
MP BOARD की आगामी अर्द्धवार्षिक/ वार्षिक परीक्षा 2026-27 के लिए कक्षा 12 हिंदी नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2026-27 (MP Board) दिए गए हैं हिंदी के अतिरिक्त इंग्लिश , संस्कृत , भौतिक , रसायन (विज्ञान/ गणित संकाय ) कला संकाय ( इतिहास , राजनीति आदि ) कामर्स संकाय ( एकाउंटेंसी , व्यवसाय अध्ययन ) कृषि संकाय के नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर इस वेबसाईट पर दिए गए है . बोर्ड परीक्षा तक वेबसाईट को दिन में कम से कम एक बार अवश्य चेक करें . नियमित अपडेट होगी .
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MP BOARD परीक्षा 2026-27 के लिए कक्षा 12 हिंदी नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2026-27 (MP Board)
🛑 भाग 1: 1 अंक वाले 25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर सहित)
(A) सही विकल्प चुनकर लिखिए (MCQs)
प्रश्न 1. ‘आत्मपरिचय’ कविता किस गीत संग्रह से ली गई है?
(अ) निशा निमंत्रण
(ब) मधुशाला
(स) मिलन यामिनी
(द) यामा
उत्तर: (अ) निशा निमंत्रण
प्रश्न 2. ‘भक्तिन’ संस्मरणात्मक रेखाचित्र महादेवी वर्मा के किस संकलन में संकलित है?
(अ) अतीत के चलचित्र
(ब) स्मृति की रेखाएँ
(स) पथ के साथी
(द) शृंखला की कड़ियाँ
उत्तर: (ब) स्मृति की रेखाएँ
प्रश्न 3. ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के मुख्य पात्र यशोधर बाबू अपने जीवन में किसको अपना आदर्श (गुरु) मानते थे?
(अ) भूषण को
(ब) किशनदा को
(स) चड्ढा को
(द) दत्ता जी राव को
उत्तर: (ब) किशनदा को
प्रश्न 4. समाचार लेखन की सबसे लोकप्रिय और प्रामाणिक शैली कौन सी है?
(अ) सीधा पिरामिड शैली
(ब) उल्टा पिरामिड शैली
(स) वर्णनात्मक शैली
(द) नाटकीय शैली
उत्तर: (ब) उल्टा पिरामिड शैली (Inverted Pyramid)
प्रश्न 5. ‘काव्य की शोभा बढ़ाने वाले धर्म (तत्व)’ क्या कहलाते हैं?
(अ) रस
(ब) छंद
(स) अलंकार
(द) शब्द शक्ति
उत्तर: (स) अलंकार
(B) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
प्रश्न 6. आलोक धन्वा की ‘पतंग’ कविता उनके एकमात्र संग्रह …………….. से ली गई है। (दुनिया रोज़ बनती है / जनता का आदमी)
उत्तर: दुनिया रोज़ बनती है
प्रश्न 7. ‘बाजार दर्शन’ पाठ में जैनेंद्र कुमार ने …………….. को बाजार का मुख्य जादू का असर माना है। (आँख की राह / कान की राह)
उत्तर: आँख की राह
प्रश्न 8. ‘जूझ’ उपन्यास मूल रूप से …………….. भाषा में लिखा गया है। (मराठी / गुजराती)
उत्तर: मराठी (आनंद यादव द्वारा)
प्रश्न 9. आधुनिक जनसंचार का सबसे पुराना माध्यम …………….. माध्यम है। (प्रिंट / इलेक्ट्रॉनिक)
उत्तर: प्रिंट (मुद्रित) माध्यम
प्रश्न 10. जहाँ उपमेय में उपमान का निषेध रहित अभेद आरोप हो, वहाँ …………….. अलंकार होता है। (रूपक / सांगरूपक)
उत्तर: रूपक (या सांगरूपक)
(C) सही जोड़ी बनाइए
| कॉलम ‘A’ | कॉलम ‘B’ |
|---|---|
| (1) कैमरे में बंद अपाहिज | (A) ओम थानवी का यात्रा-वृत्तांत |
| (2) पहलवान की ढोलक | (B) वर्णों की संख्या 31 (वर्णिक छंद) |
| (3) अतीत में दबे पाँव | (C) रघुवीर सहाय की कविता |
| (4) कवित्त छंद | (D) व्यंजना शब्द शक्ति |
| (5) व्यंग्यार्थ का बोध | (E) फणीश्वर नाथ रेणु की आंचलिक कहानी |
उत्तर (सही मिलान): 1 → (C), 2 → (E), 3 → (A), 4 → (B), 5 → (D)
(D) एक वाक्य / शब्द में उत्तर दीजिए
प्रश्न 16. ‘लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप’ रामचरितमानस के किस काण्ड से उद्धृत है?
उत्तर: लंकाकाण्ड से।
प्रश्न 17. चार्ली चैपलीन पर लिखे गए प्रसिद्ध निबंध ‘चार्ली चैपलीन यानी हम सब’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: विष्णु खरे।
प्रश्न 18. सिंधु घाटी सभ्यता के दो मुख्य शहरों के नाम लिखिए जो ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ में वर्णित हैं।
उत्तर: मोहनजोदड़ो और हड़प्पा।
प्रश्न 19. समाचार लेखन में ‘छह ककार’ कौन-कौन से होते हैं?
उत्तर: क्या, कौन, कहाँ, कब, क्यों और कैसे।
प्रश्न 20. कविता के पंख लगाकार उड़ने के माने कौन नहीं जानता?
उत्तर: चिड़िया नहीं जानती (‘कविता के बहाने’ कविता के अनुसार)।
(E) सत्य या असत्य बताइए
प्रश्न 21. हरिवंश राय बच्चन जी हालावाद के प्रवर्तक माने जाते हैं।
उत्तर: सत्य
प्रश्न 22. ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ संस्मरण विधा के अंतर्गत आता है जिसके लेखक धर्मवीर भारती हैं।
उत्तर: सत्य
प्रश्न 23. सवैया एक मात्रिक छंद का प्रमुख उदाहरण है।
उत्तर: असत्य (यह एक वर्णिक छंद है जिसमें 22 से 26 वर्ण होते हैं)।
प्रश्न 24. माधुर्य गुण शांत और शृंगार रस की कविताओं में मुख्य रूप से पाया जाता है।
उत्तर: सत्य
प्रश्न 25. इंटरनेट पत्रकारिता आज के समय में जनसंचार का सबसे तीव्र और लोकप्रिय माध्यम है।
उत्तर: सत्य
🛑 भाग 2: 2 अंक वाले 25 लघूत्तरीय प्रश्न (उत्तर सहित)
प्रश्न 1. ‘जग-जीवन के भार’ से कवि हरिवंश राय बच्चन का क्या आशय है?
उत्तर: ‘जग-जीवन के भार’ से कवि का आशय सांसारिक दायित्वों, सामाजिक नियमों, पारिवारिक कर्तव्यों और जीवन के संघर्षों से है, जिन्हें चाहकर भी मनुष्य छोड़ नहीं सकता और उसे निभाना ही पड़ता है।
प्रश्न 2. ‘उड़ने’ और ‘खिलने’ का कविता से क्या संबंध है? (‘काव्य बोध’)
उत्तर: चिड़िया की उड़ान सीमित होती है, परंतु कविता की कल्पना की उड़ान असीमित होती है। फूल खिलकर एक दिन मुरझा जाता है, परंतु कविता एक बार खिलकर (रची जाकर) युगों-युगों तक बिना मुरझाए आनंद देती रहती है।
प्रश्न 3. पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं— बच्चों का पतंग से क्या संबंध है?
उत्तर: पतंग बच्चों की उमंगों और रंग-बिरंगे सपनों का प्रतीक है। जब पतंग आकाश में ऊँचाइयाँ छूती है, तो बच्चों का बाल-मन भी अत्यंत उत्साहित होकर मानो पतंग की डोर के सहारे आसमान में उड़ने लगता है।
प्रश्न 4. ‘बात सीधी थी पर…’ कविता में बात के पेचीदा होने का क्या कारण था?
