
MP BOARD की आगामी अर्द्धवार्षिक/ वार्षिक परीक्षा 2026-27 के लिए कक्षा 12 भौतिकशास्त्र नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2026-27 (MP Board) दिए गए हैं हिंदी के अतिरिक्त इंग्लिश , संस्कृत , भौतिक , रसायन (विज्ञान/ गणित संकाय ) कला संकाय ( इतिहास , राजनीति आदि ) कामर्स संकाय ( एकाउंटेंसी , व्यवसाय अध्ययन ) कृषि संकाय के नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर इस वेबसाईट पर दिए गए है . बोर्ड परीक्षा तक वेबसाईट को दिन में कम से कम एक बार अवश्य चेक करें . नियमित अपडेट होगी .
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अर्द्धवार्षिक परीक्षा कक्षा 12 भौतिकशास्त्र नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2026-27 (MP Board)
🛑 भाग 1: 1 अंक वाले 25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर सहित)
(A) सही विकल्प चुनकर लिखिए (MCQs)
प्रश्न 1. वायु में स्थित एकांक धनआवेश से निकलने वाले कुल वैद्युत फ्लक्स का मान होता है:
(अ) ε0
(ब) 1/ε0
(स) 4πε0
(द) शून्य
उत्तर: (ब) 1/ε0 (गॉस की प्रमेय से)
प्रश्न 2. किसी चालक तार का विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) निम्नलिखित में से किस पर निर्भर करता है?
(अ) तार की लंबाई पर
(ब) तार के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर
(स) तार के पदार्थ की प्रकृति पर
(द) तार के द्रव्यमान पर
उत्तर: (स) तार के पदार्थ की प्रकृति पर
प्रश्न 3. एक गतिमान आवेशित कण उत्पन्न करता है:
(अ) केवल वैद्युत क्षेत्र
(ब) केवल चुम्बकीय क्षेत्र
(स) वैद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (स) वैद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों
प्रश्न 4. भँवर धाराओं (Eddy Currents) का उपयोग निम्नलिखित में से किसमें नहीं किया जाता है?
(अ) प्रेरण भट्टी में
(ब) रेलगाड़ी के चुम्बकीय ब्रेक में
(स) विद्युत धारामापी को रुद्धदोल बनाने में
(द) ट्रांसफार्मर की क्रोड में ऊष्मा उत्पन्न करने में
उत्तर: (द) ट्रांसफार्मर की क्रोड में ऊष्मा उत्पन्न करने में (वहाँ यह ऊर्जा हानि का कारण बनती हैं)
प्रश्न 5. यदि किसी माध्यम का क्रांतिक कोण 45° हो, तो उस माध्यम का अपवर्तनांक (μ) होगा:
(अ) √2
(ब) 1/√2
(स) 2
(द) 1.5
उत्तर: (अ) √2 [μ = 1/sin C = 1/sin 45° = 1/(1/√2) = √2]
(B) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
प्रश्न 6. दो सजातीय आवेश एक-दूसरे को …………….. करते हैं। (आकर्षित / प्रतिकर्षित)
उत्तर: प्रतिकर्षित
प्रश्न 7. आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध …………….. होता है। (शून्य / अनन्त)
उत्तर: अनन्त
प्रश्न 8. ज्यामिति रूप से पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवों पर नमन कोण (Angle of Dip) का मान …………….. होता है।
उत्तर: 90°
प्रश्न 9. लेन्ज का नियम …………….. संरक्षण के नियम पर आधारित है।
उत्तर: ऊर्जा
प्रश्न 10. ओजोन परत वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम की …………….. किरणों का अवशोषण करती है।
उत्तर: पराबैंगनी (UV) किरणों
(C) सही जोड़ी बनाइए
| कॉलम ‘A’ | कॉलम ‘B’ |
|---|---|
| (1) वैद्युत धारिता का मात्रक | (A) मैक्सवेल |
| (2) चुम्बकीय फ्लक्स का S.I. मात्रक | (B) फैराडे (F) |
| (3) विस्थापन धारा (Displacement Current) | (C) तरंगों का अध्यारोपण सिद्धांत |
| (4) तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics) | (D) वेबर (Wb) |
| (5) अवरक्त तरंगे (Infrared Waves) | (E) ऊष्मीय प्रभाव (गर्म वस्तुएं) |
उत्तर (सही मिलान): 1 → (B), 2 → (D), 3 → (A), 4 → (C), 5 → (E)
(D) एक वाक्य / शब्द में उत्तर दीजिए
प्रश्न 16. मूल आवेश (Elementary Charge) का मान कितना होता है?
उत्तर: 1.6 × 10-19 कूलॉम।
प्रश्न 17. विभव प्रवणता (Potential Gradient) का S.I. मात्रक क्या है?
उत्तर: वोल्ट प्रति मीटर (V/m)।
प्रश्न 18. स्वप्रेरकत्व (Self-Inductance) का S.I. मात्रक क्या होता है?
उत्तर: हेनरी (H)।
प्रश्न 19. दृश्य प्रकाश (Visible Light) का तरंगदैर्ध्य परिसर कितना होता है?
उत्तर: लगभग 4000 Å से 8000 Å (या 400 nm से 780 nm) तक।
प्रश्न 20. ज्यामितीय छाया में प्रकाश के मुड़ने की घटना को क्या कहते हैं?
उत्तर: प्रकाश का विवर्तन (Diffraction of Light)।
(E) सत्य या असत्य बताइए
प्रश्न 21. समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface) के प्रत्येक बिंदु पर वैद्युत क्षेत्र रेखाएं पृष्ठ के समानांतर होती हैं।
उत्तर: असत्य (रेखाएं हमेशा पृष्ठ के लंबवत होती हैं)।
प्रश्न 22. चालक का तापमान बढ़ाने पर उसका प्रतिरोध घटता है।
उत्तर: असत्य (धातुओं का प्रतिरोध तापमान बढ़ाने पर बढ़ता है)।
प्रश्न 23. अमीटर को हमेशा परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
उत्तर: सत्य
प्रश्न 24. चोक कुण्डली का उपयोग दिष्ट धारा (D.C.) परिपथ में धारा नियंत्रण के लिए किया जाता है।
उत्तर: असत्य (इसका उपयोग केवल प्रत्यावर्ती धारा – A.C. परिपथ में होता है)।
प्रश्न 25. तरंगान्न (Wavefront) के प्रत्येक बिंदु पर खींचा गया अभिलंब तरंग के संचरण की दिशा को व्यक्त करता है।
उत्तर: सत्य
🛑 भाग 2: 2 अंक वाले 25 लघूत्तरीय प्रश्न (उत्तर सहित)
प्रश्न 1. आवेश के क्वांटीकरण (Quantization of Charge) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: प्रकृति में किसी भी वस्तु पर उपस्थित आवेश हमेशा मूल आवेश ‘e’ (इलेक्ट्रॉनिक आवेश) का एक पूर्ण गुणज होता है। अर्थात q = ±ne, जहाँ n = 1, 2, 3… एक पूर्णांक संख्या है। आवेश को अनिश्चित रूप से विभाजित नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 2. वैद्युत क्षेत्र रेखाओं की कोई दो मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: (1) ये रेखाएं धनआवेश से प्रारंभ होकर ऋणआवेश पर समाप्त होती हैं और बंद लूप नहीं बनातीं। (2) दो क्षेत्र रेखाएं कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटतीं क्योंकि कटान बिंदु पर वैद्युत क्षेत्र की दो दिशाएं संभव नहीं हैं।
प्रश्न 3. समविभव पृष्ठ किसे कहते हैं? इसकी एक विशेषता लिखिए।
उत्तर: वैद्युत क्षेत्र में स्थित वह पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर वैद्युत विभव का मान समान (बराबर) होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है। *विशेषता:* इस पृष्ठ पर किसी आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य शून्य होता है।
प्रश्न 4. पृथ्वी का वैद्युत विभव शून्य क्यों माना जाता है?
