MP Board कक्षा 10 हिंदी अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2026-27 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर/ नोट्स

MP Board कक्षा 10 हिंदी अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2026-27 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर/ नोट्स

🛑 भाग 1: 1 अंक वाले 25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर सहित)

(A) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1. हिंदी पद्य साहित्य में ‘रीतिकाल’ की मुख्य प्रवृत्ति या विशेषता कौन सी है?
(a) वीरगाथा काल की रचनाएँ
(b) शृंगार निरूपण और लक्षण ग्रंथों की प्रधानता
(c) देशप्रेम की भावना
(d) शोषकों के प्रति विद्रोह
उत्तर: (b) शृंगार निरूपण और लक्षण ग्रंथों की प्रधानता

प्रश्न 2. ‘नेताजी का चश्मा’ कहानी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(a) व्यापार को बढ़ावा देना
(b) देशभक्ति की भावना को जाग्रत करना
(c) चश्मों की बिक्री बढ़ाना
(d) विदेशी संस्कृति का प्रचार करना
उत्तर: (b) देशभक्ति की भावना को जाग्रत करना

प्रश्न 3. ‘आत्मकथ्य’ कविता के रचयिता निम्नलिखित में से कौन हैं?
(a) सूरदास
(b) तुलसीदास
(c) जयशंकर प्रसाद
(d) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
उत्तर: (c) जयशंकर प्रसाद

प्रश्न 4. रस के कितने अंग (अवयव) होते हैं?
(a) दो
(b) चार
(c) नौ
(d) दस
उत्तर: (b) चार (स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव)

प्रश्न 5. ‘साना-साना हाथ जोड़ी’ गद्य की कौन सी विधा के अंतर्गत आता है?
(a) कहानी
(b) संस्मरण
(c) यात्रा-वृत्तांत
(d) रेखाचित्र
उत्तर: (c) यात्रा-वृत्तांत


(B) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

प्रश्न 6. सूरदास मुख्य रूप से …………….. रस के सम्राट कवि माने जाते हैं।
उत्तर: वात्सल्य

प्रश्न 7. बालगोबिन भगत कबीर को अपना …………….. मानते थे।
उत्तर: साहब

प्रश्न 8. चौपाई छंद के प्रत्येक चरण में …………….. मात्राएँ होती हैं।
उत्तर: 16 (सोलह)

प्रश्न 9. दो या दो से अधिक वर्णों के मेल से होने वाले विकार को …………….. कहते हैं।
उत्तर: संधि

प्रश्न 10. ‘माता का अँचल’ उपन्यास का अंश शिवपूजन सहाय के प्रसिद्ध उपन्यास …………….. से लिया गया है।
उत्तर: देहाती दुनिया


(C) सही जोड़ी बनाइए

कॉलम ‘A’कॉलम ‘B’
(1) राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद(A) उपमान पर उपमेय का अभेद आरोप
(2) रूपक अलंकार(B) अव्ययीभाव समास
(3) लखनवी अंदाज़(C) अवध प्रांत की रामचरितमानस
(4) यथाशक्ति(D) अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)
(5) मैं क्यों लिखता हूँ?(E) यशपाल का व्यंग्य संग्रह

उत्तर (सही मिलान): 1 → (C), 2 → (A), 3 → (E), 4 → (B), 5 → (D)


(D) एक वाक्य / शब्द में उत्तर दीजिए

प्रश्न 16. तुलसीदास जी के दीक्षा गुरु का नाम क्या था?
उत्तर: नरहर्यानंद (नरहरिदास)।

प्रश्न 17. नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा कहाँ लगाई गई थी?
उत्तर: कस्बे के मुख्य चौराहे (बाजार के मुख्य चौराहे) पर।

प्रश्न 18. शांत रस का स्थायी भाव क्या है?
उत्तर: निर्वेद।

प्रश्न 19. अर्थ के आधार पर वाक्य के कितने भेद होते हैं?
उत्तर: आठ (8) भेद।

प्रश्न 20. हिरोशिमा कविता किस देश की त्रासद घटना पर आधारित है?
उत्तर: जापान (परमाणु बम विस्फोट की घटना पर)।


(E) सत्य या असत्य बताइए

प्रश्न 21. प्रगतिवादी कवियों ने रूढ़िवादिता और शोषक वर्ग का पुरजोर विरोध किया है।
उत्तर: सत्य

प्रश्न 22. बालगोबिन भगत हर वर्ष गंगा स्नान करने पैदल ही जाते थे।
उत्तर: सत्य

प्रश्न 23. दोहा एक सम मात्रिक छंद का उदाहरण है।
उत्तर: असत्य (यह अर्ध-सम मात्रिक छंद है)।

प्रश्न 24. समास के मुख्यतः आठ भेद स्वीकार किए गए हैं।
उत्तर: असत्य (समास के छह भेद होते हैं)।

प्रश्न 25. ‘माता का अँचल’ पाठ में ग्रामीण संस्कृति का जीवंत चित्रण मिलता है।
उत्तर: सत्य

🛑 भाग 2: 2 अंक वाले 20 प्रश्न (उत्तर सहित)

प्रश्न 1. रीतिकाल को ‘शृंगार काल’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: रीतिकाल के अधिकांश कवियों ने अपनी रचनाओं में राजाओं को प्रसन्न करने के लिए शृंगार रस, नायक-नायिका भेद और सौंदर्य का अत्यधिक वर्णन किया है। इस काल में शृंगार रस की प्रधानता होने के कारण इसे ‘शृंगार काल’ भी कहा जाता है।

प्रश्न 2. प्रगतिवादी काव्य की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: (1) शोषक वर्ग (अमीर/पूंजीपति) के प्रति तीव्र विद्रोह और आक्रोश। (2) शोषितों (मजदूरों/किसानों) के प्रति गहरी सहानुभूति प्रकट करना।

प्रश्न 3. नई कविता के किन्हीं दो कवियों और उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर: (1) दुष्यंत कुमार – ‘साये में धूप’ (ग़ज़ल संग्रह)। (2) कुंवर नारायण – ‘आत्मजयी’।