उत्तर: भाषा को अधिक चमत्कारी, पांडित्यपूर्ण और सुंदर बनाने के चक्कर में जब कवि ने क्लिष्ट (कठिन) शब्दों का प्रयोग किया, तो भाषा के जाल में फंसकर सीधी और सरल बात भी पेचीदा (कठिन) हो गई।
प्रश्न 5. ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता मीडिया की किस मानसिकता पर करारा व्यंग्य करती है?
उत्तर: यह कविता मीडिया की संवेदनहीनता और व्यावसायिक क्रूरता पर व्यंग्य करती है, जहाँ वे अपने कार्यक्रम की टीआरपी (TRP) और व्यावसायिक लाभ के लिए एक लाचार अपाहिज के व्यक्तिगत दुःख को सरेआम बेचते हैं।
प्रश्न 6. भक्तिन के आ जाने से महादेवी वर्मा अधिक देहाती (ग्रामीण) क्यों हो गईं?
उत्तर: भक्तिन पूरी तरह ग्रामीण संस्कारों में ढली थी। उसने शहर आकर भी अपनी आदतों को नहीं बदला, बल्कि महादेवी जी को ग्रामीण मकई की लापसी, बाजरे के पुए और ज्वार के भुट्टे खिलाकर तथा देहाती भाषा सिखाकर अपने रंग में ढाल लिया।
प्रश्न 7. बाजार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: बाजार का जादू (आकर्षण) चढ़ने पर मनुष्य असंतोष और लालच के वश में होकर अनुपयोगी चीजें भी खरीद लेता है। परंतु जादू उतरने पर उसे अहसास होता है कि वे चीजें आराम देने के बजाय उसके सुख में खलल डालती हैं।
प्रश्न 8. ‘परचेजिंग पावर’ (Purchasing Power) से जैनेंद्र कुमार का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: ‘परचेजिंग पावर’ का अर्थ है धन की क्रय शक्ति या खरीदने की ताकत। कुछ लोग बाजार में अपनी अमीरी का घमंड दिखाने के लिए अपनी परचेजिंग पावर का दुरुपयोग करते हैं और अनावश्यक सामान खरीदते हैं।
प्रश्न 9. ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में ‘जीजी’ ने इंद्र सेना पर पानी फेंके जाने को किस प्रकार सही ठहराया?
उत्तर: जीजी ने तर्क दिया कि यदि हम बादलों को पानी का अर्घ्य (दान) नहीं देंगे, तो वे हमें पानी कैसे देंगे। कुछ पाने के लिए पहले त्याग करना पड़ता है। यह पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि पानी का बुआई (दान) है।
प्रश्न 10. लुट्टन पहलवान ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मेरा गुरु कोई आदमी नहीं बल्कि यह ढोलक है?
उत्तर: लुट्टन ने कुश्ती की बारीकियों को किसी उस्ताद से नहीं सीखा था। दंगल के समय ढोलक की थाप से ही उसे दांव-पेच खेलने की प्रेरणा, उत्साह और शक्ति मिलती थी। ढोल की हर आवाज उसे निर्देश देती थी, इसलिए उसने ढोलक को गुरु माना।
प्रश्न 11. यशोधर बाबू की ‘समहाउ इम्प्रॉपर’ (Somehow Improper) जुमले का प्रयोग किस प्रकार की स्थितियों में करते थे?
उत्तर: यशोधर बाबू जब भी किसी आधुनिक बनावट, पश्चिमी संस्कृति, अपने बच्चों के फिजूलखर्चों या नई पीढ़ी के तौर-तरीकों को देखते थे जो उनके पुराने सिद्धांतों से मेल नहीं खाते थे, तो वे असमंजस में ‘समहाउ इम्प्रॉपर’ कहते थे।
प्रश्न 12. ‘जूझ’ पाठ के आधार पर बताइए कि आनंदा के पिता ने उसे स्कूल भेजने के लिए क्या शर्तें रखीं?
उत्तर: पिता ने शर्तें रखीं कि स्कूल जाने से पहले सुबह 11 बजे तक खेत पर काम करना होगा, पशु चराने होंगे और यदि खेत पर काम अधिक हुआ तो स्कूल से छुट्टी रखनी होगी।
प्रश्न 13. मास्टर सोंदलगेकर के अध्यापन की उन विशेषताओं को लिखिए जिन्होंने लेखक आनंदा को प्रभावित किया?
उत्तर: मास्टर सोंदलगेकर मराठी बहुत सुरीले ढंग से, रस लेकर, कविता की लय और अभिनय के साथ पढ़ाते थे। वे स्वयं कविताएँ लिखते थे, जिससे आनंदा के मन में भी कविता लिखने की प्रेरणा जगी।
प्रश्न 14. सिंधु घाटी सभ्यता को ‘लो-प्रोफाइल’ (Low-Profile) सभ्यता क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि वहाँ मिस्र या मेसोपोटामिया की तरह बड़े-बड़े राजमहल, भव्य मकबरे, राजाओं की मूर्तियाँ या भारी हथियार नहीं मिले। वहाँ भव्यता का दिखावा नहीं था, बल्कि साधारण नागरिकों के उपयोग की वस्तुएँ और अनुशासन मुख्य था।
प्रश्न 15. मुद्रित (प्रिंट) माध्यमों की दो मुख्य कमियाँ (सीमाएँ) कौन सी हैं?
उत्तर: (1) यह माध्यम अनपढ़ (अशिक्षित) लोगों के लिए पूरी तरह अनुपयोगी है। (2) इसमें रेडियो या टीवी की तरह तुरंत घटी घटनाओं को ऑन-द-स्पॉट (Live) अपडेट नहीं किया जा सकता, इसकी एक निश्चित डेडलाइन होती है।
प्रश्न 16. ‘फ्लैश’ (Flash) या ‘ब्रेकिंग न्यूज’ (Breaking News) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: जब किसी अत्यंत महत्वपूर्ण या बड़ी घटना की सूचना कम से कम शब्दों में बिना किसी विस्तृत विवरण के तुरंत दर्शकों तक टीवी स्क्रीन पर फ्लैश के रूप में पहुँचाई जाती है, तो उसे ब्रेकिंग न्यूज कहते हैं।
प्रश्न 17. रस की परिभाषा लिखते हुए ‘करुण रस’ का स्थायी भाव लिखिए।
उत्तर: काव्य को पढ़ने, सुनने या देखने से हृदय में जो अलौकिक आनंद प्राप्त होता है, उसे रस कहते हैं। करुण रस का स्थायी भाव शोक है।
प्रश्न 18. महाकाव्य की कोई दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: (1) महाकाव्य में नायक के जीवन का संपूर्ण और विस्तृत चित्रण होता है। (2) इसमें इतिहास प्रसिद्ध कथानक होता है और कम से कम आठ सर्ग होते हैं।
प्रश्न 19. रुबाई छंद के लक्षण (परिभाषा) लिखिए।
उत्तर: रुबाई उर्दू और फारसी का एक प्रसिद्ध छंद है। इसमें चार पंक्तियाँ होती हैं, जिनमें से पहली, दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक (Rhyme) मिलाई जाती है, तथा तीसरी पंक्ति स्वतंत्र होती है।
प्रश्न 20. शब्द शक्ति किसे कहते हैं? इसके भेदों के नाम लिखिए।
उत्तर: शब्द के अर्थ का बोध कराने वाली विधा या शक्ति को शब्द शक्ति कहते हैं। इसके तीन भेद हैं: अभिधा, लक्षणा और व्यंजना।
प्रश्न 21. ‘ओज गुण’ की परिभाषा और इसकी पहचान लिखिए।
उत्तर: जिस काव्य को पढ़ने से हृदय में उत्साह, वीर रस और स्फूर्ति का संचार होता है, वहाँ ओज गुण होता है। इसमें ट, ठ, ड, ढ जैसे कठोर वर्णों और संयुक्त अक्षरों की प्रधानता होती है (जैसे वीर रस की कविताएँ)।
प्रश्न 22. सांगरूपक अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित दीजिए।
उत्तर: जहाँ उपमेय पर उपमान का आरोप उसके सभी अंगों (अंग-प्रत्यंगों सहित) के साथ विस्तार से किया जाता है, वहाँ सांगरूपक अलंकार होता है।
उदाहरण: “उदित उदयगिरि मंच पर, रघुवर बालपतंग। विकसे संत सरोज सब, हरषे लोचन भृंग॥”
प्रश्न 23. भ्रांतिमान अलंकार और संदेह अलंकार में मुख्य अंतर लिखिए।
उत्तर: संदेह अलंकार में उपमेय और उपमान में अंत तक अनिश्चय बना रहता है (जैसे- सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है)। जबकि भ्रांतिमान में उपमेय को भूल से पूरी तरह उपमान मान लिया जाता है और क्रिया भी कर दी जाती है (जैसे- नाक का मोती अधर की कांति से, बीज दाड़िम का समझकर भ्रांति से)।
