अर्द्धवार्षिक/ वार्षिक परीक्षा 2026-27 कक्षा 12 राजनीतिशास्त्र (Political Science) नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (MP Board)

MP BOARD की आगामी अर्द्धवार्षिक/ वार्षिक परीक्षा 2026-27 के लिए कक्षा 12 राजनीतिशास्त्र (Political Science) नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2026-27 (MP Board) दिए गए हैं हिंदी के अतिरिक्त इंग्लिश , संस्कृत , भौतिक , रसायन (विज्ञान/ गणित संकाय ) कला संकाय ( इतिहास , राजनीति आदि ) कामर्स संकाय ( एकाउंटेंसी , व्यवसाय अध्ययन ) कृषि संकाय के नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर इस वेबसाईट पर दिए गए है . बोर्ड परीक्षा तक वेबसाईट को दिन में कम से कम एक बार अवश्य चेक करें . नियमित अपडेट होगी .

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अर्द्धवार्षिक/ वार्षिक परीक्षा 2026-27 कक्षा 12 राजनीतिशास्त्र (Political Science) / महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (MP Board)

भाग अ: 1 अंक वाले प्रश्न (कुल: 50 प्रश्न)

1. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1. सोवियत संघ का विघटन किस वर्ष हुआ था?
  • 1989
  • 1990
  • 1991
  • 1992
उत्तर: 1991
प्रश्न 2. यूरोपीय संघ (EU) की मुद्रा का क्या नाम है?
  • डॉलर
  • यूरो
  • पाउंड
  • रूबल
उत्तर: यूरो
प्रश्न 3. दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की स्थापना कब हुई थी?
  • 1980
  • 1985
  • 1990
  • 1995
उत्तर: 1985
प्रश्न 4. संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के वर्तमान महासचिव कौन हैं?
  • बान की मून
  • कोफी अन्नान
  • एंतोनियो गुतारेस
  • बुतरस घाली
उत्तर: एंतोनियो गुतारेस
प्रश्न 5. आजादी के समय भारत के सामने राष्ट्र-निर्माण की कितनी मुख्य चुनौतियाँ थीं?
  • दो
  • तीन
  • चार
  • पाँच
उत्तर: तीन

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति (Fill in the Blanks)

प्रश्न 6. बर्लिन की दीवार को वर्ष ____________ में गिराया गया था।
उत्तर: 1989
प्रश्न 7. आसियान (ASEAN) का मुख्यालय ____________ में स्थित है।
उत्तर: जकार्ता (इण्डोनेशिया)
प्रश्न 8. नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी ____________ को की गई थी।
उत्तर: 2015
प्रश्न 9. भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण वर्ष ____________ में पोखरण में किया था।
उत्तर: 1974
प्रश्न 10. पर्यावरण संरक्षण के लिए पहला पृथ्वी सम्मेलन वर्ष 1992 में ____________ शहर में हुआ था।
उत्तर: रियो डी जेनेरियो (ब्राजील)

3. सत्य या असत्य (True or False)

प्रश्न 11. सोवियत संघ द्वारा अपनाई गई आर्थिक-राजनैतिक व्यवस्था को शॉक थेरेपी कहा गया। (सत्य/असत्य)
उत्तर: सत्य
प्रश्न 12. चीन ने 1978 में ‘खुले द्वार की नीति’ (Open Door Policy) अपनाई थी। (सत्य/असत्य)
उत्तर: सत्य
प्रश्न 13. भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता 1965 में हुआ था। (सत्य/असत्य)
उत्तर: असत्य (शिमला समझौता 1972 में हुआ था)
प्रश्न 14. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 10 स्थायी सदस्य होते हैं। (सत्य/असत्य)
उत्तर: असत्य (सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं)
प्रश्न 15. क्योटो प्रोटोकॉल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने से संबंधित है। (सत्य/असत्य)
उत्तर: सत्य

4. सही जोड़ी बनाइए (Match the Following)

प्रश्न 16 से 25. कॉलम अ का कॉलम ब के सही मिलान के सामने उत्तर दिया गया है:

कॉलम अकॉलम ब (सही मिलान)
16. लौह पुरुषसरदार वल्लभभाई पटेल
17. पंचशील समझौताभारत और चीन (1954)
18. जय जवान, जय किसानलाल बहादुर शास्त्री
19. योजना आयोग की स्थापनामार्च 1950
20. प्रथम आम चुनाव1951-1952
21. भारत का 29वां राज्य (पूर्व में)तेलंगाना (2014)
22. ‘गरीबी हटाओ’ का नाराइन्दिरा गांधी
23. मध्यरात्रि का भाषण (Tryst with Destiny)जवाहरलाल नेहरू
24. आपातकाल की घोषणा25 जून 1975
25. गैर-कांग्रेसवाद के प्रणेताराममनोहर लोहिया

5. एक शब्द / एक वाक्य में उत्तर (Q26 to Q50)

प्रश्न 26. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का पहला शिखर सम्मेलन कहाँ हुआ था?
उत्तर: बेलग्रेड में (1961)
प्रश्न 27. द्वि-राष्ट्र सिद्धांत (Two-Nation Theory) किसने दिया था?
उत्तर: मुस्लिम लीग (मोहम्मद अली जिन्ना) ने।
प्रश्न 28. भाग्यवधू से चिर-प्रतीक्षित भेंट (Tryst with Destiny) भाषण किसने दिया था?
उत्तर: पंडित जवाहरलाल नेहरू ने।
प्रश्न 29. आजादी के बाद भारत के पहले चुनाव आयुक्त कौन थे?
उत्तर: सुकुमार सेन।
प्रश्न 30. मिल्क मैन ऑफ इंडिया के नाम से कौन प्रसिद्ध हैं?
उत्तर: वर्गीज कुरियन।
प्रश्न 31. राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
उत्तर: 1953 (इसने अपनी रिपोर्ट 1955 में सौंपी और अधिनियम 1956 में बना)।
प्रश्न 32. भाषाई आधार पर गठित होने वाला भारत का पहला राज्य कौन सा था?
उत्तर: आंध्र प्रदेश।
प्रश्न 33. नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष कौन होते हैं?
उत्तर: भारत के प्रधानमंत्री।
प्रश्न 34. ‘सिंडिकेट’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: कांग्रेस के भीतर ताकतवर और प्रभावशाली पुराने नेताओं के अनौपचारिक समूह को सिंडिकेट कहा जाता था।
प्रश्न 35. भारत-चीन युद्ध किस वर्ष हुआ था?
उत्तर: 1962 में।

प्रश्न 36. ताशकंद समझौता कब और किनके बीच हुआ था?
उत्तर: 1966 में लाल बहादुर शास्त्री और अय्यूब खान (पाकिस्तान) के बीच।