प्रश्न 4. गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए?
उत्तर: गोपियों के अनुसार सच्चा राजधर्म यह है कि राजा अपनी प्रजा को कभी न सताए, प्रजा के दुखों को दूर करे और अपनी प्रजा की हर स्थिति में रक्षा करे।

प्रश्न 5. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष टूट जाने के कौन से तर्क दिए?
उत्तर: लक्ष्मण ने तर्क दिए कि बचपन में हमने खेल-खेल में कई धनुष तोड़े थे, तब आपने क्रोध नहीं किया। यह धनुष पुराना और जीर्ण-शीर्ण था जो श्री राम के छूते ही टूट गया, इसमें उनका कोई दोष नहीं है।

प्रश्न 6. जयशंकर प्रसाद आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहते थे?
उत्तर: कवि प्रसाद जी का मानना था कि उनका जीवन अत्यंत साधारण रहा है, जिसमें केवल दुःख और असफलताएँ ही हाथ लगी हैं। आत्मकथा लिखने से उनके जीवन के पुराने घाव फिर से हरे हो जाएँगे, इसलिए वे इससे बचना चाहते थे।

प्रश्न 7. कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ क्यों रखा गया है?
उत्तर: कवि निराला ने बादलों को क्रांति का अग्रदूत माना है। वे बादलों के माध्यम से समाज में नवचेतना, ऊर्जा और पौरुष जगाना चाहते हैं। समाज में नए बदलाव के लिए उत्साह आवश्यक है, इसीलिए शीर्षक ‘उत्साह’ रखा गया है।

प्रश्न 8. कैप्टन कौन था? उसे ‘नेताजी का चश्मा’ कहानी में देशभक्त क्यों कहा गया है?
उत्तर: कैप्टन एक शारीरिक रूप से कमजोर और लंगड़ा चश्मा बेचने वाला व्यक्ति था। सुभाषचंद्र बोस की चश्मेविहीन मूर्ति उसे आहत करती थी, इसलिए वह अपनी तरफ से मूर्ति पर चश्मा लगाता था। सुभाष बाबू के प्रति इसी अगाध सम्मान के कारण उसे देशभक्त कहा गया।

प्रश्न 9. बालगोबिन भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?
उत्तर: भगत जी के इकलौते बेटे की मृत्यु के बाद वे घर में बिल्कुल अकेले रह गए थे। उनकी पुत्रवधू को चिंता थी कि बुढ़ापे में भगत जी के लिए भोजन कौन बनाएगा, बीमार होने पर दवा कौन देगा और उनकी देखभाल कौन करेगा।

प्रश्न 10. नवाब साहब ने खीरे की फांकों को बिना खाए ही खिड़की से बाहर क्यों फेंक दिया?
उत्तर: नवाब साहब लेखक के सामने अपनी नवाबी शान और झूठी रईसी का प्रदर्शन करना चाहते थे। वे दिखाना चाहते थे कि नवाब खीरे जैसी साधारण वस्तु का केवल सूंघकर ही रसास्वादन करते हैं, उसे खाते नहीं।

प्रश्न 11. प्रबंध काव्य और मुक्तक काव्य में दो अंतर लिखिए।
उत्तर: (1) प्रबंध काव्य में कथा सूत्र क्रमबद्ध रूप से जुड़ा होता है, जबकि मुक्तक काव्य का प्रत्येक छंद स्वतंत्र होता है। (2) प्रबंध काव्य का विस्तृत कथानक होता है (जैसे- महाकाव्य), जबकि मुक्तक काव्य में संक्षिप्त भाव होते हैं।

प्रश्न 12. रस किसे कहते हैं? इसके अंगों के नाम लिखिए।
उत्तर: किसी काव्य को पढ़ने, सुनने या देखने से पाठक/श्रोता के हृदय में जो अलौकिक आनंद की अनुभूति होती है, उसे रस कहते हैं। इसके चार अंग हैं: स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव और संचारी भाव।

प्रश्न 13. वीर रस की परिभाषा उदाहरण सहित दीजिए।

उत्तर: युद्ध भूमि में शत्रुओं को देखकर या किसी कठिन कार्य को करने के लिए हृदय में जो ‘उत्साह’ नामक स्थायी भाव जाग्रत होता है, वहाँ वीर रस होता है।

उदाहरण: “बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।”

प्रश्न 14. छंद किसे कहते हैं? इसके दो मुख्य प्रकारों के नाम लिखिए।

उत्तर: अक्षरों की संख्या, मात्रा, गणना, यति और गति के नियमों से बंधी हुई काव्यात्मक रचना को छंद कहते हैं। इसके दो मुख्य प्रकार हैं: (1) मात्रिक छंद, (2) वर्णिक छंद।

प्रश्न 15. अनुप्रास अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तर: काव्य में जहाँ एक ही वर्ण (अक्षर) की आवृत्ति दो या दो से अधिक बार क्रमबद्ध रूप से होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

उदाहरण: “चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही थीं जल-थल में।” (च वर्ण की आवृत्ति)।

प्रश्न 16. संधि और समास में कोई दो मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: (1) संधि दो वर्णों के मेल को कहते हैं, जबकि समास दो शब्दों (पदों) के मेल को कहते हैं। (2) संधि को तोड़ने की प्रक्रिया को ‘विच्छेद’ कहते हैं, जबकि समास को अलग करने की प्रक्रिया को ‘विग्रह’ कहते हैं।

प्रश्न 17. मुहावरे और लोकोक्ति में दो अंतर लिखिए।

उत्तर: (1) मुहावरा एक वाक्यांश होता है जो वाक्य के बीच में प्रयुक्त होता है, जबकि लोकोक्ति एक स्वतंत्र और पूर्ण वाक्य होती है। (2) मुहावरे का रूप बदल सकता है, लेकिन लोकोक्ति का रूप ज्यों का त्यों रहता है।

प्रश्न 18. भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता था?