उत्तर: पृथ्वी की धारिता अनन्त होती है। इसमें से कुछ आवेश लेने या इसे कुछ आवेश देने पर इसके विभव में कोई व्यावहारिक परिवर्तन नहीं होता। इसलिए इसे संदर्भ विभव मानकर इसका विभव शून्य स्वीकार किया गया है।
प्रश्न 5. ओह्म का नियम लिखिए तथा इसकी सीमा बताइए।
उत्तर: यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएं (जैसे लंबाई, तापमान आदि) अपरिवर्तित रहें, तो चालक के सिरों पर लगाया गया विभवान्तर (V) उसमें बहने वाली धारा (I) के समानुपाती होता है (V = IR)। *सीमा:* यह नियम केवल धात्विक चालकों पर और निश्चित तापमान पर ही लागू होता है।
प्रश्न 6. चालकों में ‘अनुगमन वेग’ (Drift Velocity) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: जब किसी चालक के सिरों पर विभवान्तर लगाया जाता है, तो चालक के भीतर उपस्थित मुक्त इलेक्ट्रॉन एक नियत सूक्ष्म औसत वेग (लगभग 10-4 m/s) से उच्च विभव वाले सिरे की ओर गति करने लगते हैं, इस वेग को अनुगमन वेग कहते हैं।
प्रश्न 7. किरचॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम) किस संरक्षण सिद्धांत पर आधारित है?
उत्तर: किरचॉफ का प्रथम नियम (सन्धिनियम) के अनुसार किसी सन्धि पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजीय योग शून्य होता है (∑I = 0)। यह **आवेश संरक्षण** के सिद्धांत पर आधारित है।
प्रश्न 8. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं और वैद्युत क्षेत्र रेखाओं में एक मुख्य अंतर लिखिए।
उत्तर: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएं हमेशा सतत बंद लूप (Closed Loops) बनाती हैं जो उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव और फिर अंदर से वापस उत्तरी ध्रुव तक जाती हैं, जबकि वैद्युत रेखाएं बंद लूप नहीं बनातीं।
प्रश्न 9. शंट (Shunt) किसे कहते हैं? इसका एक उपयोग लिखिए।
उत्तर: धारामापी (गैल्वेनोमीटर) की कुण्डली को जलने से बचाने के लिए उसके समानांतर क्रम में जोड़ा गया अत्यंत कम प्रतिरोध का तार शंट कहलाता है। उपयोग: इसका उपयोग गैल्वेनोमीटर को अमीटर में बदलने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 10. एम्पियर का परिपथीय नियम लिखिए।
उत्तर: किसी बंद वक्र के परितः चुम्बकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन (∮B•dl), उस बंद वक्र द्वारा घिरे क्षेत्रफल से गुजरने वाली कुल नेट धारा (I) का μ0 गुना होता है। [∮B•dl = μ0I]
प्रश्न 11. चुम्बकीय अवयव ‘नमन कोण’ (Angle of Dip) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: किसी स्थान पर पृथ्वी का कुल चुम्बकीय क्षेत्र क्षैतिज रेखा के साथ जो कोण बनाता है, उसे उस स्थान का नमन कोण कहते हैं। ध्रुवों पर इसका मान 90° और भूमध्य रेखा पर 0° होता है।
प्रश्न 12. स्वप्रेरण (Self-Induction) और अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction) में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: स्वप्रेरण में केवल एक ही कुण्डली होती है जिसमें धारा बदलने पर उसी में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। अन्योन्य प्रेरण में दो पास-पास रखी कुण्डलियाँ होती हैं, जहाँ पहली (प्राथमिक) कुण्डली में धारा बदलने पर दूसरी (द्वितीयक) कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है।
प्रश्न 13. लेन्ज का नियम लिखिए।
उत्तर: वैद्युतचुंबकीय प्रेरण के कारण परिपथ में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उसी कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न हुई है।
प्रश्न 14. भँवर धाराएं क्या हैं? इन्हें कम करने का एक उपाय लिखिए।
उत्तर: जब किसी मोटे धातु के टुकड़े को बदलते हुए चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो धातु के पूरे आयतन में पानी के भँवर जैसी चक्करदार प्रेरित धाराएं उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें भँवर धाराएं कहते हैं। उपाय: ट्रांसफार्मर की क्रोड को पटलित (Laminated) बनाकर इन्हें कम किया जाता है।
प्रश्न 15. प्रत्यावर्ती धारा (A.C.) परिपथ में ‘प्रतिघात’ (Reactance) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: ए.सी. परिपथ में केवल कुण्डली (प्रेरकत्व L) अथवा केवल संधारित्र (धारिता C) द्वारा धारा के प्रवाह में डाले गए मार्ग के अवरोध को प्रतिघात कहते हैं। इसका मात्रक ओह्म होता है।
प्रश्न 16. वॉटहीन धारा (Wattless Current) किसे कहते हैं?
उत्तर: यदि किसी प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में केवल शुद्ध प्रेरकत्व या शुद्ध धारिता हो (प्रतिरोध शून्य हो), तो परिपथ में धारा बहने पर भी औसत ऊर्जा व्यय शून्य रहता है। इस धारा को वॉटहीन धारा कहते हैं।
प्रश्न 17. विस्थापन धारा (Displacement Current) किसे कहते हैं? इसका सूत्र लिखिए।
उत्तर: बदलते हुए वैद्युत क्षेत्र (या वैद्युत फ्लक्स) के कारण शून्य आकाश या संधारित्र की प्लेटों के बीच उत्पन्न होने वाली आभासी धारा को विस्थापन धारा कहते हैं। सूत्र: Id = ε0 (dΦe / dt).
