अर्द्धवार्षिक परीक्षा कक्षा 12 जीवविज्ञान नोट्स / महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2026-27 (MP Board)

MP BOARD की आगामी अर्द्धवार्षिक/ वार्षिक परीक्षा 2026-27 के लिए कक्षा 12 जीवविज्ञान (Biology) नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2026-27 (MP Board) दिए गए हैं हिंदी के अतिरिक्त इंग्लिश , संस्कृत , भौतिक , रसायन (विज्ञान/ गणित संकाय ) कला संकाय ( इतिहास , राजनीति आदि ) कामर्स संकाय ( एकाउंटेंसी , व्यवसाय अध्ययन ) कृषि संकाय के नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर इस वेबसाईट पर दिए गए है . बोर्ड परीक्षा तक वेबसाईट को दिन में कम से कम एक बार अवश्य चेक करें . नियमित अपडेट होगी .

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अर्द्धवार्षिक परीक्षा कक्षा 12 जीवविज्ञान नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2026-27 (MP Board)

🛑 भाग 1: 1 अंक वाले 25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर सहित)

(A) सही विकल्प चुनकर लिखिए (MCQs)

प्रश्न 1. आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में ‘भ्रूणपोष’ (Endosperm) की गुणसूत्र प्रकृत्ति होती है:
(अ) अगुणित (n)
(ब) द्विगुणित (2n)
(स) त्रिगुणित (3n)
(द) चतुर्गुणित (4n)
उत्तर: (स) त्रिगुणित (3n) [नर युग्मक और द्वितीयक केंद्रक के संलयन से बनने के कारण]

प्रश्न 2. ‘एकरूपता’ (एक ही गुणसूत्र प्रारूप) वाले समरूप जुड़वां बच्चे (Identical Twins) कब बनते हैं?
(अ) दो अलग-अलग अंडाणुओं के निषेचन से
(ब) एक ही निषेचित अंडाणु (युग्मनज) के दो भागों में विभक्त होने से
(स) बिना निषेचन के अंडाणु के विकसित होने से
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (ब) एक ही निषेचित अंडाणु (युग्मनज) के दो भागों में विभक्त होने से

प्रश्न 3. ‘डाउन सिंड्रोम’ (Down’s Syndrome) किस गुणसूत्र की त्रिसूत्रता (Trisomy) के कारण होता है?
(अ) 11वें गुणसूत्र की
(ब) 21वें गुणसूत्र की
(स) 23वें गुणसूत्र की
(द) 18वें गुणसूत्र की
उत्तर: (ब) 21वें गुणसूत्र की (कुल 47 गुणसूत्र हो जाते हैं)

प्रश्न 4. डी.एन.ए. (DNA) फिंगरप्रिंटिंग तकनीक को भारत में विकसित करने वाले मुख्य वैज्ञानिक थे:
(अ) डॉ. लालजी सिंह
(ब) डॉ. हरगोविंद खुराना
(स) डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन
(द) डॉ. सतीश गुहा
उत्तर: (अ) डॉ. लालजी सिंह (तथा डॉ. कश्यप)

प्रश्न 5. पुनर्योगज डी.एन.ए. तकनीक (Recombinant DNA Technology) में ‘आणविक कैंची’ (Molecular Scissors) किसे कहा जाता है?
(अ) डी.एन.ए. लाइगेज को
(ब) रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज को
(स) डी.एन.ए. पॉलिमरेज को
(द) आर.एन.ए. प्राइमर को
उत्तर: (ब) रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज को


(B) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

प्रश्न 6. मानव में निषेचन (Fertilization) फैलोपियन नलिका के …………….. भाग में संपन्न होता है।
उत्तर: एम्पुला (Ampulla-isthmic junction)

प्रश्न 7. मेंडेल ने वंशागति के सिद्धांतों को प्रतिपादित करने के लिए उद्यान …………….. के पौधे का चयन किया था।
उत्तर: मटर (Pisum sativum)

प्रश्न 8. डी.एन.ए. से एम-आर.एन.ए. (mRNA) के निर्माण की प्रक्रिया को …………….. कहते हैं।
उत्तर: अनुलेखन (Transcription)

प्रश्न 9. मलेरिया रोग के जनक प्लाज्मोडियम का वाहक मादा …………….. मच्छर होती है।
उत्तर: एनोफिलीज (Anopheles)

प्रश्न 10. पहले व्यावसायिक रूप से उत्पादित मानव हार्मोन का नाम …………….. है जिसे जैव प्रौद्योगिकी द्वारा बनाया गया।
उत्तर: ह्यूमलिन (Humulin – इंसुलिन)


(C) सही जोड़ी बनाइए

कॉलम ‘A’कॉलम ‘B’
(1) सहेली (Saheli)(A) जीवाणु (Bacillus thuringiensis)
(2) टर्नर सिंड्रोम(B) मौखिक गर्भनिरोधक गोली (गैर-स्टेरॉयडल)
(3) बी.टी. (Bt) कपास(C) लिंग गुणसूत्र की एकाधिसूत्रता (45, XO)
(4) पेनिसिलिन (Penicillin)(A) कवक (Penicillium notatum)
(5) सहजीविता (Symbiosis)(E) लाइकेन (Lichen)

उत्तर (सही मिलान): 1 → (B), 2 → (C), 3 → (A), 4 → (A), 5 → (E)


(D) एक वाक्य / शब्द में उत्तर दीजिए

प्रश्न 16. बिना निषेचन के अंडाणु से फल बनने की क्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर: अनिषेकफलन (Parthenocarpy)।

प्रश्न 17. मानव जनसंख्या का वैज्ञानिक अध्ययन क्या कहलाता है?
उत्तर: डेमोग्राफी (Demography – जनसांख्यिकी)।

प्रश्न 18. प्रारंभिक कूट (Initiation Codon) का नाम लिखिए जो प्रोटीन संश्लेषण शुरू करता है।
उत्तर: AUG (यह मेथिओनिन एमिनो अम्ल को कोड करता है)।

प्रश्न 19. एड्स (AIDS) की पुष्टि करने वाले प्रयोगात्मक परीक्षण का नाम लिखिए।
उत्तर: एलिसा टेस्ट (ELISA – Enzyme-Linked Immunosorbent Assay)।

प्रश्न 20. पी.सी.आर. (PCR) का पूरा नाम लिखिए जिसका उपयोग डी.एन.ए. प्रवर्धन में होता है।
उत्तर: पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (Polymerase Chain Reaction)।


(E) सत्य या असत्य बताइए

प्रश्न 21. सरटोली कोशिकाएं (Sertoli Cells) विकसित हो रहे शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करती हैं।
उत्तर: सत्य

प्रश्न 22. हीमोफीलिया एक लिंग-सहलग्न प्रभावी विकार है।
उत्तर: असत्य (यह एक लिंग-सहलग्न अप्रभावी – Recessive विकार है)।

प्रश्न 23. डी.एन.ए. अणु की दोनों श्रृंखलाएं समानांतर दिशा में होती हैं।
उत्तर: असत्य (ये प्रति-समानांतर – Antiparallel दिशा 5′ → 3′ और 3′ → 5′ में होती हैं)।

प्रश्न 24. दूध से दही का निर्माण लैक्टोबैसिलस (LAB) जीवाणु की सहायता से होता है।
उत्तर: सत्य

प्रश्न 25. अमरबेल (Cuscuta) सहभोजिता का एक प्रमुख उदाहरण है।
उत्तर: असत्य (यह पूर्ण स्तंभ परजीवी – Parasitism का उदाहरण है)।

🛑 भाग 2: 2 अंक वाले 25 लघूत्तरीय प्रश्न (उत्तर सहित)

प्रश्न 1. स्व-परागण और पर-परागण में कोई दो मुख्य अंतर लिखिए।
उत्तर: (1) स्व-परागण एक ही पौधे के फूलों के बीच होता है, जबकि पर-परागण एक ही जाति के दो अलग-अलग पौधों के फूलों के बीच होता है। (2) स्व-परागण के लिए किसी बाहरी माध्यम (कीट, वायु) की आवश्यकता नहीं होती, जबकि पर-परागण माध्यम पर निर्भर करता है।