प्रश्न 24. रचना के आधार पर वाक्य के कितने भेद होते हैं? नाम लिखिए।
उत्तर: रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते हैं: (1) सरल वाक्य, (2) संयुक्त वाक्य, (3) मिश्रित वाक्य।
प्रश्न 25. मुहावरा ‘अंगूठा दिखाना’ और लोकोक्ति ‘अधजल गगरी छलकत जाए’ का अर्थ लिखिए।
उत्तर:
– अंगूठा दिखाना: वक्त पर किसी काम के लिए साफ मना कर देना या इनकार करना।
– अधजल गगरी छलकत जाए: ओछा या कम योग्य व्यक्ति अधिक दिखावा/घमंड करता है।
🛑 भाग 3: 3 अंक वाले 20 महत्वपूर्ण विषय-आधारित प्रश्न (उत्तर सहित)
प्रश्न 1. हरिवंश राय बच्चन अथवा कुंवर नारायण की काव्यगत विशेषताएँ निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर लिखिए: (i) दो रचनाएँ, (ii) भावपक्ष-कलापक्ष।
उत्तर (हरिवंश राय बच्चन):
– दो रचनाएँ: (1) मधुशाला, (2) निशा निमंत्रण।
– भावपक्ष: बच्चन जी हालावाद के प्रवर्तक हैं। उनकी कविताओं में सूफियाना मस्तानापन, प्रेम और सौंदर्य की सहज अभिव्यक्ति मिलती है। उन्होंने संसार के दुखों को स्वीकार करते हुए भी मस्ती से जीने का संदेश दिया है। वैयक्तिकता और आत्मानुभूति आपके भावपक्ष की मुख्य रीढ़ है।
– कलापक्ष: आपकी भाषा शुद्ध, साहित्यिक और कोमलकांत खड़ी बोली है। गीतों में गयता, प्रवाह और संगीतात्मकता अद्भुत है। रूपक, अनुप्रास और विरोधाभास अलंकारों का सहज प्रयोग देखने को मिलता है।
प्रश्न 2. महादेवी वर्मा अथवा जैनेंद्र कुमार की साहित्यिक विशेषताएँ लिखिए: (i) दो रचनाएँ, (ii) भाषा-शैली।
उत्तर (महादेवी वर्मा):
– दो रचनाएँ: (1) स्मृति की रेखाएँ, (2) दीपशिखा।
– भाषा: महादेवी जी की भाषा अत्यंत परिमार्जित, तत्समप्रधान, संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है। गद्य में भी काव्यात्मक सौंदर्य और तरलता दिखाई देती है। शब्दों का चयन रेखाचित्र को सजीव बना देता है।
– शैली: आपने मुख्य रूप से संस्मरणात्मक, चित्रात्मक, वर्णनात्मक और भावात्मक शैली का प्रयोग किया है। मर्मस्पर्शी रेखाचित्रों के कारण आपकी शैली पाठक को बांध लेती है।
प्रश्न 3. ‘बाजार दर्शन’ पाठ के आधार पर बताइए कि बाजारूपन (Bazaaruphan) से क्या तात्पर्य है? समाज पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: बाजारूपन से लेखक जैनेंद्र कुमार का तात्पर्य बाजार के उस बनावटी आकर्षण और दिखावे से है, जहाँ ग्राहक और विक्रेता दोनों एक-दूसरे को ठगने की फिराक में रहते हैं। जब बाजार केवल कपट, लालच और दिखावे का माध्यम बन जाता है, तो उसे बाजारूपन कहते हैं। समाज पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे मनुष्यों के बीच का सद्भाव नष्ट हो जाता है, लोग भाई-भाई न रहकर केवल ग्राहक और बेचक बन जाते हैं। इससे समाज में फिजूलखर्ची, असंतोष और वर्ग-भेद बढ़ता है, जिससे सामाजिक शांति भंग होती है।
प्रश्न 4. ‘लक्ष्मण-मूच्छी और राम का विलाप’ प्रसंग में राम का विलाप उनके ईश्वरीय रूप को छिपाकर एक सामान्य मानव रूप को उजागर करता है, सिद्ध कीजिए।
उत्तर: गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस प्रसंग में राम के मानवीय रूप का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है। जब लक्ष्मण मूर्छित होते हैं, तो राम एक साधारण मनुष्य की तरह फूट-फूट कर रोते हैं। वे विलाप करते हुए कहते हैं कि मैं अयोध्या जाकर माता सुमित्रा को क्या मुँह दिखाऊँगा? लोग कहेंगे कि स्त्री के लिए भाई को खो दिया। वे कहते हैं कि भाई का स्थान संसार में कोई नहीं ले सकता। राम का यह विलाप दर्शाता है कि वे ईश्वर होते हुए भी मानव अवतार में इंसानी दुखों, भाई के प्रति अगाध प्रेम और वियोग की पीड़ा से पूरी तरह ग्रसित हैं।
प्रश्न 5. ‘पहलवान की ढोलक’ कहानी में महामारी की विभीषिका के बीच ढोलक की आवाज का गाँव वालों पर क्या प्रभाव पड़ता था?
उत्तर: गाँव में जब मलेरिया और हैजा फैला हुआ था, चारों तरफ सन्नाटा और मौत का साया था। लोग अपने बच्चों और परिजनों को खो रहे थे। ऐसे भयावह माहौल में रात के सन्नाटे को चीरती हुई लुट्टन पहलवान की ढोलक की आवाज गूंजती थी। ढोलक की वह थाप गाँव के बीमार और मरते हुए लोगों की नसों में संजीवनी शक्ति भर देती थी। वह आवाज उन्हें मौत से लड़ने का हौसला देती थी और मरते हुए लोग भी बिना किसी डर या लाचारी के शांति से अपनी आँखें बंद कर पाते थे। ढोलक मौत की विभीषिका को चुनौती देती थी।
प्रश्न 6. यशोधर बाबू के चरित्र के उन मुख्य अंतर्विरोधों को स्पष्ट कीजिए जो उन्हें आधुनिक समाज में अकेला बनाते हैं।
उत्तर: यशोधर बाबू के चरित्र में पुराने सिद्धांतों और नए आधुनिक दौर के बीच एक गहरा अंतर्विरोध है। वे मन से किशनदा के पुराने मूल्यों, सादगी और संयुक्त परिवार की व्यवस्था से जुड़े रहना चाहते हैं, परंतु व्यावहारिक रूप से उनके बच्चे और पत्नी आधुनिक पश्चिमी रंग में ढल चुके हैं। वे अपनी सिल्वर वैडिंग की पार्टी को ‘समहाउ इम्प्रॉपर’ भी मानते हैं, पर उसमें शामिल भी होते हैं। वे बच्चों की तरक्की से खुश हैं, पर उनके बात करने के तरीके से आहत हैं। सिद्धांतों और व्यवहार की इसी कशमकश के कारण वे अपने ही घर में बिल्कुल अकेले पड़ जाते हैं।
प्रश्न 7. ‘जूझ’ कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन को किस प्रकार बदल देती है? आनंदा के संदर्भ में लिखिए।
उत्तर: ‘जूझ’ कहानी एक जीवंत दस्तावेज है जो दर्शाती है कि शिक्षा संघर्षों से लड़ने का संबल देती है। आनंदा का पिता उसे स्कूल नहीं भेजना चाहता था, परंतु आनंदा ने अपनी माँ और दत्ता जी राव की मदद से स्कूल जाना शुरू किया। खेत के कठिन काम के बावजूद उसने पढ़ाई में मन लगाया। स्कूल में उसे मास्टर सोंदलगेकर का मार्गदर्शन मिला, जिसने उसकी छिपी प्रतिभा को पहचाना। शिक्षा के कारण ही वह एक सामान्य खेतिहर मजदूर बनने के बजाय एक सफल लेखक और कवि के रूप में स्थापित हो सका। शिक्षा ने उसे गरिमा और आत्मसम्मान से जीना सिखाया।
प्रश्न 8. मोहनजोदड़ो के ‘डी.के. हलके’ और वहाँ की नगर नियोजन (Town Planning) की तीन मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के अनुसार मोहनजोदड़ो की नगर नियोजन कला बेजोड़ थी:
1. ग्रिड पैटर्न (सड़कें): शहर की सभी सड़कें सीधी थीं जो एक-दूसरे को समकोण (90°) पर काटती थीं, इसे ग्रिड प्लानिंग कहा जाता है।
2. ढकी हुई नालियाँ: पूरे शहर में जल निकासी की अद्भुत व्यवस्था थी। सभी नालियाँ पक्की ईंटों से बनी थीं और ऊपर से ढकी हुई थीं, जिससे स्वास्थ्य और स्वच्छता का पता चलता है।
3. साधारण और व्यवस्थित मकान: मकानों के दरवाजे मुख्य सड़क पर न खुलकर गलियों में खुलते थे। सभी मकानों का आनुपातिक आकार था और उनमें भव्यता के स्थान पर उपयोगिता मुख्य थी।
प्रश्न 9. प्रिंट माध्यम, रेडियो और टेलीविजन— इन तीनों जनसंचार माध्यमों की लेखन शैलियों में क्या मुख्य अंतर होता है?