प्रश्न 37. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत 1975 में आपातकाल लगाया गया था?
उत्तर: अनुच्छेद 352 (आंतरिक अशांति के आधार पर)।

प्रश्न 38. ‘आया राम, गया राम’ का जुमला किससे संबंधित है?
उत्तर: राजनीति में दल-बदल (Defection) की प्रवृत्ति से।

प्रश्न 39. शाह आयोग का गठन क्यों किया गया था?
उत्तर: 1975 के आपातकाल के दौरान की गई ज्यादतियों और जांच के लिए।

प्रश्न 40. 1977 के आम चुनावों में किस दल को बहुमत मिला था?
उत्तर: जनता पार्टी को।

प्रश्न 41. सुरक्षा का बुनियादी अर्थ क्या है?
उत्तर: खतरे से आज़ादी या मुक्ति।

प्रश्न 42. जैविक हथियार संधि (BWC) किस वर्ष हुई थी?
उत्तर: 1972 में।

प्रश्न 43. ‘ग्लोबल वार्मिंग’ का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: ग्रीनहाउस गैसों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड) के उत्सर्जन में वृद्धि।

प्रश्न 44. साझी संपदा (Common Property Resources) का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका या समुद्री सतह।

प्रश्न 45. भारत की विदेश नीति के मूल निर्माता कौन माने जाते हैं?
उत्तर: पंडित जवाहरलाल नेहरू।

प्रश्न 46. ‘प्रीवी पर्स’ (Privy Purse) क्या था?
उत्तर: देसी रियासतों के विलय के बदले उनके राजाओं को दी जाने वाली विशेष सरकारी धनराशि और भत्ते।

प्रश्न 47. संपूर्ण क्रांति (Total Revolution) का आह्वान किसने किया था?
उत्तर: जयप्रकाश नारायण ने।

प्रश्न 48. लिट्टे (LTTE) का संबंध किस देश के जातीय संघर्ष से था?
उत्तर: श्रीलंका।

प्रश्न 49. यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: 1957 में (रोम की संधि द्वारा)।

प्रश्न 50. भारत में योजना अवकाश (Plan Holiday) का काल कौन सा था?
उत्तर: 1966 से 1969 तक (तीसरी पंचवर्षीय योजना के बाद)।

भाग ब: 2 अंक वाले प्रश्न (कुल: 30 प्रश्न)

प्रश्न 1. सोवियत संघ के विघटन के दो मुख्य कारण लिखिए।
उत्तर: 1) सोवियत संघ की राजनैतिक-प्रशासनिक व्यवस्था का पूरी तरह कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण में नौकरशाही का शिकार होना। 2) संसाधनों का अत्यधिक हिस्सा हथियारों की होड़ में लगाना, जिससे आम नागरिकों की आर्थिक जरूरतें पूरी नहीं हो सकीं।

प्रश्न 2. शॉक थेरेपी (Shock Therapy) का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका शाब्दिक अर्थ ‘आघात पहुँचाकर उपचार करना’ है। साम्यवाद के पतन के बाद सोवियत संघ के देशों को विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित पूंजीवाद की ओर संक्रमण के मॉडल को शॉक थेरेपी कहा गया।

प्रश्न 3. ‘द्विध्रुवीयता’ (Bipolarity) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब विश्व दो महाशक्तियों (संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ) के नेतृत्व वाले दो विरोधी गुटों में विभाजित हो गया, तो इस व्यवस्था को द्विध्रुवीय विश्व कहा गया।

प्रश्न 4. यूरोपीय संघ (EU) के गठन के दो मुख्य उद्देश्य क्या थे?
उत्तर: 1) यूरोप के देशों के बीच एक साझा विदेश, सुरक्षा नीति और न्याय प्रणाली विकसित करना। 2) एक समान मुद्रा (यूरो) का निर्माण करना तथा आर्थिक व्यापारिक बाधाओं को पूरी तरह समाप्त करना।

प्रश्न 5. मार्शल योजना (Marshal Plan) क्या थी?
उत्तर: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका द्वारा पश्चिमी यूरोप के देशों के आर्थिक पुनर्निर्माण और उन्हें साम्यवाद के प्रभाव से बचाने के लिए दी गई भारी वित्तीय सहायता को मार्शल योजना कहते हैं।

प्रश्न 6. आसियान (ASEAN) के ‘आसियान शैली’ (ASEAN Way) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: आसियान सदस्य देशों के बीच अनौपचारिक, टकराव रहित, शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक बातचीत के माध्यम से राष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के तरीके को आसियान शैली कहा जाता है।

प्रश्न 7. दक्षिण एशिया के दो देशों के नाम लिखिए जहाँ सफल लोकतंत्र विद्यमान है।
उत्तर: भारत और श्रीलंका (दोनों ही देशों ने स्वतंत्रता के बाद से अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था को सफलतापूर्वक बनाए रखा है)।

प्रश्न 8. वीटो पावर (निषेधाधिकार) क्या है? यह किन देशों को प्राप्त है?
उत्तर: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के किसी भी स्थायी सदस्य की वह शक्ति जिसके द्वारा वह किसी भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को अकेले खारिज कर सकता है। यह शक्ति अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन को प्राप्त है।

प्रश्न 9. सुरक्षा परिषद के दो स्थायी कार्यों को लिखिए।
उत्तर: 1) विश्व में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना। 2) किसी भी आक्रामक देश के खिलाफ राजनैतिक या सैन्य कार्रवाई करने का आदेश देना।

प्रश्न 10. राष्ट्र-निर्माण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: एक बहु-सांस्कृतिक और विविध समाज के लोगों को एक साझा राजनैतिक, आर्थिक और भावनात्मक सूत्र में बांधकर एक मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की प्रक्रिया को राष्ट्र-निर्माण कहते हैं।

प्रश्न 11. देसी रियासतों के विलय में सरदार पटेल की क्या भूमिका थी?
उत्तर: स्वतंत्रता के समय भारत की 562 से अधिक देसी रियासतों को अपनी राजनीतिक सूझबूझ, कूटनीति और दृढ़ता के माध्यम से भारत संघ में शामिल कराया, इसीलिए उन्हें भारत का बिस्मार्क कहा जाता है।

प्रश्न 12. एक दल के प्रभुत्व के दौर का क्या अर्थ है?
उत्तर: स्वतंत्रता के बाद भारत के शुरुआती तीन आम चुनावों (1952, 1957, 1962) में केंद्र और अधिकांश राज्यों में कांग्रेस पार्टी को मिलने वाले भारी बहुमत और एकतरफा राजनैतिक वर्चस्व को एक दल का प्रभुत्व कहा जाता है।

प्रश्न 13. कांग्रेस एक सामाजिक और विचारात्मक गठबंधन थी, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: स्वतंत्रता आंदोलन के समय कांग्रेस में जमींदार, किसान, मजदूर, दक्षिणपंथी, वामपंथी और विभिन्न जातियों व वर्गों के लोग एक साथ शामिल थे, जिससे यह पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करने वाला एक सामाजिक गठबंधन बन गई थी।

