
MP BOARD की आगामी अर्द्धवार्षिक/ वार्षिक परीक्षा 2026-27 के लिए कक्षा 12 रसायनशास्त्र नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2026-27 (MP Board) दिए गए हैं हिंदी के अतिरिक्त इंग्लिश , संस्कृत , भौतिक , रसायन (विज्ञान/ गणित संकाय ) कला संकाय ( इतिहास , राजनीति आदि ) कामर्स संकाय ( एकाउंटेंसी , व्यवसाय अध्ययन ) कृषि संकाय के नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर इस वेबसाईट पर दिए गए है . बोर्ड परीक्षा तक वेबसाईट को दिन में कम से कम एक बार अवश्य चेक करें . नियमित अपडेट होगी .
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अर्द्धवार्षिक परीक्षा कक्षा 12 रसायनशास्त्र नोट्स/ महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 2026-27 (MP Board)
🛑 भाग 1: 1 अंक वाले 25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (उत्तर सहित)
(A) सही विकल्प चुनकर लिखिए (MCQs)
प्रश्न 1. शुद्ध जल की मोलरता (Molarity) का मान कितना होता है?
(अ) 55.5 M
(ब) 5.55 M
(स) 18 M
(द) 0.18 M
उत्तर: (अ) 55.5 M
प्रश्न 2. विशिष्ट चालकता (Electrolytic Conductivity) की S.I. इकाई क्या है?
(अ) ओम-1 सेमी-1
(ब) ओम सेमी
(स) ओम-1 सेमी2 मोल-1
(द) सीमेंस
उत्तर: (अ) ओम-1 सेमी-1 (या S cm-1)
प्रश्न 3. प्रथम कोटि की अभिक्रिया (First Order Reaction) के लिए वेग स्थिरांक k का मात्रक होता है:
(अ) मोल लीटर-1 सेकंड-1
(ब) सेकंड-1
(स) लीटर मोल-1 सेकंड-1
(द) मोल2 सेकंड-1
उत्तर: (ब) सेकंड-1 (s-1)
प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन सा तत्व संक्रमण तत्व (Transition Element) नहीं माना जाता है?
(अ) आयरन (Fe)
(ब) कॉपर (Cu)
(स) जिंक (Zn)
(द) क्रोमियम (Cr)
उत्तर: (स) जिंक (Zn) [क्योंकि इसके d-कक्षक पूर्णतः भरे होते हैं]
प्रश्न 5. ल्यूकास अभिकर्मक (Lucas Reagent) किसका मिश्रण होता है?
(अ) तनु HCl + निर्जल ZnCl2
(ब) सांद्र HCl + निर्जल ZnCl2
(स) सांद्र HNO3 + निर्जल ZnCl2
(द) सांद्र HCl + आर्द्र FeCl3
उत्तर: (ब) सांद्र HCl + निर्जल ZnCl2
(B) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
प्रश्न 6. विलयन के प्रति लीटर में विलेय के मोलों की संख्या को विलयन की …………….. कहते हैं।
उत्तर: मोलरता
प्रश्न 7. वह इलेक्ट्रोड जिस पर ऑक्सीकरण की क्रिया संपन्न होती है, …………….. कहलाता है।
उत्तर: एनोड
प्रश्न 8. अभिक्रिया की दर अभिकारक की सांद्रता के …………….. होती है। (समानुपाती / व्युत्क्रमानुपाती)
उत्तर: समानुपाती
प्रश्न 9. उपसहसंयोजक यौगिकों में केंद्रीय धातु को इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने वाले परमाणु या समूह …………….. कहलाते हैं।
उत्तर: लिगैंड (Ligand)
प्रश्न 10. आर.एन.ए. (RNA) में थायमीन के स्थान पर …………….. क्षार पाया जाता है।
उत्तर: यूरसिल
(C) सही जोड़ी बनाइए
| कॉलम ‘A’ | कॉलम ‘B’ |
|---|---|
| (1) राउल्ट का नियम | (A) [Co(NH3)6]Cl3 |
| (2) अन्त:संक्रमण तत्व | (B) आदर्श विलयन |
| (3) उदासीन लिगैंड | (C) f-ब्लॉक के तत्व (लैंथेनाइड्स) |
| (4) क्लोरोफॉर्म + Ag चूर्ण | (A) एमीन (R-NH2) |
| (5) कार्बिलएमीन परीक्षण | (E) एसीटलीन गैस (C2H2) |
उत्तर (सही मिलान): 1 → (B), 2 → (C), 3 → (A), 4 → (E), 5 → (D)
(D) एक वाक्य / शब्द में उत्तर दीजिए
प्रश्न 16. शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्द्धआयु काल (t1/2) अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता पर किस प्रकार निर्भर करता है?