प्रश्न 2. आभासी फल (False Fruit) किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जिन फलों के निर्माण में अंडाशय (Ovary) के साथ-साथ पुष्प के अन्य भाग जैसे पुष्पासन (Thalamus) भी भाग लेते हैं, उन्हें आभासी या कूट फल कहते हैं। *उदाहरण:* सेब (Apple) और नाशपाती।

प्रश्न 3. पुरुषों में वृषण (Testis) उदर गुहा के बाहर वृषण कोष में क्यों स्थित होते हैं?
उत्तर: शुक्राणु निर्माण (शुक्रजनन) के लिए शरीर के सामान्य तापमान से लगभग 2°C से 2.5°C कम तापमान की आवश्यकता होती है। वृषण कोष उदर गुहा के बाहर रहकर यह कम तापमान प्रदान करता है।

प्रश्न 4. ‘प्रसव’ (Parturition) किसे कहते हैं? इसमें भाग लेने वाले एक हार्मोन का नाम लिखिए।
उत्तर: गर्भकाल पूरा होने पर पूर्ण विकसित गर्भ के गर्भाशय से बाहर निकलने (शिशु जन्म) की शारीरिक प्रक्रिया को प्रसव कहते हैं। *हार्मोन:* ऑक्सीटोसिन (Oxytocin)।

प्रश्न 5. एमनियोसेंटेसिस (Amniocentesis) क्या है? भारत में इस पर कानूनी प्रतिबंध क्यों लगाया गया है?
उत्तर: यह उल्वनल द्रव (Amniotic fluid) की सहायता से भ्रूण के गुणसूत्रीय विकारों की जांच करने की एक तकनीक है। भारत में इसका दुरुपयोग मादा भ्रूण की पहचान कर कन्या भ्रूण हत्या के लिए किया जाने लगा, इसलिए इस पर कानूनी प्रतिबंध लगाया गया है।

प्रश्न 6. टेस्ट ट्यूब बेबी (Test Tube Baby) तकनीक से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इस तकनीक में माता के अंडाणु और पिता के शुक्राणु का शरीर के बाहर प्रयोगशाला की परखनेली में नियंत्रित परिस्थितियों में निषेचन (IVF) कराया जाता है। इसके बाद बने भ्रूण (8 या 32 कोशिकीय) को माता के गर्भाशय में स्थानांतरित (ET) कर दिया जाता है।

प्रश्न 7. मेंडेल द्वारा प्रतिपादित ‘प्रभाविता का नियम’ लिखिए।
उत्तर: जब एक जोड़ी विपरीत लक्षणों वाले शुद्ध पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो प्रथम पीढ़ी (F1) में केवल एक ही लक्षण प्रकट होता है। प्रकट होने वाले लक्षण को ‘प्रभावी’ (Dominant) और छिपे रहने वाले लक्षण को ‘अप्रभावी’ (Recessive) कहते हैं।

प्रश्न 8. अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance) क्या है? एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: जब F1 पीढ़ी में दोनों में से कोई भी जीन पूरी तरह प्रभावी नहीं होता और दोनों के बीच का एक नया मिश्रित लक्षण प्रकट होता है, तो इसे अपूर्ण प्रभाविता कहते हैं। उदाहरण: मिराबिलिस जलापा (4 O’clock plant) में लाल और सफेद फूलों के संकरण से गुलाबी फूल बनना।

प्रश्न 9. सह-प्रभाविता (Co-dominance) को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जब F1 पीढ़ी में दोनों अलील (जीन) बिना मिश्रित हुए एक साथ समान रूप से प्रकट होते हैं, तो इसे सह-प्रभाविता कहते हैं। उदाहरण: मानव में AB रक्त समूह (ABO Blood Grouping)।

प्रश्न 10. डी.एन.ए. और आर.एन.ए. में उपस्थित नाइट्रोजनयुक्त क्षारों के नाम लिखिए।

उत्तर:

– डी.एन.ए. में: एडेनीन (A), गुआनीन (G), साइटोसीन (C), और थायमीन (T)।

– आर.एन.ए. में: एडेनीन (A), गुआनीन (G), साइटोसीन (C), और यूरसिल (U)।

प्रश्न 11. ओकाजाकी खंड (Okazaki Fragments) क्या हैं? इन्हें जोड़ने वाले एंजाइम का नाम लिखिए।

उत्तर: डी.एन.ए. प्रतिकृति (Replication) के समय लैगिंग स्टैंड (Lagging Strand – 3′ → 5′) पर बनने वाले डी.एन.ए. के छोटे-छोटे असतत टुकड़ों को ओकाजाकी खंड कहते हैं। इन्हें डी.एन.ए. लाइगेज एंजाइम द्वारा जोड़ा जाता है।

प्रश्न 12. कूट (Codon) की कोई दो मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: (1) कूट हमेशा त्रिक (Triplet) होता है, अर्थात तीन नाइट्रोजन क्षारों से मिलकर बनता है। (2) यह सार्वभौमिक (Universal) होता है, अर्थात जीवाणु से लेकर मनुष्य तक एक ही कोडोन समान एमिनो अम्ल को कोड करता है।

प्रश्न 13. समजात अंग (Homologous Organs) किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।

उत्तर: वे अंग जो उत्पत्ति और संरचना में समान होते हैं, परंतु भिन्न-भिन्न कार्यों को करने के लिए रूपांतरित हो जाते हैं, समजात अंग कहलाते हैं। यह अपसारी विकास को दर्शाता है। उदाहरण: चमगादड़ के पंख, चीते के अग्रपाद और मनुष्य के हाथ।

प्रश्न 14. समवृत्ति अंग (Analogous Organs) क्या हैं? उदाहरण दीजिए।

उत्तर: वे अंग जो बाहरी रूप और कार्यों में समान होते हैं, परंतु उनकी उत्पत्ति और आंतरिक संरचना बिल्कुल भिन्न होती है, समवृत्ति अंग कहलाते हैं। यह अभिसारी विकास को दर्शाता है। उदाहरण: तितली के पंख और पक्षी के पंख।

प्रश्न 15. सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Active and Passive Immunity) में दो अंतर लिखिए।

उत्तर: (1) सक्रिय प्रतिरक्षा में शरीर की अपनी कोशिकाएं एंटीजन के संपर्क में आने पर एंटीबॉडी बनाती हैं, जबकि निष्क्रिय प्रतिरक्षा में बाहर से बने-बनाए एंटीबॉडी सीधे शरीर में डाले जाते हैं। (2) सक्रिय प्रतिरक्षा धीमी होती है पर लंबे समय तक काम करती है, निष्क्रिय तुरंत असर करती है पर अस्थाई होती है।

प्रश्न 16. सहज और उपार्जित प्रतिरक्षा में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: सहज प्रतिरक्षा जन्मजात होती है जो माता-पिता से मिलती है और यह गैर-विशिष्ट होती है। उपार्जित प्रतिरक्षा जन्म के बाद किसी रोगजनक के संपर्क में आने पर शरीर द्वारा विकसित की जाती है और यह विशिष्ट होती है तथा इसमें स्मृति (Memory) का गुण होता है।

प्रश्न 17. इंटरफेरॉन (Interferons) क्या हैं? इनका क्या कार्य है?

उत्तर: विषाणु (Virus) से संक्रमित कोशिकाओं द्वारा स्रावित होने वाले विशेष प्रोटीन इंटरफेरॉन कहलाते हैं। ये पास की अन्य स्वस्थ कोशिकाओं को विषाणु के संक्रमण से बचाने के लिए सुरक्षा कवच तैयार करते हैं।

प्रश्न 18. वाहित मल (Sewage) किसे कहते हैं? यह हमारे लिए क्यों हानिकारक है?

उत्तर: शहरों और घरों से निकलने वाले व्यर्थ गंदे पानी, जिसमें भारी मात्रा में मानव मल-मूत्र और कार्बनिक पदार्थ होते हैं, को वाहित मल कहते हैं। यह नदियों के जल को प्रदूषित करता है और इसमें उपस्थित रोगजनक जीवाणु हैजा, पेचिश जैसी बीमारियाँ फैलाते हैं।

प्रश्न 19. पेनिसिलिन नामक प्रतिजैविक (Antibiotic) की खोज किसने और किससे की थी?