प्रश्न 18. वैद्युतचुंबकीय तरंगों की कोई दो मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: (1) ये तरंगें अनुप्रस्थ तरंगें होती हैं और इन्हें संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती (ये निर्वात में भी चल सकती हैं)। (2) निर्वात में इनकी चाल प्रकाश की चाल (c = 3 × 108 m/s) के बराबर होती है।
प्रश्न 19. अवरक्त तरंगों (Infrared Waves) को ‘ऊष्मा तरंगें’ क्यों कहा जाता है? इनका एक उपयोग लिखिए।
उत्तर: क्योंकि ये तरंगें जब किसी वस्तु पर पड़ती हैं, तो उस वस्तु के परमाणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है जिससे उसका तापमान बढ़ जाता है और ऊष्मा का अहसास होता है। उपयोग: टीवी के रिमोट कंट्रोल में।
Question 20. प्रकाश के परावर्तन के दो नियम लिखिए।
उत्तर: (1) आपतन कोण (∠i) हमेशा परावर्तन कोण (∠r) के बराबर होता है। (2) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब तीनों एक ही समतल में होते हैं।
प्रश्न 21. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के लिए आवश्यक दो शर्तें लिखिए।
उत्तर: (1) प्रकाश की किरण हमेशा सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करनी चाहिए। (2) सघन माध्यम में आपतन कोण का मान उस माध्यम के क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक होना चाहिए।
प्रश्न 22. लेंस की क्षमता (Power of Lens) को परिभाषित कीजिए तथा इसका S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर: लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसरित करने की क्षमता को लेंस क्षमता कहते हैं। यह मीटर में नापी गई फोकस दूरी का व्युत्क्रम होती है (P = 1/f)। इसका मात्रक डायोप्टर (D) है।
प्रश्न 23. प्रकाश के ‘व्यतिकरण’ (Interference) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जब किसी माध्यम में एक ही आवृत्ति और लगभग समान आयाम की दो प्रकाश तरंगें एक ही दिशा में संचरित होती हैं, तो उनके अध्यारोपण के कारण माध्यम के विभिन्न बिंदुओं पर प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन हो जाता है। इस घटना को व्यतिकरण कहते हैं।
प्रश्न 24. कला सम्बद्ध स्रोत (Coherent Sources) क्या होते हैं?
उत्तर: ऐसे दो प्रकाश स्रोत जिनसे निकलने वाली प्रकाश तरंगों के बीच का विभवान्तर (कलान्तर) समय के साथ हमेशा नियत (स्थिर) रहता है या शून्य रहता है, कला सम्बद्ध स्रोत कहलाते हैं।
प्रश्न 25. हाइगेन्स का तरंग सिद्धांत क्या है?
उत्तर: हाइगेन्स के अनुसार प्रकाश तरंगों के रूप में चलता है। ये तरंगें स्रोत से निकलकर सर्वदिशाओं में माध्यम के कणों को कंपित करती हैं। इन तरंगों के संचरण के लिए उन्होंने एक काल्पनिक सर्वव्यापी माध्यम ‘ईथर’ की कल्पना की थी।
🛑 भाग 3: 3 अंक वाले 20 महत्वपूर्ण प्रश्न (हल व न्यूमेरिकल सहित)
प्रश्न 1. गॉस की प्रमेय लिखिए तथा इसकी सहायता से किसी बिंदु आवेश के कारण वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का सूत्र स्थापित कीजिए।
हल:गॉस की प्रमेय: किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल वैद्युत फ्लक्स (Φe), उस पृष्ठ के भीतर उपस्थित कुल नेट आवेश (q) का 1/ε0 गुना होता है। [Φe = ∮E•dS = q/ε0]
व्युत्पत्ति: माना एक बिंदु आवेश +q केंद्र O पर स्थित है। इससे r दूरी पर एक गॉसियन गोलीय पृष्ठ की कल्पना करते हैं। पृष्ठ के एक सूक्ष्म अवयव dS से गुजरने वाला फ्लक्स dΦ = E•dS = E•dS cos 0° = E•dS.
संपूर्ण पृष्ठ के लिए समाकलन करने पर: Φ = ∮E•dS = E ∮dS = E × (4πr2).
गॉस की प्रमेय से, Φ = q/ε0 ⇒ E × 4πr2 = q/ε0 ⇒ E = 1 / (4πε0) • q/r2
प्रश्न 2. वैद्युत द्विध्रुव किसे कहते हैं? इसके कारण अक्षीय (End-on) स्थिति में किसी बिंदु पर वैद्युत विभव का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
हल: जब दो बराबर और विपरीत बिंदु आवेश एक-दूसरे से बहुत अल्प दूरी (2l) पर स्थित हों, तो इस निकाय को वैद्युत द्विध्रुव कहते हैं।
अक्षीय स्थिति में विभव: माना द्विध्रुव के केंद्र O से अक्ष पर r दूरी पर एक बिंदु P स्थित है।
+q आवेश के कारण P पर विभव V1 = 1/(4πε0) • q/(r – l)
-q आवेश के कारण P पर विभव V2 = 1/(4πε0) • (-q)/(r + l)
कुल विभव V = V1 + V2 = q/(4πε0) [1/(r – l) – 1/(r + l)] = q/(4πε0) • [2l / (r2 – l2)]
चूँकि q × 2l = p (वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण) और r >> l है, अतः V = 1 / (4πε0) • p/r2
प्रश्न 3. समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता का व्यंजक स्थापित कीजिए जब प्लेटों के बीच निर्वात हो।
हल: माना संधारित्र की दो प्लेटें A और B हैं, जिनका क्षेत्रफल A है और उनके बीच की दूरी d है। प्लेटों पर आवेश का पृष्ठ घनत्व σ = q/A है।
प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र E = σ / ε0 = q / (ε0A).
प्लेटों के बीच विभवान्तर V = E • d = qd / (ε0A).
धारिता की परिभाषा से, C = q / V = q / [qd / (ε0A)] ⇒ C = ε0A / d
प्रश्न 4. अनुगमन वेग और विद्युत धारा में संबंध स्थापित कीजिए।
हल: माना एक चालक तार की लंबाई l और उसके अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A है। चालक के प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या n है। चालक का कुल आयतन = A • l. कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या = nAl. कुल आवेश q = nAle.
यदि इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग vd हो, तो चालक को पार करने में लगा समय t = l / vd.