उत्तर:
1. प्रिंट माध्यम (समाचार पत्र): इसमें लेखन केवल शब्दों और भाषा पर निर्भर करता है। पाठक अपनी इच्छा और गति से इसे पढ़ सकता है। इसमें शुद्ध वर्तनी और व्याकरण का ध्यान रखना अनिवार्य है।
2. रेडियो: यह एक श्रव्य (Audio) माध्यम है, इसलिए इसके लिए लिखते समय सरल, स्पष्ट और बोलचाल की भाषा का प्रयोग होता है। जटिल शब्दों और बड़े आंकड़ों से बचा जाता है ताकि सुनने वाला एक ही बार में समझ सके।
3. टेलीविजन: यह दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual) माध्यम है। टीवी लेखन का मूल सिद्धांत है— “दृश्य पर लेखन”। अर्थात जो स्क्रीन पर दिख रहा है, शब्द उसी के अनुकूल होने चाहिए। इसमें भाषा संक्षिप्त और दृश्यों को सहयोग देने वाली होती है।
प्रश्न 10. विशेष लेखन (Specialized Writing) किसे कहते हैं? इसके किन्हीं दो क्षेत्रों और महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: समाचार पत्रों या माध्यमों में सामान्य समाचारों से अलग जब किसी विशेष विषय (जैसे खेल, अर्थशास्त्र, विज्ञान, अपराध) पर गहरी रिसर्च, विश्लेषण और विशेषज्ञता के साथ लिखा जाता है, तो उसे विशेष लेखन कहते हैं। इसकी भाषा तकनीकी और विषय के अनुकूल होती है (जैसे शेयर बाजार के लिए तेजड़िया-मंदड़िया)।
महत्त्व: (1) यह पाठकों को किसी विषय की सतही जानकारी के बजाय उसका गहरा और तार्किक विश्लेषण प्रदान करता है। (2) आधुनिक दौर में विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती दिलचस्पी के कारण विशेष लेखन अखबारों की साख और लोकप्रियता बढ़ाता है।
प्रश्न 11. लक्षणा शब्द शक्ति और व्यंजना शब्द शक्ति में अंतर सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
– लक्षणा शब्द शक्ति: जहाँ शब्द के मुख्य अर्थ (वाच्यार्थ) में बाधा उत्पन्न होने पर उसके लक्षणों के आधार पर कोई अन्य अर्थ ग्रहण किया जाता है, वहाँ लक्षणा होती है।
उदाहरण: “तुम बिल्कुल गधे हो।” (यहाँ गधे का अर्थ चौपाया जानवर नहीं, मूर्ख होना है)।
– व्यंजना शब्द शक्ति: जहाँ न मुख्य अर्थ काम करे और न लक्ष्यार्थ, बल्कि संदर्भ के अनुसार पाठक या श्रोता अपनी बुद्धि से एक सर्वथा नया चमत्कारी अर्थ (व्यंग्यार्थ) निकालता है, वहाँ व्यंजना होती है।
उदाहरण: “सांझ हो गई।” (इसका अर्थ चरवाहे के लिए घर लौटने का समय है, और गृहणी के लिए दीपक जलाने का समय)।
प्रश्न 12. सांगरूपक अलंकार और अपह्न्युति अलंकार में क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
– सांगरूपक अलंकार: जहाँ उपमेय पर उपमान का आरोप उसके सभी अंगों सहित पूर्ण रूप से किया जाता है। उदाहरण: “उदित उदयगिरि मंच पर, रघुवर बालपतंग।”
– अपह्न्युति अलंकार: जहाँ उपमेय का पूरी तरह निषेध (अस्वीकार) करके उस पर उपमान का आरोप किया जाए, अर्थात सत्य बात को छिपाकर झूठी बात कही जाए (इसमें ‘नही’, ‘ना’ शब्द आते हैं)।
उदाहरण: “यह चेहरा नहीं, साक्षात चंद्रमा है।” (चेहरे को पूरी तरह नकार दिया गया)।
प्रश्न 13. व्यतिरेक अलंकार और विशेषोक्ति अलंकार को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
– व्यतिरेक अलंकार: जहाँ उपमेय को उपमान से श्रेष्ठ (बढ़कर) बताया जाए और उसका कारण भी दिया जाए, वहाँ व्यतिरेक होता है। उदाहरण: “संत हृदय नवनीत समाना, कहा कविन्ह पर कहै न जाना। नवनीत ताहि पिघले निज तापा, संत द्रवे पर दुख लखि आपा।” (संत का हृदय मक्खन से भी श्रेष्ठ है)।
– विशेषोक्ति अलंकार: जहाँ कारण के उपस्थित होने पर भी कार्य संपन्न न हो (साधन होने पर भी काम न होना), वहाँ विशेषोक्ति अलंकार होता है। उदाहरण: “नेहु न नैनन को घटै, रहे नित प्रति मँगे चाय। दोउ नैन नीर भरे रहें, तऊ न प्यास बुझाय॥”
प्रश्न 14. भ्रांतिमान अलंकार और संदेह अलंकार को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
– संदेह अलंकार: जहाँ उपमेय और उपमान की समानता देखकर यह निश्चित न हो पाए कि वास्तव में वस्तु क्या है। अनिश्चय अंत तक रहता है। उदाहरण: “किधौं व्योम वीथिका भरे हैं भूरि धूमकेतु।”
– भ्रांतिमान अलंकार: जहाँ सादृश्य के कारण उपमेय को भ्रमवश उपमान समझ लिया जाता है और तदनुसार क्रिया भी कर दी जाती है। उदाहरण: “नाक का मोती अधर की कांति से, बीज दाड़िम का समझकर भ्रांति से; देख उसको ही हुआ शुक मौन है, सोचता है अन्य शुक यह कौन है।”
प्रश्न 15. निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित (वाक्य रूपांतरण) कीजिए:
(i) जैसे ही सूर्योदय हुआ, पक्षी चहकने लगे। (सरल वाक्य में बदलें)
(ii) वह अमीर है परंतु बहुत कंजूस है। (मिश्रित वाक्य में बदलें)
(iii) क्या आप कल भोपाल जाएँगे? (विस्मयादिबोधक में बदलें)
उत्तर:
(i) सूर्योदय होने पर पक्षी चहकने लगे।
(ii) यद्यपि वह अमीर है, तथापि वह बहुत कंजूस है।
(iii) अरे! क्या आप कल भोपाल जाएँगे!
