अर्द्धवार्षिक/ वार्षिक परीक्षा 2026-27 कक्षा 12 लेखाशास्त्र (Accountancy) नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (MP Board)

MP BOARD की आगामी अर्द्धवार्षिक/ वार्षिक परीक्षा 2026-27 के लिए कक्षा 12 लेखाशास्त्र (Accountancy) नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2026-27 (MP Board) दिए गए हैं हिंदी के अतिरिक्त इंग्लिश , संस्कृत , भौतिक , रसायन (विज्ञान/ गणित संकाय ) कला संकाय ( इतिहास , राजनीति आदि ) कामर्स संकाय ( एकाउंटेंसी , व्यवसाय अध्ययन ) कृषि संकाय के नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर इस वेबसाईट पर दिए गए है . बोर्ड परीक्षा तक वेबसाईट को दिन में कम से कम एक बार अवश्य चेक करें . नियमित अपडेट होगी .

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अर्द्धवार्षिक/ वार्षिक परीक्षा 2026-27 कक्षा 12 लेखाशास्त्र (Accountancy) नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (MP Board)

भाग अ: 1 अंक वाले वस्तुनिष्ठ प्रश्न (कुल: 50 प्रश्न)

1. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1. साझेदारी संलेख (Partnership Deed) के अभाव में लाभ-हानि का विभाजन किया जाता है:
  • पूंजी के अनुपात में
  • बराबर-बराबर (समान अनुपात में)
  • त्याग अनुपात में
  • समय के अनुपात में
उत्तर: बराबर-बराबर (समान अनुपात में)
प्रश्न 2. नए साझेदार के प्रवेश पर पुरानी बैलेंस शीट में दर्शाए गए सामान्य संचय (General Reserve) को हस्तांतरित किया जाता है:
  • सभी साझेदारों के पूंजी खाते में
  • पुराने साझेदारों के पूंजी खाते में पुराने अनुपात में
  • नए साझेदार के पूंजी खाते में
  • पुनर्मूल्यांकन खाते में
उत्तर: पुराने साझेदारों के पूंजी खाते में पुराने अनुपात में
प्रश्न 3. किसी साझेदार के अवकाश ग्रहण करने पर उसके हिस्से की ख्याति (Goodwill) को शेष साझेदारों के मध्य डेबिट किया जाता है:
  • लाभ प्राप्ति अनुपात (Gaining Ratio) में
  • त्याग अनुपात में
  • पुराने लाभ-हानि अनुपात में
  • पूंजी अनुपात में
उत्तर: लाभ प्राप्ति अनुपात (Gaining Ratio) में
प्रश्न 4. साझेदारी फर्म के विघटन (Dissolution) पर संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राशि को लिखा जाता है:
  • पुनर्मूल्यांकन खाते (Revaluation A/c) के क्रेडिट में
  • वसूली खाते (Realisation A/c) के डेबिट में
  • वसूली खाते (Realisation A/c) के क्रेडिट में
  • साझेदारों के पूंजी खाते में
उत्तर: वसूली खाते (Realisation A/c) के क्रेडिट में
प्रश्न 5. एक कंपनी अपने अंशों को प्रीमियम पर जारी कर सकती है, इसका उल्लेख किस धारा में है?
  • धारा 52
  • धारा 53
  • धारा 78
  • धारा 62
उत्तर: धारा 52 (कंपनी अधिनियम, 2013)
प्रश्न 6. अंशों के समर्पण या जब्ती (Forfeiture of Shares) के बाद अंश जब्ती खाते के शेष को हस्तांतरित किया जाता है:
  • सामान्य संचय खाते में
  • पूंजी संचय खाते (Capital Reserve A/c) में
  • लाभ-हानि विवरणी में
  • आरक्षित पूंजी खाते में
उत्तर: पूंजी संचय खाते (Capital Reserve A/c) में
प्रश्न 7. ऋणपत्रधारी (Debenture holders) कंपनी के होते हैं:
  • स्वामी (Owners)
  • लेनदार (Creditors)
  • ग्राहक (Customers)
  • निदेशक (Directors)
उत्तर: लेनदार (Creditors)
प्रश्न 8. कंपनी के वित्तीय विवरण (Financial Statements) में शामिल होते हैं:
  • तुलन पत्र (Balance Sheet)
  • लाभ और हानि की विवरणी
  • नकद प्रवाह विवरणी (Cash Flow Statement)
  • उपरोक्त सभी
उत्तर: उपरोक्त सभी
प्रश्न 9. चालू अनुपात (Current Ratio) का आदर्श रूप माना जाता है:
  • 1:1
  • 2:1
  • 3:1
  • 1:2
उत्तर: 2:1
प्रश्न 10. तरलता अनुपात (Liquid Ratio) की गणना के लिए चालू संपत्तियों में से किसे घटाया जाता है?
  • रहतिया (Stock) और पूर्वदत्त व्यय (Prepaid Expenses)
  • देनदार (Debtors)
  • नकद शेष (Cash)
  • प्राप्य बिल (B/R)
उत्तर: रहतिया (Stock) और पूर्वदत्त व्यय (Prepaid Expenses)

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति (Fill in the Blanks)

प्रश्न 11. साझेदारी अधिनियम ____________ वर्ष में पारित किया गया था।
उत्तर: 1932
प्रश्न 12. जब साझेदारों की पूंजी स्थिर (Fixed) हो, तो चालू खाते (Current Accounts) का शेष हमेशा ____________ या क्रेडिट हो सकता है।
उत्तर: डेबिट
प्रश्न 13. ख्याति (Goodwill) एक ____________ संपत्ति है।
उत्तर: अमूर्त और अदृश्य (Intangible Asset)
प्रश्न 14. नया अनुपात – पुराना अनुपात = ____________ अनुपात होता है।
उत्तर: लाभ प्राप्ति (Gaining)
प्रश्न 15. पुनर्मूल्यांकन खाता (Revaluation Account) एक ____________ प्रकृति का खाता है।
उत्तर: नाममात्र (Nominal Account)
प्रश्न 16. फर्म के विघटन पर बैंक ओवरड्राफ्ट को ____________ खाते में हस्तांतरित किया जाता है।
उत्तर: वसूली (Realisation)
प्रश्न 17. अधिकृत पूंजी (Authorized Capital) को कंपनी की ____________ पूंजी भी कहा जाता है।
उत्तर: पंजीकृत या नाममात्र (Registered or Nominal Capital)
प्रश्न 18. ऋणपत्रों पर ब्याज का भुगतान एक निश्चित दर से किया जाता है, जो कंपनी के लाभों पर एक ____________ होता है।
उत्तर: प्रभार (Charge against profit)
प्रश्न 19. तुलन पत्र (Balance Sheet) कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची III के भाग ____________ के प्रारूप में बनाया जाता है।
उत्तर: I (भाग 1)
प्रश्न 20. सकल लाभ अनुपात की गणना शुद्ध ____________ पर की जाती है।
उत्तर: विक्रय (Revenue from Operations / Net Sales)

3. सत्य या असत्य (True or False)