विद्युत धारा I = q / t = (nAle) / (l / vd) ⇒ I = nAevd
प्रश्न 5. विभवमापी (Potentiometer) का सिद्धांत समझाइए। यह वोल्टमीटर से किस प्रकार श्रेष्ठ है?
हल:सिद्धांत: जब किसी एकसमान अनुप्रस्थ काट वाले तार में नियत धारा प्रवाहित की जाती है, तो तार के किसी भी भाग के सिरों पर होने वाला विभव पतन (V) उस भाग की लंबाई (l) के समानुपाती होता है (V ∝ l ⇒ V = kl, जहाँ k विभव प्रवणता है)।
श्रेष्ठता: वोल्टमीटर मापन के समय परिपथ से कुछ धारा स्वयं लेता है, जिससे मापा गया विभवान्तर वास्तविक मान से थोड़ा कम होता है। इसके विपरीत, विभवमापी ‘शून्य विक्षेप’ (Null Deflection) की स्थिति में परिपथ से कोई धारा नहीं लेता, अतः यह बिल्कुल शुद्ध विद्युत वाहक बल (EMF) मापता है। इसे आदर्श वोल्टमीटर भी कहते हैं।
प्रश्न 6. बायो-सेवर्ट का नियम लिखिए तथा इसके आधार पर चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र (Vector Form) व्यक्त कीजिए।
हल: बायो-सेवर्ट के अनुसार किसी धारावाही अवयव dl के कारण r दूरी पर स्थित बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र dB का मान:
(1) धारा I के समानुपाती (dB ∝ I), (2) अवयव की लंबाई के समानुपाती (dB ∝ dl), (3) कोण की ज्या के समानुपाती (dB ∝ sinθ), (4) दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती (dB ∝ 1/r2) होता है।
संयुक्त रूप से: dB = (μ0 / 4π) • (I dl sinθ / r2).
सदिश रूप (Vector Form):dB = (μ0 / 4π) • I (dl × r̂) / r2 = (μ0 / 4π) • I (dl × r⃗) / r3
प्रश्न 7. एक लंबे सीधे धारावाही चालक तार के कारण r दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक एम्पियर के परिपथीय नियम की सहायता से ज्ञात कीजिए।
हल: माना एक सीधा लंबा तार है जिसमें I धारा बह रही है। तार से r दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र B ज्ञात करने के लिए r त्रिज्या के एक वृत्ताकार एम्पियर लूप की कल्पना करते हैं।
लूप के परितः रेखीय समाकलन: ∮B•dl = ∮B dl cos 0° = B ∮dl = B × (2πr).
एम्पियर के नियम से, ∮B•dl = μ0I ⇒ B × (2πr) = μ0I ⇒ B = μ0I / (2πr)
प्रश्न 8. दो समानांतर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले बल का सूत्र लिखिए। यह बल कब आकर्षणात्मक और कब प्रतिकर्षणात्मक होता है?
हल: दो सीधे समानांतर तारों के प्रति एकांक लंबाई पर लगने वाला चुंबकीय बल: F/l = (μ0 / 2π) • (I1I2 / d), जहाँ d तारों के बीच की दूरी है।
– यदि दोनों तारों में धारा एक ही दिशा (Same Direction) में बह रही हो, तो उनके बीच आकर्षण बल कार्य करता है।
– यदि दोनों तारों में धारा विपरीत दिशा (Opposite Direction) में बह रही हो, तो उनके बीच प्रतिकर्षण बल कार्य करता है।
प्रश्न 9. चुम्बकीय फ्लक्स किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखिए तथा फैराडे के वैद्युतचुंबकीय प्रेरण का द्वितीय नियम समझाइए।
हल:चुम्बकीय फ्लक्स: किसी चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित पृष्ठ के लंबवत गुजरने वाली कुल चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की संख्या को चुम्बकीय फ्लक्स (ΦB) कहते हैं। इसका मात्रक वेबर (Wb) है।
फैराडे का द्वितीय नियम: किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (e) का मान, चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की ऋणात्मक दर के बराबर होता है। [e = – dΦB / dt]. ऋणात्मक चिह्न लेन्ज के नियम (विरोध करने के गुण) को दर्शाता है।
प्रश्न 10. स्वप्रेरकत्व (Self-Inductance) किसे कहते हैं? एक लंबी परिनालिका (Solenoid) के स्वप्रेरकत्व का सूत्र स्थापित कीजिए।
हल: किसी कुण्डली से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स उसमें बहने वाली धारा के समानुपाती होता है (Φ = LI, जहाँ L स्वप्रेरकत्व गुणांक है)।
परिनालिका का स्वप्रेरकत्व: माना एक परिनालिका की लंबाई l, अनुप्रस्थ काट A तथा कुल फेरे N हैं। इसके भीतर चुम्बकीय क्षेत्र B = μ0NI / l.
कुल फ्लक्स Φ = N • B • A = N × (μ0NI / l) × A = μ0N2IA / l.
L = Φ / I से तुलना करने पर: L = μ0N2A / l
प्रश्न 11. प्रत्यावर्ती धारा परिपथ के लिए सिद्ध कीजिए कि औसत शक्ति Pavg = Vrms • Irms • cosφ होती है।
हल: माना किसी परिपथ में विभवान्तर v = Vm sinωt और धारा i = Im sin(ωt – φ) है।
तात्क्षणिक शक्ति p = v • i = VmIm sinωt • sin(ωt – φ).
त्रिकोणमितीय सूत्र 2 sinA sinB = cos(A-B) – cos(A+B) का उपयोग करने पर:
p = (VmIm / 2) [cosφ – cos(2ωt – φ)].
एक पूर्ण चक्र के लिए cos(2ωt – φ) का औसत मान शून्य होता है।
अतः औसत शक्ति Pavg = (Vm/√2) • (Im/√2) • cosφ ⇒ Pavg = Vrms • Irms • cosφ (जहाँ cosφ परिपथ का शक्ति गुणांक है)।
प्रश्न 12. वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम में उपस्थित तरंगों को आवृत्ति के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए तथा मैक्सवेल के समीकरणों का महत्त्व बताइए।
हल:स्पेक्ट्रम का बढ़ता आवृत्ति क्रम: रेडियो तरंगें < सूक्ष्म तरंगें (Microwaves) < अवरक्त किरणें < दृश्य प्रकाश < पराबैंगनी किरणें < एक्स-किरणें < गामा किरणें (γ-rays). गामा किरणों की आवृत्ति सर्वाधिक होती है।
मैक्सवेल के समीकरणों का महत्त्व: मैक्सवेल ने चार मूलभूत समीकरणों द्वारा संपूर्ण वैद्युतगतिकी, स्थिरवैद्युतिकी और चुम्बकत्व के नियमों को एकीकृत किया और यह गणितीय रूप से सिद्ध किया कि प्रकाश भी एक वैद्युतचुंबकीय तरंग ही है।
प्रश्न 13. गोलीय दर्पण के लिए दर्पण सूत्र स्थापित कीजिए: 1/f = 1/v + 1/u।
हल: माना एक अवतल दर्पण के सामने मुख्य अक्ष पर एक वस्तु AB स्थित है, जिसका प्रतिबिंब A’B’ बनता है। समरूप त्रिभुजों ΔABC और ΔA’B’C से:
AB / A’B’ = BC / B’C = (PC – PB) / (PB’ – PC) — (1)
इसी प्रकार ध्रुव P के समीप अन्य समरूप त्रिभुजों से तुलना करने पर:
AB / A’B’ = PB / PB’ — (2)
समीकरण (1) और (2) से: (PC – PB) / (PB’ – PC) = PB / PB’.