प्रश्न 16. कविता कैसे बनती है? कविता लेखन के किन्हीं तीन मुख्य घटकों या तत्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: कविता मन के भावों की सहज और काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, जो शब्दों के सुंदर विन्यास से बनती है। इसके तीन मुख्य घटक हैं:
1. शब्दों का चयन: शब्दों का सही और उपयुक्त चयन कविता का पहला उपकरण है। शब्दों के मेल से ही कविता का ढांचा खड़ा होता है।
2. बिम्ब और प्रतीक: बिम्ब कविता को चित्रात्मक बनाते हैं (जैसे दृश्य बिम्ब)। पाठक के मन में कविता पढ़ते ही चित्र उभरना चाहिए।
3. छंद और लय: आंतरिक या बाहरी लय कविता को गयता और तरलता प्रदान करती है, जो उसे गद्य से अलग करती है।
प्रश्न 17. नाटक लिखने का व्याकरण कहानी लेखन से किस प्रकार भिन्न है? तीन बिंदु लिखिए।
उत्तर:
1. नाटक एक दृश्य विधा है जिसे रंगमंच पर अभिनेताओं द्वारा जिया जाता है, जबकि कहानी एक पाठ्य विधा है जिसे पढ़ा या सुना जाता है।
2. नाटक का पूरा विकास संवादों (Dialogues) और अभिनय के माध्यम से होता है, जबकि कहानी में लेखक स्वयं वर्णन (Narration) करता है।
3. नाटक हमेशा ‘वर्तमान काल’ में घटित होता है (चाहे कथा भूतकाल की हो), जबकि कहानी भूतकाल में लिखी जा सकती है। नाटक में समय का बंधन अनिवार्य है।
प्रश्न 18. कहानी में ‘कथानक’ (Plot) और ‘द्वंद्व’ (Conflict) का क्या महत्त्व है?
उत्तर: कथानक कहानी का वह संक्षिप्त ढांचा या प्रारंभिक नक्शा होता है जिसके आधार पर कहानी आगे बढ़ती है। यह कहानी की शुरुआत, मध्य और अंत को जोड़ता है। द्वंद्व कहानी की आत्मा है। जब दो विरोधी विचारधाराओं या पात्रों के बीच टकराव या मानसिक कशमकश दिखाई जाती है, तो कहानी में सस्पेंस और रोचकता बढ़ती है। द्वंद्व के बिना कहानी आगे नहीं बढ़ सकती।
प्रश्न 20. फीचर लेखन (Feature Writing) क्या है? एक अच्छे फीचर की तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाला ऐसा सुव्यवस्थित, सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेखन, जिसका मुख्य उद्देश्य पाठकों को सूचना देने के साथ-साथ उनका मनोरंजन करना और उन्हें सोचने पर मजबूर करना हो, फीचर कहलाता है।
विशेषताएँ: (1) इसकी भाषा सरल, आकर्षक और काव्यात्मक हो सकती है (इसमें समाचार की तरह उल्टा पिरामिड शैली अनिवार्य नहीं है)। (2) फीचर में लेखक अपनी राय या भावनाओं को व्यक्त कर सकता है। (3) इसमें दृश्यों और रेखाचित्रों का सुंदर प्रयोग होता है।
🛑 भाग 4: 4 अंक वाले 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (व्याख्या, पत्र व निबंध)
प्रश्न 1. निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या संदर्भ सहित लिखिए:
“मैं निज उर के उद्गार लिए फिरता हूँ,
मैं निज उर के उपहार लिए फिरता हूँ;
है यह अपूर्ण संसार न मुझको भाता,
मैं स्वप्नों का संसार लिए फिरता हूँ।”
उत्तर:
– संदर्भ: प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह भाग-2’ के ‘आत्मपरिचय’ शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता प्रसिद्ध हालावादी कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन जी हैं।
– प्रसंग: कवि सांसारिक बंधनों के बीच अपने मन के प्रेम भाव, अपनी अंतरात्मा की आवाज और अपने आदर्श संसार को व्यक्त कर रहा है।
– व्याख्या: कवि कहते हैं कि मैं इस संसार को देने के लिए अपने हृदय के सच्चे भाव (उद्गार) और प्रेम रूपी उपहार लेकर घूम रहा हूँ। मुझे यह भौतिकवादी, स्वार्थी और अधूरा (प्रेमविहीन) संसार बिल्कुल पसंद नहीं आता। इसलिए मैं अपने मन में एक सुंदर, प्रेम से परिपूर्ण सपनों का काल्पनिक संसार संजोए हुए हूँ और उसी मस्ती में जीता हूँ।
– विशेष: (1) शुद्ध खड़ी बोली का माधुर्य रूप। (2) ‘निज उर’, ‘स्वप्नों का संसार’ में अनुप्रास अलंकार है। (3) आत्मानुभूति की सहज अभिव्यक्ति है और शैली गीतात्मक है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या संदर्भ और विशेष सहित लिखिए:
“बाजार में एक जादू है। वह जादू आँख की राह काम करता है। वह रूप का जादू है; पर जैसे चुम्बक का जादू लोहे पर ही चलता है, वैसे ही इस जादू की भी एक मर्यादा है। जेब भरी हो और मन खाली हो, ऐसी हालत में जादू का असर खूब होता है।”
उत्तर:
– संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह भाग-2’ के प्रसिद्ध वैचारिक निबंध ‘बाजार दर्शन’ से ली गई हैं। इसके लेखक जैनेंद्र कुमार हैं।
– प्रसंग: लेखक बाजार के सम्मोहन (आकर्षण) के काम करने के तरीके और मानव मन की कमजोरियों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण कर रहे हैं।
– व्याख्या: लेखक कहते हैं कि बाजार में एक जादुई सम्मोहन होता है जो मनुष्य को अपनी ओर खींचता है। यह जादू आँखों के रास्ते (सुंदर सजी हुई दुकानों को देखकर) मन में प्रवेश करता है। जैसे चुम्बक केवल लोहे को खींचता है, वैसे ही बाजार का जादू उस व्यक्ति पर सबसे ज्यादा असर करता है जिसकी जेब तो पैसों से भरी हो लेकिन उसका मन खाली हो (अर्थात उसे यह न पता हो कि उसे वास्तव में क्या खरीदना है)। ऐसा व्यक्ति बाजार के जाल में फंस जाता है।
– विशेष: (1) भाषा अत्यंत सरल, व्यावहारिक और विचारात्मक है। (2) ‘चुम्बक का जादू’ एक सटीक और सुंदर दृष्टांत अलंकार का उदाहरण है। (3) उपभोक्तावादी संस्कृति पर गहरा प्रहार है।
प्रश्न 3. अपने जिले के जिलाधीश (कलेक्टर) को शासकीय अस्पतालों में फैली अव्यवस्थाओं, डॉक्टरों की समय पर अनुपस्थिति तथा दवाओं की कमी को दूर करने हेतु एक शिकायती आवेदन पत्र लिखिए।
उत्तर:
सेवा में,
श्रीमान जिलाधीश महोदय,
जिला – ग्वालियर (म.प्र.)
विषय: जिला शासकीय अस्पताल की अव्यवस्थाओं एवं दवाओं की कमी को दूर करने हेतु आवेदन।
महोदय,
मैं इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान ग्वालियर जिला मुख्यालय स्थित मुख्य शासकीय अस्पताल में फैली अत्यधिक अव्यवस्थाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। वर्तमान में अस्पताल की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। दूर-दराज के गाँवों से आने वाले गरीब मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
मुख्य समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
1. ओपीडी (OPD) के समय डॉक्टर अपने कमरों से नदारद रहते हैं, जिससे मरीजों को लंबी लाइनों में घंटों इंतजार करना पड़ता है।
2. अस्पताल के नि:शुल्क दवा वितरण केंद्र में आवश्यक जीवन रक्षक दवाएँ और एंटीबायोटिक हमेशा समाप्त रहते हैं, और मरीजों को बाहर की महंगी दुकानों से दवाएँ खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
3. वार्डों में साफ-सुथरे बिस्तरों का अभाव है और चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य है।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि आप स्वयं अस्पताल का औचक निरीक्षण करें तथा दोषी स्टाफ के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की कृपा करें ताकि आम जनता को उचित स्वास्थ्य लाभ मिल सके।
धन्यवाद।
भवदीय,
संयोजक, नागरिक कल्याण मंच,
ग्वालियर, मध्य प्रदेश।
दिनांक: 21 अक्टूबर 2026
प्रश्न 4. अपने परम मित्र को हायर सेकेंडरी परीक्षा (कक्षा 12वीं) में पूरे राज्य की प्राविण्य सूची (Merit List) में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर एक बधाई पत्र लिखिए।
उत्तर:
12/4, नेहरू नगर,
ग्वालियर (म.प्र.)
