बैठता-उठता है और बेचैन रहता है।
- उत्तर:
3 अंक वाले प्रश्न एवं उत्तर (कुल 6 प्रश्न)
- प्रश्न: पशु आहार के आवश्यक अवयवों (Nutrients) के नाम लिखिए तथा पानी का पशु शरीर में महत्व समझाइए।
- उत्तर: पशु आहार के मुख्य छह अवयव हैं: जल, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण और विटामिन।
- प्रश्न: एक उत्तम साइलेज के तीन प्रमुख गुण या विशेषताएं लिखिए।
- उत्तर:
- रंग और सुगंध: अच्छी साइलेज का रंग हल्का पीला या भूरा-हरा होता है और इसकी महक स्वादिष्ट, खट्टी-मीठी (सिरके जैसी) होती है।
- अम्लता (pH): इसका pH मान 3.5 से 4.2 के बीच होता है, जिससे यह लंबे समय तक सड़ती नहीं है।
- फफूंद रहित: उत्तम साइलेज पूरी तरह से फफूंद (Silo Mold) और दुर्गंध से मुक्त होती है और पशु इसे चाव से खाते हैं। [1]
- उत्तर:
- प्रश्न: निम्नलिखित उपकरणों की पहचान और उनका पशु चिकित्सा में उपयोग लिखिए: (i) डोकिंग मशीन (ii) कैथेटर (iii) थर्मामीटर।
- उत्तर:
- (i) डोकिंग मशीन (Docking Machine): इसका उपयोग मुख्य रूप से भेड़ों और मेमनों की पूंछ काटने के लिए किया जाता है ताकि वे गंदगी और बीमारियों से बच सकें।
- (ii) कैथेटर (Catheter): यह एक पतली नली होती है। जब किसी बीमार पशु का पेशाब रुक जाता है, तो इसके माध्यम से मूत्रमार्ग से पेशाब बाहर निकाला जाता है।
- (iii) क्लीनिकल थर्मामीटर: इसका उपयोग पशु के मलाशय (Rectum) में लगाकर उसके शरीर का तापमान (बुखार) मापने के लिए किया जाता है।
- उत्तर:
- प्रश्न: खुरपका-मुँहपका (FMD) रोग के तीन मुख्य लक्षण और इसके उपचार के उपाय लिखिए।
- उत्तर:
- लक्षण:
- पशु को तेज बुखार आता है और उसके मुँह, मसूड़ों व जीभ पर छाले पड़ जाते हैं।
- पैरों के खुरों के बीच में छाले हो जाते हैं, जो फूटकर घाव बन जाते हैं, जिससे पशु लंगड़ाकर चलता है।
- मुँह से लार की लगातार लंबी धागे जैसी धार गिरती रहती है और चप-चप की आवाज आती है।
- उपचार: मुँह के छालों को फिटकरी या लाल दवा के घोल से धोएं। खुरों के घावों पर फिनाइल या नीले थोथे का घोल लगाएं। समय पर FMD का टीका लगवाएं।
- लक्षण:
- उत्तर:
- प्रश्न: पशु प्लेग (Rinderpest) रोग के कारण, लक्षण और रोकथाम के उपाय लिखिए।
- उत्तर: यह एक अत्यंत घातक विषाणु जनित रोग है (अब भारत इस रोग से पूरी तरह मुक्त हो चुका है, लेकिन पाठ्यक्रम के अनुसार विवरण निम्न है):
- कारण: यह ‘फिल्ट्रेबल वायरस’ (Filterable Virus) के कारण होता था।
- लक्षण: पशु को तेज बुखार के साथ आँखें लाल हो जाती हैं और पिचकारी की तरह बदबूदार, खून मिश्रित पतले दस्त (पोकनी) होने लगते हैं। मुँह के अंदर दानेदार घाव हो जाते हैं।