प्रश्न 14. बॉम्बे प्लान (Bombay Plan) क्या था?
उत्तर: 1944 में भारत के बड़े उद्योगपतियों के एक समूह ने देश के नियोजित आर्थिक विकास के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे बॉम्बे प्लान कहा जाता है। इसमें सरकार को औद्योगिक विकास में बड़ी भूमिका सौंपने की बात कही गई थी।

प्रश्न 15. नीति आयोग और योजना आयोग में दो मुख्य अंतर लिखिए।
उत्तर: 1) योजना आयोग राज्यों के लिए नीतियां ऊपर से थोपता था (Top-Down दृष्टिकोण), जबकि नीति आयोग राज्यों की सहभागिता पर बल देता है (Bottom-Up दृष्टिकोण)। 2) नीति आयोग को वित्तीय कोष आवंटित करने का अधिकार नहीं है, जबकि योजना आयोग मंत्रालयों को धन आवंटित करता था।

प्रश्न 16. पंचशील के दो सिद्धांत लिखिए।
उत्तर: 1) एक-दूसरे की प्रादेशिक अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करना। 2) एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में अहस्तक्षेप (Interference न करना)।

प्रश्न 17. ‘गैर-कांग्रेसवाद’ (Non-Congressism) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: राममनोहर लोहिया द्वारा दी गई यह एक राजनैतिक अवधारणा थी, जिसका उद्देश्य कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए सभी विरोधी दलों को एक मंच पर लाकर उनके वोटों के बिखराव को रोकना था।

प्रश्न 18. 1969 में कांग्रेस के विभाजन का तात्कालिक कारण क्या था?
उत्तर: 1969 के राष्ट्रपति चुनाव में सिंडिकेट के आधिकारिक उम्मीदवार एन. संजीव रेड्डी के खिलाफ इंदिरा गांधी द्वारा स्वतंत्र उम्मीदवार वी.वी. गिरि का समर्थन करना और वी.वी. गिरि की जीत होना था।

प्रश्न 19. ‘सेंसॉरशिप’ (Censorship) क्या है? आपातकाल के संदर्भ में लिखिए।
उत्तर: सरकार की वह शक्ति जिसके तहत समाचार पत्रों, फिल्मों या मीडिया में किसी भी सामग्री को प्रकाशित करने से पहले सरकार की अनुमति अनिवार्य कर दी जाती है। 1975 के आपातकाल में अंग्रेजों की तरह कड़ा प्रेस सेंसरशिप लगाया गया था।

प्रश्न 20. नागरिक स्वतंत्रता संगठनों का उदय आपातकाल के बाद क्यों हुआ?
उत्तर: क्योंकि आपातकाल के दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे और बड़े पैमाने पर अवैध गिरफ्तारियां हुई थीं। भविष्य में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए पीयूसीएल (PUCL) जैसे नागरिक संगठनों का जन्म हुआ।

प्रश्न 21. ‘क्षेत्रीय आकांक्षाओं’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: किसी विशिष्ट क्षेत्र के लोगों द्वारा अपनी भाषाई, सांस्कृतिक या क्षेत्रीय पहचान के आधार पर अधिक स्वायत्तता, आर्थिक विकास या अलग राज्य की मांग करने की राजनैतिक भावना को क्षेत्रीय आकांक्षा कहते हैं।

प्रश्न 22. पारंपरिक सुरक्षा और अपारंपरिक सुरक्षा में क्या अंतर है?
उत्तर: पारंपरिक सुरक्षा का संबंध मुख्य रूप से सैन्य खतरों और राज्यों की सीमाओं की रक्षा से होता है, जबकि अपारंपरिक सुरक्षा में वैश्विक खतरे जैसे महामारी, भुखमरी, आतंकवाद और ग्लोबल वार्मिंग शामिल हैं जो पूरी मानवता को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 23. ‘अपरोध’ (Deterrence) का क्या अर्थ है?
उत्तर: युद्ध की स्थिति को रोकने के लिए अपनी सैन्य शक्ति को इतना मजबूत कर लेना कि दुश्मन देश नुकसान के डर से हमला करने का साहस ही न कर सके, इसे अपरोध की नीति कहते हैं।

प्रश्न 24. साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ (CBDR) का क्या अर्थ है?
उत्तर: पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी पूरे विश्व की साझी है, लेकिन विकसित देशों ने पर्यावरण को अधिक नुकसान पहुँचाया है, इसलिए प्रदूषण कम करने और वित्तीय सहायता देने की मुख्य जिम्मेदारी उनकी (अलग) होनी चाहिए।

प्रश्न 25. भारत ने क्योटो प्रोटोकॉल पर किस वर्ष हस्ताक्षर किए थे?
उत्तर: भारत ने अगस्त 2002 में क्योटो प्रोटोकॉल (1997) पर हस्ताक्षर और इसका समर्थन किया था।

प्रश्न 26. स्वतंत्रता के समय जम्मू-कश्मीर के शासक कौन थे और उनका क्या इरादा था?
उत्तर: राजा हरि सिंह। वे कश्मीर को भारत या पाकिस्तान में मिलाने के बजाय एक स्वतंत्र राज्य के रूप में बनाए रखना चाहते थे।

प्रश्न 27. आनंदपुर साहिब प्रस्ताव (1973) की दो मुख्य माँगें क्या थीं?
उत्तर: 1) पंजाब को अधिक क्षेत्रीय स्वायत्तता (Autonomy) दी जाए। 2) केंद्र का नियंत्रण केवल विदेश, रक्षा और संचार तक सीमित रहे।

प्रश्न 28. ‘आपरेशन ब्लू स्टार’ क्या था? यह कब चलाया गया था?
उत्तर: जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में छिपे उग्रवादियों को बाहर निकालने और मंदिर को उनके नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए भारतीय सेना द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई को आपरेशन ब्लू स्टार कहते हैं।

प्रश्न 29. पूर्वोत्तर के ‘सात बहनें’ (Seven Sisters) राज्यों में कौन-कौन से राज्य शामिल हैं?
उत्तर: असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा।

प्रश्न 30. दलबदल क्या है?
उत्तर: जब कोई जनप्रतिनिधि किसी खास दल के चुनाव चिह्न पर जीतकर आता है और स्वार्थ या किसी अन्य कारण से उस दल को छोड़कर दूसरे दल में शामिल हो जाता है, तो इसे दलबदल कहते हैं।

भाग स: 3 अंक वाले प्रश्न (कुल: 20 प्रश्न)

प्रश्न 1. सोवियत प्रणाली (Soviet System) की तीन प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: सोवियत प्रणाली की तीन विशेषताएं निम्नलिखित थीं:

1. राज्य का पूर्ण नियंत्रण: अर्थव्यवस्था पर पूरी तरह से राज्य (정부) का नियंत्रण था और उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व की अनुमति नहीं थी।

2. कम्युनिस्ट पार्टी का वर्चस्व: सोवियत राजनैतिक व्यवस्था में केवल एक ही पार्टी ‘कम्युनिस्ट पार्टी’ का शासन था और किसी भी विरोधी दल या विपक्ष को कोई स्थान नहीं था।

3. उन्नत लोक कल्याण: सरकार अपने नागरिकों को न्यूनतम जीवन स्तर की गारंटी देती थी, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, बच्चों की देखरेख और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं बहुत सस्ती दरों पर राज्य द्वारा प्रदान की जाती थीं।

प्रश्न 2. शॉक थेरेपी के तीन प्रमुख आर्थिक परिणामों (दुष्प्रभावों) की समीक्षा कीजिए।
उत्तर: शॉक थेरेपी के कारण सोवियत देशों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा:

1. इतिहास की सबसे बड़ी गैराज सेल: सोवियत संघ के लगभग 90% औद्योगिक कारखानों को बहुत ही कम दामों पर निजी हाथों या कंपनियों को बेच दिया गया, जिससे पूरा ढांचा नष्ट हो गया।

2. रूसी मुद्रा ‘रूबल’ में गिरावट: शॉक थेरेपी के कारण मुद्रास्फीति इतनी अधिक बढ़ी कि रूसी मुद्रा रूबल के मूल्य में भारी गिरावट आई और लोगों की जीवनभर की बचत समाप्त हो गई।

3. खाद्यान्न संकट और माफिया वर्ग का उदय: सामूहिक खेती की प्रणाली समाप्त होने से खाद्यान्न सुरक्षा खत्म हो गई और रूस को विदेशों से भोजन आयात करना पड़ा। साथ ही आर्थिक गतिविधियों पर आपराधिक माफिया वर्ग का नियंत्रण हो गया।

प्रश्न 3. चीन द्वारा 1970 के दशक में अपनाए गए आर्थिक सुधारों के तीन चरणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: चीन ने सोवियत संघ की तरह अचानक बदलाव करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अपनी अर्थव्यवस्था को खोला:

1. अमरीका से संबंध और आधुनिकीकरण (1972-73): चीन ने 1972 में अमेरिका से संबंध बनाकर अपना राजनैतिक एकांतवास समाप्त किया और चाऊ एन लाई ने कृषि, उद्योग, सेना तथा विज्ञान के क्षेत्र में चार आधुनिकीकरण के प्रस्ताव रखे।

2. कृषि का निजीकरण (1982): चीन ने सबसे पहले 1982 में कृषि का निजीकरण किया, जिससे किसानों की आय में भारी वृद्धि हुई और ग्रामीण उद्योग तेजी से फले-फूले।

3. उद्योगों का निजीकरण और SEZ की स्थापना (1998): कृषि के बाद चीन ने उद्योगों का निजीकरण किया और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’ (Special Economic Zones) की स्थापना की।

प्रश्न 4. दक्षिण एशिया के देशों में आपस में अविश्वास के तीन मुख्य कारण क्या हैं?
उत्तर: दक्षिण एशिया (सार्क देशों) में तनाव के तीन मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. भारत-पाक सीमा और कश्मीर विवाद: स्वतंत्रता के समय से ही कश्मीर मुद्दा और सीमा पार आतंकवाद भारत और पाकिस्तान के बीच स्थायी अविश्वास का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।

2. छोटे देशों का डर: भौगोलिक और आर्थिक रूप से भारत इस क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है, जिसके कारण नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे छोटे देशों को हमेशा यह डर रहता है कि भारत उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है।

3. संसाधनों और नदी जल का बंटवारा: भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी जल बंटवारा और भारत-नेपाल के बीच व्यापार व सीमा विवाद को लेकर समय-समय पर राजनैतिक मतभेद उभरते रहते हैं।

प्रश्न 5. संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के सुधारों के अंतर्गत सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत के पास कौन से तीन मजबूत तर्क हैं?
उत्तर: भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का सबसे मजबूत दावेदार है, जिसके पक्ष में तीन मुख्य तर्क हैं:

1. विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और जनसंख्या: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और आबादी के मामले में अग्रणी है, जो वैश्विक मंच पर एक बहुत बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।

2. तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था: भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति है और वैश्विक व्यापार व विकास में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।

3. UN शांति सेना में निरंतर योगदान: भारत संयुक्त राष्ट्र संघ के सिद्धांतों का हमेशा सम्मान करता रहा है और यूएन के शांति अभियानों (Peacekeeping Missions) में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में से एक है।

प्रश्न 6. आजादी के तुरंत बाद भारत के सामने आई राष्ट्र-निर्माण की तीन मुख्य चुनौतियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर: 1947 में भारत के सामने मुख्य रूप से तीन चुनौतियाँ थीं:

1. एकता और अखंडता की चुनौती: भारत विविधताओं (विभिन्न भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों) से भरा देश था। ऐसे समाज को एक सूत्र में पिरोना और देसी रियासतों का भारत में विलय कराना सबसे बड़ी चुनौती थी ताकि देश का दोबारा विभाजन न हो।

2. लोकतंत्र स्थापित करने की चुनौती: संविधान के अनुसार देश में वास्तविक लोकतंत्र को जमीन पर उतारना, वयस्क मताधिकार के आधार पर बिना किसी गड़बड़ी के निष्पक्ष चुनाव कराना एक कठिन कार्य था क्योंकि अधिकांश आबादी अनपढ़ थी।

3. समान विकास की चुनौती: ऐसा आर्थिक मॉडल तैयार करना जिससे समाज के किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि गरीब, पिछड़े और वंचित समूहों सहित पूरे समाज का समान रूप से आर्थिक कल्याण हो सके।

प्रश्न 7. राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC) की स्थापना क्यों की गई थी? इसकी मुख्य सिफारिशें क्या थीं?
उत्तर: 1953 में भाषाई आधार पर आंध्र प्रदेश के गठन के बाद देश के अन्य हिस्सों से भी भाषा के आधार पर अलग राज्यों की मांग उठने लगी। इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने ‘राज्य पुनर्गठन आयोग’ का गठन किया।

मुख्य सिफारिशें: आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया कि भारत में राज्यों की सीमाओं का निर्धारण वहां बोली जाने वाली भाषाओं के आधार पर ही किया जाना चाहिए। इसी सिफारिश के आधार पर संसद ने 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम पास किया, जिसके तहत देश में 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।

प्रश्न 8. भारत में शुरुआती वर्षों में अपनाई गई नियोजित विकास की नीति के तहत ‘कृषि बनाम उद्योग’ के विवाद को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पहली दो पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान योजनाकारों के बीच यह गहरा विवाद था कि भारत जैसे पिछड़े देश में कृषि को प्राथमिकता दी जाए या भारी उद्योगों को:

1. कृषि के समर्थक: जे.सी. कुमारप्पा जैसे अर्थशास्त्रियों का मानना था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है, इसलिए पहली प्राथमिकता ग्रामीण विकास और कृषि को मिलनी चाहिए ताकि खाद्यान्न संकट दूर हो सके और गरीबी खत्म हो।

2. उद्योगों के समर्थक: पी.सी. महालनोबिस और नेहरू का मानना था कि बिना भारी उद्योगों (जैसे इस्पात, बिजली, मशीनें) के भारत कभी भी आत्मनिर्भर और आधुनिक राष्ट्र नहीं बन सकता। उद्योगों से ही गरीबी और बेरोजगारी का स्थायी समाधान संभव था।

प्रश्न 9. भारत की विदेश नीति के मुख्य निर्धारक तत्व के रूप में ‘गुटनिरपेक्षता’ (Non-Alignment) की नीति को समझाइए।
उत्तर: आजादी के समय पूरा विश्व अमेरिका और सोवियत संघ के दो विरोधी सैन्य गुटों (शीत युद्ध) में बंटा हुआ था। भारत ने किसी भी गुट में शामिल होने के बजाय एक स्वतंत्र विदेश नीति चुनी, जिसे गुटनिरपेक्षता कहा गया।

इसके तीन मुख्य उद्देश्य थे – भारत की नई संप्रभुता की रक्षा करना, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने स्वतंत्र फैसले लेना, और दोनों महाशक्तियों से समान दूरी बनाकर अपने आर्थिक विकास के लिए दोनों से तकनीकी व वित्तीय सहायता प्राप्त करना। यह नीति पलायन की नहीं, बल्कि विश्व शांति के लिए सक्रिय मध्यस्थता की नीति थी।

प्रश्न 10. 1960 के दशक को भारतीय राजनीति में ‘खतरनाक दशक’ (Dangerous Decade) क्यों कहा जाता है? तीन कारण दीजिए।
उत्तर: 1960 के दशक को निम्नलिखित तीन कारणों से सबसे कठिन और खतरनाक समय माना जाता है:

1. दो महान प्रधानमंत्रियों का निधन: इस दशक में भारत ने अपने दो बड़े नेताओं को खोया – 1964 में जवाहरलाल नेहरू और 1966 में लाल बहादुर शास्त्री, जिससे देश में राजनैतिक स्थिरता का संकट पैदा हुआ।

2. दो भयानक युद्ध: भारत को इस दशक में दो बड़े सैन्य संकटों का सामना करना पड़ा – 1962 में चीन के साथ और 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध, जिससे अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

3. अकाल और आर्थिक मंदी: लगातार दो वर्ष मानसून न आने के कारण देश में भयानक सूखा और खाद्यान्न संकट पैदा हुआ, जिसके कारण भारत को अनाज के लिए अमेरिका पर निर्भर होना पड़ा।

प्रश्न 11. 1967 के चौथे आम चुनावों को भारतीय राजनीति में ‘राजनैतिक भूकंप’ (Political Earthquake) क्यों कहा जाता है?
उत्तर: 1967 के चुनाव परिणामों ने स्वतंत्रता के बाद से चले आ रहे कांग्रेस के एकतरफा वर्चस्व को हिलाकर रख दिया:

1. हालांकि कांग्रेस केंद्र में जैसे-तैसे सरकार बनाने में सफल रही, लेकिन उसे लोकसभा में अब तक की सबसे कम सीटें मिलीं और इंदिरा गांधी की कैबिनेट के कई बड़े मंत्री चुनाव हार गए।

2. देश के 9 महत्वपूर्ण राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मद्रास, पश्चिम बंगाल) में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई और वहां गैर-कांग्रेसी दलों की गठबंधन सरकारें (संविद सरकारें) बनीं।

3. तमिलनाडु (मद्रास) में पहली बार किसी क्षेत्रीय दल (DMK) को पूर्ण बहुमत मिला, जिसने कांग्रेस के एकाधिकार को पूरी तरह समाप्त कर दिया।

प्रश्न 12. 1975 में घोषित आपातकाल के तीन प्रमुख राजनैतिक परिणामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल के तीन मुख्य राजनैतिक प्रभाव निम्नलिखित थे:

1. विपक्ष के नेताओं की जेल: जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित विपक्ष के सभी बड़े नेताओं को मीसा (MISA) कानून के तहत जेल में डाल दिया गया।

2. मौलिक अधिकारों का निलंबन: नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए और न्यायपालिका की शक्ति को सीमित कर दिया गया। नागरिक अपनी अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ कोर्ट भी नहीं जा सकते थे।

3. प्रेस पर सेंसरशिप और संगठनों पर प्रतिबंध: समाचार पत्रों पर कड़ी सेंसरशिप लगा दी गई और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) तथा जमात-ए-इस्लामी जैसे सामाजिक-राजनैतिक संगठनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।

प्रश्न 13. 1977 के चुनावों में कांग्रेस की ऐतिहासिक हार के तीन मुख्य कारण क्या थे?
उत्तर: 1977 के चुनावों में पहली बार कांग्रेस केंद्र में चुनाव हार गई, जिसके तीन मुख्य कारण थे:

1. आपातकाल के दौरान की गई ज्यादतियाँ: उत्तर भारत की जनता में आपातकाल के दौरान की गई जबरन नसबंदी, झुग्गियों को उजाड़ने और प्रेस सेंसरशिप को लेकर भारी गुस्सा था।

2. विपक्ष की एकजुटता (जनता पार्टी का गठन): चुनाव से ठीक पहले विपक्ष के सभी बड़े दलों ने मिलकर ‘जनता पार्टी’ का गठन किया, जिससे कांग्रेस विरोधी वोटों का बिखराव पूरी तरह रुक गया।

3. जयप्रकाश नारायण का नैतिक नेतृत्व: जेपी के आंदोलन ने जनता में तानाशाही के खिलाफ लोकतंत्र को बचाने की एक मजबूत नैतिक चेतना जगाई, जिसने कांग्रेस विरोधी लहर का निर्माण किया।

प्रश्न 14. पंजाब समझौते (राजीव-लौंगोवाल समझौता 1985) की तीन मुख्य शर्तें क्या थीं?
उत्तर: पंजाब में उग्रवाद और अशांति को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री राजीव गांधी और अकाली दल के अध्यक्ष हरचंद सिंह लौंगोवाल के बीच एक समझौता हुआ, जिसकी मुख्य शर्तें थीं:

1. चंडीगढ़ को पूर्ण रूप से पंजाब राज्य को सौंप दिया जाएगा।

2. पंजाब और हरियाणा के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए एक अलग न्यायाधिकरण (Tribunal) का गठन किया जाएगा।

3. पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच रावी-ब्यास नदी जल के बंटवारे के लिए एक स्वतंत्र आयोग नियुक्त किया जाएगा और पंजाब में उग्रवाद से प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया जाएगा।

प्रश्न 15. पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में अलगाववादी आंदोलनों के उदय के तीन मुख्य कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पूर्वोत्तर भारत (जैसे नागालैंड, मिजोरम) में असंतोष के तीन मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. भौगोलिक और सांस्कृतिक अलगाव: यह क्षेत्र मुख्य भूमि भारत से एक संकरे गलियारे (सिक्किम-सिलिगुड़ी कॉरिडोर) से जुड़ा है, और यहाँ की जनजातीय संस्कृति बाकी भारत से काफी भिन्न है, जिससे वे खुद को अलग-थलग महसूस करते थे।

2. आर्थिक पिछड़ापन और उपेक्षा: प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों (जैसे असम में तेल और चाय) के बावजूद इस क्षेत्र का औद्योगिक विकास नहीं हुआ, जिससे स्थानीय युवाओं में केंद्र सरकार के प्रति भारी नाराजगी थी।

3. बाहरी लोगों का अवैध प्रवासन: बांग्लादेश और भारत के अन्य हिस्सों से आने वाले लोगों के कारण स्थानीय जनजातियों को अपनी भाषाई, सांस्कृतिक और राजनैतिक पहचान खोने का खतरा (Demographic Threat) पैदा हो गया।

प्रश्न 16. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद को पारंपरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा क्यों माना जाता है? तीन तर्क दीजिए।
उत्तर: 1. आतंकवाद का कोई निश्चित युद्धक्षेत्र नहीं होता; यह किसी देश की सीमा पर नहीं बल्कि निर्दोष आम नागरिकों को अपना निशाना बनाता है ताकि समाज में डर पैदा किया जा सके।

2. आधुनिक आतंकवादी नेटवर्क वैश्विक (Global) हैं, जो इंटरनेट, आधुनिक हथियारों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणालियों का उपयोग करके किसी भी देश में अचानक हमला (जैसे 9/11 हमला) कर सकते हैं।

3. यह राज्यों की संप्रभुता और राजनैतिक स्थिरता को चुनौती देता है, जिससे देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और नागरिक स्वतंत्रता पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 17. वैश्विक साझी संपदा (Global Commons) की सुरक्षा के मार्ग में आने वाली तीन मुख्य कठिनाइयाँ क्या हैं?
उत्तर: 1. स्पष्ट संप्रभुता का अभाव: अंटार्कटिका, बाहरी अंतरिक्ष और समुद्री सतह जैसे क्षेत्रों पर किसी एक देश का अधिकार न होने के कारण वहां के संसाधनों के दोहन को विनियमित (Regulate) करना बहुत कठिन होता है।

2. विकसित देशों का अड़ियल रवैया: विकसित देश पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले औद्योगिक उत्सर्जन को कम करने के वैश्विक समझौतों को मानने में आनाकानी करते हैं (जैसे अमेरिका का शुरुआती रुख)।

3. निगरानी और आम सहमति की कमी: वैश्विक नियमों को तोड़ने वाले देशों पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए कोई मजबूत अंतरराष्ट्रीय संस्था या वैश्विक सरकार मौजूद नहीं है।

प्रश्न 18. भारत सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए गए तीन प्रमुख कदमों (नीतियों) का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: भारत पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है, जिसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

1. राष्ट्रीय सौर मिशन: गैर-पारंपरिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर सौर पार्कों का निर्माण किया जा रहा है ताकि कोयले पर निर्भरता कम हो।

2. पर्यावरण कानून: भारत ने वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम जैसे कड़े कानून बनाए हैं। जैव ईंधन (Bio-fuels) और सीएनजी (CNG) के उपयोग को अनिवार्य किया जा रहा है।

3. एलईडी (LED) बल्ब कार्यक्रम और वृक्षारोपण: ऊर्जा की बचत के लिए उजाला योजना के तहत करोड़ों घरों में एलईडी बल्ब लगाए गए हैं और स्वच्छ भारत मिशन के तहत कचरा प्रबंधन में सुधार किया गया है।

प्रश्न 19. कांग्रेस प्रणाली (Congress System) से क्या तात्पर्य है? रजनी कोठारी के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: प्रसिद्ध राजनैतिक विश्लेषक रजनी कोठारी ने स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दो दशकों के भारतीय दलीय राजनीतिक ढांचे को ‘कांग्रेस प्रणाली’ का नाम दिया था।

इसका अर्थ यह था कि देश में बहुदलीय लोकतंत्र होने के बावजूद केवल कांग्रेस ही सत्ता और विपक्ष दोनों की भूमिका निभाती थी। कांग्रेस के भीतर ही विभिन्न गुट (Factions) मौजूद थे जो आपस में सौदेबाजी करके राजनैतिक संतुलन बनाए रखते थे। बाहरी दल केवल इन गुटों को प्रभावित करते थे, जिससे कांग्रेस का वर्चस्व अटूट बना रहा।

प्रश्न 20. आनंदपुर साहिब प्रस्ताव (1973) के राजनैतिक विवाद और उसके दूरगामी प्रभावों को समझाइए।
उत्तर: 1973 में अकाली दल द्वारा पास किए गए इस प्रस्ताव में पंजाब के लिए अधिक स्वायत्तता और केंद्र के अधिकारों को सीमित करने की मांग की गई थी।

विवाद का कारण: इस प्रस्ताव में ‘सिख कौम’ को एक अलग राष्ट्र (Bol) के रूप में परिभाषित करने की कोशिश की गई थी, जिसे केंद्र सरकार और आलोचकों ने अलगाववाद और ‘खालिस्तान’ की नींव के रूप में देखा। इस राजनैतिक विवाद ने पंजाब में उग्रवाद को बढ़ावा दिया, जिसके परिणामस्वरूप आपरेशन ब्लू स्टार और इंदिरा गांधी की हत्या जैसी दुखद घटनाएं हुईं।

भाग द: 4 अंक वाले प्रश्न (कुल: 15 प्रश्न)

प्रश्न 1. सोवियत संघ के विघटन के प्रमुख कारणों और उसके वैश्विक राजनीति पर पड़े दूरगामी प्रभावों की सविस्तार समीक्षा कीजिए।
उत्तर:विघटन के प्रमुख कारण:

1. सोवियत संघ की राजनैतिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर पूरी तरह कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण था, जो समय के साथ अत्यधिक भ्रष्ट, अनुत्तरदायी और नौकरशाही के चंगुल में फंस गई। आम नागरिकों की स्वतंत्रता पूरी तरह समाप्त हो चुकी थी।