प्रश्न 21. एक साझेदारी फर्म में साझेदारों की अधिकतम संख्या 50 हो सकती है। (सत्य/असत्य)
उत्तर: सत्य
प्रश्न 22. साझेदारी संलेख बनाना कानूनन अनिवार्य है। (सत्य/असत्य)
उत्तर: असत्य (यह ऐच्छिक है)
प्रश्न 23. नए साझेदार के प्रवेश पर संपत्ति के मूल्य में वृद्धि से वसूली खाते को क्रेडिट किया जाता है। (सत्य/असत्य)

उत्तर: असत्य (पुनर्मूल्यांकन खाते को क्रेडिट किया जाता है)

प्रश्न 24. अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार को फर्म के संचित लाभों में हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार है। (सत्य/असत्य)
उत्तर: सत्य

प्रश्न 25. फर्म के विघटन पर सबसे अंत में साझेदारों के ऋण खातों का भुगतान किया जाता है। (सत्य/असत्य)
उत्तर: असत्य (साझेदारों की पूंजी से पहले बाह्य लेनदारों और साझेदार के ऋण का भुगतान होता है)

प्रश्न 26. एक निजी कंपनी (Private Company) जनता को अंश खरीदने के लिए आमंत्रित नहीं कर सकती। (सत्य/असत्य)
उत्तर: सत्य

प्रश्न 27. ऋणपत्रधारियों को कंपनी की बैठकों में मतदान (Voting Right) का अधिकार होता है। (सत्य/असत्य)
उत्तर: असत्य (केवल अंशधारियों को मतदान का अधिकार होता है)

प्रश्न 28. वित्तीय विवरण केवल ऐतिहासिक तथ्यों (Historical Facts) पर आधारित होते हैं। (सत्य/असत्य)
उत्तर: सत्य

प्रश्न 29. ऋण-समता अनुपात (Debt-Equity Ratio) कंपनी की दीर्घकालीन शोधन क्षमता को मापता है। (सत्य/असत्य)
उत्तर: सत्य

प्रश्न 30. स्टॉक आवर्त अनुपात (Stock Turnover Ratio) एक शोधन क्षमता अनुपात है। (सत्य/असत्य)
उत्तर: असत्य (यह क्रियाशीलता/क्रियात्मक अनुपात है)

4. सही जोड़ी बनाइए (Match the Following)

प्रश्न 31 से 40. कॉलम अ के लेखांकन मदों का कॉलम ब के सही वर्गीकरण से मिलान करें:

कॉलम अकॉलम ब (सही उत्तर)
साझेदारी संलेख का अभावसाझेदार के ऋण पर 6% वार्षिक ब्याज
त्याग अनुपात (Sacrificing Ratio)पुराना अनुपात – नया अनुपात
अधिलाभ (Super Profit)औसत लाभ – सामान्य लाभ
वसूली खाता (Realisation A/c)फर्म के विघटन पर खोला जाने वाला खाता
प्रतिभूति प्रीमियम आरक्षित (Securities Premium)बैलेंस शीट का इक्विटी और लायबिलिटी पक्ष (चिठ्ठा)
अग्रिम याचना (Calls in Advance)इस पर 12% वार्षिक दर से ब्याज देय होता है
शोधनीय ऋणपत्र (Redeemable Debentures)जिनका भुगतान एक निश्चित अवधि के बाद आवश्यक है
अमूर्त संपत्तियां (Intangible Assets)ख्याति, पेटेंट और ट्रेडमार्क
त्वरित अनुपात (Quick Ratio)तरल संपत्तियां / चालू दायित्व (1:1 आदर्श)
परिचालन अनुपात (Operating Ratio)परिचालन लागत / शुद्ध विक्रय × 100

5. एक शब्द / एक वाक्य में उत्तर

प्रश्न 41. साझेदारी की स्थापना के लिए कम से कम कितने व्यक्तियों का होना आवश्यक है?
उत्तर: न्यूनतम दो (2) व्यक्ति।

प्रश्न 42. उस खाते का नाम बताइए जो साझेदारों के लाभ-हानि को बांटने के लिए बनाया जाता है।
उत्तर: लाभ-हानि नियोजन खाता (Profit and Loss Appropriation Account)।

प्रश्न 43. नए साझेदार के प्रवेश पर संपत्तियों और दायित्वों के मूल्यों में बदलाव के रिकॉर्ड के लिए कौन सा खाता बनाते हैं?
उत्तर: पुनर्मूल्यांकन खाता (Revaluation Account) या लाभ-हानि समायोजन खाता।

प्रश्न 44. साझेदारी फर्म के पुनर्गठन से क्या आशय है?
उत्तर: साझेदारों के मध्य वर्तमान आपसी संबंधों या समझौते में होने वाला कोई भी परिवर्तन जिससे नया ठहराव जन्म लेता है।

प्रश्न 45. फर्म के समापन (विघटन) पर संपत्तियों से वसूली और बाह्य दायित्वों के भुगतान के लिए कौन सा खाता खोला जाता है?
उत्तर: वसूली खाता (Realisation Account)।

प्रश्न 46. न्यूनतम अभिदान (Minimum Subscription) की राशि निर्गमित पूंजी के कितने प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए?
उत्तर: 90% (सेबी के दिशा-निर्देशों के अनुसार)।

प्रश्न 47. कंपनी के उन अंशों को क्या कहते हैं जिन्हें लाभांश प्राप्ति और पूंजी की वापसी में पूर्वाधिकार होता है?
उत्तर: पूर्वाधिकार अंश (Preference Shares)।

प्रश्न 48. क्या ऋणपत्रों को बट्टे (Discount) पर निर्गमित किया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, कंपनियों को ऋणपत्रों को बट्टे पर निर्गमित करने की अनुमति है (धारा 53 केवल अंशों पर रोक लगाती है)।

प्रश्न 49. चालू दायित्वों (Current Liabilities) के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: व्यापारिक लेनदार (Sundry Creditors) और देय बिल (Bills Payable)।

प्रश्न 50. अनुपात विश्लेषण (Ratio Analysis) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: वित्तीय विवरणों के जटिल आंकड़ों को सरल बनाकर कंपनी की लाभप्रदता, तरलता और शोधन क्षमता का मूल्यांकन करना।

भाग ब: 2 अंक वाले लघु उत्तरीय प्रश्न (कुल: 30 प्रश्न)

प्रश्न 1. साझेदारी (Partnership) की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 की धारा 4 के अनुसार, “साझेदारी उन व्यक्तियों के बीच का संबंध है, जिन्होंने एक ऐसे व्यवसाय के लाभ को आपस में बांटने का समझौता किया है, जिसे उन सबके द्वारा या उन सब की ओर से किसी एक व्यक्ति द्वारा चलाया जाता है।”

प्रश्न 2. साझेदारी संलेख (Partnership Deed) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: साझेदारों के आपसी अधिकारों, कर्तव्यों और व्यावसायिक शर्तों को तय करने के लिए उनके बीच किया गया लिखित या मौखिक समझौता ‘साझेदारी संलेख’ कहलाता है। भविष्य के विवादों से बचने के लिए इसका लिखित होना उत्तम है।