उत्तर: भोलानाथ का बच्चों की टोली के साथ गहरा लगाव था। जब वह अपने हमउम्र साथियों को खेल-कूद, हुड़दंग और मौज-मस्ती करते देखता, तो उसका बाल-मन आकर्षित हो जाता था और वह अपना रोना-धोना भूलकर खेल में लग जाता था।

प्रश्न 19. जितेन नार्गे ने सिक्किम की घाटियों में किन मान्यताओं और झंडों के बारे में बताया?

उत्तर: नार्गे ने बताया कि सिक्किम में किसी बौद्ध भिक्षु की मृत्यु पर उसकी आत्मा की शांति के लिए शहर से दूर 108 श्वेत झंडे लगाए जाते हैं जिन्हें उतारा नहीं जाता। किसी शुभ कार्य की शुरुआत में 108 रंगीन झंडे लगाए जाते हैं।

प्रश्न 20. लेखक अज्ञेय के अनुसार ‘बाहरी दबाव’ और ‘आंतरिक विवशता’ में क्या अंतर है?

उत्तर: लेखक के अनुसार बाहरी दबाव संपादकों की मांग, प्रकाशक का आग्रह या आर्थिक आवश्यकता के कारण होता है। जबकि आंतरिक विवशता लेखक के मन की वह व्याकुलता है जो उसे किसी सत्य या पीड़ा को व्यक्त करने के लिए मजबूर करती है।

🛑 भाग 3: 3 अंक वाले 15 विषय-आधारित प्रश्न (उत्तर सहित)

प्रश्न 1. सूरदास अथवा तुलसीदास जी की काव्यगत विशेषताएँ निम्नलिखित बिंदुओं पर लिखिए: (i) दो रचनाएँ, (ii) भावपक्ष-कलापक्ष।

उत्तर (तुलसीदास जी):

– दो रचनाएँ: (1) रामचरितमानस, (2) कवितावली।

– भावपक्ष: तुलसीदास जी सगुण भक्ति शाखा के रामभक्त कवि हैं। उनकी भक्ति में दास्य भाव की प्रधानता है। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के लोक-कल्याणकारी रूप को समाज के सामने रखा।

– कलापक्ष: आपने मुख्य रूप से अवधी और ब्रज भाषा का प्रयोग किया। दोहा, चौपाई, कवित्त और सवैया छंदों का सुंदर समन्वय आपकी रचनाओं में देखने को मिलता है। अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकारों का प्रचुरता से प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 2. स्वयं प्रकाश अथवा रामवृक्ष बेनीपुरी जी की साहित्यिक विशेषताएँ लिखिए: (i) दो रचनाएँ, (ii) भाषा-शैली।

उत्तर (रामवृक्ष बेनीपुरी):

– दो रचनाएँ: (1) माटी की मूरतें, (2) चिता के फूल।

– भाषा: बेनीपुरी जी की भाषा सरल, सजीव, व्यावहारिक तथा मुहावरेदार खड़ी बोली है। छोटे-छोटे वाक्यों के माध्यम से वे गहरी बात कह देते हैं। शब्दों का चयन सटीक और प्रभावशाली है।

– शैली: आपने रेखाचित्र, संस्मरण और निबंध विधाओं में प्रमुख रूप से वर्णनात्मक, विचारात्मक और भावात्मक शैलियों का प्रयोग किया है।

प्रश्न 3. उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया?

उत्तर: गोपियाँ श्री कृष्ण के विरह (वियोग) की वेदना को सह रही थीं और वे उम्मीद कर रही थीं कि कृष्ण लौटकर आएँगे तो उनके मन को शांति मिलेगी। लेकिन कृष्ण ने स्वयं न आकर उद्धव के हाथों निराकार ब्रह्म और योग का शुष्क संदेश भेज दिया। इस कड़वी ककड़ी जैसे संदेश को सुनकर कृष्ण से मिलन की उनकी अंतिम आशा भी टूट गई और वे अत्यंत व्याकुल हो उठीं। इस प्रकार इस योग संदेश ने आग में घी की तरह काम किया।

प्रश्न 4. ‘लखनवी अंदाज़’ व्यंग्य पाठ के माध्यम से लेखक यशपाल ने समाज के किस वर्ग पर कटाक्ष किया है?

उत्तर: ‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के माध्यम से लेखक ने समाज के पतनोन्मुख सामंती वर्ग और बनावटी रईसों पर तीखा कटाक्ष किया है। यह वर्ग वास्तविक धरातल से दूर रहकर आज भी अपनी झूठी शान, तड़क-भड़क और दिखावे की जीवन शैली में जीता है। लेखक ने वर्तमान समाज में पनपने वाली इसी दिखावे की संस्कृति (परजीवी संस्कृति) को बेनकाब किया है।

प्रश्न 5. बालगोबिन भगत के गायन की उन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए जो पूरे वातावरण को झंकृत कर देती थीं?

उत्तर: बालगोबिन भगत का गायन ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम से भरा होता था। जब वे आषाढ़ की रिमझिम फुहारों के बीच खेत में धान की रोपाई करते हुए कबीर के पदों को गाते, तो उनका स्वर सीधे सुनने वालों के कानों से होता हुआ हृदय को छू जाता था। बच्चे झूमने लगते, मेढ़ पर खड़ी महिलाओं के होठ स्वतः कांपने लगते और हलवाहों के पैर संगीत की थाप पर उठने लगते थे। उनका संगीत जादुई प्रभाव छोड़ता था।

प्रश्न 6. महाकाव्य और खंडकाव्य में किन्हीं तीन मुख्य अंतरों को रेखांकित कीजिए।

उत्तर:

1. महाकाव्य में नायक के संपूर्ण जीवन का व्यापक व विस्तृत चित्रण होता है, जबकि खंडकाव्य में जीवन की किसी एक विशिष्ट घटना या अंश का चित्रण होता है।

2. महाकाव्य का आकार बहुत बड़ा होता है और इसमें कम से कम आठ सर्ग होते हैं, जबकि खंडकाव्य का आकार सीमित होता है और इसमें सर्गों की संख्या कम होती है।