चिह्न परिपाटी का उपयोग करने पर: PB = -u, PB’ = -v, PC = -R = -2f.
(-2f – (-u)) / (-v – (-2f)) = -u / -v ⇒ (-2f + u) / (-v + 2f) = u / v.
तिर्यक गुणा करके हल करने पर uv = 2vf + 2uf. दोनों पक्षों में uvf से भाग देने पर: 1/f = 1/v + 1/u. इति सिद्धम्।
प्रश्न 14. किसी गोलीय पृष्ठ (उत्तल या अवतल) पर अपवर्तन के लिए सूत्र लिखिए तथा इसके आधार पर पतले लेंस के लिए लेंस मेकर सूत्र स्थापित कीजिए।
हल: गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन का सूत्र होता है: μ/v – 1/u = (μ – 1)/R.
लेंस मेकर सूत्र: माना एक पतला लेंस है जिसके दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याएँ R1 और R2 हैं।
प्रथम पृष्ठ पर अपवर्तन से: μ/v’ – 1/u = (μ – 1)/R1 — (1)
द्वितीय पृष्ठ के लिए v’ वस्तु का कार्य करेगा और अंतिम प्रतिबिंब v पर बनेगा: 1/v – μ/v’ = (1 – μ)/R2 = -(μ – 1)/R2 — (2)
समीकरण (1) और (2) को जोड़ने पर: 1/v – 1/u = (μ – 1) [1/R1 – 1/R2].
यदि वस्तु अनन्त (u=&inf;) पर हो, तो प्रतिबिंब फोकस (v=f) पर बनता है। अतः: 1/f = (μ – 1) [1/R1 – 1/R2]
प्रश्न 15. यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग (Young’s Double Slit Experiment) में फ्रिंज चौड़ाई (β) का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
हल: माना दो कला सम्बद्ध स्रोत S1 और S2 हैं जिनके बीच की दूरी d है और पर्दे की दूरी D है। पर्दे के किसी बिंदु P पर दोनों तरंगों के बीच पथान्तर Δx = S2P – S1P = x•d / D, जहाँ x केंद्रीय फ्रिंज से P की दूरी है।
दीप्त (Bright) फ्रिंजों के लिए, पथान्तर Δx = nλ ⇒ x•d / D = nλ ⇒ xn = nλD / d.
दो क्रमागत दीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी को फ्रिंज चौड़ाई (β) कहते हैं:
β = xn+1 – xn = (幕n+1)λD/d – nλD/d ⇒ β = λD / d
प्रश्न 16. [न्यूमेरिकल] दो बिंदु आवेश +9e और +e एक-दूसरे से 16 सेमी की दूरी पर स्थित हैं। इनके बीच एक तीसरा आवेश q कहाँ रखा जाए कि वह संतुलन में हो?
हल: माना तीसरा आवेश q, +9e आवेश से x दूरी पर रखा जाता है। तो +e आवेश से उसकी दूरी (16 – x) होगी।
संतुलन की स्थिति में दोनों आवेशों द्वारा q पर लगाया गया बल बराबर होना चाहिए:
1/(4πε0) • (9e × q) / x2 = 1/(4πε0) • (e × q) / (16 – x)2
9 / x2 = 1 / (16 – x)2 ⇒ दोनों ओर वर्गमूल लेने पर: 3 / x = 1 / (16 – x)
3(16 – x) = x ⇒ 48 – 3x = x ⇒ 4x = 48 ⇒ x = 12 सेमी.
अतः तीसरा आवेश +9e आवेश से 12 सेमी की दूरी पर रखा जाना चाहिए।
प्रश्न 17. [न्यूमेरिकल] एक समांतर प्लेट संधारित्र की प्लेटों का क्षेत्रफल 6 × 10-3 m2 है तथा उनके बीच की दूरी 3 मिमी है। इसकी धारिता परिकलित कीजिए। (दिया है ε0 = 8.85 × 10-12 F/m)
हल: A = 6 × 10-3 m2, d = 3 मिमी = 3 × 10-3 m.
सूत्र: C = ε0A / d = (8.85 × 10-12 × 6 × 10-3) / (3 × 10-3)
C = 8.85 × 10-12 × 2 = 17.7 × 10-12 F = 17.7 pF (पिकोफैराडे)
प्रश्न 18. [न्यूमेरिकल] एक कार की स्टोरेज बैटरी का विद्युत वाहक बल (EMF) 12 वोल्ट है। यदि बैटरी का आंतरिक प्रतिरोध 0.4 ओह्म हो, तो बैटरी से ली जाने वाली अधिकतम धारा का मान क्या होगा?
हल: E = 12 V, r = 0.4 Ω.
अधिकतम धारा (Maximum Current) के लिए बाह्य प्रतिरोध R = 0 होना चाहिए।
सूत्र: Imax = E / r = 12 / 0.4 = 120 / 4 = 30 एम्पियर
प्रश्न 19. [न्यूमेरिकल] एक 200 Ω का प्रतिरोधक और 15 μF का संधारित्र एक 220 V, 50 Hz के ए.सी. स्रोत से श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। परिपथ की कुल प्रतिबाधा (Impedance) ज्ञात कीजिए।
हल: R = 200 Ω, C = 15 × 10-6 F, f = 50 Hz.
धारितीय प्रतिघात XC = 1 / (2πfC) = 1 / (2 × 3.14 × 50 × 15 × 10-6) = 106 / 4710 ≈ 212.3 Ω.