2. सोवियत संघ ने अपने आर्थिक संसाधनों का एक बहुत बड़ा हिस्सा अमेरिका के साथ हथियारों की होड़ में परमाणु हथियार बनाने और अपने उपग्रह देशों (पूर्वी यूरोप) को सैन्य सहायता देने में खर्च कर दिया, जिससे आम उपभोक्ता वस्तुओं की भारी कमी हो गई।

3. मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा शुरू किए गए सुधारों (पेरेस्त्रोइका – आर्थिक पुनर्गठन और ग्लासनोस्त – खुलापन) ने सोवियत संघ के भीतर राष्ट्रवादी भावनाओं और लोकतंत्र की इच्छा को तीव्र कर दिया, जिसे कम्युनिस्ट पार्टी संभाल नहीं सकी।

वैश्विक राजनीति पर प्रभाव:

1. शीत युद्ध की समाप्ति: अमेरिका और सोवियत संघ के बीच चार दशकों से चला आ रहा वैचारिक और सैन्य संघर्ष हमेशा के लिए समाप्त हो गया और वारसा पैक्ट भंग हो गया।

2. एकध्रुवीय विश्व का उदय: सोवियत संघ के अंत के बाद विश्व राजनीति में अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बनकर उभरा, जिसका पूंजीवादी मॉडल और डॉलर पूरे विश्व पर हावी हो गया।

3. नए देशों का उदय: सोवियत संघ के मलबे से 15 नए स्वतंत्र देशों का जन्म हुआ, जिन्होंने लोकतंत्र और मुक्त बाज़ार अर्थव्यवस्था को अपनाया, जिससे वैश्विक मानचित्र पूरी तरह बदल गया।

प्रश्न 2. यूरोपीय संघ (EU) को एक अत्यधिक प्रभावशाली क्षेत्रीय संगठन बनाने वाले उसके राजनैतिक, आर्थिक और सैन्य प्रभाव का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर: यूरोपीय संघ केवल एक आर्थिक संगठन नहीं है, बल्कि यह एक विशाल महाशक्ति की तरह कार्य करता है जिसके प्रभाव निम्नलिखित हैं:

1. आर्थिक प्रभाव: यूरोपीय संघ विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसकी साझा मुद्रा ‘यूरो’ अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व के लिए एक बड़ा खतरा है। वैश्विक व्यापार में इसका हिस्सा अमेरिका से कहीं अधिक है, जिसके कारण यह अफ्रीका और एशिया के देशों पर गहरा आर्थिक प्रभाव डालता है।

2. राजनैतिक और कूटनीतिक प्रभाव: यूरोपीय संघ के दो सदस्य देश (फ्रांस और पूर्व में ब्रिटेन) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य रहे हैं। इसके कई सदस्य देशों के पास वीटो पावर है। यह मानवाधिकारों, लोकतंत्र और पर्यावरण के मुद्दों पर वैश्विक कूटनीति को गहराई से प्रभावित करता है।

3. सैन्य प्रभाव: यूरोपीय संघ के पास सामूहिक रूप से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है। इसका रक्षा बजट अमेरिका के बाद सबसे अधिक है। इसके सदस्य देश (विशेषकर फ्रांस) परमाणु हथियारों से लैस हैं और अत्याधुनिक सैन्य तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर हैं।

4. सांस्कृतिक और संरचनात्मक प्रभाव: इसका अपना एक ध्वज, स्थापना दिवस, गान और एक साझी विदेश नीति है। यह विकासशील देशों को वित्तीय सहायता देकर वहां अपने राजनैतिक सिद्धांतों का विस्तार करने में पूरी तरह सक्षम है।

प्रश्न 3. दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क – SAFTA) की सफलताओं और विफलताओं का एक आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर: 1985 में स्थापित सार्क दक्षिण एशिया के 8 देशों का एक मंच है, जिसका मूल्यांकन इस प्रकार है:

विफलता के कारण (कमजोरियाँ):

1. सार्क की विफलता का सबसे बड़ा कारण भारत और पाकिस्तान के बीच का स्थायी तनाव, कश्मीर विवाद और सीमा पार आतंकवाद है। दोनों देशों के मतभेदों के कारण सार्क के अधिकांश शिखर सम्मेलन या तो रद्द हो जाते हैं या बेअसर रहते हैं।

2. इस क्षेत्र के छोटे देशों को भारत के विशाल आकार और आर्थिक शक्ति से यह डर रहता है कि भारत उनके बाज़ारों पर कब्ज़ा करना चाहता है और उनके आंतरिक मामलों को नियंत्रित करना चाहता है।

3. दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौता (SAFTA) लागू होने के बावजूद सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार कुल व्यापार का मात्र 5% है, जबकि यूरोपीय संघ में यह 60% से अधिक है।

सफलताएं और महत्व:

1. तनाव के बावजूद, सार्क ने दक्षिण एशिया के नेताओं को नियमित रूप से एक मंच पर आकर अनौपचारिक बातचीत करने का अवसर दिया है।

2. सार्क कृषि केंद्र, सार्क खाद्य बैंक और दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (SAU, दिल्ली) की स्थापना इसके सफल सहयोगात्मक उदाहरण हैं।

3. पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में इन देशों ने सामूहिक रणनीतियाँ बनाई हैं, जो इस क्षेत्र के भविष्य के लिए आवश्यक हैं।

प्रश्न 4. संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए। क्या यह बदलती हुई वैश्विक परिस्थितियों में विश्व शांति बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है?
उत्तर: 1945 में स्थापित संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता और सीमाओं की समीक्षा नीचे दी गई है:

सक्षमता और प्रासंगिकता (सकारात्मक पक्ष):

1. यूएनओ का सबसे बड़ा योगदान यह है कि इसके रहते दुनिया कभी तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर नहीं पहुँची। महाशक्तियों के बीच परमाणु युद्ध को टालने में इसने एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ मंच का कार्य किया है।

2. इसकी विशेष संस्थाएं जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनेस्को (UNESCO) और यूनीसेफ (UNICEF) विकासशील देशों में महामारी नियंत्रण, शिक्षा और बच्चों के अधिकारों के लिए अद्वितीय कार्य कर रही हैं।

3. यह वैश्विक साझी समस्याओं जैसे आतंकवाद, पर्यावरण क्षरण (जलवायु परिवर्तन) और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए नियम बनाने वाली एकमात्र सार्वभौमिक संस्था है।

सीमाएं और विफलताएं (नकारात्मक पक्ष):

1. यह संस्था अमेरिका जैसी एकमात्र महाशक्ति के प्रभाव से मुक्त नहीं है। अमेरिका कई बार यूएन की अनुमति के बिना (जैसे इराक युद्ध में) एकतरफा कार्रवाई करता है और यूएन मूकदर्शक बना रहता है।