प्रश्न 3. स्थिर पूंजी पद्धति और परिवर्तनशील पूंजी पद्धति में क्या अंतर है?
उत्तर: स्थिर पूंजी पद्धति में साझेदार का पूंजी खाता शेष हमेशा अपरिवर्तित रहता है और अन्य समायोजनों के लिए अलग से ‘चालू खाता’ बनाया जाता है। परिवर्तनशील पद्धति में केवल एक ही पूंजी खाता बनता है और उसका शेष बदलता रहता है।

प्रश्न 4. साझेदारी संलेख के अभाव में लागू होने वाले दो नियम लिखिए।
उत्तर: 1) सभी साझेदारों के बीच लाभ-हानि का विभाजन बराबर-बराबर किया जाएगा। 2) साझेदारों द्वारा फर्म को दिए गए ऋण पर 6% वार्षिक दर से ब्याज दिया जाएगा।

प्रश्न 5. ख्याति (Goodwill) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: ख्याति किसी व्यावसायिक फर्म के अच्छे नाम, प्रतिष्ठा और संबंधों का वह मौद्रिक मूल्य है, जो उसे अन्य प्रतिस्पर्धी फर्मों की तुलना में अधिक लाभ कमाने में सहायता प्रदान करता है।

प्रश्न 6. पुनर्मूल्यांकन खाता (Revaluation Account) क्यों बनाया जाता है?
उत्तर: नए साझेदार के प्रवेश या किसी साझेदार के अवकाश ग्रहण करने पर संपत्तियों के पुस्तकीय मूल्य में बदलाव और पुराने दायित्वों के सही मूल्यांकन से होने वाले लाभ या हानि को ज्ञात करने के लिए यह खाता बनाया जाता है।

प्रश्न 7. त्याग अनुपात (Sacrificing Ratio) क्या है? इसका सूत्र लिखिए।
उत्तर: नया साझेदार आने पर पुराने साझेदार अपने लाभ का जो हिस्सा नए साझेदार के पक्ष में छोड़ते हैं, उसे त्याग अनुपात कहते हैं।
सूत्र: त्याग अनुपात = पुराना अनुपात – नया अनुपात।

प्रश्न 8. लाभ प्राप्ति अनुपात (Gaining Ratio) से क्या आशय है?
उत्तर: किसी साझेदार के फर्म छोड़कर जाने या मृत्यु होने पर उसके हिस्से को शेष साझेदार जिस अनुपात में प्राप्त करते हैं, उसे लाभ प्राप्ति अनुपात कहते हैं।
सूत्र: लाभ प्राप्ति अनुपात = नया अनुपात – पुराना अनुपात।

प्रश्न 9. गुप्त ख्याति (Hidden Goodwill) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जब नए साझेदार के प्रवेश पर ख्याति की राशि स्पष्ट रूप से समझौते में नहीं दी होती, बल्कि फर्म की कुल संचित पूंजी और नए साझेदार के हिस्से के आधार पर निकाली जाती है, तो उसे गुप्त ख्याति कहते हैं।

प्रश्न 10. साझेदारी फर्म के पुनर्गठन (Reconstitution) की दो परिस्थितियां लिखिए।
उत्तर: 1) वर्तमान साझेदारों के मध्य लाभ-हानि विभाजन अनुपात में बदलाव होना। 2) फर्म में किसी नए साझेदार का प्रवेश होना।

प्रश्न 11. फर्म के विघटन (Dissolution of Firm) और साझेदारी के विघटन (Dissolution of Partnership) में अंतर बताइए।
उत्तर: साझेदारी के विघटन का अर्थ केवल पुराने समझौते का अंत और व्यवसाय का नए रूप में जारी रहना है। जबकि फर्म के विघटन का अर्थ है पूरा व्यवसाय बंद हो जाना, संपत्तियों की बिक्री और सभी दायित्वों का अंतिम भुगतान।

प्रश्न 12. वसूली खाता (Realisation Account) कब और क्यों बनाया जाता है?
उत्तर: यह खाता साझेदारी फर्म के पूर्ण विघटन (बंद होने) पर बनाया जाता है ताकि संपत्तियों को बेचने से प्राप्त नकद राशि और बाहरी दायित्वों के भुगतान के बाद होने वाले शुद्ध लाभ या हानि की गणना की जा सके।

प्रश्न 13. सीमित दायित्व साझेदारी (LLP) क्या है?
उत्तर: यह एक ऐसी साझेदारी संरचना है जिसमें कानूनन व्यावसायिक फर्म का अपना पृथक अस्तित्व होता है और प्रत्येक साझेदार का दायित्व उनके द्वारा निवेशित पूंजी तक ही सीमित होता है (उनकी निजी संपत्ति सुरक्षित रहती है)।

प्रश्न 14. अंश (Share) किसे कहते हैं? इसके दो प्रकार लिखिए।
उत्तर: किसी कंपनी की कुल पूंजी को जिन छोटे-छोटे समान टुकड़ों या इकाइयों में विभाजित किया जाता है, उसके एक टुकड़े को ‘अंश’ कहते हैं। प्रकार: 1) समता अंश (Equity Shares) 2) पूर्वाधिकार अंश (Preference Shares)।

प्रश्न 15. समता अंश (Equity Shares) की दो विशेषताएं लिखिए।
उत्तर: 1) इन अंशधारियों को कंपनी की बैठकों में मतदान करने और प्रबंधन में भाग लेने का पूर्ण अधिकार होता है। 2) इन्हें लाभांश की दर निश्चित नहीं होती, लाभ बचने पर ही इन्हें भुगतान मिलता है।

प्रश्न 16. अति-अभिदान (Over Subscription) से क्या आशय है?
उत्तर: जब किसी कंपनी द्वारा जनता को जारी किए गए अंशों की संख्या की तुलना में अधिक अंश खरीदने के आवेदन पत्र (Applications) प्राप्त हो जाते हैं, तो उस स्थिति को अति-अभिदान कहते हैं।

प्रश्न 17. अंशों के हरण या जब्ती (Forfeiture of Shares) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: यदि कोई अंशधारी बार-बार सूचना देने के बाद भी आबंटन या याचना (Call Money) की बकाया राशि का भुगतान नहीं करता, तो कंपनी निदेशक मंडल के प्रस्ताव द्वारा उसके अंशों और जमा राशि को जब्त कर लेती है, इसे ही अंशों का हरण कहते हैं।

प्रश्न 18. अवशिष्ट याचना (Calls in Arrears) क्या है?
उत्तर: जब कंपनी द्वारा अंशों पर याचना राशि मांगी जाती है और कोई अंशधारी निश्चित समय सीमा के भीतर उस राशि का भुगतान नहीं कर पाता, तो वह बकाया राशि ‘अवशिष्ट याचना’ कहलाती है।

प्रश्न 19. ऋणपत्र (Debenture) की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: ऋणपत्र कंपनी द्वारा अपनी सार्वमुद्रा (Common Seal) के अधीन जारी किया गया एक लिखित प्रपत्र या ऋण का पावती-पत्र है, जो इस बात का प्रमाण है कि कंपनी ने एक निश्चित ब्याज दर और शर्तों पर ऋण लिया है।