3. महाकाव्य में अनेक छंदों और रसों का समावेश होता है (जैसे- रामचरितमानस), जबकि खंडकाव्य में मुख्य रूप से एक ही छंद और रस की प्रधानता होती है (जैसे- पंचवटी)।

प्रश्न 7. अतिशयोक्ति अलंकार और मानवीकरण अलंकार को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

– अतिशयोक्ति अलंकार: जहाँ किसी वस्तु, व्यक्ति या घटना का वर्णन लोक-सीमा से इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि विश्वास करना कठिन हो जाए।

उदाहरण: “हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग, लंका सिगरी जरि गई गए निसाचर भाग।”

– मानवीकरण अलंकार: जहाँ जड़ या अचेतन प्रकृति (पेड़, पौधे, बादल, नदी) पर मानवीय क्रियाओं और भावनाओं का आरोप किया जाता है।

उदाहरण: “मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।”

प्रश्न 8. भाववाच्य और कर्मवाच्य में क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

– कर्मवाच्य: क्रिया के जिस रूप में कर्म (Object) की प्रधानता होती है और क्रिया का लिंग-वचन कर्म के अनुसार बदलता है, उसे कर्मवाच्य कहते हैं।

उदाहरण: “राम द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है।”

– भाववाच्य: जहाँ न तो कर्ता की प्रधानता हो और न ही कर्म की, बल्कि क्रिया का भाव (Feeling) मुख्य होता है। यह वाक्य प्रायः निषेधात्मक होते हैं।

उदाहरण: “मुझसे अब चला नहीं जाता।”

प्रश्न 9. ‘साना-साना हाथ जोड़ी’ पाठ के आधार पर बताइए कि प्रदूषण का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ रहा है और स्नो-फॉल कम होने के क्या कारण हैं?

उत्तर: बढ़ते शहरीकरण, वाहनों के धुएँ और पर्यटकों की अनियंत्रित आमद के कारण प्रदूषण हिमालय जैसी पवित्र और संवेदनशील जगहों तक पहुँच गया है। प्रदूषण के कारण वैश्विक तापमान (ग्लोबल वॉर्मिंग) बढ़ रहा है। यही कारण है कि कटाओ जैसी जगहों पर भी अब प्राकृतिक बर्फ (स्नो-फॉल) लगातार कम होती जा रही है। पर्यावरण का संतुलन बिगड़ने से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जो भविष्य के जल संकट की ओर इशारा करता है।

प्रश्न 10. समाज में मुहावरों और लोकोक्तियों के प्रयोग का क्या महत्व है? कोई तीन बिंदु लिखिए।

उत्तर:

1. मुहावरे और लोकोक्तियाँ भाषा को संक्षिप्त, सुंदर, आकर्षक और प्रभावशाली बनाती हैं।

2. इनके प्रयोग से कम शब्दों में बहुत गहरी और गंभीर बात को आसानी से समाज के सामने रखा जा सकता है।

3. लोकोक्तियाँ मानव जाति के सदियों पुराने अनुभवों का निचोड़ होती हैं, जो समाज को नैतिक सीख और दिशा प्रदान करती हैं।

प्रश्न 11. बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं? ‘माता का अँचल’ पाठ के परिप्रेक्ष्य में लिखिए।

उत्तर: बच्चे माता-पिता के साथ खेलकर, उनकी गोद में बैठकर, उनसे लिपटकर और चूमकर अपने प्रेम को व्यक्त करते हैं। वे अपने माता-पिता के सामने नखरे दिखाते हैं, रूठते हैं और मनाए जाने पर खुश हो जाते हैं। ‘माता का अँचल’ पाठ में भोलानाथ दिनभर पिताजी के साथ रहता है, उनकी छाती पर खेलता है और अंत में भारी संकट या डर आने पर सीधे दौड़कर माता के आँचल में छिप जाता है। यही निश्चल बाल-प्रेम की चरम अभिव्यक्ति है।

प्रश्न 12. अर्थ के आधार पर वाक्य के किन्हीं तीन भेदों की परिभाषा और एक-एक उदाहरण लिखिए।

उत्तर:

1. विधानवाचक वाक्य: जिस वाक्य से किसी कार्य के होने या करने की सामान्य सूचना मिलती है। उदाहरण: “सूर्य पूर्व से उदय होता है।”

2. निषेधवाचक वाक्य: जिस वाक्य से किसी कार्य के न होने का बोध होता है। उदाहरण: “आज बाजार नहीं खुलेगा।”

3. आज्ञावाचक वाक्य: जिस वाक्य से आदेश, निर्देश, प्रार्थना या अनुमति का बोध होता है। उदाहरण: “तुम चुपचाप बैठकर अपना गृहकार्य करो।”

प्रश्न 13. छायावाद की तीन प्रमुख प्रवृत्तियाँ (विशेषताएँ) लिखिए।

उत्तर: (1) व्यक्तिवाद की प्रधानता अर्थात कवि की अपनी निजी भावनाओं की अभिव्यक्ति। (2) प्रकृति का सजीव मानवीकरण एवं सौंदर्य का सूक्ष्म चित्रण। (3) रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, रहस्यवाद और नारी के प्रति पूज्य भाव का समावेशन।

प्रश्न 14. विज्ञापन लेखन (Advertisement Writing) करते समय ध्यान रखने योग्य तीन महत्वपूर्ण बातें क्या हैं?