- रोकथाम: स्वस्थ पशुओं को बीमार पशु से तुरंत अलग करें। पशुशाला को फिनाइल से साफ करें। जी.टी.वी. (GTV) का टीका लगवाना इसका मुख्य बचाव था।
- उत्तर: यह एक अत्यंत घातक विषाणु जनित रोग है (अब भारत इस रोग से पूरी तरह मुक्त हो चुका है, लेकिन पाठ्यक्रम के अनुसार विवरण निम्न है):
- प्रश्न: थनैला रोग (Mastitis) के कारण और इससे दुग्ध उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव को समझाइए।
- उत्तर:
- कारण: यह रोग थनों की अस्वच्छता के कारण स्ट्रैप्टोकोकस या स्टैफिलोकोकस नामक जीवाणुओं के थन के छिद्रों में प्रवेश करने से होता है।
- दुग्ध उत्पादन पर प्रभाव:
- अयन (गादी) और थन सूजकर गर्म और कड़े हो जाते हैं, जिससे पशु दूध दुहने नहीं देता।
- दूध का रंग बदल जाता है; दूध पतला, पानी जैसा या छिछड़े (खून के थक्के) युक्त हो जाता है।
- समय पर इलाज न होने पर थन हमेशा के लिए ब्लॉक (अंधा थन) हो जाता है, जिससे पशु की दूध देने की क्षमता हमेशा के लिए नष्ट हो जाती है।
- उत्तर:
4 अंक वाले प्रश्न एवं उत्तर (कुल 6 प्रश्न)
- प्रश्न: आदर्श पशु आहार (Balanced Ration) किसे कहते हैं? एक उत्तम पशु आहार निर्धारित करते समय किन-किन सिद्धांतों या बातों का ध्यान रखना चाहिए?
- उत्तर:परिभाषा: वह आहार जो पशु की सभी पोषण संबंधी आवश्यकताओं (जैसे शरीर रक्षा, वृद्धि और दूध उत्पादन) को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा और सही अनुपात में 24 घंटे के लिए प्रदान करता है, संतुलित या आदर्श आहार कहलाता है।
- आहार निर्धारण के सिद्धांत (कोई चार):
- पशु का वजन और उत्पादन: आहार हमेशा पशु के शारीरिक भार और उसके द्वारा दिए जाने वाले दूध की मात्रा के अनुसार तय होना चाहिए (जैसे प्रति 2.5-3 लीटर दूध पर 1 किग्रा दाना)।
- स्वादिष्ट और पाचक: चारा साफ, मुलायम और स्वादिष्ट होना चाहिए ताकि पशु उसे पूरा खाए। आहार आसानी से पचने वाला होना चाहिए।
- हरे और सूखे चारे का अनुपात: आहार में दो भाग हरा चारा और एक भाग सूखा चारा होना चाहिए, जिससे भोजन का आयतन संतुलित रहे।
- सस्ता और स्थानीय: दाना और चारा मिश्रण पौष्टिक होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से किफायती होना चाहिए और स्थानीय बाजार में आसानी से उपलब्ध होना चाहिए। [1, 2, 3, 4]
- आहार निर्धारण के सिद्धांत (कोई चार):
- उत्तर:परिभाषा: वह आहार जो पशु की सभी पोषण संबंधी आवश्यकताओं (जैसे शरीर रक्षा, वृद्धि और दूध उत्पादन) को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा और सही अनुपात में 24 घंटे के लिए प्रदान करता है, संतुलित या आदर्श आहार कहलाता है।
- प्रश्न: साइलेज निर्माण की ‘गड्ढा विधि’ (Silo Pit Method) का विस्तृत वर्णन कीजिए। इसके संगठन में किन बातों का ध्यान रखा जाता है?