प्रश्न 20. बंधक ऋणपत्र (Mortgaged Debentures) किसे कहते हैं?
उत्तर: वे ऋणपत्र जिनके सुरक्षित भुगतान के लिए कंपनी अपनी किसी विशिष्ट संपत्ति या समस्त संपत्तियों को लेनदार के पास प्रभार या बंधक के रूप में रखती है, ताकि भुगतान न होने पर संपत्ति बेचकर राशि वसूली जा सके।

प्रश्न 21. परिवर्तनीय ऋणपत्र (Convertible Debentures) क्या हैं?
उत्तर: वे ऋणपत्र जिनके धारकों को यह विकल्प या अधिकार दिया जाता है कि वे एक निश्चित अवधि के बाद अपने ऋणपत्रों को कंपनी के समता अंशों या नए ऋणपत्रों में बदल सकते हैं।

प्रश्न 22. वित्तीय विवरण (Financial Statements) से क्या आशय है?
उत्तर: लेखांकन अवधि के अंत में कंपनी की वित्तीय स्थिति और परिचालन परिणामों (लाभ-हानि) को सारांश रूप में प्रस्तुत करने वाले अंतिम विवरण ‘वित्तीय विवरण’ कहलाते हैं। इसमें बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाता शामिल हैं।

प्रश्न 23. वित्तीय विवरण विश्लेषण की दो सीमाएं लिखिए।
उत्तर: 1) यह केवल गुणात्मक तत्वों (कर्मचारियों की कार्यक्षमता आदि) को छोड़ देता है और केवल मौद्रिक आंकड़ों को दर्शाता है। 2) यह ऐतिहासिक लागतों पर आधारित होता है, जिससे मुद्रास्फीति (मूल्य वृद्धि) का प्रभाव सही से नहीं दिखता।

प्रश्न 24. चिट्ठे (Balance Sheet) का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: किसी निश्चित तिथि (प्रायः 31 मार्च) को कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति को स्पष्ट करना, अर्थात कंपनी के पास कितनी संपत्तियां हैं और बाह्य व आंतरिक दायित्व (पूंजी) कितने हैं, यह दर्शाना।

प्रश्न 25. अनुपात विश्लेषण (Ratio Analysis) से क्या आशय है?
उत्तर: वित्तीय विवरणों की दो या दो से अधिक लेखांकन मदों के मध्य पाए जाने वाले गणितीय संबंधों को ज्ञात करना और उनका विश्लेषण करना ही अनुपात विश्लेषण कहलाता है।

प्रश्न 26. चालू संपत्तियों (Current Assets) से क्या तात्पर्य है? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: वे संपत्तियां जिन्हें व्यवसाय में सामान्य परिचालन चक्र के भीतर या एक वर्ष के अंदर नकद (Cash) में बदला जा सकता है। उदाहरण: रहतिया (Stock) और देनदार (Debtors)।

प्रश्न 27. ऋण-समता अनुपात (Debt-Equity Ratio) का सूत्र लिखिए।
उत्तर: यह अनुपात दीर्घकालीन ऋणों और शेयरधारकों के कोष (Equity) के संबंध को दर्शाता है।
सूत्र: ऋण-समता अनुपात = दीर्घकालीन ऋण (Long-term Debts) / शेयरधारक कोष (Shareholders’ Funds)।

प्रश्न 28. क्रियाशीलता अनुपात (Activity Ratios) क्या मापते हैं?
उत्तर: ये अनुपात यह मापते हैं कि फर्म ने अपने पास उपलब्ध संपत्तियों और संसाधनों का कितनी कुशलता और तेजी से उपयोग व्यवसाय संचालन या बिक्री बढ़ाने में किया है। इन्हें आवर्त (Turnover) अनुपात भी कहते हैं।

प्रश्न 29. कंपनी के किन्हीं दो गैर-चालू दायित्वों (Non-Current Liabilities) के नाम लिखिए।
उत्तर: 1) दीर्घकालीन ऋण (जैसे बैंक लोन) 2) जारी किए गए ऋणपत्र (Debentures)।

प्रश्न 30. साझेदारी में ‘असीमित दायित्व’ (Unlimited Liability) का क्या अर्थ है?
उत्तर: यदि साझेदारी व्यवसाय में भारी घाटा हो जाए और फर्म के दायित्व उसकी संपत्तियों से अधिक हो जाएं, तो लेनदारों का भुगतान करने के लिए साझेदारों की निजी संपत्तियों (मकान, व्यक्तिगत धन) का भी उपयोग किया जा सकता है।

भाग स: 3 अंक वाले लघु उत्तरीय प्रश्न (कुल: 15 प्रश्न)

प्रश्न 1. साझेदारी संलेख (Partnership Deed) में शामिल की जाने वाली किन्हीं तीन मुख्य बातों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: साझेदारी संलेख में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें शामिल की जाती हैं:

1. फर्म का नाम और पता: साझेदारी व्यवसाय का नाम क्या होगा और उसका मुख्य कार्यालय कहाँ स्थित होगा।

2. साझेदारों की पूंजी: प्रत्येक साझेदार द्वारा व्यवसाय में कितनी पूंजी लगाई जाएगी और पूंजी स्थिर होगी या परिवर्तनशील।

3. लाभ-हानि का विभाजन: साझेदार आपस में होने वाले लाभ या हानि को किस अनुपात में बांटेंगे (जैसे समान रूप से या पूंजी के अनुपात में)।

प्रश्न 2. ख्याति (Goodwill) के मूल्यांकन की ‘औसत लाभ विधि’ (Average Profit Method) को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: इस विधि के अंतर्गत पिछले कुछ वर्षों के वास्तविक लाभों का औसत निकालकर उसे समझौते के अनुसार क्रय के वर्षों की संख्या से गुणा कर दिया जाता है।

सूत्र: ख्याति = औसत लाभ × क्रय के वर्षों की संख्या (Number of years’ purchase)

उदाहरण: यदि किसी फर्म का पिछले 3 वर्षों का लाभ क्रमशः 40,000 रुपये, 50,000 रुपये और 60,000 रुपये है, तो कुल लाभ = 1,50,000 रुपये।

औसत लाभ = 1,50,000 / 3 = 50,000 रुपये। यदि ख्याति 2 वर्षों के क्रय के आधार पर निकालनी हो, तो ख्याति = 50,000 × 2 = 1,000,000 रुपये होगी।

प्रश्न 3. नए साझेदार के प्रवेश (Admission of a New Partner) के समय कौन-कौन से मुख्य लेखांकन समायोजन करने पड़ते हैं?
उत्तर: नए साझेदार के प्रवेश पर निम्नलिखित तीन प्रमुख लेखांकन समायोजन आवश्यक हैं:

1. नए लाभ-हानि अनुपात और त्याग अनुपात की गणना: पुराने साझेदारों के नए हिस्से और त्याग का निर्धारण करना।