उत्तर:

1. विज्ञापन का बॉक्स या लेआउट आकर्षक और साफ-सुथरा होना चाहिए।

2. उत्पाद का नाम बड़े अक्षरों में होना चाहिए तथा उसके साथ कोई तुकबंदी या स्लोगन (जैसे- ‘पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करें’) लिखा होना चाहिए।

3. विज्ञापन की भाषा सरल, रोचक और संक्षिप्त होनी चाहिए ताकि ग्राहक तुरंत आकर्षित हो सकें।

प्रश्न 15. निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित (वाक्य परिवर्तन) कीजिए:

(i) राधा बहुत मधुर गाती है। (विस्मयादिबोधक में बदलें)

(ii) क्या आज वर्षा होगी? (विधानवाचक में बदलें)

(iii) झूठ बोलने वाले को कोई प्यार नहीं करता। (सकारात्मक/संदेहवाचक में बदलें)

उत्तर:

(i) वाह! राधा कितना मधुर गाती है।

(ii) आज वर्षा होगी।

(iii) शायद झूठ बोलने वाले को कोई प्यार न करे।

🛑 भाग 4: 4 अंक वाले 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (व्याख्या, पत्र व निबंध)

प्रश्न 1. निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या (Contextual Explanation) लिखिए:

“ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।

अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।

पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।

ज्यों जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी।”

उत्तर:

– संदर्भ: प्रस्तुत पद हमारी पाठ्यपुस्तक ‘क्षितिज भाग-2’ के ‘पद’ शीर्षक से लिया गया है। इसके रचयिता महाकवि सूरदास जी हैं।

– प्रसंग: इसमें गोपियों ने कृष्ण के सखा उद्धव पर व्यंग्य किया है, जो कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम बंधन से अछूते रहे।

– व्याख्या: गोपियाँ कहती हैं कि हे उद्धव! तुम बहुत भाग्यशाली हो जो कृष्ण के समीप रहकर भी उनके प्रेम के धागे में नहीं बंधे और न ही तुम्हारे मन में उनके प्रति कोई अनुराग पैदा हुआ। तुम्हारी स्थिति कमल के उस पत्ते के समान है जो पानी के भीतर रहता है पर उस पर पानी की एक भी बूंद नहीं ठहरती। या तुम तेल के उस घड़े की तरह हो जिसे पानी में डुबोने पर भी उस पर पानी की बूंद नहीं टिकती। तुम प्रेम की नदी के पास रहकर भी उसमें पैर नहीं डुबो पाए।

– विशेष: (1) ब्रजभाषा का अत्यंत ललित प्रयोग। (2) व्यंग्य शैली की प्रधानता। (3) ‘पुरइनि पात’ और ‘जल माहँ तेल की गागरि’ में उपमा व दृष्टांत अलंकार है।

प्रश्न 2. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या संदर्भ सहित लिखिए:

“बालगोबिन भगत की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखा गया जिस दिन उनका बेटा मरा। इकलौता बेटा था वह! कुछ सुस्त और बोदा-सा था, किन्तु इसी कारण बालगोबिन भगत उसे और भी मानते थे।”

उत्तर:

– संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘क्षितिज भाग-2’ के रेखाचित्र पाठ ‘बालगोबिन भगत’ से अवतरित हैं। इसके लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी हैं।

– प्रसंग: लेखक ने भगत जी के जीवन की सबसे कठिन घड़ी (पुत्र की मृत्यु) के माध्यम से उनकी अनन्य भक्ति और अध्यात्म भावना का वर्णन किया है।

– व्याख्या: लेखक कहते हैं कि भगत जी संगीत के सच्चे साधक थे। उनके संगीत का सबसे बड़ा प्रमाण तब मिला जब उनके एकमात्र पुत्र का निधन हो गया। वह लड़का थोड़ा मानसिक रूप से कमजोर था, इसलिए भगत जी उसकी अधिक देखभाल करते थे क्योंकि उनका मानना था कि ऐसे बच्चों को अधिक प्रेम और संरक्षण की आवश्यकता होती है। पुत्र की मृत्यु पर रोने के बजाय वे कबीर के पदों को गा रहे थे क्योंकि उनका मानना था कि आत्मा परमात्मा से मिल गई है, यह शोक का नहीं बल्कि उत्सव का समय है।

– विशेष: (1) भाषा सरल, मर्मस्पर्शी खड़ी बोली है। (2) भगत जी के उच्च आध्यात्मिक दृष्टिकोण को दर्शाया गया है।

प्रश्न 3. अपने जिले के जिलाधीश (कलेक्टर) को परीक्षा काल में ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर) पर प्रतिबंध लगाने हेतु प्रार्थना पत्र लिखिए।

उत्तर:

सेवा में,

    श्रीमान जिलाधीश महोदय,

    जिला – ग्वालियर (म.प्र.)

विषय: परीक्षा काल में ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर रोक लगाने हेतु प्रार्थना पत्र।

महोदय,

    विनम्र निवेदन है कि माध्यमिक शिक्षा मण्डल की कक्षा 10वीं और 12वीं की वार्षिक व अर्धवार्षिक परीक्षाएँ अत्यंत निकट हैं। हम सभी छात्र दिन-रात लगन से परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं। परंतु अत्यंत खेद का विषय है कि शहर में देर रात तक विवाह समारोहों, धार्मिक आयोजनों और पार्टियों में तीव्र आवाज में लाउडस्पीकर बजाए जा रहे हैं।

    इस अत्यधिक तीव्र शोर के कारण हमारा ध्यान पूरी तरह भंग हो जाता है और हम एकाग्रता से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। छात्रों के अमूल्य भविष्य को ध्यान में रखते हुए आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि परीक्षा समाप्ति तक रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी करने की कृपा करें।

धन्यवाद।

भवदीय,

समस्त छात्र वर्ग,

ग्वालियर, मध्य प्रदेश।

दिनांक: 18 अक्टूबर 2026

प्रश्न 4. अपने विद्यालय के प्राचार्य को शाला शुल्क (फीस) से मुक्ति (स्कॉलरशिप) हेतु एक औपचारिक आवेदन पत्र लिखिए।

उत्तर:

सेवा में,

    श्रीमान प्राचार्य महोदय,

    शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ग्वालियर (म.प्र.)