दिनांक: 21 अक्टूबर 2026
प्रिय मित्र राहुल,
सप्रेम नमस्ते।
आज सुबह के समाचार पत्र में तुम्हारा रोल नंबर और तुम्हारी सुंदर तस्वीर देखकर मेरा हृदय अत्यंत हर्ष और गर्व से भर गया। तुम्हें माध्यमिक शिक्षा मण्डल की कक्षा 12वीं की परीक्षा में पूरे मध्य प्रदेश राज्य की मेरिट सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर मेरी और मेरे पूरे परिवार की ओर से कोटि-कोटि बधाई!
मुझे पहले से ही पूरा विश्वास था कि तुम्हारी दिन-रात की कड़ी मेहनत, लगन और प्रतिभा एक दिन रंग लाएगी। तुमने न केवल अपना बल्कि हम सभी मित्रों और अपने माता-पिता का नाम पूरे राज्य में रोशन किया है। तुम्हारी यह ऐतिहासिक सफलता हम सभी के लिए प्रेरणादायी है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि तुम भविष्य में भी इसी प्रकार सफलता के नए आयाम स्थापित करो। अगले रविवार को मैं तुमसे मिलने तुम्हारे घर आ रहा हूँ, तब हम सब मिलकर इस बड़ी खुशी का जश्न मनाएँगे। आदरणीय माताजी एवं पिताजी को मेरा सादर चरण स्पर्श कहना और छोटी बहन को ढेर सारा प्यार।
तुम्हारा अभिन्न मित्र,
अमित शर्मा
प्रश्न 5. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 250 शब्दों में सारगर्भित और बिंदुवार निबंध (Essay) लिखिए:
(i) डिजिटल इंडिया और आधुनिक छात्र, (ii) साहित्य और समाज का अंतःसंबंध, (iii) वनों का महत्त्व और पर्यावरण संतुलन।
उत्तर (विषय: डिजिटल इंडिया और आधुनिक छात्र):
– 1. प्रस्तावना: भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान आज देश के कोने-कोने में पहुँच चुका है। तकनीक के इस क्रांतिकारी युग ने मानव जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है, लेकिन इसका सबसे व्यापक और गहरा प्रभाव आधुनिक छात्र वर्ग और हमारी शिक्षा प्रणाली पर पड़ा है। चाक और ब्लैकबोर्ड की पारंपरिक दुनिया से निकलकर आज शिक्षा स्क्रीन और डेटा के डिजिटल धरातल पर आ गई है।
– 2. शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति: डिजिटल इंडिया की बदौलत आज ‘स्मार्ट क्लासेस’ और ई-लर्निंग आम बात हो गई है। देश के किसी भी सुदूर गाँव में बैठा छात्र इंटरनेट के माध्यम से विश्व के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के व्याख्यान (जैसे यूट्यूब या ऑनलाइन पोर्टल्स पर) नि:शुल्क सुन सकता है। ई-पुस्तकालयों (जैसे NCERT पोर्टल्स) ने किताबों की कमी को पूरी तरह दूर कर दिया है।
– 3. आधुनिक छात्र के लिए लाभ: (1) ज्ञान तक त्वरित पहुँच: किसी भी कठिन विषय या शोध के लिए अब लाइब्रेरी में घंटों खाक छानने की आवश्यकता नहीं है, एक क्लिक पर सारी जानकारी सामने आ जाती है। (2) समय और धन की बचत: ऑनलाइन कोचिंग और वेबिनार्स के कारण ग्रामीण छात्रों को बड़े शहरों में जाकर महंगा खर्च उठाने की जरूरत नहीं रही।
– 4. चुनौतियाँ और डार्क साइड: जहाँ तकनीक एक वरदान है, वहीं इसके कुछ दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग छात्रों में एकाग्रता की कमी, मानसिक तनाव और आँखों की बीमारियों को बढ़ा रहा है। सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम रील्स, गेम्स) का नशा छात्रों के अमूल्य समय को बर्बाद कर रहा है, जिससे वे वास्तविक सामाजिक जीवन और खेलों से दूर होते जा रहे हैं।
– 5. उपसंहार: डिजिटल इंडिया आधुनिक छात्रों के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली और अचूक उपकरण (Tool) है। अब यह स्वयं छात्र के विवेक पर निर्भर करता है कि वह इसका उपयोग अपने ज्ञानवर्धन और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए करता है या व्यर्थ की गतिविधियों में समय गंवाने के लिए। तकनीक का संतुलित और अनुशासित उपयोग ही छात्रों को सफलता के शिखर पर ले जा सकता है।
प्रश्न 6. ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के आधार पर यशोधर बाबू के स्वभाव, उनकी जीवन शैली और आधुनिक पीढ़ी के साथ उनके वैचारिक मतभेदों की विस्तृत समीक्षा कीजिए।
उत्तर: मनोहर श्याम जोशी द्वारा लिखित ‘सिल्वर वैडिंग’ आधुनिक समाज की एक शाश्वत समस्या— ‘पीढ़ी के अंतराल’ (Generation Gap) को उजागर करती है।
1. यशोधर बाबू का स्वभाव और सादगी: यशोधर पंत (वाय.डी. पंत) एक संस्कारी, सीधे, परंपरावादी और सादगी पसंद व्यक्ति हैं। वे दफ्तर में अपने जूनियरों के साथ भी अनुशासन बनाए रखते हैं। उनके जीवन पर उनके मार्गदर्शक ‘किशनदा’ का गहरा प्रभाव है। वे साइकिल से दफ्तर जाते हैं, पैदल सब्जी लाते हैं और शाम को बिड़ला मंदिर में ध्यान लगाते हैं।
2. आधुनिक पीढ़ी से टकराव: यशोधर बाबू के बच्चे आधुनिक जमाने के अनुसार जीना चाहते हैं। उनका बड़ा बेटा एक विज्ञापन एजेंसी में ऊंचे वेतन पर काम करता है, जो यशोधर बाबू को समझ नहीं आता। उनका बेटा जब उनके लिए एक महंगा ऊनी गाउन लाता है और कहता है कि आप दूध लेने इसे पहनकर जाया करें, तो यशोधर बाबू का दिल भर आता है; वे चाहते थे कि बेटा जिम्मेदारी संभाले और खुद दूध लाने जाए।
3. वैचारिक मतभेद: पत्नी भी बच्चों के रंग में रंगकर आधुनिक कपड़े पहनती है और बिना पल्ले की साड़ी पहनती है, जिसे पंत जी ‘शैंडी बुढ़िया’ कहकर मजाक उड़ाते हैं। उनके घर में जब उनकी शादी की 25वीं सालगिरह (सिल्वर वैडिंग) पर बड़ी केक काटने वाली पार्टी रखी जाती है, तो वे इसे अपनी संस्कृति के खिलाफ (‘समहाउ इम्प्रॉपर’) मानते हैं। कहानी दर्शाती है कि पुराने आदर्शों को पूरी तरह न छोड़ पाने और नई पीढ़ी द्वारा उन्हें न समझ पाने के कारण यशोधर बाबू जैसे लोग समाज में अप्रासंगिक और अकेले हो जाते हैं।
प्रश्न 7. ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता के आधार पर सिद्ध कीजिए कि यह कविता ‘करुणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता’ की कहानी है।
उत्तर: रघुवीर सहाय द्वारा रचित ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता मीडिया जगत के व्यावसायिक चेहरे को बेनकाब करती है। ऊपर से देखने पर ऐसा लगता है कि मीडिया एक अपाहिज के प्रति सहानुभूति और करुणा जगाने के लिए एक सामाजिक कार्यक्रम बना रहा है, लेकिन वास्तव में उनका उद्देश्य केवल अपने शो की टीआरपी बढ़ाना होता है।