2. ख्याति का मूल्यांकन और उपचार: नए साझेदार द्वारा लाई गई प्रीमियम की राशि को पुराने साझेदारों के त्याग अनुपात में बांटना।

3. संपत्तियों और दायित्वों का पुनर्मूल्यांकन: पुनर्मूल्यांकन खाता बनाकर पुराने मूल्यों के अंतर से हुए लाभ-हानि को पुराने साझेदारों में बांटना।

प्रश्न 4. ख्याति के स्वभाव (Nature of Goodwill) के आधार पर बिल्ली के स्वभाव की ख्याति और कुत्ते के स्वभाव की ख्याति में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: व्यावसायिक ख्याति को उनके ग्राहकों के व्यवहार के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:

1. बिल्ली के स्वभाव की ख्याति (Cat Goodwill): बिल्ली स्थान से प्रेम करती है, मालिक से नहीं। इसी प्रकार, इस ख्याति के ग्राहक मालिक के बदलने पर भी उसी दुकान या स्थान पर जाते हैं। इसका मूल्य सबसे अधिक होता है।

2. कुत्ते के स्वभाव की ख्याति (Dog Goodwill): कुत्ता स्वामीभक्त होता है। इस ख्याति के ग्राहक मालिक के प्रति वफादार होते हैं। मालिक जहाँ अपनी दुकान बदलेगा, ग्राहक भी उसी के पास चले जाते हैं। इसका मूल्य बिल्ली वाली ख्याति से कम होता है।

प्रश्न 5. साझेदारी फर्म के विघटन पर ‘वसूली खाते’ (Realisation Account) और ‘पुनर्मूल्यांकन खाते’ (Revaluation Account) में तीन अंतर लिखिए।
उत्तर: दोनों खातों में निम्नलिखित मुख्य अंतर हैं:

1. समय: पुनर्मूल्यांकन खाता फर्म के पुनर्गठन (प्रवेश/अवकाश) पर बनता है, जबकि वसूली खाता फर्म के पूर्ण समापन पर बनता है।

2. उद्देश्य: पुनर्मूल्यांकन खाते का उद्देश्य संपत्तियों/दायित्वों के मूल्यों को संशोधित करना है, जबकि वसूली खाते का उद्देश्य संपत्तियों को बेचकर नकद प्राप्त करना और दायित्व चुकाना है।

3. खातों का बंद होना: पुनर्मूल्यांकन खाता बनने के बाद संपत्तियों के खाते बंद नहीं होते, जबकि वसूली खाता बनते ही सभी संपत्तियों और बाह्य दायित्वों के खाते हमेशा के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

प्रश्न 6. पूर्वाधिकार अंशों (Preference Shares) के किन्हीं तीन प्रकारों को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर: पूर्वाधिकार अंशों के तीन प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

1. संचयी पूर्वाधिकार अंश (Cumulative): यदि किसी वर्ष कंपनी को पर्याप्त लाभ नहीं होता और लाभांश नहीं दिया जाता, तो इनका लाभांश बकाया जुड़ता जाता है और भविष्य के वर्षों में लाभ होने पर सबसे पहले पुराना बकाया चुकाया जाता है।

2. असंचयी पूर्वाधिकार अंश (Non-Cumulative): इन्हें केवल उसी वर्ष लाभांश मिलता है जिस वर्ष लाभ हुआ हो। किसी वर्ष लाभ न होने पर इनका लाभांश लैप्स (समाप्त) हो जाता है, बकाया नहीं जुड़ता।

3. शोधनीय पूर्वाधिकार अंश (Redeemable): इन अंशों की राशि कंपनी अधिनियम की शर्तों के अनुसार एक निश्चित समय अवधि के भीतर अंशधारियों को वापस लौटा दी जाती है।

प्रश्न 7. अंशों के हरण (जब्ती) की जर्नल प्रविष्टि (Journal Entry) को आवश्यक नियमों के साथ समझाइए।
उत्तर: जब अंशों को जब्त किया जाता है, तो अंश पूंजी खाते को उस राशि से डेबिट किया जाता है जो अब तक मांगी जा चुकी है (Called-up value)।

जर्नल प्रविष्टि:

Share Capital A/c — Debit [मांगी गई कुल राशि से]

    To Share Forfeiture A/c [जो राशि प्राप्त हो चुकी है]

    To Calls in Arrears A/c [जो राशि बकाया है और प्राप्त नहीं हुई]

(अंशों को देय राशि का भुगतान न करने के कारण जब्त करने पर)।

प्रश्न 8. अंश (Share) और ऋणपत्र (Debenture) में तीन मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अंश और ऋणपत्र में निम्नलिखित आधारभूत अंतर हैं:

1. स्थिति (Status): अंशधारी कंपनी के स्वामी (Owners) माने जाते हैं, जबकि ऋणपत्रधारी कंपनी के लेनदार (Creditors) होते हैं।

2. प्रतिफल (Return): अंशधारियों को लाभ के हिस्से के रूप में लाभांश (Dividend) मिलता है जो अनिश्चित होता है, जबकि ऋणपत्रधारियों को एक निश्चित दर से ब्याज (Interest) अवश्य मिलता है।

3. जोखिम: अंशों पर जोखिम अधिक होता है क्योंकि कंपनी बंद होने पर सबसे अंत में पूंजी मिलती है, जबकि ऋणपत्र सुरक्षित होते हैं और इन्हें भुगतान पहले मिलता है।

प्रश्न 9. समता अंशधारियों को कंपनी का वास्तविक स्वामी क्यों कहा जाता है? तीन कारण दीजिए।
उत्तर: समता अंशधारियों को वास्तविक स्वामी मानने के तीन कारण निम्नलिखित हैं:

1. मतदान का अधिकार: इन्हें कंपनी के निदेशकों को चुनने और महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर वोट देने का वैधानिक अधिकार होता है।

2. अंतिम जोखिम कर्ता: कंपनी को घाटा होने पर यह पूरा जोखिम उठाते हैं और इन्हें कोई लाभांश नहीं मिलता।

3. अवशिष्ट लाभ के अधिकारी: सभी दायित्वों और पूर्वाधिकार अंशधारियों को भुगतान के बाद बचने वाले पूरे लाभ पर इनका हक होता है।

प्रश्न 10. कंपनी के वित्तीय विवरणों (Financial Statements) के किन्हीं तीन महत्वों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: वित्तीय विवरण निम्नलिखित तीन हितधारकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

1. प्रबंधकों के लिए: यह प्रबंधन को कंपनी की वर्तमान कार्यक्षमता की जानकारी देकर भविष्य के नियोजन और निर्णयन में सहायता करता है।

2. निवेशकों के लिए: वर्तमान और भावी शेयरधारक इसके आधार पर तय करते हैं कि कंपनी में पैसा लगाना सुरक्षित और लाभदायक है या नहीं।

3. बैंक और वित्तीय संस्थाओं के लिए: इसके माध्यम से बैंक कंपनी की शोधन क्षमता की जांच करते हैं ताकि ऋण या लोन देने की सीमा तय की जा सके।