विषय: शाला शुल्क से पूर्ण मुक्ति हेतु प्रार्थना पत्र।

महोदय,

    सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 10वीं ‘अ’ का एक अत्यंत मेधावी छात्र हूँ। मैंने कक्षा 9वीं की परीक्षा में 92% अंक प्राप्त कर अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। खेल-कूद व अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में भी मेरा प्रदर्शन सदैव सराहनीय रहा है।

    मेरे पिताजी एक छोटे से निजी संस्थान में श्रमिक हैं। अत्यंत सीमित आय होने के कारण वे पूरे परिवार का भरण-पोषण बड़ी कठिनाई से कर पाते हैं। वर्तमान में घर की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है, जिसके कारण वे मेरा मासिक विद्यालय शुल्क जमा करने में असमर्थ हैं। मेरी पढ़ाई में गहरी रुचि है और मैं भविष्य में देश की सेवा करना चाहता हूँ।

    अतः आपसे नम्र प्रार्थना है कि मेरी पारिवारिक स्थिति और शैक्षणिक रिकॉर्ड को देखते हुए मुझे शाला शुल्क से पूर्ण मुक्ति प्रदान करने की कृपा करें, ताकि मैं अपनी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रख सकूँ।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,

नाम: अनुज शर्मा, कक्षा: 10वीं ‘अ’

रोल नंबर: 12

प्रश्न 5. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 200 से 250 शब्दों में सारगर्भित निबंध (Essay) लिखिए:
(i) विद्यार्थी जीवन और अनुशासन, (ii) विज्ञान: वरदान या अभिशाप, (iii) पर्यावरण प्रदूषण: कारण और निवारण।

उत्तर (विषय: पर्यावरण प्रदूषण: कारण और निवारण):

– 1. प्रस्तावना: प्रकृति ने मनुष्य को एक स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण उपहार स्वरूप दिया था। परंतु आधुनिक युग में मानव की अंधी भौतिक महत्वाकांक्षाओं, औद्योगिक विकास और वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण हमारा पर्यावरण पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। प्रदूषण आज संपूर्ण मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है।

– 2. प्रदूषण के प्रकार: मुख्य रूप से प्रदूषण चार प्रकार का होता है। फैक्ट्रियों और वाहनों से निकलने वाले धुएँ के कारण ‘वायु प्रदूषण’ हो रहा है, जिससे सांस की बीमारियाँ बढ़ रही हैं। उद्योगों के दूषित रसायनों को नदियों में बहाने से ‘जल प्रदूषण’ चरम पर है। लाउडस्पीकरों और मशीनों के शोर से ‘ध्वनि प्रदूषण’ मानसिक तनाव दे रहा है तथा रासायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग से ‘भूमि प्रदूषण’ फसलों को जहरीला बना रहा है।

– 3. प्रदूषण के कारण: वनों की तेजी से होती कटाई इसका सबसे बड़ा कारण है क्योंकि पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर हमें ऑक्सीजन देते हैं। जनसंख्या विस्फोट और कचरे के सही निपटान की व्यवस्था न होना भी प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है।

– 4. निवारण के उपाय: प्रदूषण से मुक्ति पाने के लिए हमें बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण (Afforestation) करना होगा। सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ईंधन के विकल्पों को अपनाना होगा। फैक्ट्रियों के कचरे को परिष्कृत करके ही नदियों में बहाने की सख्त कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए। प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना आवश्यक है।

– 5. उपसंहार: पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है। यदि हम आज सचेत नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा और पानी नसीब नहीं होगा। “वृक्ष लगाओ, धरा बचाओ” के संकल्प के साथ ही हम इस पृथ्वी को रहने योग्य बनाए रख सकते हैं।

प्रश्न 6. ‘लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ में लक्ष्मण के चरित्र की कोई चार मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: लक्ष्मण वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस के एक अत्यंत पराक्रमी और विशिष्ट पात्र हैं। इस पाठ के आधार पर उनके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. वीर और निडर योद्धा: लक्ष्मण अत्यंत साहसी हैं। वे महान पराक्रमी महर्षि परशुराम के फरसे को देखकर भी तनिक भी भयभीत नहीं होते और निर्भीकता से उनका सामना करते हैं।

2. व्यंग्य कला में निपुण: परशुराम के अत्यंत क्रोधपूर्ण वचनों का उत्तर लक्ष्मण शांत रहने के बजाय अत्यधिक धारदार व्यंग्यों से देते हैं, जिससे परशुराम का क्रोध और भड़क जाता है।

3. तर्कशील बुद्धि: वे हर बात का अकाट्य तर्क देते हैं। धनुष टूटने पर उनका यह कहना कि “छूअत टूट रघुपतिहूँ न दोसू” (श्रीराम के छूते ही टूट गया) उनके तार्किक स्वभाव को दर्शाता है।

4. श्रीराम के प्रति अगाध निष्ठा: लक्ष्मण अपने बड़े भाई श्रीराम के प्रति पूर्ण समर्पित हैं। वे मर्यादा पुरुषोत्तम राम के सम्मान की रक्षा के लिए परशुराम के सामने एक ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं।

प्रश्न 7. रस के चार प्रमुख अंगों का नाम लिखकर प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

उत्तर: रस की निष्पत्ति के लिए निम्नलिखित चार अवयव या अंग अनिवार्य माने गए हैं:

1. स्थायी भाव: जो भाव मानव के हृदय में सुशुप्त अवस्था में जन्म से ही स्थायी रूप से विद्यमान रहते हैं और अनुकूल वातावरण मिलने पर जाग्रत होते हैं, उन्हें स्थायी भाव कहते हैं। इनकी संख्या 10 मानी गई है (जैसे- शृंगार का रति, वीर का उत्साह)।

2. विभाव: स्थायी भावों को जाग्रत या उद्दीप्त करने वाले कारणों (जैसे- व्यक्ति, वस्तु या परिस्थितियाँ) को विभाव कहते हैं। इसके दो भेद हैं: आलम्बन विभाव और उद्दीपन विभाव।

3. अनुभाव: स्थायी भाव के जाग्रत होने पर आश्रय के शरीर में होने वाली बाहरी चेष्टाओं (जैसे- भय से काँपना, आँखों का लाल होना, आँसू आना) को अनुभाव कहते हैं।

4. संचारी भाव: जो भाव आश्रय के मन में पानी के बुलबुलों की तरह क्षण भर के लिए प्रकट होते हैं और स्थायी भाव को पुष्ट करके तुरंत विलीन हो जाते हैं, उन्हें संचारी या व्यभिचारी भाव कहते हैं। इनकी संख्या 33 मानी गई है (जैसे- हर्ष, चिंता, शंका)।

प्रश्न 8. ‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के आधार पर बताइए कि एक आम नागरिक देश के निर्माण में किस प्रकार अपना योगदान दे सकता है?