- उत्तर: साइलेज बनाने के लिए जमीन में बनाए गए गड्ढों को साइलो पिट कहते हैं।
- निर्माण विधि:
- गड्ढे की तैयारी: ढलान वाली और सूखी जगह पर आवश्यकतानुसार (जैसे 10 फीट गहरा और 8 फीट चौड़ा) पक्का गड्ढा बनाया जाता है।
- फसल का चुनाव: साइलेज के लिए मक्का, ज्वार या बाजरा जैसी कार्बोहाइड्रेट युक्त फसलों को फूल आने व दाने पड़ने की अवस्था में काटा जाता है।
- कुट्टी काटना और भरना: चारे को चाफ कटर से 1-2 इंच के टुकड़ों में काटा जाता है। चारे को गड्ढे में 1-1 फीट की परतों में भरकर पैरों या ट्रैक्टर से अच्छी तरह दबाया जाता है ताकि अंदर की हवा पूरी तरह बाहर निकल जाए।
- गड्ढा बंद करना: गड्ढे को जमीन की सतह से 2-3 फीट ऊपर तक भरकर उसके ऊपर सूखी घास और मिट्टी का लेप (कीचड़ से लिपाई) करके पूरी तरह हवा बंद (Air-tight) कर दिया जाता है। 3 महीने में साइलेज बनकर तैयार हो जाती है।
- संगठन में ध्यान रखने योग्य बातें: चारे में नमी की मात्रा 60-70% होनी चाहिए और शुष्क पदार्थ (Dry matter) 30-40% होना चाहिए ताकि किण्वन सही से हो। [1, 2, 3]
- निर्माण विधि:
- उत्तर: साइलेज बनाने के लिए जमीन में बनाए गए गड्ढों को साइलो पिट कहते हैं।
- प्रश्न: पशु चिकित्सा में उपयोग होने वाले किन्हीं चार रासायनिक पदार्थों/औषधियों का नाम, उनकी प्रकृति (जैसे एंटीसेप्टिक, कृमिनाशक) और कार्य विस्तार से लिखिए।
- उत्तर:औषधि का नामप्रकृति / वर्गमुख्य कार्य व उपयोग1. बोरिक एसिड (Boric Acid)मन्द प्रतिरोधी (Mild Antiseptic)इसका 2-3% का हल्का घोल पशुओं की आँखें धोने, थनों के घावों को साफ करने और एंटीसेप्टिक लोशन बनाने में होता है।2. मैगनीशियम सल्फेट (Epsom Salt)विरेचक / जुलाब (Purgative)कब्ज होने पर पशु का पेट साफ करने के लिए इसे पानी में घोलकर पिलाया जाता है। यह सूजन पर सेंक करने के काम भी आता है।3. टिंचर आयोडीन (Tincture Iodine)कीटाणुनाशक / जीवाणुरोधकपशुओं के ऑपरेशन वाले स्थान, ताजे घावों और कटी-फटी त्वचा पर संक्रमण रोकने के लिए लगाया जाता है।4. फिनोल / फिनाइल (Phenol)रोगाणुनाशक (Disinfectant)इसका 1-2% घोल पशुशाला की नालियों, फर्श, दीवारों को धोने और फर्श को कीटाणुरहित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- प्रश्न: लंगड़ी रोग (Black Quarter – BQ) का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत कीजिए: (i) रोग कारक जीवाणु (ii) दो मुख्य लक्षण (iii) शव परीक्षा (Post-mortem) के लक्षण (iv) रोकथाम के उपाय।
- उत्तर:
- (i) रोग कारक जीवाणु: यह क्लॉस्ट्रिडियम चाउवोई (Clostridium chauvoei) नामक जीवाणु द्वारा होता है।
- (ii) दो मुख्य लक्षण:
- पशु के पिछले या अगले पुट्ठों (भारी मांसल भागों) पर गर्म और दर्दनाक सूजन आ जाती है, जिससे पशु गंभीर रूप से लंगड़ाने लगता है।
- सूजन वाले स्थान को हाथ से दबाने पर ‘चर-चर’ (Crepitating sound) की आवाज आती है क्योंकि मांस के अंदर गैस भरी होती है।