प्रतिबाधा Z = √(R2 + XC2) = √(2002 + 212.32) = √(40000 + 45071) = √85071 ≈ 291.6 Ω
प्रश्न 20. [न्यूमेरिकल] एक प्रकाश किरण हवा से 1.5 अपवर्तनांक वाले कांच के स्लैब में प्रवेश करती है। कांच में प्रकाश की चाल क्या होगी? (निर्वात में प्रकाश की चाल c = 3 × 108 m/s)
हल: μ = 1.5, c = 3 × 108 m/s.
सूत्र: μ = c / v ⇒ v = c / μ = (3 × 108) / 1.5 = 2 × 108 m/s
🛑 भाग 4: 4/5 अंक वाले 15 दीर्घ उत्तरीय विश्लेषणात्मक प्रश्न (पूर्ण हल)
प्रश्न 1. वैद्युत द्विध्रुव किसे कहते हैं? इसके कारण निरक्षीय (Broadside-on) स्थिति में किसी बिंदु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक विस्तार से स्थापित कीजिए।
हल:निरक्षीय स्थिति में तीव्रता: माना एक वैद्युत द्विध्रुव AB जिसके आवेश -q और +q हैं और लम्बाई 2l है, के केंद्र O से लंब अर्द्धक रेखा पर r दूरी पर एक बिंदु P स्थित है।
+q आवेश के कारण P पर तीव्रता E1 = 1/(4πε0) • q / (r2 + l2) (दिशा BP के अनुदिश)
-q आवेश के कारण P पर तीव्रता E2 = 1/(4πε0) • q / (r2 + l2) (दिशा PA के अनुदिश)
दोनों तीव्रताओं के परिमाण समान हैं (E1 = E2)। लंबवत घटक (E1sinθ और E2sinθ) एक-दूसरे को निरस्त कर देंगे, और क्षैतिज घटक (cosθ) आपस में जुड़ जाएँगे।
कुल तीव्रता E = E1cosθ + E2cosθ = 2E1cosθ.
चित्र से cosθ = आधार/कर्ण = l / √(r2 + l2).
मान रखने पर: E = 2 × [1/(4πε0) • q/(r2 + l2)] × [l / (r2 + l2)1/2] = 1/(4πε0) • (q×2l) / (r2 + l2)3/2.
चूँकि q×2l = p और r >> l है, अतः l2 को नगण्य मानने पर: E = 1 / (4πε0) • p/r3
प्रश्न 2. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) का परिपथ चित्र बनाइए तथा किरचॉफ के नियमों का उपयोग करके इसकी संतुलन की शर्त P/Q = R/S स्थापित कीजिए।
हल: व्हीटस्टोन सेतु में चार प्रतिरोध P, Q, R, S एक चतुर्भुज ABCD के रूप में जुड़े होते हैं। विकर्ण AC के बीच एक सेल और विकर्ण BD के बीच एक गैल्वेनोमीटर (G) जुड़ा होता है।
संतुलन की स्थिति: जब सेतु संतुलित होता है, तो गैल्वेनोमीटर में कोई धारा नहीं बहती (Ig = 0), जिससे बिंदु B और D का विभव समान होता है।
किरचॉफ के द्वितीय नियम (लूप नियम) से बंद पाश ABDA में:
I1P – I2R = 0 ⇒ I1P = I2R — (1)
इसी प्रकार बंद पाश BCDB में:
I1Q – I2S = 0 ⇒ I1Q = I2S — (2)
समीकरण (1) को (2) से भाग देने पर:
(I1P) / (I1Q) = (I2R) / (I2S) ⇒ P / Q = R / S. यही व्हीटस्टोन सेतु के संतुलन की आवश्यक शर्त है।
प्रश्न 3. साइक्लोट्रॉन (Cyclotron) क्या है? इसके सिद्धांत, कार्यविधि और आवृत्ति (Cyclotron Frequency) के लिए सूत्र का सविस्तार वर्णन कीजिए।
हल:परिभाषा: साइक्लोट्रॉन एक ऐसी युक्ति है जिसका उपयोग धनआवेशित कणों (जैसे प्रोटॉन, अल्फा कण) को अत्यधिक उच्च वेग और ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए किया जाता है।
सिद्धांत: जब एक आवेशित कण एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र के लंबवत गति करता है, तो वह वृत्ताकार मार्ग पर घूमने लगता है। यदि इस पर एक निश्चित आवृत्ति का उच्च प्रत्यावर्ती वैद्युत क्षेत्र लगाया जाए, तो कण प्रत्येक चक्कर में त्वरित होकर सर्पिलाकार मार्ग पर अपनी त्रिज्या और ऊर्जा बढ़ाता जाता है।
आवृत्ति का सूत्र: वृत्ताकार मार्ग पर आवश्यक अभिकेंद्र बल = चुंबकीय लॉरेंज बल
mv2 / r = qvB ⇒ v = qBr / m.
एक चक्कर लगाने में लगा समय T = 2πr / v = 2πr / (qBr / m) = 2πm / qB.
साइक्लोट्रॉन आवृत्ति ν = 1 / T ⇒ ν = qB / (2πm). (यह दर्शाता है कि आवृत्ति कण की त्रिज्या या वेग पर निर्भर नहीं करती)।
प्रश्न 4. ट्रांसफार्मर (Transformer) का वर्णन निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर कीजिए: (1) सिद्धांत, (2) प्रकार, (3) परिणमन अनुपात का सूत्र, (4) ऊर्जा क्षय के कारण।
हल:
– 1. सिद्धांत: यह अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction) के सिद्धांत पर कार्य करने वाली एक ऐसी युक्ति है जो प्रत्यावर्ती विभवान्तर को बदलने (कम या अधिक करने) के काम आती है। यह दिष्ट धारा (D.C.) पर कार्य नहीं करता।
– 2. प्रकार: यह दो प्रकार का होता है: (i) ऊंचाई ट्रांसफार्मर (Step-up): जो कम ए.सी. विभव को उच्च ए.सी. विभव में बदलता है। (ii) अपचायी ट्रांसफार्मर (Step-down): जो उच्च विभव को कम विभव में बदलता है।
– 3. परिणमन अनुपात (Transformation Ratio): द्वितीयक कुण्डली के फेरों (Ns) और प्राथमिक के फेरों (Np) का अनुपात परिणमन अनुपात (k) कहलाता है। [k = Ns / Np = Vs / Vp = Ip / Is]. ऊंचाई ट्रांसफार्मर के लिए k > 1 होता है।
– 4. ऊर्जा क्षय के कारण: (i) ताम्र हानि: कुण्डली के तारों के प्रतिरोध के कारण ऊष्मा (I2Rt) के रूप में ऊर्जा हानि। (ii) भँवर धारा हानि: लोहे की क्रोड में भँवर धाराओं के कारण ऊष्मा हानि (इसे कम करने के लिए पटलित क्रोड बनाते हैं)। (iii) शैथिल्य हानि: क्रोड के बार-बार चुम्बकित और विचुम्बकित होने में ऊर्जा की हानि।
प्रश्न 5. L-C-R श्रेणीक्रम प्रत्यावर्ती धारा परिपथ के लिए प्रतिबाधा (Impedance) और कलान्तर (Phase Angle) का व्यंजक फेज़र आरेख (Phasor Diagram) की सहायता से ज्ञात कीजिए।
हल: माना एक ए.सी. परिपथ में प्रेरकत्व L, संधारित्र C और प्रतिरोध R श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। परिपथ में बहने वाली धारा I है।
R के सिरों पर विभवान्तर VR = IR (धारा की कला में), L के सिरों पर VL = IXL (धारा से 90° अग्रगामी), C के सिरों पर VC = IXC (धारा से 90° पश्चगामी) है।
फेज़र आरेख से परिणामी विभवान्तर V = √[VR2 + (VL – VC)2]
V = √[(IR)2 + (IXL – IXC)2] = I • √[R2 + (XL – XC)2].