प्रश्न 11. एक कंपनी के चिट्ठे (Balance Sheet) के परिसंपत्ति (Assets) पक्ष के मुख्य शीर्षकों को क्रमानुसार लिखिए।
उत्तर: कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची III के अनुसार, परिसंपत्ति पक्ष को दो मुख्य शीर्षकों में बांटा जाता है:

1. गैर-चालू संपत्तियां (Non-Current Assets): इसके अंतर्गत अचल संपत्तियां (Property, Plant and Equipment), अमूर्त संपत्तियां (ख्याति आदि) और दीर्घकालीन निवेश आते हैं।

2. चालू संपत्तियां (Current Assets): इसके अंतर्गत चालू रहतिया (Inventories), व्यापारिक प्राप्य (Trade Receivables/Debtors), और नकद व नकद समतुल्य (Cash and Cash Equivalents) मदें आती हैं।

प्रश्न 12. तरलता अनुपात (Liquidity Ratios) क्या हैं? चालू अनुपात और त्वरित अनुपात को समझाइए।
उत्तर: वे अनुपात जो फर्म की अल्पकालीन वित्तीय स्थिति और अपने दैनिक चालू दायित्वों को चुकाने की क्षमता को मापते हैं, तरलता अनुपात कहलाते हैं।

1. चालू अनुपात (Current Ratio): यह चालू संपत्तियों और चालू दायित्वों का संबंध है (सूत्र: Current Assets / Current Liabilities)। इसका आदर्श रूप 2:1 है।

2. त्वरित अनुपात (Quick Ratio): यह अत्यधिक तरल संपत्तियों और चालू दायित्वों का संबंध है (सूत्र: Liquid Assets / Current Liabilities)। इसका आदर्श रूप 1:1 है।

प्रश्न 13. [संख्यात्मक प्रश्न] एक व्यवसाय की चालू संपत्तियां 4,00,000 रुपये और चालू दायित्व 2,00,000 रुपये हैं। यदि रहतिया (Stock) 50,000 रुपये का हो, तो चालू अनुपात और त्वरित अनुपात की गणना कीजिए।
हल:

1. चालू अनुपात (Current Ratio): चालू संपत्तियां / चालू दायित्व = 4,00,000 / 2,00,000 = 2:1

2. त्वरित संपत्तियां (Quick Assets): चालू संपत्तियां – रहतिया (Stock) = 4,00,000 – 50,000 = 3,50,000 रुपये।

3. त्वरित अनुपात (Quick Ratio): त्वरित संपत्तियां / चालू दायित्व = 3,50,000 / 2,00,000 = 1.75:1

प्रश्न 14. लेखांकन अनुपातों (Accounting Ratios) के तीन मुख्य वर्गीकरणों को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: अनुपातों को उनके उद्देश्यों के आधार पर मुख्य रूप से इन वर्गों में बांटा जाता है:

1. तरलता अनुपात (Liquidity Ratios): ये फर्म की अल्पकालीन ऋण भुगतान क्षमता को मापते हैं (जैसे चालू अनुपात)।

2. शोधन क्षमता अनुपात (Solvency Ratios): ये फर्म की दीर्घकालीन ऋणों को ब्याज सहित चुकाने की क्षमता देखते हैं (जैसे ऋण-समता अनुपात)।

3. लाभप्रदता अनुपात (Profitability Ratios): ये व्यवसाय की बिक्री और पूंजी पर लाभ कमाने की दर को दर्शाते हैं (जैसे सकल लाभ अनुपात)।

प्रश्न 15. फर्म के विघटन पर ‘वसूली व्यय’ (Realisation Expenses) के तीन अलग-अलग लेखांकन व्यवहारों को समझाइए।
उत्तर: वसूली व्ययों का लेखांकन इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कौन वहन कर रहा है:

1. जब व्यय फर्म द्वारा वहन किए जाएं और फर्म द्वारा ही चुकाए जाएं: वसूली खाते को डेबिट और नकद/बैंक खाते को क्रेडिट करते हैं (Realisation A/c Dr. To Cash/Bank A/c)।

2. जब व्यय किसी साझेदार द्वारा व्यक्तिगत रूप से चुकाए जाएं: फर्म की पुस्तकों में इसकी कोई प्रविष्टि नहीं होती।

3. जब व्यय फर्म के थे लेकिन किसी साझेदार ने चुकाए: वसूली खाते को डेबिट और उस साझेदार के पूंजी खाते को क्रेडिट करते हैं (Realisation A/c Dr. To Partner’s Capital A/c)।

भाग द: 4 अंक वाले दीर्घ उत्तरीय व संख्यात्मक प्रश्न (कुल: 10 प्रश्न)

प्रश्न 1. [संख्यात्मक प्रश्न – साझेदारी] A और B एक फर्म में 3:2 के अनुपात में साझेदार हैं। वे C को लाभ में 1/5 हिस्से के लिए नया साझेदार बनाते हैं। C अपने हिस्से के लिए 50,000 रुपये पूंजी और 20,000 रुपये ख्याति की प्रीमियम नकद लाता है। फर्म की पुस्तकों में आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ कीजिए और नया लाभ-हानि अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल:

1. नए लाभ अनुपात की गणना:

माना कुल लाभ = 1। C का हिस्सा = 1/5। शेष लाभ = 1 – 1/5 = 4/5।

A का नया हिस्सा = 4/5 × 3/5 = 12/25

B का नया हिस्सा = 4/5 × 2/5 = 8/25

C का हिस्सा = 1/5 (या 5/25)। नया अनुपात = 12:8:5। त्याग अनुपात पुराना अनुपात ही होगा (3:2)।

2. जर्नल प्रविष्टियाँ (Journal Entries):

a) Cash/Bank A/c — Dr. 70,000

    To C’s Capital A/c 50,000

    To Premium for Goodwill A/c 20,000

(C द्वारा पूंजी और ख्याति की राशि नकद लाने पर)

b) Premium for Goodwill A/c — Dr. 20,000

    To A’s Capital A/c 12,000 [20,000 × 3/5]

    To B’s Capital A/c 8,000 [20,000 × 2/5]

(ख्याति की प्रीमियम राशि को पुराने साझेदारों के त्याग अनुपात 3:2 में बांटने पर)

प्रश्न 2. साझेदारी फर्म के विघटन (Dissolution) की विभिन्न विधियों/तरीकों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 के अनुसार, फर्म का विघटन निम्नलिखित तरीकों से हो सकता है:

1. आपसी समझौते द्वारा (By Agreement): यदि सभी साझेदार फर्म को बंद करने के लिए सहमत हो जाएं, तो व्यवसाय को आपसी सहमति से किसी भी समय समाप्त किया जा सकता है (धारा 40)।

2. अनिवार्य विघटन (Compulsory Dissolution): यदि कोई ऐसा बदलाव आए जिससे फर्म का व्यवसाय पूरी तरह गैर-कानूनी (Illegal) हो जाए, या एक साझेदार को छोड़कर सभी साझेदार दिवालिया (Insolvent) हो जाएं (धारा 41)।