वे एक बंद स्टूडियो में अपाहिज से बेहद बेहूदा, संवेदनहीन और चुभने वाले सवाल पूछते हैं, जैसे— “क्या आप अपाहिज हैं? आपको अपाहिज होकर कैसा दुःख होता है? जरा कैमरे पर बताइए।” वे उसे मजबूर करते हैं कि वह रोए। यदि वह नहीं रोता, तो वे उसके सूजे हुए चेहरे और आँखों की बड़ी तस्वीर (Close-up) दिखाते हैं ताकि दर्शक भावुक हो जाएँ और रोने लगें। मीडिया कर्मी सोचते हैं कि यदि अपाहिज और दर्शक एक साथ रोने लगेंगे, तो उनका कार्यक्रम व्यावसायिक रूप से सुपरहिट हो जाएगा। यह सोच दर्शाती है कि करुणा का नाटक करने वाला मीडिया वास्तव में अत्यंत क्रूर और संवेदनहीन है।
प्रश्न 8. ‘भक्तिन’ के चरित्र की उन चार मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालिए जो उसे आम महिलाओं से अलग एक विशिष्ट और जीवंत पात्र बनाती हैं।
उत्तर: महादेवी वर्मा के जीवन की जीवन रेखा रही भक्तिन (लछमिन) के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. अत्यंत स्वाभिमानी और दृढ़निश्चयी: भक्तिन का जीवन दुखों से भरा था। पति की मृत्यु के बाद जेठ-जिठौतों ने उसकी संपत्ति हड़पने की बहुत कोशिश की और उसकी बेटी का विवाह अपने साले से कराना चाहा, परंतु भक्तिन ने डटकर उनका मुकाबला किया, पंचायत बुलाई और अपने स्वाभिमान की रक्षा की।
2. परम स्वामीभक्त (सेविका): महादेवी वर्मा के प्रति उसकी निष्ठा अतुलनीय थी। वह दिन-रात महादेवी जी की सेवा में लगी रहती थी। जब महादेवी जी देर रात तक लेखन कार्य करतीं, तो वह कभी पानी, कभी चाय देकर उनका साथ निभाती। यहाँ तक कि जेल जाने की नौबत आने पर भी वह अपनी मालकिन से पहले जाने की जिद करती थी।
3. तर्क कला में निपुण: वह अपनी हर बात को शास्त्र सम्मत सिद्ध करने के लिए झूठे-सच्चे तर्क गढ़ लेती थी। जब महादेवी जी ने उसे सिर मुंडाने (मुंडन) से मना किया, तो उसने तुरंत शास्त्र का हवाला दिया— “तीरथ गए मुँड़ाए सिद्ध”।
4. सरल और अपरिवर्तनीय ग्रामीण चरित्र: शहर में वर्षों रहने के बाद भी उसने अपनी देहाती आदतों, भाषा और खान-पान को नहीं बदला, बल्कि लेखिका को ही ग्रामीण जीवन के अनुकूल बना दिया। वह दिल की साफ और निश्चल थी।
प्रश्न 9. ‘जूझ’ कहानी के आधार पर बताइए कि लेखक के जीवन में उनकी माता और दत्ता जी राव ने किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
उत्तर: लेखक आनंदा की तीव्र इच्छा थी कि वह स्कूल जाए और पढ़े, लेकिन उसका पिता (दादा) अत्यंत स्वार्थी और आलसी था जो खुद दिनभर गाँव में घूमता था और आनंदा को खेत पर काम में झोंक रखा था। इस कठिन परिस्थिति में माता और दत्ता जी राव संकटमोचक बनकर उभरे:
1. माता का सहयोग: जब आनंदा ने अपनी इच्छा माँ के सामने रखी, तो माँ ने सहमति जताई पर पति के गुस्से से डर गई। उसने समझदारी दिखाते हुए आनंदा को सलाह दी कि वे गाँव के सबसे प्रभावशाली और सम्मानित व्यक्ति ‘दत्ता जी राव’ के पास जाकर मदद माँगें।
2. दत्ता जी राव की भूमिका: दत्ता जी राव शिक्षा के महत्त्व को अच्छी तरह जानते थे। जब उन्होंने आनंदा की पढ़ाई के प्रति तड़प सुनी और जाना कि उसका पिता केवल अय्याशी के लिए बच्चे की पढ़ाई रोक रहा है, तो वे अत्यधिक क्रोधित हुए। उन्होंने आनंदा के पिता को अपने घर बुलाया और उसे कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने साफ कहा कि यदि तुम बेटे की फीस नहीं दे सकते, तो मैं उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाऊँगा। दत्ता जी राव के इसी राजनैतिक और सामाजिक दबाव के कारण पिता को झुकना पड़ा और आनंदा के लिए स्कूल के द्वार खुले।
प्रश्न 10. सिंधु घाटी सभ्यता (विशेषकर मोहनजोदड़ो) की जल निकासी प्रणाली (Drainage System) और पानी के स्रोतों (कुओं और स्नानागार) का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर: ओम थानवी के ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता आज से पाँच हजार साल पहले भी इंजीनियरिंग और नागरिक प्रबंधन का एक बेजोड़ उदाहरण थी:
1. अद्भुत जल निकासी प्रणाली (नालियाँ): मोहनजोदड़ो शहर की सबसे बड़ी विशेषता उसकी नालियाँ थीं। घरों का गंदा पानी सड़क के किनारे बनी पक्की नालियों में जाता था। ये नालियाँ पूरी तरह पक्की ईंटों से बनी थीं और कचरा साफ करने के लिए जगह-जगह उन पर ढक्कन (मैनहोल) लगे थे। नालियों का यह जाल पूरे शहर में व्यवस्थित रूप से बिछा था, जैसा आधुनिक शहरों में भी मुश्किल से दिखता है।
2. विशाल स्नानागार (Great Bath): बौद्ध स्तूप के पास एक बहुत बड़ा सामूहिक स्नानागार मिला है, जो पक्की ईंटों से बना है। इसकी तली और दीवारों पर पक्की ईंटों और जिप्सम के गारे का प्रयोग किया गया है ताकि पानी का रिसाव न हो। स्नानागार में गंदे पानी को बाहर निकालने के लिए बड़ी नालियाँ थीं और साफ पानी भरने के लिए पास में ही एक कुआं था।
3. कुओं का जाल (पानी के स्रोत): पुरातत्वविदों के अनुसार मोहनजोदड़ो में लगभग 700 कुएं मिले हैं। इतिहासकार मानते हैं कि यह सभ्यता पूरी तरह कुओं और भूमिगत जल के सही उपयोग पर आधारित थी, वे नदियों के पानी पर पूरी तरह निर्भर नहीं थे। यही कारण है कि इसे एक जल-संस्कृति (Water Culture) भी कहा जाता है।
प्रश्न 11. उल्टा पिरामिड शैली (Inverted Pyramid Style) क्या है? इसके तीनों भागों (इंट्रो, बॉडी, समापन) का विस्तृत विवरण रेखाचित्र के प्रारूप में समझाइए।
उत्तर: उल्टा पिरामिड शैली समाचार लेखन की सबसे बुनियादी, प्रामाणिक और लोकप्रिय शैली है। इस शैली में समाचार लिखते समय 가장 महत्वपूर्ण तथ्य को सबसे पहले (ऊपर) लिखा जाता है, और उसके बाद घटते हुए महत्त्व के क्रम में अन्य तथ्यों को लिखा जाता है। यह कहानी लेखन की शैली (जहाँ क्लाइमेक्स अंत में आता है) के बिल्कुल विपरीत होती है।
इसके मुख्य तीन भाग होते हैं:
1. मुखड़ा या इंट्रो (Intro): यह समाचार का सबसे ऊपरी और मुख्य भाग होता है। इसमें समाचार की सबसे सनसनीखेज और महत्वपूर्ण सूचना 2-3 पंक्तियों में दी जाती है। इसमें मुख्य रूप से चार ककारों (क्या, कौन, कहाँ, कब) का उत्तर होता है।
2. निकाय या बॉडी (Body): यह समाचार का मध्य भाग है। इसमें इंट्रो में दी गई सूचना का विस्तार से विवरण, पृष्ठभूमि और कारण स्पष्ट किए जाते हैं। इसमें बाकी दो ककारों (क्यों और कैसे) का उत्तर दिया जाता है।
3. समापन (Conclusion): यह समाचार का अंतिम भाग है। इसमें समाचार की प्रासंगिकता के अनुसार संक्षिप्त समापन किया जाता है। कई बार स्पेस की कमी होने पर संपादक नीचे से इसी भाग को सबसे पहले काटते हैं, क्योंकि मुख्य सूचना ऊपर आ चुकी होती है।