2. सुरक्षा परिषद का वीटो पावर अत्यंत अलोकतांत्रिक है, जिसके कारण यदि कोई महाशक्ति किसी विवाद में शामिल हो (जैसे रूस-यूक्रेन संघर्ष या मध्य पूर्व संकट), तो यूएन कोई कड़ा फैसला नहीं ले पाता।

निष्कर्ष: कमियों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र संघ आज भी प्रासंगिक है। जैसा कि यूएन के दूसरे महासचिव डैग हैमरशोल्ड ने कहा था, “यूएन का गठन मानवता को स्वर्ग ले जाने के लिए नहीं, बल्कि उसे नर्क से बचाने के लिए हुआ था।” इसके बिना दुनिया और अधिक अराजक हो जाएगी।

प्रश्न 5. आजादी के समय भारत के सामने मौजूद विभिन्न देसी रियासतों के एकीकरण की समस्या और उसमें सरदार वल्लभभाई पटेल के ऐतिहासिक योगदान की सविस्तार व्याख्या कीजिए।
उत्तर: 1947 में अंग्रेजों ने घोषणा की कि भारत की सभी 565 देसी रियासतें अपनी इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान में मिल सकती हैं या स्वतंत्र रह सकती हैं, जिसने भारत के सामने टूटने का बड़ा संकट खड़ा कर दिया:

1. एकीकरण की समस्या: त्रावणकोर, हैदराबाद और भोपाल जैसी बड़ी रियासतों के शासकों ने स्वतंत्र रहने की घोषणा कर दी, जिससे भारत के भीतर ही कई छोटे-छोटे दुश्मन देश बनने का खतरा पैदा हो गया। देश की अखंडता खतरे में थी।

2. सरदार पटेल की कूटनीति: तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने अदम्य साहस और राजनैतिक सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने राजाओं को समझाया कि भारत संघ में शामिल होना उनके और देश दोनों के हित में है। उन्होंने राजाओं को मनाने के लिए ‘प्रीवी पर्स’ (विशेष भत्ते) का प्रस्ताव दिया।

3. सहमति पत्र (Instrument of Accession): पटेल के प्रयासों से अधिकांश रियासतों ने शांतिपूर्वक इस सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। लेकिन हैदराबाद, जूनागढ़, कश्मीर और मणिपुर के विलय में कठिन समस्याएं आईं।

4. कठिन रियासतों का विलय: हैदराबाद के निजाम के खिलाफ वहां की जनता ने विद्रोह किया, तो पटेल ने ‘ऑपरेशन पोलो’ के तहत सेना भेजकर पुलिस कार्रवाई द्वारा हैदराबाद को भारत में मिलाया। जूनागढ़ में जनमत संग्रह कराया गया। पटेल की इसी दृढ़ता के कारण उन्हें भारत का ‘लौह पुरुष’ कहा जाता है, जिन्होंने खंडित भारत को एक अखंड राष्ट्र में बदल दिया।

प्रश्न 6. भारत में योजना आयोग (नियोजित विकास) की स्थापना के उद्देश्यों और देश के आर्थिक विकास में इसकी भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर: मार्च 1950 में स्थापित योजना आयोग भारत के आर्थिक विकास का मुख्य नीति निर्माता था:

स्थापना के मुख्य उद्देश्य:

1. देश के मानवीय, पूंजीगत और प्राकृतिक संसाधनों का सटीक अनुमान लगाना और उनका राष्ट्रहित में संतुलित उपयोग करना।

2. पंचवर्षीय योजनाओं (Five-Year Plans) के माध्यम से देश में कृषि, भारी उद्योगों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्राथमिकताएं और लक्ष्य तय करना।

3. समाज में आर्थिक असमानता को कम करना और समान सामाजिक कल्याण के लिए कल्याणकारी नीतियां बनाना।

सकारात्मक भूमिका (सफलताएं):

1. इसके तहत पहली तीन योजनाओं में भाखड़ा नांगल और दामोदर घाटी जैसी विशाल नदी घाटी परियोजनाएं बनीं, जिन्होंने भारत को कृषि में आत्मनिर्भर (हरित क्रांति) बनाने की नींव रखी।

2. भिलाई, राउरकेला और बोकारो में इस्पात कारखाने स्थापित हुए, जिससे देश में भारी और बुनियादी उद्योगों का विकास हुआ।

नकारात्मक मूल्यांकन (विफलताएं):

1. यह संस्था एक अत्यधिक केंद्रीकृत संस्था बन गई थी, जो राज्यों की स्थानीय जरूरतों को समझे बिना दिल्ली से नीतियां थोपती थी (Top-Down Model), जिससे ‘सहकारी संघवाद’ को ठेस पहुँची।

2. नौकरशाही के कड़े नियंत्रण के कारण योजनाएं समय पर पूरी नहीं होती थीं और देश की आर्थिक विकास दर बहुत धीमी (हिंदू विकास दर) बनी रही, जिसके कारण अंततः 2014 में इसे समाप्त कर नीति आयोग बनाया गया।

प्रश्न 7. भारत की विदेश नीति के मुख्य सिद्धांतों और पंडित जवाहरलाल नेहरू के विदेश नीति संबंधी दृष्टिकोण का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारत के पहले प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत की विदेश नीति के मुख्य शिल्पकार थे। उनके दृष्टिकोण और विदेश नीति के मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित हैं:

1. गुटनिरपेक्षता (Non-Alignment): नेहरू का सबसे बड़ा योगदान शीत युद्ध के दौरान दोनों महाशक्तियों (अमेरिका और सोवियत संघ) के सैन्य गुटों से दूर रहना था। उनका मानना था कि भारत अपनी कठिन आज़ादी को किसी गुट का पिछलग्गू बनकर नहीं खो सकता। भारत अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर स्वतंत्र और निष्पक्ष फैसले लेगा।

2. साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद का विरोध: भारत स्वयं ब्रिटिश गुलामी का दंश झेल चुका था, इसलिए नेहरू ने एशिया और अफ्रीका के देशों के स्वतंत्रता आंदोलनों (जैसे इंडोनेशिया और अल्जीरिया) का खुलकर समर्थन किया और रंगभेद नीति (Apartheid) की कड़ी आलोचना की।

3. पंचशील के सिद्धांत (1954): नेहरू ने चीन के प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई के साथ मिलकर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच नियम तय किए – एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान, अहस्तक्षेप, अनाक्रमण, समानता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व। यह विश्व शांति का एक बड़ा भारतीय मॉडल था।

4. एशियाई एकता पर बल (Afro-Asian Solidarity): नेहरू ने मार्च 1947 में ही नई दिल्ली में ‘एशियाई संबंध सम्मेलन’ और 1955 में बांडुंग सम्मेलन का आयोजन किया, जिसने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखी। वे एशिया और अफ्रीका के नव-स्वतंत्र देशों को तीसरी बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहते थे।

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