उत्तर: पेनिसिलिन की खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने सन 1928 में पेनिसिलियम नोटैटम (Penicillium notatum) नामक कवक से अचानक की थी। यह विश्व का पहला व्यावसायिक एंटीबायोटिक था।

प्रश्न 20. प्लास्मिड (Plasmid) किसे कहते हैं पुनर्योगज डी.एन.ए. में इसका क्या महत्त्व है?

उत्तर: जीवाणुओं में मुख्य गुणसूत्रीय डी.एन.ए. के अतिरिक्त पाए जाने वाले गोलाकार, स्वतः प्रतिकृति करने वाले बाह्य-गुणसूत्रीय डी.एन.ए. को प्लास्मिड कहते हैं। जैव प्रौद्योगिकी में इसका उपयोग वांछित जीन को क्लोनिंग होस्ट (जैसे ई.कोलाई) में ले जाने के लिए वाहक (Vector) के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 21. जी.एम.ओ. (GMO) का पूरा नाम लिखिए तथा इसकी परिभाषा दीजिए।

उत्तर: GMO का पूरा नाम Genetically Modified Organism (अनुवांशिकता रूपांतरित जीव) है। ऐसे पौधे, जीव या जीवाणु जिनके जीनोम में कृत्रिम रूप से बाहरी वांछित जीन को जोड़कर उनके लक्षणों में बदलाव किया गया है, जी.एम.ओ. कहलाते हैं।

प्रश्न 22. बी.टी. विष (Bt Toxin) क्या है? यह कपास के पौधों को कीटों से कैसे बचाता है?

उत्तर: यह बैसिलस थुरिंजिएंसिस जीवाणु द्वारा निर्मित एक क्रिस्टलीय कीटनाशक प्रोटीन है। जब हानिकारक कीट (जैसे तंबाकू की कली का कीड़ा) बी.टी. कपास के पौधे को खाता है, तो यह विष कीट की क्षारीय आँत में जाकर सक्रिय हो जाता है और उसकी आँत की कोशिकाओं में छेद कर देता है जिससे कीट की मृत्यु हो जाती है।

प्रश्न 23. बायोपाईरेसी (Biopiracy) से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: किसी देश या बहुराष्ट्रीय कंपनी द्वारा किसी दूसरे देश के जैव संसाधनों (जैसे औषधीय पौधों, पारंपरिक ज्ञान) का बिना उस देश की अनुमति या बिना उचित मुआवजा दिए अनधिकृत रूप से दोहन या पेटेंट कराना बायोपाईरेसी कहलाता है।

प्रश्न 24. सहभोजिता (Commensalism) को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: यह दो प्रजातियों के बीच ऐसी पारस्परिक क्रिया है जिसमें एक प्रजाति को लाभ होता है, परंतु दूसरी प्रजाति को न तो कोई लाभ होता है और न ही कोई हानि। उदाहरण: आम के पेड़ की शाखा पर उगने वाला आर्किड (Orchid) का पौधा।

प्रश्न 25. स्पर्धा वर्जी नियम (Gause’s Competitive Exclusion Principle) क्या है?

उत्तर: गॉस के नियम के अनुसार, एक ही संसाधनों (भोजन, आवास) के लिए स्पर्धा करने वाली दो पास की समरूप प्रजातियाँ लंबे समय तक एक साथ सह-अस्तित्व में नहीं रह सकतीं। अंततः कमजोर प्रजाति विलुप्त हो जाती है या विस्थापित हो जाती है।

🛑 भाग 3: 3 अंक वाले 20 महत्वपूर्ण वैचारिक प्रश्न (उत्तर सहित)

प्रश्न 1. एक परिपक्व आवृतबीजी भ्रूणकोष (7-कोशिकीय एवं 8-केंद्रकीय) का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए तथा इसके भागों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: आवृतबीजी पौधों का मादा युग्मकोद्भिद (भ्रूणकोष) निषेचन से पूर्व 7-कोशिकीय और 8-केंद्रकीय होता है:

1. अण्ड उपकरण (Egg Apparatus): इसमें बीजांडद्वार की ओर तीन कोशिकाएं होती हैं— एक मुख्य अंड कोशिका (Egg cell) और दो सहायक कोशिकाएं (Synergids)।

2. प्रतिमुख कोशिकाएं (Antipodal Cells): निभागीय (Chalaza) छोर पर तीन कोशिकाएं स्थित होती हैं, जिन्हें प्रतिमुख कोशिकाएं कहते हैं।

3. केंद्रीय कोशिका (Central Cell): मध्य में एक बड़ी कोशिका होती है जिसमें दो ध्रुवीय केंद्रक (Polar nuclei) आपस में मिलकर एक द्विगुणित द्वितीयक केंद्रक बनाते हैं।

प्रश्न 2. द्विनिषेचन (Double Fertilization) और त्रिसंलयन (Triple Fusion) क्या है? इसका क्या महत्त्व है?

उत्तर: परागनली से मुक्त हुए दो नर युग्मकों में से पहला नर युग्मक (n) अंड कोशिका से मिलकर द्विगुणित युग्मनज (2n) बनाता है, इसे सत्य निषेचन कहते हैं। दूसरा नर युग्मक (n) मध्य में स्थित द्वितीयक केंद्रक (2n) से मिलकर त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (3n) बनाता है, इसे त्रिसंलयन कहते हैं। आवृतबीजी पौधों में निषेचन की यह क्रिया दो बार संपन्न होने के कारण इसे द्विनिषेचन कहते हैं। महत्त्व: इसके परिणामस्वरूप भ्रूणपोष बनता है जो विकसित हो रहे भ्रूण को निरंतर पोषण प्रदान करता है।

प्रश्न 3. शुक्रजनन (Spermatogenesis) और अंडजनन (Oogenesis) की प्रक्रियाओं में कोई तीन मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

1. शुक्रजनन वृषण की शुक्रजनन नलिकाओं में होता है और यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जबकि अंडजनन अंडाशय में होता है और इसकी शुरुआत मादा के भ्रूणीय अवस्था में ही हो जाती है।

2. शुक्रजनन में एक प्राथमिक शुक्राणु कोशिका से चार सक्रिय गतिशील शुक्राणु बनते हैं, जबकि अंडजनन में एक प्राथमिक अंड कोशिका से केवल एक सक्रिय अंडाणु और तीन निष्क्रिय ध्रुवीय काय (Polar bodies) बनते हैं।

3. शुक्रजनन पुरुषों में जीवनभर चलता रहता है, जबकि अंडजनन महिलाओं में मेनोपॉज (लगभग 45-50 वर्ष की आयु) के बाद स्थाई रूप से रुक जाता है।

प्रश्न 4. आर्तव चक्र (Menstrual Cycle) क्या है? इस चक्र को नियंत्रित करने वाले चार मुख्य हार्मोनों के नाम और कार्य लिखिए।

उत्तर: प्राइमेट्स मादाओं (जैसे मानव) के अंडाशय और गर्भाशय में प्रति माह (लगभग 28 दिनों में) होने वाले चक्रवातीय परिवर्तनों को आर्तव चक्र कहते हैं।

चार मुख्य हार्मोन:

1. FSH (पुटीय प्रेरक हार्मोन): यह अंडाशय में ग्राफियन पुटिकाओं के विकास को प्रेरित करता है।

2. LH (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन): इसकी उच्च सांद्रता (LH Surge) के कारण 14वें दिन अंडोत्सर्ग (Ovulation) होता है।

3. एस्ट्रोजन: यह गर्भाशय की आंतरिक एंडोमेट्रियम परत की मरम्मत और मरम्मत करता है।

4. प्रोजेस्टेरोन: यह कॉर्पस ल्यूटियम द्वारा स्रावित होता है और गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए एंडोमेट्रियम को तैयार करता है।

प्रश्न 5. वंशागति के क्रोमोसोम सिद्धांत (Chromosomal Theory of Inheritance) के मुख्य तीन बिंदु लिखिए तथा इसे किसने प्रतिपादित किया था?