परिपथ की प्रतिबाधा Z = V / I ⇒ Z = √[R2 + (XL – XC)2], जहाँ XL = ωL और XC = 1/ωC है।
कलान्तर (φ): tanφ = (VL – VC) / VR ⇒ tanφ = (XL – XC) / R
प्रश्न 6. खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical Telescope) का वर्णन कीजिए जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (d) पर बने। आवर्धन क्षमता का सूत्र स्थापित कीजिए।
हल: खगोलीय दूरदर्शी में दो उत्तल लेंस होते हैं: अभिदृश्यक लेंस (बड़ा आकार व बड़ी फोकस दूरी Fo) और नेत्रिका लेंस (छोटा आकार व कम फोकस दूरी fe)। दूर स्थित वस्तु से आने वाली समानांतर किरणें अभिदृश्यक के फोकस पर एक वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब A’B’ बनाती हैं। नेत्रिका को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि A’B’ उसके फोकस के अंदर आ जाए, जिससे उसका अंतिम बड़ा, आभासी और उल्टा प्रतिबिंब पर्दे पर स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (D) पर बनता है।
आवर्धन क्षमता का सूत्र: m = β / α ≈ tanβ / tanα.
चित्र से तुलना करने पर m = – Fo / ue.
नेत्रिका लेंस के लिए लेंस सूत्र (1/v – 1/u = 1/f) लगाने पर, जहाँ v = -D और u = -ue है:
1/-D – 1/-ue = 1/fe ⇒ 1/ue = 1/fe + 1/D = 1/fe [1 + fe/D].
यह मान m के सूत्र में रखने पर: m = – (Fo / fe) • [1 + fe / D]
प्रश्न 7. प्रकाश के ‘विवर्तन’ से क्या तात्पर्य है? एकल झिरी (Single Slit) के कारण प्रकाश के विवर्तन का प्रारूप और केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
हल: जब प्रकाश किसी सूक्ष्म अवरोध या तीक्ष्ण किनारे पर पड़ता है, तो वह ज्यामितीय छाया की ओर मुड़ जाता है, इसे प्रकाश का विवर्तन कहते हैं।
एकल झिरी से विवर्तन: माना a चौड़ाई की एक झिरी (Slit) है जिस पर λ तरंगदैर्ध्य का समतल तरंगान्न आपतित होता है। झिरी के विभिन्न भागों से निकलने वाली द्वितीयक तरंगिकाएं जब पर्दे पर मिलती हैं, तो केंद्रीय बिंदु पर सभी समान कला में होती हैं, जिससे वहाँ केंद्रीय उच्चिष्ठ (Central Maxima) बनता है, जिसकी तीव्रता सर्वाधिक होती है।
अनंत पर विवर्तन कोण θ के लिए प्रथम निम्निष्ठ (Minimum) की शर्त: a sinθ = λ ⇒ sinθ ≈ θ = λ/a.
केंद्रीय उच्चिष्ठ दोनों तरफ के प्रथम निम्निष्ठों के बीच फैला होता है। अतः कोणीय चौड़ाई 2θ = 2λ/a.
यदि पर्दे की दूरी D हो, तो रैखिक चौड़ाई w = 2λD / a होती है।
प्रश्न 8. [न्यूमेरिकल] एक कुंडली का स्वप्रेरकत्व 0.5 हेनरी है। इसमें विद्युत धारा 0.1 सेकंड में 5 एम्पियर से घटकर शून्य हो जाती है। कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का मान ज्ञात कीजिए।
हल: L = 0.5 H, dt = 0.1 s, dI = Ifinal – Iinitial = 0 – 5 = -5 A.
सूत्र: e = – L (dI / dt)
e = – 0.5 × (-5 / 0.1) = – 0.5 × (-50) = +25 वोल्ट.
अतः कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल 25 वोल्ट होगा।
प्रश्न 9. [न्यूमेरिकल] एक उत्तल लेंस की दोनों सतहों की वक्रता त्रिज्याएँ क्रमशः 20 सेमी और 30 सेमी हैं। यदि कांच का अपवर्तनांक 1.5 हो, तो लेंस की फोकस दूरी और क्षमता ज्ञात कीजिए।
हल: R1 = +20 सेमी, R2 = -30 सेमी (चिह्न परिपाटी से), μ = 1.5.
लेंस मेकर सूत्र से: 1/f = (μ – 1) [1/R1 – 1/R2]
1/f = (1.5 – 1) [1/20 – (1/-30)] = 0.5 × [1/20 + 1/30] = 0.5 × [5 / 60] = 0.5 × 1/12 = 1/24.
f = 24 सेमी = 0.24 मीटर.
लेंस क्षमता P = 1 / f(मीटर में) = 1 / 0.24 = 100 / 24 = +4.17 D (डायोप्टर)
प्रश्न 10. हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धांत (Theory of Secondary Wavelets) के आधार पर प्रकाश के अपवर्तन के नियमों (स्नेल के नियम) की पुष्टि कीजिए।
हल: माना एक समतल तरंगान्न AB दो माध्यमों (अपवर्तनांक μ1 व μ2) के सीमा पृष्ठ ZY पर आपतित होता है। पहले माध्यम में प्रकाश की चाल v1 और दूसरे में v2 है।
माना तरंगान्न का सिरा B पृष्ठ को बिंदु A’ पर t समय में छूता है, अतः BA’ = v1t.