प्रश्न 12. शब्द गुण किसे कहते हैं? काव्य में पाए जाने वाले तीनों गुणों (माधुर्य, ओज, प्रसाद) को उदाहरण सहित विस्तार से समझाइए।
उत्तर: काव्य के आंतरिक सौंदर्य और रसों को उत्कर्ष (बढ़ावा) देने वाले स्थायी धर्मों या तत्वों को शब्द गुण कहते हैं। जैसे मनुष्य के शरीर में शौर्य और करुणा होती है, वैसे ही काव्य में गुण होते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं:
1. माधुर्य गुण: जिस काव्य को पढ़ने या सुनने से हृदय में अत्यधिक आनंद, कोमलता और मिठास का संचार हो, वहाँ माधुर्य गुण होता है। यह शृंगार, करुण और शांत रस की कविताओं में पाया जाता है। इसमें अनुनासिक और कोमल वर्णों का प्रयोग होता है।
उदाहरण: “बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय। सोह करै भौनहुँ हँसे, दैन कहै नट जाय॥”
2. ओज गुण: जिस काव्य को पढ़ने से पाठक के हृदय में वीरता, उत्साह, स्फूर्ति और तेज का संचार हो, वहाँ ओज गुण होता है। यह वीर, रौद्र और बीभत्स रस की कविताओं में मिलता है। इसमें संयुक्त अक्षरों और कठोर वर्णों (ट, ठ, ड, ढ) की प्रधानता होती है।
उदाहरण: “बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।”
3. प्रसाद गुण: जिस काव्य को पढ़ते ही उसका सरल और स्पष्ट अर्थ बिना किसी विशेष प्रयास के तुरंत बुद्धि में समझ आ जाए (जैसे सूखे ईंधन में आग तुरंत फैलती है), वहाँ प्रसाद गुण होता है। यह सभी रसों की सरल कविताओं में पाया जाता है।
उदाहरण: “हे प्रभु आनंददाता ज्ञान हमको दीजिए। शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिए।”
प्रश्न 13. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के सटीक उत्तर लिखिए:
“साहित्य का आधार जीवन है। इसी आधार पर साहित्य की भव्य इमारत खड़ी होती है। जीवन परमात्मा की सृष्टि है, इसलिए वह सुबोध और सुगम है। परंतु साहित्य मनुष्य की सृष्टि है, इसलिए वह विचारों और भावनाओं के ताने-बाने से निर्मित होता है। जो समाज अपने साहित्य का आदर नहीं करता, वह आगे चलकर अपना नैतिक और सांस्कृतिक अस्तित्व खो बैठता है। साहित्य ही समाज का दर्पण है, जो हमें हमारे वास्तविक रूप का साक्षात्कार कराता है।”
(i) साहित्य की भव्य इमारत का मुख्य आधार क्या है?
(ii) जीवन और साहित्य में क्या मुख्य अंतर बताया गया है?
(iii) समाज के लिए अपने साहित्य का आदर करना क्यों आवश्यक है?
(iv) इस गद्यांश का एक सर्वथा उपयुक्त और सटीक शीर्षक (Title) लिखिए।
उत्तर:
(i) साहित्य की भव्य इमारत का मुख्य आधार मानव जीवन है।
(ii) मुख्य अंतर यह है कि जीवन परमात्मा की सृष्टि है, इसलिए वह सुबोध और सुगम है; जबकि साहित्य मनुष्य की मानसिक सृष्टि है जो विचारों और भावनाओं के ताने-बाने से बनती है।
(iii) यदि समाज अपने साहित्य का आदर नहीं करेगा, तो वह समय के साथ अपना नैतिक और सांस्कृतिक अस्तित्व पूरी तरह खो बैठेगा।
(iv) शीर्षक: साहित्य और समाज का संबंध (या साहित्य: समाज का दर्पण)।
प्रश्न 14. शासकीय पत्र (Official Letter) और अर्धशासकीय पत्र (Demi-Official Letter) में क्या अंतर होता है? दोनों के मुख्य प्रारूप (Format) की रूपरेखा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शासकीय और अर्धशासकीय पत्र दोनों ही सरकारी कामकाज के अंग हैं, परंतु इनमें निम्नलिखित मुख्य अंतर होते हैं:
1. औपचारिकता: शासकीय पत्र पूर्णतः औपचारिक (Formal) होता है, जो एक पद से दूसरे पद को भेजा जाता है (जैसे कलेक्टर द्वारा सचिव को)। अर्धशासकीय पत्र में औपचारिकता कम होती है और यह एक अधिकारी द्वारा दूसरे अधिकारी को व्यक्तिगत स्तर पर किसी कार्य में तेजी लाने के लिए लिखा जाता है।
2. भाषा और शैली: शासकीय पत्र की भाषा अन्य पुरुष (Third Person) में होती है और अत्यंत नपी-तुली व प्रशासनिक होती है। अर्धशासकीय पत्र उत्तम पुरुष (First Person) में लिखा जाता है, और इसकी शुरुआत ‘प्रिय श्री…’ या ‘सस्नेह…’ जैसे आत्मीय शब्दों से हो सकती है।
3. संबोधन: शासकीय पत्र में नाम का उल्लेख नहीं होता, केवल पद नाम होता है। अर्धशासकीय पत्र में अधिकारी के नाम का उल्लेख सम्मानपूर्वक किया जा सकता है।
प्रारूप की रूपरेखा: शासकीय पत्र में सबसे ऊपर पत्र क्रमांक, कार्यालय का नाम, दिनांक, फिर ‘सेवा में’ के बाद पद नाम और विषय होता है। अर्धशासकीय पत्र में अधिकारी का नाम दाईं या बाईं ओर व्यक्तिगत रूप से अंकित होता है और अंत में ‘आपका शुभेच्छु’ या ‘भवदीय’ लिखा जाता है।
प्रश्न 15. ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ के परिप्रेक्ष्य में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के ‘आदर्श समाज’ (Ideal Society) की कल्पना के मुख्य स्तंभों पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
उत्तर: बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने प्रसिद्ध भाषण ‘एनीहिलेशन ऑफ कास्ट’ के अंश ‘मेरी कल्पना का आदर्श समाज’ में एक आदर्श और समतामूलक समाज की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार एक आदर्श समाज के तीन मुख्य स्तंभ होने चाहिए:
1. स्वतंत्रता (Liberty): समाज में प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी पेशा (व्यापार) चुनने, जीवन जीने, देश में कहीं भी आने-जाने और अपने विचारों को अभिव्यक्त करने की पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए। जाति प्रथा की तरह किसी पर जन्म आधारित पेशा थोपना गुलामी के समान है।
2. समता (Equality): फ्रांसीसी क्रांति के इस नारे का समर्थन करते हुए बाबा साहेब कहते हैं कि यद्यपि सभी मनुष्य जन्म, आनुवंशिकता और प्रयत्नों के आधार पर समान नहीं होते, लेकिन एक सभ्य समाज को अपने सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और सबको आगे बढ़ने के समान अवसर (Equal Opportunities) देने चाहिए।
3. भ्रातृता (Fraternity/भाईचारा): समाज में सभी नागरिकों के बीच दूध और पानी के मिश्रण की तरह एक सहज भाईचारा होना चाहिए। समाज में इतनी गतिशीलता होनी चाहिए कि कोई भी अच्छा बदलाव समाज के एक छोर से दूसरे छोर तक तुरंत पहुँच सके। इसी भाईचारे का दूसरा नाम लोकतंत्र है, क्योंकि लोकतंत्र केवल शासन की पद्धति नहीं, बल्कि सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति है।
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