उत्तर: इस सिद्धांत को सन 1902 में वॉल्टर सटन और थियोडोर बोवेरी ने प्रतिपादित किया था।

मुख्य बिंदु:

1. जीन की तरह गुणसूत्र (क्रोमोसोम) भी हमेशा जोड़ों (Pairs) में पाए जाते हैं।

2. युग्मक निर्माण (अर्द्धसूत्री विभाजन) के समय गुणसूत्रों के जोड़े अलग हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक में जोड़े का केवल एक ही गुणसूत्र पहुँचता है।

3. अलग-अलग गुणसूत्रों के जोड़े एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से अपव्यूहन (Separate) प्रदर्शित करते हैं। मेंडेल के कारक वास्तव में गुणसूत्रों पर ही स्थित होते हैं।

प्रश्न 6. डी.एन.ए. (DNA) को एक आनुवंशिक पदार्थ सिद्ध करने हेतु हर्षे और चेज़ (Hershey & Chase) के प्रयोग का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

उत्तर: हर्षे और चेज़ ने सन 1952 में बैक्टीरियोफेज (विषाणु जो जीवाणु को संक्रमित करता है) पर प्रयोग किया। उन्होंने एक समूह के विषाणुओं के प्रोटीन आवरण को रेडियोधर्मी सल्फर (35S) से और दूसरे समूह के डी.एन.ए. को रेडियोधर्मी फास्फोरस (32P) से चिह्नित किया। दोनों विषाणुओं से ई.कोलाई जीवाणु को संक्रमित कराया गया।
ब्लेंडिंग और सेंट्रीफ्यूगेशन के बाद देखा गया कि केवल वही जीवाणु रेडियोधर्मी पाए गए जिन्हें 32P (रेडियोधर्मी डी.एन.ए.) वाले विषाणु ने संक्रमित किया था। प्रोटीन आवरण (35S) जीवाणु के भीतर प्रवेश नहीं कर पाया था। इससे निर्विवाद रूप से सिद्ध हो गया कि डी.एन.ए. ही वह आनुवंशिक पदार्थ है जो विषाणु से जीवाणु में स्थानांतरित होता है।

प्रश्न 7. डी.एन.ए. की द्विकुण्डलिनी संरचना (Double Helix Structure) के वाटसन और क्रिक मॉडल की तीन मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

1. डी.एन.ए. दो पॉलीन्यूक्लिओटाइड श्रृंखलाओं का बना होता है, जिसकी रीढ़ की हड्डी शर्करा-फॉस्फेट से बनी होती है और क्षार अंदर की ओर होते हैं। दोनों श्रृंखलाएं प्रति-समानांतर (5′ → 3′ और 3′ → 5′) दिशा में होती हैं।

2. दोनों श्रृंखलाओं के क्षार आपस में विशिष्ट हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़े होते हैं; एडेनीन हमेशा थायमीन से दो बंध द्वारा (A=T) और गुआनीन हमेशा साइटोसीन से तीन बंध द्वारा (G≡C) जुड़ता है।

3. दोनों श्रृंखलाएं दाईं ओर कुण्डलित होती हैं। प्रत्येक मोड़ की लंबाई 3.4 nm होती है और एक मोड़ में लगभग 10 क्षार युग्म (Base Pairs) पाए जाते हैं।

प्रश्न 10. कैंसर रोग क्या है? इसके प्रकार (बनाइन और मैलिग्नेंट ट्यूमर) और कारणों को विस्तार से समझाइए।

उत्तर: कोशिकाओं के अनियंत्रित, अनियमित और असामान्य विभाजन को कैंसर कहते हैं। इसमें कोशिकाएं अपनी सामान्य ‘संपर्क संदमन’ (Contact Inhibition) की क्षमता खो देती हैं और ट्यूमर (रसोली) बनाती हैं।

ट्यूमर के प्रकार:

1. सुदम ट्यूमर (Benign Tumor): यह अपने मूल स्थान पर ही सीमित रहता है और शरीर के अन्य भागों में नहीं फैलता। यह कम नुकसानदेह होता है।

2. दुर्दम ट्यूमर (Malignant Tumor): इसकी कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं और रक्त के माध्यम से शरीर के अन्य स्वस्थ अंगों तक पहुँचकर वहाँ भी नए ट्यूमर बनाना शुरू कर देती हैं। इस खतरनाक गुण को मेटास्टैसिस (Metastasis) कहते हैं।

कारण: कार्सिनोजेन्स (जैसे एक्स-किरणें, तंबाकू का धुआं, ऑन्कोजेनिक वायरस)।

प्रश्न 9. जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) के क्षेत्र में रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज एंजाइम के महत्त्व और कार्यप्रणाली को समझाइए।

उत्तर: रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज को ‘आणविक कैंची’ कहा जाता है क्योंकि यह डी.एन.ए. को किसी भी स्थान से काटने के बजाय एक विशिष्ट न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम पर ही काटता है, जिसे पैलिंड्रोमिक अनुक्रम (Palindromic Sequence) कहते हैं (जैसे GAATTC)। यह डी.एन.ए. के दोनों स्टैंडों को थोड़ा हटकर काटता है, जिससे सिरों पर अयुग्मित क्षार बच जाते हैं, जिन्हें ‘चिपेचिपे सिरे’ (Sticky Ends) कहते हैं। ये चिपचिपे सिरे डी.एन.ए. लाइगेज एंजाइम की मदद से बाहरी वांछित जीन को प्लास्मिड वाहक के साथ आसानी से जोड़ने में मदद करते हैं, जिससे पुनर्योगज डी.एन.ए. का निर्माण सुगम होता है।

प्रश्न 10. पी.सी.आर. (PCR) तकनीक क्या है? इसके तीनों चरणों (निष्क्रियीकरण, तापनुशीलन, विस्तारण) को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (PCR) एक ऐसी प्रयोगात्मक तकनीक है जिसके द्वारा डी.एन.ए. की एक एकल प्रतिलिपि से कुछ ही घंटों में अरबों प्रतिलिपियाँ (Amplification/प्रवर्धन) तैयार की जा सकती हैं। इसकी खोज कैरी मुलिस ने की थी।

इसके तीन चरण हैं:

1. निष्क्रियीकरण (Denaturation): डी.एन.ए. को उच्च ताप (94°C) पर गर्म किया जाता है जिससे उसके दोनों स्टैंडों के बीच के हाइड्रोजन बंध टूट जाते हैं और वे अलग हो जाते हैं।

2. तापनुशीलन (Annealing): कम ताप (लगभग 50-60°C) पर दोनों अलग हुए स्टैंडों के 3′ सिरों पर छोटे ओलिगोअनुक्रम ‘प्राइमर’ (Primers) को जोड़ा जाता है।

3. विस्तारण (Extension): 72°C ताप पर टैक पॉलीमरेज (Taq Polymerase) एंजाइम (जो गर्म झरनों के जीवाणु थर्मस एक्वाटिकस से निकाला जाता है) की सहायता से न्यूक्लिओटाइडों को जोड़कर नए स्टैंड का निर्माण पूरा किया जाता है।

प्रश्न 11. जीन थेरेपी (Gene Therapy) क्या है? ए.डी.ए. (ADA) की कमी का उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर: यदि किसी बच्चे या भ्रूण में जन्मजात कोई आनुवंशिक दोष (खराब जीन) है, तो उस खराब जीन को हटाकर उसके स्थान पर स्वस्थ क्रियाशील जीन को प्रविष्ट कराने की चिकित्सा पद्धति को जीन थेरेपी कहते हैं।

ADA की कमी का उदाहरण: सन 1990 में एक चार वर्षीय बालिका को एडेनोसिन डीएमीनेज (ADA) एंजाइम की कमी को दूर करने के लिए पहली बार जीन थेरेपी दी गई। यह एंजाइम हमारे प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) के कार्य के लिए अनिवार्य है। इसके उपचार के लिए बच्ची के रक्त से लसीकाणुओं (Lymphocytes) को निकालकर शरीर के बाहर संवर्धित किया गया और रेट्रोवायरस वाहक की मदद से उनमें स्वस्थ ADA का जीन प्रविष्ट कराकर पुनः बच्ची के शरीर में डाला गया। (यदि यह कार्य भ्रूणीय अवस्था में किया जाए, तो रोग का स्थाई इलाज संभव है)।

प्रश्न 12. पारजीवी जंतु (Transgenic Animals) किसे कहते हैं? मानव कल्याण में इनके कोई दो मुख्य उपयोग लिखिए।

उत्तर: ऐसे जंतु जिनके जीनोम में जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीक द्वारा किसी बाहरी अवांछित जीन को प्रविष्ट कराया गया है और वे उसे प्रदर्शित करते हैं, पारजीवी जंतु कहलाते हैं। (जैसे पारजीवी चूहे, भेड़, गाय ‘रोज़ी’)।