उत्तर: देश का निर्माण केवल सेना के जवानों या राजनेताओं के माध्यम से ही नहीं होता, बल्कि देश का प्रत्येक आम नागरिक अपने दैनिक कार्यों द्वारा इसमें अमूल्य योगदान दे सकता है। पाठ में चश्मा बेचने वाला कैप्टन एक बहुत साधारण और गरीब व्यक्ति था, लेकिन उसके मन में राष्ट्र के महापुरुषों के प्रति गहरा सम्मान था, जिसे वह मूर्ति पर चश्मा लगाकर व्यक्त करता था। इसी प्रकार एक आम नागरिक निम्नलिखित तरीकों से योगदान दे सकता है:

1. सार्वजनिक संपत्ति (जैसे रेलवे, बस, पार्क) को नुकसान न पहुँचा कर और साफ-सुथरा रखकर।

2. पानी, बिजली और पर्यावरण की बचत करके तथा अधिक से अधिक पौधे लगाकर।

3. ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करना, टैक्स चुकाना और कानून व्यवस्था का सम्मान करना।

4. समाज के कमजोर, बुजुर्गों और असहाय लोगों की मदद करके आपसी भाईचारे को बढ़ावा देना।

प्रश्न 9. गीतिका और हरिगीतिका छंद के लक्षण (परिभाषा) उदाहरण सहित विस्तार से लिखिए।

उत्तर:

– 1. गीतिका छंद: यह एक मात्रिक सम छंद है। इसके प्रत्येक चरण में कुल 26 मात्राएँ होती हैं। इसमें 14 और 12 मात्राओं पर यति (विराम) होती है तथा चरण के अंत में क्रमशः लघु और गुरु (। ऽ) का होना अनिवार्य है।

उदाहरण: “हे प्रभो आनंददाता ज्ञान हमको दीजिए। शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिए।”

– 2. हरिगीतिका छंद: यह भी एक मात्रिक सम छंद है जो हिंदी काव्य में बहुत लोकप्रिय है। इसके प्रत्येक चरण में कुल 28 मात्राएँ होती हैं। इसमें 16 और 12 मात्राओं पर यति होती है तथा चरण के अंत में लघु-गुरु का आना उत्तम माना जाता है।

उदाहरण: “श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं। नवकंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं।”

प्रश्न 10. समाज में ‘संस्कृति’ और ‘सभ्यता’ में क्या अंतर है? ‘संस्कृति’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: भदंत आनंद कौसल्यायन के अनुसार संस्कृति और सभ्यता दो अलग-अलग अवधारणाएँ हैं, जिन्हें अक्सर लोग एक समझ लेते हैं। इनमें मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

1. संस्कृति आंतरिक आविष्कार है: मनुष्य की वह मूल बुद्धि, योग्यता या प्रेरणा जिसके बल पर वह किसी नई चीज़ का आविष्कार करता है, संस्कृति कहलाती है। उदाहरण के लिए, जिस आदिमानव ने सबसे पहले सुई-धागे का आविष्कार किया या आग की खोज की, उसकी वह आंतरिक प्रेरणा ‘संस्कृति’ थी।

2. सभ्यता बाहरी रहन-सहन है: संस्कृति के द्वारा जिस वस्तु का आविष्कार कर लिया जाता है, उसका उपयोग जब मानव समाज अपने भौतिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए करता है, तो वह ‘सभ्यता’ कहलाती है। उदाहरण के लिए, सुई-धागे के आविष्कार की प्रेरणा संस्कृति थी, परंतु आज जो हम सुंदर और आधुनिक कपड़े पहनते हैं, वह हमारी सभ्यता का हिस्सा है।

3. संक्षेप में, संस्कृति कर्ता (उत्पादक) है और सभ्यता उसका परिणाम (उत्पाद) है। संस्कृति अविभाज्य और अपरिवर्तनीय आंतरिक गुण है, जबकि सभ्यता समय के साथ बदलती रहती है।

प्रश्न 11. महाकवि सूरदास के ‘भ्रमरगीत’ की मुख्य साहित्यिक और वैचारिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: सूरदास का भ्रमरगीत हिंदी साहित्य की एक बेजोड़ और अनमोल धरोहर है। इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

1. सगुण भक्ति की विजय: भ्रमरगीत का मुख्य वैचारिक उद्देश्य निराकार ब्रह्म और योग साधना के ऊपर सगुण भक्ति और प्रेम की श्रेष्ठता को स्थापित करना है। गोपियों के तर्कों के सामने ज्ञानी ऊधो भी निरुत्तर हो जाते हैं।

2. उपालंभ (उलाहना) की प्रधानता: गोपियाँ उद्धव और कृष्ण को बहुत ही मधुर परंतु तीखे उलाहने देती हैं। वे अपनी पीड़ा को सीधे शब्दों में न कहकर प्रतीकों (भ्रमर/भौंरे) के माध्यम से कहती हैं।

3. वियोग शृंगार का चरम उत्कर्ष: इसमें गोपियों की विरह वेदना का अत्यंत सूक्ष्म और मर्मस्पर्शी चित्रण हुआ है। कृष्ण के बिना उन्हें कुंज, वन और प्रकृति की हर सुंदर वस्तु कष्टदायक लगने लगती है।

4. ललित ब्रजभाषा: भ्रमरगीत में संगीतात्मकता, पद शैली और कोमलकांत पदावली से युक्त शुद्ध साहित्यिक ब्रजभाषा का चरम रूप दिखाई देता है।

प्रश्न 12. अपने छोटे भाई को एक अनौपचारिक पत्र लिखिए, जिसमें उसे समय का सदुपयोग करने और मोबाइल फोन के अत्यधिक प्रयोग से बचने की सलाह दी गई हो।

उत्तर:

परीक्षा भवन,

ग्वालियर (म.प्र.)