3. विशेष घटनाओं के घटने पर (On Happening of Events): यदि फर्म किसी निश्चित उद्देश्य या निश्चित समय अवधि के लिए बनाई गई थी और वह उद्देश्य या समय पूरा हो जाए, या किसी साझेदार की मृत्यु हो जाए (धारा 42)।

4. सूचना द्वारा विघटन (By Notice): यदि साझेदारी ऐच्छिक (Partnership at Will) है, तो कोई भी साझेदार अन्य सभी साझेदारों को लिखित नोटिस देकर फर्म को समाप्त करने की इच्छा व्यक्त कर सकता है (धारा 43)।

5. न्यायालय द्वारा विघटन (By Court): यदि कोई साझेदार मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाए, अपने कर्तव्यों का पालन करने में जानबूझकर असमर्थ रहे, या व्यवसाय में लगातार भारी घाटा हो रहा हो, तो न्यायालय के आदेश द्वारा फर्म बंद की जा सकती है (धारा 44)।

प्रश्न 3. [संख्यात्मक प्रश्न – अंशों का निर्गमन] एक्स लिमिटेड ने 10 रुपये वाले 10,000 समता अंश 2 रुपये प्रति अंश प्रीमियम पर जनता को जारी किए। राशियाँ इस प्रकार देय थीं: आवेदन पर 3 रुपये, आबंटन पर 5 रुपये (प्रीमियम सहित), और प्रथम व अंतिम याचना पर 4 रुपये। सभी अंशों के लिए आवेदन प्राप्त हुए और राशियाँ समय पर मिल गईं। कंपनी की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ कीजिए।
हल: एक्स लिमिटेड की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ:

1. आवेदन राशि प्राप्त होने पर:

Bank A/c — Dr. 30,000 [10,000 × 3]

    To Equity Share Application A/c 30,000

2. आवेदन राशि पूंजी खाते में भेजने पर:

Equity Share Application A/c — Dr. 30,000

    To Equity Share Capital A/c 30,000

3. आबंटन राशि प्रीमियम सहित देय (Due) होने पर:

Equity Share Allotment A/c — Dr. 50,000 [10,000 × 5]

    To Equity Share Capital A/c 30,000 [10,000 × 3]

    To Securities Premium A/c 20,000 [10,000 × 2]

4. आबंटन राशि नकद प्राप्त होने पर:

Bank A/c — Dr. 50,000

    To Equity Share Allotment A/c 50,000

5. याचना राशि देय होने पर:

Equity Share First & Final Call A/c — Dr. 40,000 [10,000 × 4]

    To Equity Share Capital A/c 40,000

6. याचना राशि प्राप्त होने पर:

Bank A/c — Dr. 40,000

    To Equity Share First & Final Call A/c 40,000

प्रश्न 4. अंशों के हरण (जब्ती) और अंशों के पुनर्निर्गमन (Re-issue of Shares) की प्रक्रिया को सविस्तार समझाइए। पूंजी संचय (Capital Reserve) की गणना कैसे की जाती है?
उत्तर:1. अंशों का हरण (Forfeiture): जब कोई अंशधारी मांग पत्र भेजने के बाद भी बकाया याचना राशि नहीं चुकाता, तो कंपनी अधिनियम की नियमावली के अनुसार न्यूनतम 14 दिनों का लिखित नोटिस देती है। यदि फिर भी भुगतान नहीं होता, तो संचालक मंडल अंशों को जब्त कर लेता है। इससे अंशधारी का नाम रजिस्टर से हट जाता है और उसकी अब तक जमा राशि कंपनी जब्त कर लेती है।

2. अंशों का पुनर्निर्गमन (Re-issue): जब्त किए गए अंश कंपनी की संपत्ति बन जाते हैं। कंपनी इन अंशों को किसी अन्य व्यक्ति को सम्मूल्य, प्रीमियम या बट्टे (Discount) पर दोबारा बेच सकती है। बट्टे की अधिकतम राशि जब्त की गई राशि से अधिक नहीं हो सकती।

3. पूंजी संचय (Capital Reserve) की गणना: पुनर्निर्गमन के बाद, जब्त अंश खाते (Share Forfeiture A/c) में जो राशि बच जाती है, वह कंपनी का पूंजीगत लाभ (Capital Gain) होती है। इसे ‘Capital Reserve Account’ में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

सूत्र: पूंजी संचय = पुनर्निर्गमित अंशों पर जब्त की गई कुल राशि – पुनर्निर्गमन पर दिया गया बट्टा (Discount)।

प्रश्न 5. ऋणपत्रों के वर्गीकरण (Types of Debentures) के विभिन्न आधारों की सविस्तार व्याख्या कीजिए।
उत्तर: ऋणपत्रों को निम्नलिखित प्रमुख आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है:

1. सुरक्षा के आधार पर:

    a) सुरक्षित या बंधक ऋणपत्र: जिनकी सुरक्षा के लिए कंपनी की संपत्तियां गिरवी होती हैं।

    b) असुरक्षित या नग्न ऋणपत्र: जिनके लिए कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखी जाती।

2. अभिलेख/हस्तांतरण के आधार पर:

    a) पंजीकृत ऋणपत्र (Registered): जिनका नाम-पता कंपनी के रजिस्टर में दर्ज होता है, इनका हस्तांतरण विलेख द्वारा होता है।

    b) वाहक ऋणपत्र (Bearer): जो केवल सुपुर्दगी मात्र से हस्तांतरित हो जाते हैं, जिसका ब्याज कूपन दिखाकर कोई भी ले सकता है।

3. शोधन (भुगतान) के आधार पर:

    a) शोधनीय ऋणपत्र (Redeemable): जिनका भुगतान एक निश्चित अवधि के बाद कंपनी के जीवनकाल में कर दिया जाता है।

    b) अशोधनीय ऋणपत्र (Irredeemable): जिनका भुगतान केवल कंपनी के समापन पर ही किया जाता है।

4. परिवर्तनशीलता के आधार पर:

    a) परिवर्तनीय (Convertible): जिन्हें निश्चित समय बाद अंशों में बदला जा सकता है।

    b) अपरिवर्तनीय (Non-convertible): जिन्हें अंशों में बदलने का कोई अधिकार नहीं होता।

प्रश्न 6. [संख्यात्मक प्रश्न – ऋणपत्रों का निर्गमन] वाई लिमिटेड ने 100 रुपये वाले 5,000, 9% ऋणपत्र 5% बट्टे (Discount) पर निर्गमित किए, जिनका शोधन (Redemption) 5 वर्ष बाद 10% प्रीमियम पर किया जाना है। निर्गमन के समय की जाने वाली आवश्यक जर्नल प्रविष्टियाँ कीजिए।
हल: वाई लिमिटेड की पुस्तकों में जर्नल प्रविष्टियाँ:

1. आवेदन राशि प्राप्त होने पर (100 का 5% बट्टा यानी 95 रुपये प्रति ऋणपत्र):

Bank A/c — Dr. 4,75,000 [5,000 × 95]