उपयोग:

1. औषधीय उत्पादों की प्राप्ति: पहली पारजीवी गाय ‘रोज़ी’ (1997) के दूध में मानव प्रोटीन α-लैक्ट एल्ब्युमिन (2.4 ग्राम प्रति लीटर) प्रचुर मात्रा में पाया गया, जो साधारण गाय के दूध की तुलना में मानव शिशुओं के लिए अधिक संतुलित पोषक था।

2. वैक्सीन सुरक्षा परीक्षण: पोलियो या अन्य नई वैक्सीनों को मनुष्यों पर प्रयोग करने से पहले उनकी सुरक्षा और प्रभावकारिता की जांच पारजीवी चूहों पर की जाती है।

प्रश्न 13. सहोपकारिता (Mutualism) और परजीविता (Parasitism) में अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

– सहोपकारिता (Mutualism): यह दो प्रजातियों के बीच का ऐसा सकारात्मक अंतर्संबंध है जिसमें दोनों प्रजातियों को एक-दूसरे से लाभ होता है, कोई भी अकेले जीवित नहीं रह सकता। उदाहरण: कवक और शैवाल के बीच लाइकेन (Lichen) का संबंध, जहाँ शैवाल भोजन बनाता है और कवक खनिज व सुरक्षा देता है।

– परजीविता (Parasitism): यह दो प्रजातियों के बीच ऐसा संबंध है जिसमें एक छोटी प्रजाति (परजीवी) को लाभ होता है परंतु दूसरी बड़ी प्रजाति (पोषक/Host) को नुकसान होता है और वह बीमार हो जाती है। उदाहरण: मानव की आँत में रहने वाला एस्केरिस कृमि या पौधों पर अमरबेल।

प्रश्न 14. मरुस्थलीय पौधों (Xerophytes) में शुष्क वातावरण में जीवित रहने के लिए कौन-कौन से अनुकूलन पाए जाते हैं?

उत्तर: मरुस्थलीय पौधों (जैसे नागफनी / Opuntia) में पानी की कमी से बचने के लिए निम्नलिखित अनुकूलन होते हैं:

1. उनकी पत्तियों की सतह पर मोटी उपत्वचा (Cuticle) पाई जाती है और धंसे हुए रंध्र (Sunken Stomata) होते हैं ताकि वाष्पोत्सर्जन कम से कम हो।

2. पानी की हानि रोकने के लिए पत्तियां कांटों (Spines) में रूपांतरित हो जाती हैं, और प्रकाश संश्लेषण का कार्य उनका तना करता है जो हरा और गूदेदार हो जाता है।

3. इनमें विशेष CAM (Crassulacean Acid Metabolism) प्रकाश संश्लेषणात्मक मार्ग पाया जाता है, जिससे इनके रंध्र दिन में बंद रहते हैं और केवल रात में खुलते हैं।

प्रश्न 15. समष्टि (Population) की कोई तीन मुख्य विशेषताएँ (डेमोग्राफिक लक्षण) लिखिए।

उत्तर: एक निश्चित समय और क्षेत्र में रहने वाली एक ही जाति के जीवों के समूह को समष्टि कहते हैं। इसके मुख्य लक्षण हैं:

1. जन्म दर (Natality): प्रति एकांक समय में समष्टि में पैदा होने वाले नए जीवों की औसत संख्या।

2. मृत्यु दर (Mortality): प्रति एकांक समय में समष्टि में मरने वाले जीवों की औसत संख्या।

3. लिंग अनुपात (Sex Ratio): समष्टि में प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या (जैसे 60% मादा और 40% नर)।

प्रश्न 16. मेंडेल के पृथक्करण के नियम (Law of Segregation) को आरेख द्वारा समझाइए।

उत्तर: इस नियम के अनुसार, जब F1 पीढ़ी के संकर पौधों (Tt) में युग्मक बनते हैं, तो दोनों अलील (T और t) एक-दूसरे से पूरी तरह अलग (पृथक) हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक में केवल एक ही अलील जाता है। युग्मकों की शुद्धता के कारण इसे ‘युग्मकों की शुद्धता का नियम’ भी कहते हैं। F2 पीढ़ी में 3:1 का लक्षणप्रारूप अनुपात प्राप्त होता है।

प्रश्न 17. सेंट्रल डोगमा (Central Dogma) क्या है? इसका आरेख बनाइये।

उत्तर: फ्रांसिस क्रिक के अनुसार, कोशिकाओं में आनुवंशिक सूचनाओं का प्रवाह हमेशा एक ही दिशा में होता है; डी.एन.ए. से सूचनाएं आर.एन.ए. में और आर.एन.ए. से प्रोटीन में जाती हैं, इसे ही सेंट्रल डोगमा कहते हैं।

आरेख: DNA → (अनुलेखन) → RNA → (अनुवादन) → प्रोटीन।

प्रश्न 18. प्रतिजैविक (Antibiotics) क्या होते हैं? एक आदर्श प्रतिजैविक की दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: सूक्ष्मजीवों (जैसे कवक या जीवाणु) द्वारा स्रावित वे रासायनिक पदार्थ जो अन्य हानिकारक रोगजनक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं या उन्हें मार देते हैं, प्रतिजैविक कहलाते हैं। विशेषता: (1) यह केवल रोगजनक को नष्ट करे, मानव कोशिकाओं को कोई नुकसान न पहुँचाए (कम विषाक्तता)। (2) इसका प्रभाव विस्तृत स्पेक्ट्रम (Broad Spectrum) वाला होना चाहिए।

प्रश्न 19. जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस (Gel Electrophoresis) तकनीक का क्या उपयोग है?

उत्तर: रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज द्वारा काटे गए डी.एन.ए. के टुकड़ों को उनके आकार के अनुसार अलग-अलग करने के लिए जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस तकनीक का उपयोग किया जाता है। डी.एन.ए. ऋणआवेशित होने के कारण एगारोज जेल माध्यम में विद्युत क्षेत्र लगाने पर एनोड (+) की ओर गति करता है। छोटे टुकड़े तेजी से आगे निकल जाते हैं और बड़े पीछे रह जाते हैं।

प्रश्न 20. डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग (Downstream Processing / अनुप्रवाह संसाधन) क्या है?

उत्तर: जैव प्रौद्योगिकी में बायोरिएक्टर के भीतर उत्पाद (जैसे प्रोटीन या एंटीबायोटिक) का निर्माण पूरा होने के बाद, उसे बाजार में बिक्री के लिए भेजने से पहले पृथक्करण, शुद्धिकरण, गुणवत्ता नियंत्रण और उचित परिरक्षक मिलाने की पूरी प्रक्रिया को अनुप्रवाह संसाधन कहते हैं।

🛑 भाग 4: 4 अंक वाले 15 दीर्घ उत्तरीय विश्लेषणात्मक प्रश्न (नामांकित आरेख सहित)

प्रश्न 1. मनुष्य के नर जनन तंत्र (Male Reproductive System) का एक स्वच्छ रेखाचित्र बनाइए तथा वृषण, एपिडिडिमिस और प्रोस्टेट ग्रंथि के मुख्य कार्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:(विद्यार्थी परीक्षा में वृषण, शुक्रवाहिका, प्रोस्टेट ग्रंथि, और शीश्न को दर्शाता हुआ रेखाचित्र बनाएंगे)।

– वृषण (Testis): यह प्राथमिक जनन अंग है। इसके भीतर उपस्थित शुक्रजनन नलिकाओं में शुक्राणुओं (Sperms) का निर्माण होता है, तथा लेडिग कोशिकाएं ‘टेस्टोस्टेरोन’ नामक नर हार्मोन स्रावित करती हैं जो द्वितीयक लैंगिक लक्षणों को नियंत्रित करता है।

– एपिडिडिमिस (अधिवृषण): यह वृषण के पीछे स्थित एक लंबी कुण्डलित नलिका है। यहाँ शुक्राणु अस्थायी रूप से संचित रहते हैं और अपनी गतिशीलता व परिपक्वता (Maturation) प्राप्त करते हैं।