- (iii) शव परीक्षा के लक्षण: सूजन वाले स्थान को चीरा लगाने पर काले रंग का झागदार, सड़ा हुआ खून निकलता है जिससे ‘मक्खन के सड़ने जैसी’ तीव्र बदबू आती है।
- (iv) रोकथाम: मानसून शुरू होने से पहले मई-जून में बी.क्यू. (B.Q. Vaccine) का सुरक्षात्मक टीका लगवाएं। मृत पशु के शव को बिना चीरे के गहरे गड्ढे में चूने के साथ गाड़ें।
- उत्तर:
- प्रश्न: गलघोटू (H.S.) रोग की पहचान आप कैसे करेंगे? इसके लक्षण, घरेलू उपचार एवं टीकाकरण का समय लिखिए।
- उत्तर:पहचान व लक्षण:
- पशु को अचानक 105°-107°F तक तेज बुखार आता है और वह खाना-पीना व जुगाली बंद कर देता है।
- पशु के गले, जबड़े के नीचे और छाती के अग्र भाग पर बहुत बड़ी, गर्म और दर्दनाक सूजन आ जाती है।
- पशु जीभ बाहर निकालकर घुर-घुर (Gurgling sound) की आवाज करते हुए बहुत कठिनाई से सांस लेता है। दम घुटने से 24-48 घंटे में पशु की मृत्यु हो जाती है।
- घैरलू उपचार: गले की सूजन पर आयोडीन या अलसी की पुल्टिस (सेंक) बांधनी चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगवाएं।
- टीकाकरण का समय: वर्षा ऋतु शुरू होने से ठीक पहले (मई या जून के महीने में) प्रतिवर्ष इसका एच.एस. (H.S. Vaccine) का टीका लगाया जाता है।
- उत्तर:पहचान व लक्षण:
- प्रश्न: एंथ्रेक्स या जहरी बुखार (Anthrax) एक अत्यंत खतरनाक और मनुष्यों में फैलने वाला रोग है। इसके कारण, लक्षण और इससे बचने के लिए बरती जाने वाली विशेष सावधानियां लिखिए।
- उत्तर:
- कारण: यह बैसिलस एंथ्रेसिस (Bacillus anthracis) नामक बीजाणु बनाने वाले घातक जीवाणु से होता है।
- मुख्य लक्षण:
- यह एक तीव्र गति का रोग है, कई बार पशु बिना कोई लक्षण दिखाए अचानक मर जाता है।
- मृत्यु के बाद पशु के प्राकृतिक द्वारों (जैसे मुँह, नाक, गुदा और योनि) से काले रंग का, न जमने वाला, अलकतरे जैसा खून बहता है।
- पशु का पेट (तिल्ली या प्लीहा) अत्यधिक बढ़ जाता है, इसलिए इसे ‘प्लिहा ज्वर’ भी कहते हैं।
- विशेष सावधानियां (Zoonotic Alert):
- शव परीक्षा निषेध: इस रोग से मरे पशु का पोस्टमार्टम कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि हवा के संपर्क में आते ही इसके जीवाणु घातक स्पोर (बीजाणु) बना लेते हैं जो जमीन में 40 वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।
- मनुष्यों में फैलाव: यह रोग बीमार पशु के दूध, मांस या ऊन के माध्यम से मनुष्यों में भी फैल जाता है (जिसे वूल सॉर्टर्स डिजीज कहते हैं), अतः मरे पशु को छूते समय दस्ताने पहनें और गहरे गड्ढे में दबाएं।
- उत्तर:
NOTE-
शैक्षणिक सत्र 2026-27, MP BOARD 2027 के लिए हिन्दी माध्यम के छात्रों के सभी प्रकार की शैक्षणिक सामग्री एम् पी बोर्ड स्टडी डाट काम ( https://mpboardstudy.com/) पर उपलब्ध है जबकि
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