इसी समय में बिंदु A से द्वितीयक तरंगिकाएं दूसरे माध्यम में v2t दूरी तय कर लेंगी, अतः हम A को केंद्र मानकर v2t त्रिज्या का एक चाप खींचते हैं और A’ से स्पर्श रेखा A’B’ खींचते हैं। यह A’B’ अपवर्तित तरंगान्न है।
समकोण त्रिभुज ΔABA’ में: sin i = BA’ / AA’ = v1t / AA’ — (1)
समकोण त्रिभुज ΔAB’A’ में: sin r = AB’ / AA’ = v2t / AA’ — (2)
समीकरण (1) को (2) से भाग देने पर:
sin i / sin r = (v1t / AA’) / (v2t / AA’) = v1 / v2.
चूँकि v1/v2 = μ2/μ1 = 1μ2 (एक स्थिरांक) होता है, अतः:
sin i / sin r = स्थिरांक (μ). यही स्नेल का अपवर्तन का नियम है। इति सिद्धम्।
प्रश्न 11. स्थिरवैद्युतिकी में ‘कूलॉम का व्युत्क्रम वर्ग का नियम’ लिखिए तथा इसके आधार पर एकांक आवेश (Unit Charge) को परिभाषित कीजिए। इसकी सीमाएँ भी बताइए।
हल:नियम: किन्हीं दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला आकर्षण या प्रतिकर्षणात्मक बल (F) दोनों आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। [F = 1/(4πε0) • q1q2/r2]
एकांक आवेश की परिभाषा: यदि F = 9 × 109 न्यूटन, r = 1 मीटर और q1 = q2 = q हो, तो:
9 × 109 = (9 × 109) • q2 / 12 ⇒ q2 = 1 ⇒ q = ±1 कूलॉम.
“अर्थात यदि समान परिमाण के दो सजातीय आवेश निर्वात में 1 मीटर की दूरी पर रखने से एक-दूसरे को 9 × 109 न्यूटन के बल से प्रतिकर्षित करें, तो प्रत्येक आवेश एकांक आवेश कहलाता है।”
सीमाएँ: (1) यह नियम केवल बिंदु आवेशों (Point Charges) के लिए सत्य है। (2) यह केवल स्थिर आवेशों पर लागू होता है, गतिमान आवेशों पर नहीं।
प्रश्न 12. वैद्युत धारिता किसे कहते हैं? श्रेणीक्रम (Series) और समानांतर क्रम (Parallel) में जुड़े संधारित्रों की कुल धारिता के लिए सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
हल: किसी चालक को दिए गए आवेश (q) और उसके कारण विभव में हुई वृद्धि (V) के अनुपात को वैद्युत धारिता कहते हैं (C = q/V)।
– 1. श्रेणीक्रम संयोजन: इसमें सभी संधारित्रों पर आवेश q समान होता है, विभवान्तर V अलग होता है (V = V1 + V2 + V3)।
q/C = q/C1 + q/C2 + q/C3 ⇒ 1/C = 1/C1 + 1/C2 + 1/C3
– 2. समानांतर क्रम संयोजन: इसमें सभी संधारित्रों के सिरों पर विभवान्तर V समान होता है, आवेश अलग होता है (q = q1 + q2 + q3)।
CV = C1V + C2V + C3V ⇒ C = C1 + C2 + C3
प्रश्न 13. [न्यूमेरिकल] एक कुण्डली का प्रतिरोध 30 Ω है तथा प्रेरण प्रतिघात (XL) 40 Ω है। इसे 220 V, 50 Hz के प्रत्यावर्ती स्रोत से जोड़ा गया है। परिपथ में बहने वाली धारा और शक्ति गुणांक (Power Factor) का मान ज्ञात कीजिए।
हल: R = 30 Ω, XL = 40 Ω, Vrms = 220 V.
प्रतिबाधा Z = √(R2 + XL2) = √(302 + 402) = √(900 + 1600) = √2500 = 50 Ω.
परिपथ में धारा Irms = Vrms / Z = 220 / 50 = 4.4 एम्पियर.
शक्ति गुणांक cosφ = R / Z = 30 / 50 = 0.6 (यह एक इकाई रहित शुद्ध संख्या है)।
प्रश्न 14. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) का किरण आरेख बनाइए तथा इसकी कुल आवर्धन क्षमता का सूत्र तब स्थापित कीजिए जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बने।
हल: संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में दो उत्तल लेंस होते हैं: अभिदृश्यक (कम फोकस दूरी fo) और नेत्रिका (बड़ी फोकस दूरी fe)। पास रखी सूक्ष्म वस्तु AB का अभिदृश्यक द्वारा बड़ा और वास्तविक प्रतिबिंब A’B’ बनता है, जो नेत्रिका के फोकस के अंदर होता है। नेत्रिका इसका अंतिम बहुत बड़ा, आभासी और उल्टा प्रतिबिंब A”B” स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी D पर बनाती है।
आवर्धन क्षमता का सूत्र: m = mo × me.
अभिदृश्यक का रेखीय आवर्धन mo = vo / -uo.
नेत्रिका का सरल सूक्ष्मदर्शी की तरह आवर्धन me = [1 + D/fe].
संयुक्त रूप से कुल आवर्धन: m = – (vo / uo) • [1 + D / fe]
प्रश्न 15. तरंगों के ‘अध्यारोपण का सिद्धांत’ क्या है? इसके आधार पर प्रकाश के संपोषी (Constructive) और विनाशी (Destructive) व्यतिकरण के लिए आवश्यक कलान्तर (φ) और पथान्तर (Δx) की शर्तें विस्तार से लिखिए।
हल:सिद्धान्त: जब दो या दो से अधिक तरंगें माध्यम में चलकर एक साथ किसी बिंदु पर अध्यारोपित होती हैं, तो उस बिंदु का परिणामी विस्थापन (y) दोनों तरंगों के अलग-अलग विस्थापनों के सदिश योग के बराबर होता है (y⃗ = y⃗1 + y⃗2)।
इसके आधार पर परिणामी तीव्रता I = I1 + I2 + 2√(I1I2) cosφ होती है।
– 1. संपोषी व्यतिकरण (चमकदार फ्रिंज): जहाँ तीव्रता अधिकतम होती है। इसके लिए cosφ = +1 होना चाहिए।
कलान्तर शर्त: φ = 0, 2π, 4π… = 2nπ (जहाँ n=0,1,2…)
पथान्तर शर्त: Δx = λ/2π • φ = nλ
– 2. विनाशी व्यतिकरण (काली फ्रिंज): जहाँ तीव्रता न्यूनतम (शून्य) होती है। इसके लिए cosφ = -1 होना चाहिए।
कलान्तर शर्त: φ = π, 3π, 5π… = (2n – 1)π (जहाँ n=1,2…)
पथान्तर शर्त: Δx = (2n – 1)λ/2 (तरंगदैर्ध्य का अर्ध विषम गुणज)।
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