– प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostrate实用): यह मूत्रमार्ग के आधार पर स्थित होती है। इससे स्रावित होने वाला क्षारीय दूधिया तरल वीर्य (Semen) का लगभग 20-30% भाग बनाता है। यह तरल शुक्राणुओं को सक्रिय रखता है और मूत्रमार्ग की अम्लीयता को नष्ट कर उनकी रक्षा करता है।

प्रश्न 2. मेंडेल के ‘स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम’ (Law of Independent Assortment) को द्वि-संकर संकरण (Dihybrid Cross) के चेकर बोर्ड (Punnett Square) द्वारा विस्तार से समझाइए तथा लक्षणप्रारूप अनुपात लिखिए।

उत्तर:नियम: जब दो जोड़ी विपरीत लक्षणों वाले पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो एक जोड़ी लक्षण का पृथक्करण दूसरी जोड़ी लक्षण के पृथक्करण से पूरी तरह स्वतंत्र होता है। अर्थात एक लक्षण के जीन दूसरे लक्षण के जीन को प्रभावित नहीं करते।

– द्वि-संकर संकरण: मेंडेल ने गोल-पीले बीज वाले शुद्ध पौधे (RRYY) का संकरण झुर्रीदार-हरे बीज वाले पौधे (rryy) से कराया। F1 पीढ़ी में सभी पौधे गोल-पीले (RrYy) प्राप्त हुए।
F1 पीढ़ी के पौधों में स्व-परागण कराने पर F2 पीढ़ी में चार प्रकार के पौधे प्राप्त हुए।

– पुनेट चेकर बोर्ड परिणाम: युग्मक RY, Ry, rY, ry के आपसी संयोजन से कुल 16 खाने बनते हैं।

– लक्षणप्रारूप (Phenotypic) अनुपात:9:3:3:1 (9 गोल-पीले, 3 गोल-हरे, 3 झुर्रीदार-पीले, 1 झुर्रीदार-हरा)। यह सिद्ध करता है कि बीज का आकार और रंग स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं।

प्रश्न 3. डी.एन.ए. प्रतिकृति (DNA Replication) की अर्द्धसंरक्षी (Semi-conservative) विधि की कार्यप्रणाली को आवश्यक एंजाइमों (हेलीकेज, पॉलिमरेज) के कार्यों सहित विस्तार से समझाइए।

उत्तर: डी.एन.ए. प्रतिकृति की अर्द्धसंरक्षी विधि के अनुसार, बनने वाले नए डी.एन.ए. अणु में एक स्टैंड पुराना (पैतृक) और एक नया स्टैंड होता है। इसकी पुष्टि मेसेल्सन और स्टाल ने की थी।

प्रतिकृति के मुख्य चरण और एंजाइम:

1. ओरी (Ori) स्थल की पहचान और हेलीकेज का कार्य: प्रतिकृति का प्रारंभ विशिष्ट ‘ओरी’ स्थल से होता है। डी.एन.ए. हेलीकेज एंजाइम डी.एन.ए. के दोनों स्टैंडों के बीच के हाइड्रोजन बंधों को तोड़कर उन्हें अनकुण्डलित करता है, जिससे ‘प्रतिकृति चिमटा’ (Replication Fork) बनता है।

2. आर.एन.ए. प्राइमर का जुड़ना: नया स्टैंड शुरू करने के लिए आर.एन.ए. प्राइमेज एंजाइम एक छोटा प्राइमर जोड़ता है।

3. डी.एन.ए. पॉलिमरेज III का कार्य: यह मुख्य एंजाइम है जो 5′ → 3′ दिशा में नए न्यूक्लिओटाइडों को तेजी से जोड़ता है। इसके कारण लीडिंग स्टैंड पर निर्माण सतत (Continuous) होता है और लैगिंग स्टैंड पर छोटे ओकाजाकी खंडों के रूप में असतत (Discontinuous) होता है।

4. लाइगेज का कार्य: अंत में डी.एन.ए. लाइगेज ओकाजाकी खंडों को आपस में जोड़कर श्रृंखला को पूर्ण करता है।

प्रश्न 4. आनुवंशिक कूट (Genetic Code) क्या है? इसकी किन्हीं चार मुख्य और विशिष्ट विशेषताओं (जैसे- असंदिग्ध, अपह्रासित आदि) की विस्तृत व्याख्या कीजिए।

उत्तर: डी.एन.ए. या एम-आर.एन.ए. अणु पर उपस्थित नाइट्रोजन क्षारों का वह क्रम जिसमें प्रोटीन संश्लेषण के लिए एमिनो अम्लों को कोड करने की गुप्त सूचनाएँ होती हैं, आनुवंशिक कूट कहलाता है। कुल 64 कोडोन होते हैं जो 20 प्रकार के एमिनो अम्लों को कोड करते हैं।

चार मुख्य विशेषताएँ:

1. त्रिक कूट (Triplet Code): प्रत्येक कोडोन तीन नाइट्रोजन क्षारों के अनुक्रम से मिलकर बनता है। 64 कोडोन में से 61 कोडोन एमिनो अम्लों को कोड करते हैं और 3 कोडोन (UAA, UAG, UGA) स्टॉप कोडोन कहलाते हैं।

2. असंदिग्ध और विशिष्ट (Unambiguous & Specific): एक विशिष्ट कोडोन हमेशा केवल एक ही विशिष्ट एमिनो अम्ल को कोड कर सकता है, किसी अन्य को नहीं। उदाहरण के लिए, GUG केवल वैलीन को ही कोड करेगा।

3. अपह्रासित कूट (Degenerate Code): चूंकि एमिनो अम्ल केवल 20 हैं और कोडोन 61 हैं, इसलिए एक ही एमिनो अम्ल को एक से अधिक कोडोन द्वारा कोड किया जा सकता है। इसे कूट का अपह्रास कहते हैं।

4. विरामरहित (Comma-less) और सार्वभौमिक: एम-आर.एन.ए. पर कोडोन को बिना किसी विराम या कॉमा के लगातार पढ़ा जाता है। यह सार्वभौमिक होता है, अर्थात जीवाणु से लेकर मनुष्य तक AAA कोडोन केवल फेनिलएलेनिन को ही कोड करेगा।

प्रश्न 5. बाहित मल उपचार (Sewage Treatment) की द्वितीयक या जैविक उपचार (Secondary or Biological Treatment) प्रक्रिया को बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) के सिद्धांत सहित विस्तार से समझाइए।

उत्तर: प्राथमिक उपचार (छानने और अवसादन) के बाद बचे हुए बहिःस्राव (Effluent) का द्वितीयक उपचार पूरी तरह जैविक विधि से किया जाता है।

– वायवीय टैंक की कार्यप्रणाली: प्राथमिक बहिःस्राव को बड़े वायवीय टैंकों (Aeration Tanks) में भेजा जाता है, जहाँ लगातार वायु प्रवाहित की जाती है और इसे यांत्रिक रूप से हिलाया जाता है। इसके कारण इसमें उपयोगी वायवीय जीवाणु और कवक तेजी से बढ़ते हैं और एक जाल जैसी संरचना बना लेते हैं, जिसे ‘ऊर्णक’ (Flocs) कहते हैं।

– BOD का सिद्धांत: ये वायवीय सूक्ष्मजीव बहिःस्राव में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों का तेजी से उपभोग (पाचन) करने लगते हैं। जैसे-जैसे कार्बनिक पदार्थ कम होते हैं, वैसे-वैसे पानी की बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) घटने लगती है। BOD जल प्रदूषण का सीधा पैमाना है; BOD का कम होना यह दर्शाता है कि पानी अब शुद्ध हो रहा है।

– निसादन टैंक: जब BOD पर्याप्त कम हो जाती है, तो इस घोल को निसादन टैंक (Settling Tank) में भेजा जाता है, जहाँ ऊर्णक (Flocs) नीचे बैठ जाते हैं। इस नीचे बैठे गाढ़े भाग को ‘सक्रियित पंक’ (Activated Sludge) कहते हैं। इसका थोड़ा सा भाग वापस वायवीय टैंक में जामन की तरह भेजा जाता है और बाकी बचे पानी को नदियों में छोड़ दिया जाता है।

प्रश्न 6. पुनर्योगज डी.एन.ए. तकनीक (Recombinant DNA Technology) के मुख्य चरणों का क्रमबद्ध रूप से विस्तृत वर्णन कीजिए।