दिनांक: 18 अक्टूबर 2026

प्रिय अनुज (रोहित),

    सदा खुश रहो।

    कल ही पूज्य पिताजी का पत्र प्राप्त हुआ। पत्र से ज्ञात हुआ कि तुम्हारा ध्यान आजकल पढ़ाई से भटक रहा है और तुम दिन का अधिकांश समय मोबाइल फोन पर गेम खेलने और सोशल मीडिया पर व्यर्थ की चीजें देखने में बिता रहे हो। यह जानकर मुझे अत्यंत दुःख हुआ।

    रोहित, तुम जानते हो कि कक्षा 10वीं का वर्ष तुम्हारे जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है। समय बहुत मूल्यवान होता है, एक बार बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। मोबाइल फोन तकनीकी रूप से जानकारी प्राप्त करने का साधन है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग तुम्हारी एकाग्रता, मानसिक स्वास्थ्य और आँखों को नुकसान पहुँचा रहा है।

    मेरी सलाह है कि तुम मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यक पढ़ाई के लिए करो और दैनिक जीवन में एक समय-सारिणी (Time-table) बनाकर पढ़ाई और शारीरिक खेल-कूद पर ध्यान केंद्रित करो। मुझे पूरा विश्वास है कि तुम अपनी भूल सुधारोगे और अर्धवार्षिक परीक्षा में उत्कृष्ट अंक लाकर परिवार का नाम रोशन करोगे। माताजी और पिताजी को चरण स्पर्श कहना।

तुम्हारा बड़ा भाई,

विकास शर्मा

प्रश्न 13. विज्ञापन लेखन और सूचना लेखन (Notice Writing) में क्या अंतर होता है? दोनों का एक-एक प्रारूप स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: विज्ञापन और सूचना दोनों ही जनसंचार के माध्यम हैं, परंतु इनमें निम्नलिखित अंतर होता है:

1. उद्देश्य: विज्ञापन का मुख्य उद्देश्य किसी उत्पाद, सेवा या विचार का प्रचार करना और ग्राहकों को उसे खरीदने के लिए आकर्षित करना होता है (व्यावसायिक)। जबकि सूचना का उद्देश्य किसी संस्था द्वारा अपने सदस्यों या आम जनता को किसी आगामी घटना, नियम या निर्णय की आधिकारिक जानकारी देना होता है (प्रशासनिक)।

2. भाषा: विज्ञापन की भाषा चटपटी, काव्यात्मक, आकर्षक और स्लोगन युक्त होती है। सूचना की भाषा अत्यंत औपचारिक, सरल, स्पष्ट और बिंदुवार होती है।

3. प्रारूप का अंतर: विज्ञापन में चित्रों, छूट (Discount) और आकर्षक आकृतियों का प्रयोग होता है। सूचना में संस्था का नाम, दिनांक, शीर्षक और अंत में जारी करने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर व पद का नाम होना अनिवार्य है।

प्रश्न 14. संधि की परिभाषा लिखते हुए इसके मुख्य भेदों को उदाहरण सहित विस्तार से समझाइए।

उत्तर: दो निकटवर्ती वर्णों (ध्वनियों) के अत्यंत पास आने के कारण उनके आपसी मेल से जो विकार या परिवर्तन उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते हैं। जैसे: देव + इंद्र = देवेंद्र। इसके तीन मुख्य भेद हैं:

1. स्वर संधि: जब स्वर वर्ण का मेल किसी दूसरे स्वर वर्ण से होता है, तो वहाँ स्वर संधि होती है। इसके पाँच उपभेद होते हैं (दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण, अयादि)। उदाहरण: विद्या + आलय = विद्यालय (आ + आ = आ)।

2. व्यंजन संधि: जब किसी व्यंजन वर्ण का मेल किसी स्वर या व्यंजन वर्ण से होने पर जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। उदाहरण: वाक् + ईश = वागीश, सत् + जन = सज्जन।

3. विसर्ग संधि: विसर्ग (:) के साथ किसी स्वर या व्यंजन के मिलने से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं। उदाहरण: मनः + हर = मनोहर, नि: + चल = निश्चल।

प्रश्न 15. ‘साना-साना हाथ जोड़ी’ पाठ के आधार पर उन अनगिनत महिलाओं और श्रमजीवियों के योगदान पर प्रकाश डालिए जिनकी बदौलत पर्यटकों की यात्रा सुगम होती है।

उत्तर: पर्यटकों के लिए जो पर्वतीय स्थल केवल मनोरंजन, रोमांच और जन्नत जैसे सुंदर लगते हैं, उनके पीछे वहाँ के स्थानीय श्रमजीवियों का अत्यधिक कठोर और जानलेवा संघर्ष छिपा होता है। लेखिका मधु कांकरिया ने सिक्किम की यात्रा में देखा कि:

1. पहाड़ी औरतें और पत्थर तोड़ना: चिलचिलाती धूप या कड़ाके की ठंड में पहाड़ी महिलाएँ अपनी पीठ पर डोको (टोकरी) में अपने छोटे बच्चों को बांधकर कुदाल और हथौड़े से बड़े-बड़े पत्थरों को तोड़कर सड़कें चौड़ी करती हैं ताकि पर्यटकों की गाड़ियाँ सुरक्षित निकल सकें।

2. जान का जोखिम: पहाड़ों पर रास्ता बनाना अत्यंत खतरनाक काम है। जरा सी चूक या डायनामाइट के विस्फोट के समय थोड़ी सी लापरवाही सीधे मौत के मुँह में धकेल देती है। इन सड़कों को बनाने में कई मजदूरों ने अपनी जान गंवाई है।

3. छोटे बच्चों का संघर्ष: वहाँ के छोटे-छोटे बच्चे भी तीन-चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर स्कूल जाते हैं और लौटते समय अपनी माँ के साथ मवेशी चराते हैं या लकड़ियों के भारी गट्ठर ढोते हैं।

अतः सैलानियों की सुखद यात्रा के पीछे इन गुमनाम श्रमजीवियों का रक्त और पसीना बहा होता है, जिनके प्रति हमें सदैव कृतज्ञ होना चाहिए।

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