    To Debenture Application & Allotment A/c 4,75,000

2. ऋणपत्र आबंटन और शोधन के प्रीमियम का समायोजन करने पर:

ऋणपत्रों का शोधन 10% प्रीमियम पर होना है, इसलिए कुल हानि = निर्गमन का बट्टा (25,000) + शोधन का प्रीमियम (50,000) = 75,000 रुपये।

Debenture Application & Allotment A/c — Dr. 4,75,000

Loss on Issue of Debentures A/c — Dr. 75,000

    To 9% Debentures A/c 5,000,000 [5,000 × 100]

    To Premium on Redemption of Debentures A/c 50,000 [5,000 × 10]

(ऋणपत्रों को बट्टे पर निर्गमित करने और प्रीमियम पर शोधन की शर्तों को रिकॉर्ड करने पर)।

प्रश्न 7. कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची III के अनुसार एक कंपनी के चिट्ठे (Balance Sheet) के ‘इक्विटी और दायित्व’ (Equity and Liabilities) पक्ष के मुख्य शीर्षकों और उप-शीर्षकों का विस्तृत प्रारूप बनाइए।
उत्तर: चिट्ठे के इक्विटी और दायित्व पक्ष का मुख्य ढांचा निम्नलिखित है:

1. शेयरधारक कोष (Shareholders’ Funds):

    a) अंश पूंजी (Share Capital)

    b) आरक्षित और अधिशेष (Reserves and Surplus)

    c) अंश वारंट के विरुद्ध प्राप्त राशि

2. गैर-चालू दायित्व (Non-Current Liabilities):

    a) दीर्घकालीन उधार (Long-term Borrowings जैसे ऋणपत्र, बैंक लोन)

    b) अन्य दीर्घकालीन दायित्व

    c) दीर्घकालीन प्रावधान (Long-term Provisions)

3. चालू दायित्व (Current Liabilities):

    a) अल्पकालीन उधार (Short-term Borrowings)

    b) व्यापारिक देयताएं (Trade Payables जैसे लेनदार और देय बिल)

    c) अन्य चालू दायित्व

    d) अल्पकालीन प्रावधान (Short-term Provisions)

प्रश्न 8. वित्तीय विवरणों के विश्लेषण (Analysis of Financial Statements) से क्या तात्पर्य है? इसके किन्हीं तीन प्रमुख उद्देश्यों और तीन सीमाओं की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
उत्तर:अर्थ: वित्तीय विवरणों में दिए गए जटिल और बड़े आंकड़ों को सरल समूहों में पुनर्व्यवस्थित करना और उनके आपसी संबंधों की जांच करना ही वित्तीय विवरण विश्लेषण कहलाता है।

प्रमुख उद्देश्य:

1. लाभप्रदता जानना: यह पता लगाना कि कंपनी अपनी बिक्री और पूंजी की तुलना में कितना लाभ कमा रही है।

2. शोधन क्षमता का मापन: कंपनी अपने अल्पकालीन और दीर्घकालीन ऋणों को समय पर चुकाने की स्थिति में है या नहीं, यह देखना।

3. प्रवृत्तियों का अनुमान: पिछले कुछ वर्षों के प्रदर्शन की तुलना करके कंपनी के भविष्य के विकास की दिशा का अनुमान लगाना।

मुख्य सीमाएं:

1. यह केवल मौद्रिक आंकड़ों को देखता है, कर्मचारियों की ईमानदारी या बाजार की साख जैसे गुणात्मक तत्वों को छोड़ देता है।

2. यह भूतकाल के ऐतिहासिक आंकड़ों पर आधारित होता है, वर्तमान में तेजी से बदलते बाजार का इसमें तुरंत प्रभाव नहीं दिखता।

3. यदि कंपनी ने अपनी लेखांकन नीतियों (जैसे मूल्यह्रास की विधि) में बदलाव किया है, तो वित्तीय विश्लेषण भ्रामक परिणाम दे सकता है।

प्रश्न 9. लाभप्रदता अनुपातों (Profitability Ratios) से क्या तात्पर्य है? सकल लाभ अनुपात, शुद्ध लाभ अनुपात और परिचालन अनुपात के अर्थ और सूत्रों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: व्यावसायिक फर्म की लाभ कमाने की क्षमता और दक्षता को मापने वाले अनुपात लाभप्रदता अनुपात कहलाते हैं। ये प्रायः प्रतिशत (%) में व्यक्त किए जाते हैं।

1. सकल लाभ अनुपात (Gross Profit Ratio): यह अनुपात परिचालन से राजस्व (शुद्ध बिक्री) और सकल लाभ के संबंध को दर्शाता है।

सूत्र: (Gross Profit / Revenue from Operations) × 100

2. शुद्ध लाभ अनुपात (Net Profit Ratio): यह अनुपात कर और ब्याज घटाने के बाद बचे शुद्ध लाभ और शुद्ध बिक्री के संबंध को मापता है।

सूत्र: (Net Profit After Tax / Revenue from Operations) × 100

3. परिचालन अनुपात (Operating Ratio): यह व्यवसाय को चलाने की कुल परिचालन लागत (बेचे गए माल की लागत + परिचालन व्यय) और शुद्ध बिक्री का संबंध है। यह अनुपात जितना कम होगा, व्यवसाय के लिए उतना ही अच्छा माना जाता है।

सूत्र: (Operating Cost / Revenue from Operations) × 100

प्रश्न 10. [संख्यात्मक प्रश्न – अनुपात विश्लेषण] निम्नलिखित जानकारियों के आधार पर (a) सकल लाभ अनुपात, (b) स्टॉक आवर्त अनुपात (Stock Turnover Ratio), और (c) ऋण-समता अनुपात की गणना कीजिए:

– परिचालन से राजस्व (Net Sales) = 6,00,000 रुपये

– बेचे गए माल की लागत (Cost of Goods Sold) = 4,50,000 रुपये

– प्रारंभिक स्टॉक = 40,000 रुपये; अंतिम स्टॉक = 60,000 रुपये

– दीर्घकालीन ऋण (Long-term Debts) = 2,00,000 रुपये

– शेयरधारक कोष (Shareholders’ Funds) = 4,00,000 रुपये
हल:

(a) सकल लाभ अनुपात (Gross Profit Ratio):

सकल लाभ (Gross Profit) = बिक्री – बेचे गए माल की लागत = 6,00,000 – 4,50,000 = 1,50,000 रुपये।

अनुपात = (1,50,000 / 6,00,000) × 100 = 25%

(b) स्टॉक आवर्त अनुपात (Stock Turnover Ratio):

औसत स्टॉक (Average Stock) = (प्रारंभिक स्टॉक + अंतिम स्टॉक) / 2 = (40,000 + 60,000) / 2 = 50,000 रुपये।

अनुपात = बेचे गए माल की लागत / औसत स्टॉक = 4,50,000 / 50,000 = 9 गुणा (9 Times)

(c) ऋण-समता अनुपात (Debt-Equity Ratio):

सूत्र = दीर्घकालीन ऋण / शेयरधारक कोष = 2,00,000 / 4,00,000 = 0.5:1 या 1:2

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