उत्तर: आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा वांछित जीन को वाहक डी.एन.ए. के साथ जोड़कर नया पुनर्योगज डी.एन.ए. बनाने की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में संपन्न होती है:

1. डी.एन.ए. का पृथक्करण: दाता कोशिका (जैसे मानव सेल) को लाइसोजाइम या प्रोटीएज एंजाइम से उपचारित कर उसके केंद्रक से शुद्ध डी.एन.ए. को अलग किया जाता है।

2. रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज द्वारा काटना: शुद्ध डी.एन.ए. और प्लास्मिड वाहक डी.एन.ए. दोनों को एक ही रेस्ट्रिक्शन एंजाइम से काटा जाता है ताकि दोनों के सिरों पर समान ‘चिपचिपे सिरे’ (Sticky Ends) बन सकें।

3. जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस द्वारा चयन: कटे हुए डी.एन.ए. के टुकड़ों को एगारोज जेल पर चलाकर वांछित आकार वाले जीन खंड को अलग (Elution) कर लिया जाता है।

4. जीन का लाइगेशन (जोड़ना): वांछित जीन खंड और कटे हुए प्लास्मिड वाहक को डी.एन.ए. लाइगेज एंजाइम की उपस्थिति में मिलाकर जोड़ दिया जाता है, जिससे ‘पुनर्योगज डी.एन.ए.’ (rDNA) बनता है।

5. परपोषी में स्थानांतरण: इस पुनर्योगज डी.एन.ए. को कैल्शियम क्लोराइड उपचार या हीट शॉक विधि द्वारा परपोषी जीवाणु (जैसे ई.कोलाई) के भीतर प्रविष्ट कराया जाता है (रूपांतरण)।

6. व्यावसायिक उत्पादन: रूपांतरित जीवाणुओं को बायोरिएक्टर में बड़े पैमाने पर संवर्धित कर वांछित प्रोटीन उत्पाद प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 7. इंसुलिन क्या है? जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) की सहायता से मानव इंसुलिन (ह्यूमलिन) का निर्माण एलि लीली (Eli Lilly) कंपनी ने किस प्रकार किया? विस्तार से समझाइए।

उत्तर: इंसुलिन अग्न्याशय की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं की बीटा कोशिकाओं द्वारा स्रावित होने वाला एक मुख्य पेप्टाइड हार्मोन है, जो रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से मधुमेह (Diabetes) रोग हो जाता है।

– प्राकृतिक इंसुलिन की संरचना: मानव इंसुलिन प्रारंभ में ‘प्राक-इंसुलिन’ (Pro-insulin) के रूप में बनता है, जिसमें तीन श्रृंखलाएं— ए-श्रृंखला (21 एमिनो अम्ल), बी-श्रृंखला (30 एमिनो अम्ल), और एक अतिरिक्त सी-पेप्टाइड (C-peptide) श्रृंखला होती है। परिपक्व (सक्रिय) इंसुलिन बनते समय सी-पेप्टाइड अलग हो जाता है और केवल ए और बी श्रृंखलाएं आपस में डाइसल्फाइड बंधों द्वारा जुड़ी रहती हैं।

– एलि लीली कंपनी की तकनीक (1983): अमेरिकी कंपनी एलि लीली ने प्रो-इंसुलिन बनाने की जटिलता से बचने के लिए एक अभिनव रास्ता चुना। उन्होंने जेनेटिक कोड के आधार पर ए-श्रृंखला और बी-श्रृंखला को कोड करने वाले दो अलग-अलग कृत्रिम डी.एन.ए. अनुक्रम तैयार किए।
इन दोनों अनुक्रमों को अलग-अलग प्लास्मिड वाहकों के साथ जोड़कर ई.कोलाई (E.coli) जीवाणु के भीतर प्रविष्ट कराया गया। जीवाणुओं को बायोरिएक्टर में संवर्धित करके ए-श्रृंखला और बी-श्रृंखला के प्रोटीनों को अलग-अलग भारी मात्रा में उत्पादित और निष्कर्षित किया गया। अंत में, प्रयोगशाला में इन दोनों श्रृंखलाओं को निकालकर रासायनिक रूप से डाइसल्फाइड बंधों (Disulfide Bonds) द्वारा आपस में जोड़ दिया गया। इस प्रकार शुद्ध मानव इंसुलिन तैयार हुआ, जिसे ‘ह्यूमलिन’ (Humulin) नाम दिया गया।

प्रश्न 8. समष्टि पारस्परिक क्रियाओं के अंतर्गत ‘परजीविता’ (Parasitism) और ‘सहभोजिता’ (Commensalism) की विस्तृत समीक्षा उदाहरणों के साथ कीजिए।

उत्तर: प्रकृति में विभिन्न प्रजातियों के जीव जीवित रहने के लिए आपस में अंतर-क्रियाएँ करते हैं:

– 1. परजीविता (Parasitism, + / – संबंध): यह एक ऐसी नकारात्मक पारस्परिक क्रिया है जिसमें छोटी प्रजाति (परजीवी/Parasite) लाभान्वित होती है और बड़ी प्रजाति (पोषक/Host) को नुकसान होता है। परजीवी पोषक के शरीर से भोजन और आवास प्राप्त करता है और उसमें रोग उत्पन्न करता है।
वर्गीकरण और उदाहरण:
(i) बाह्य परजीवी: जो पोषक के शरीर की बाहरी सतह पर रहते हैं, जैसे मानव के सिर के बालों में जुँए या कुत्तों पर किलनी (Ticks)। (ii) अंतः परजीवी: जो शरीर के अंगों के भीतर रहते हैं, जैसे मानव के यकृत या आँत में रहने वाला फीताकृमि (Tapeworm) और एस्केरिस। (iii) पादप परजीवी: अमरबेल (Cuscuta) जिसमें क्लोरोफिल नहीं होता, यह हेज पौधों के तनों से चूषकांगों (Haustoria) द्वारा भोजन चूसती है।

– 2. सहभोजिता (Commensalism, + / 0 संबंध): यह एक ऐसी उदासीन अंतर्क्रिया है जिसमें एक प्रजाति को स्पष्ट लाभ होता है, परंतु दूसरी प्रजाति को न तो कोई लाभ होता है और न ही कोई नुकसान या असुविधा होती है।

प्रमुख उदाहरण:
(i) आम के पेड़ की शाखा पर उगने वाला आर्किड का पौधा (अधिपादप)। आर्किड को रहने का स्थान और सूर्य का प्रकाश मिलता है, पर आम के पेड़ को कोई फर्क नहीं पड़ता। (ii) व्हेल मछली की पीठ पर रहने वाले बार्नेकल (Barnacles)। बार्नेकल को गति और भोजन के नए क्षेत्र मिलते हैं, व्हेल अप्रभावित रहती है। (iii) खेतों में चरने वाले मवेशियों (गायों/भैंसों) के पीछे चलने वाले बगुले (Cattle Egrets)। जब मवेशी घास चरते हैं, तो घास में छिपे कीड़े बाहर निकल आते हैं जिन्हें बगुले आसानी से खा लेते हैं।

प्रश्न 9. मेंडेल के ‘स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम’ की वंशागति को आरेख द्वारा समझाइए।

उत्तर: स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम के अनुसार, जब दो जोड़ी विपरीत लक्षणों वाले पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो F2 पीढ़ी में लक्षणों का चयन स्वतंत्र रूप से होता है। गोल और झुर्रीदार लक्षण का पृथक्करण, पीले और हरे रंग के लक्षण से स्वतंत्र होता है। पुनेट स्क्वायर आरेख में 9:3:3:1 का लक्षणप्रारूप अनुपात इस नियम की सत्यता की पुष्टि करता है।

प्रश्न 10. डी.एन.ए. फिंगरप्रिंटिंग (DNA Fingerprinting) की कार्यप्रणाली के मुख्य चरणों (VNTR, सदर्न ब्लॉटिंग) का सविस्तार वर्णन कीजिए।

उत्तर: डॉ. एलेक जेफ्रीस द्वारा विकसित इस तकनीक के मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:

1. डी.एन.ए. का अलगाव: उपलब्ध जैविक नमूने (रक्त, बाल, वीर्य) से डी.एन.ए. को अलग करना। यदि डी.एन.ए. कम हो, तो पी.सी.आर. द्वारा उसकी प्रतिलिपियाँ बनाना।

2. प्रतिबंध खंडन: रेस्ट्रिक्शन एंडोन्यूक्लिएज एंजाइम द्वारा डी.एन.ए. को छोटे खंडों में काटना।

3. जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस: कटे हुए खंडों को एगारोज जेल पर आकार के अनुसार अलग करना।

4. सदर्न ब्लॉटिंग (Southern Blotting): अलग हुए डी.एन.ए. खंडों को जेल से निकालकर नायलोन की झिल्ली या नाइट्रोसेल्यूलोज पेपर पर स्थानांतरित करना।

5. वी.एन.टी.आर. (VNTR) हाइब्रिडाइजेशन: रेडियोधर्मी VNTR प्रोब (Variable Number of Tandem Repeats) की मदद से विशिष्ट पूरक अनुक्रमों का संकरण कराना।

6. ऑटोरेडियोग्राफी: एक्स-रे फिल्म पर प्रोब की स्थिति को देखना, जिससे विशिष्ट काली पट्टियों (Bands) का पैटर्न प्राप्त होता है, जो व्यक्ति का फिंगरप्रिंट है।

प्रश्न 11. मानव जनन स्वास्थ्य के संदर्भ में ‘यौन संचारित रोगों’ (STDs/STIs) के कारण, प्रमुख लक्षण और इनसे बचाव के तीन मुख्य उपाय लिखिए।

उत्तर: मैथुन या लैंगिक संपर्क के द्वारा एक संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में संचरित होने वाले रोगों को यौन संचारित रोग (STDs) कहते हैं। जैसे— सुजाक (Gonorrhea), सिफलिस, जननांग हर्पीस और एड्स।

– प्रमुख प्रारंभिक लक्षण: जननांग क्षेत्र में खुजली होना, तरल पदार्थ का स्राव होना, सूजन, हल्के छाले या दर्द होना। कई बार महिलाओं में लक्षण प्रकट नहीं होते, जिससे ये रोग उग्र रूप ले लेते हैं और श्रोणि शोथज रोग (PID) या बांझपन का कारण बनते हैं।

– बचाव के उपाय:

1. किसी भी अनजान व्यक्ति या अनेक साथियों के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने से पूरी तरह बचना चाहिए।

2. मैथुन के समय हमेशा रोध (जैसे कॉन्डोम) का उचित प्रयोग करना चाहिए।

3. किसी भी प्रकार का संदेह या लक्षण होने पर तुरंत योग्य डॉक्टर से जांच करानी चाहिए और रोग का पूरा इलाज कराना चाहिए।

प्रश्न 12. जैव प्रौद्योगिकी के सिद्धांतों के अंतर्गत ‘बायोरिएक्टर’ (Bioreactor) क्या है? विलोडित हौज बायो-रिएक्टर (Stirred-tank Bioreactor) का सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर: बायोरिएक्टर एक बहुत बड़ा बर्तन या टैंक (लगभग 100 से 1000 लीटर क्षमता का) होता है, जिसमें सूक्ष्मजीवों, पौधों या मानव कोशिकाओं का उपयोग करके कच्चे माल को विशिष्ट वांछित प्रोटीनों या एंजाइमों में जैविक रूप से बदला जाता है। यह कोशिकाओं की वृद्धि के लिए अनुकूलतम तापमान, pH, ऑक्सीजन और पोषण प्रदान करता है।

– विलोडित हौज बायो-रिएक्टर (Stirred-tank Bioreactor) की संरचना: यह सामान्यतः बेलनाकार होता है जिसका आधार घुमावदार (Curved) होता है, जिससे इसके भीतर उपस्थित संवर्धन घोल को आसानी से मिश्रित किया जा सके। इसमें एक विलोडक (Agitator) लगा होता है जो पंखे की तरह घूमकर पूरे घोल में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को समान रूप से फैलाता है। इसमें तापमान नियंत्रक, pH नियंत्रक, झाग संदमन (Foam breaker) प्रणाली और सैंपलिंग पोर्ट होते हैं, जिससे समय-समय पर संवर्धन की थोड़ी मात्रा बाहर निकाल कर जांच की जा सके।

प्रश्न 13. [आनुवंशिकी न्यूमेरिकल] एक वर्णान्ध पुरुष (Colorblind Male) का विवाह एक सामान्य दृष्टि वाली महिला से होता है जिसके पिता भी वर्णान्ध थे। उनकी संतानों में वर्णान्धता की वंशागति का प्रतिशत चेकर बोर्ड द्वारा स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

– जीनोम प्रकृत्ति: वर्णान्ध पुरुष का जीनोटाइप = XcY.
सामान्य महिला जिसके पिता वर्णान्ध थे, वह इस रोग की वाहक (Carrier) होगी, अतः उसका जीनोटाइप = XXc.

– चेकर बोर्ड (संकरण):

युग्मकों के मिलन से: (1) Xc × X → XXc (वाहक पुत्री), (2) Xc × Xc → XcXc (वर्णान्ध पुत्री), (3) Y × X → XY (सामान्य पुत्र), (4) Y × Xc → XcY (वर्णान्ध पुत्र)।

– परिणाम प्रतिशत: कुल संतानों में 50% संतानें वर्णान्ध होंगी (25% वर्णान्ध पुत्र और 25% वर्णान्ध पुत्री) तथा 25% पुत्री वाहक और 25% पुत्र पूरी तरह सामान्य होंगे।

प्रश्न 14. समापन कूट (Termination Codons) क्या होते हैं? किन्हीं तीन समापन कूटों के नाम लिखिए तथा स्पष्ट कीजिए कि इन्हें ‘नॉन-सेंस कोडोन’ क्यों कहते हैं?

उत्तर: प्रोटीन संश्लेषण (अनुवादन) की प्रक्रिया के समय एम-आर.एन.ए. पर उपस्थित वे कूट जो श्रृंखला के विस्तारण को रोक देते हैं और अनुवादन की समाप्ति की घोषणा करते हैं, समापन कूट कहलाते हैं।

– तीनों समापन कूट:UAA (Ochre), UAG (Amber), और UGA (Opal)।

– नॉन-सेंस कोडोन कहने का कारण: इन तीनों कोडोन के लिए साइटोप्लाज्म में कोई भी पूरक टी-आर.एन.ए. (tRNA) या एमिनो अम्ल उपस्थित नहीं होता। जब राइबोसोम इन कोडोन पर पहुँचता है, तो प्रोटीन श्रृंखला में आगे कोई एमिनो अम्ल नहीं जुड़ पाता और प्रक्रिया रुक जाती है, किसी एमिनो अम्ल को कोड न करने के कारण इन्हें नॉन-सेंस कोडोन कहते हैं।

प्रश्न 15. समष्टि अंतर्क्रियाओं के अंतर्गत ‘परभक्षण’ (Predation) क्या है? इसके पारिस्थितिक तंत्र में कोई तीन मुख्य कार्यों या महत्त्वों को विस्तार से समझाइए।

उत्तर: वह पारस्परिक क्रिया जिसमें एक शक्तिशाली प्रजाति (परभक्षी/Predator) अपनी भूख मिटाने के लिए दूसरी कमजोर प्रजाति (शिकार/Prey) को मार कर खा जाती है, परभक्षण कहलाती है। जैसे- शेर और हिरण, या चिड़िया और बीज।

पारिस्थितिक तंत्र में महत्त्व/कार्य:

1. ऊर्जा का स्थानांतरण: पौधे सौर ऊर्जा को बांधते हैं। परभक्षी शाकाहारियों को खाकर इस ऊर्जा को खाद्य श्रृंखला में उच्च पोषण स्तरों तक स्थानांतरित करने का मुख्य माध्यम बनते हैं।

2. शिकार की आबादी पर नियंत्रण: यदि प्रकृति में परभक्षी न हों, तो शिकार (जैसे हिरण या टिड्डे) की संख्या इतनी बढ़ जाएगी कि वे पूरी वनस्पति को नष्ट कर देंगे और पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाएगा।

3. जैव विविधता बनाए रखना: परभक्षी अपने शिकार प्रजातियों के बीच होने वाली आपसी स्पर्धा को कम करते हैं, जिससे एक ही क्षेत्र में कई प्रकार की शिकार प्रजातियाँ एक साथ सह-अस्तित्व में बनी रहती हैं और जैव विविधता सुरक्षित रहती है।

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