उत्तर: प्रारंभिक सांद्रता के समानुपाती होता है (t1/2 ∝ [A]0)।
प्रश्न 17. क्लोरोबेंजीन की क्रिया शुष्क ईथर की उपस्थिति में सोडियम धातु से कराने पर क्या बनता है?
उत्तर: डाइफेनिल (Diphenyl) – इसे फिटिग अभिक्रिया कहते हैं।
प्रश्न 18. मिरबेन का तेल (Oil of Mirbane) किसे कहा जाता है?
उत्तर: नाइट्रोबेंजीन को।
प्रश्न 19. प्रोटीन की मौलिक रचनात्मक इकाई क्या है?
उत्तर: अमीनो अम्ल (Amino Acids)।
प्रश्न 20. विटामिन C का रासायनिक नाम क्या है?
उत्तर: एस्कॉर्बिक अम्ल (Ascorbic Acid)।
(E) सत्य या असत्य बताइए
प्रश्न 21. तापमान बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता बढ़ती है।
उत्तर: असत्य (विलेयता घटती है क्योंकि यह एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है)।
प्रश्न 22. सेल स्थिरांक का मात्रक सेमी-1 होता है।
उत्तर: सत्य (G* = l/A)
प्रश्न 23. अभिक्रिया की आणविकता (Molecularity) का मान कभी भी शून्य या भिन्नात्मक नहीं हो सकता।
उत्तर: सत्य
प्रश्न 24. K4[Fe(CN)6] एक अंत:कक्षक (Inner Orbital) संकुल यौगिक है।
उत्तर: सत्य (d2sp3 संकरण के कारण)
प्रश्न 25. ग्लूकोज एक डाइसैकेराइड शर्करा है।
उत्तर: असत्य (यह एक मोनोसैकेराइड शर्करा है)।
🛑 भाग 2: 2 अंक वाले 25 लघूत्तरीय प्रश्न (उत्तर सहित)
प्रश्न 1. मोलरता और मोललता में दो मुख्य अंतर लिखिए।
उत्तर: (1) मोलरता विलयन के 1 लीटर आयतन पर आधारित होती है, जबकि मोललता विलायक के 1 किलोग्राम द्रव्यमान पर आधारित होती है। (2) मोलरता तापमान बदलने पर बदल जाती है, जबकि मोललता पर तापमान का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
प्रश्न 2. हेनरी का नियम लिखिए तथा इसका एक अनुप्रयोग दीजिए।
उत्तर: स्थिर ताप पर किसी विलायक के निश्चित आयतन में घुली गैस का द्रव्यमान (m), उस गैस के दाब (p) के समानुपाती होता है (m = kp)। *अनुप्रयोग:* सोडा वाटर और शीतल पेयों में CO2 की विलेयता बढ़ाने के लिए बोतल को उच्च दाब पर बंद किया जाता है।
प्रश्न 3. कोल्शराश का नियम लिखिए।
उत्तर: इस नियम के अनुसार, किसी वैद्युत अपघट्य की अनन्त तनुता पर मोलर चालकता (Λ0m), उसके धनायनों और ऋणायनों की अनन्त तनुता पर आयनिक चालकताओं के योग के बराबर होती है। [Λ0m = ν+λ0+ + ν–λ0–]
प्रश्न 4. संक्षारण (Corrosion) किसे कहते हैं? इसे रोकने का एक उपाय लिखिए।
उत्तर: वायुमण्डलीय गैसों और नमी की उपस्थिति में धातुओं की सतह का धीरे-धीरे अवांछित यौगिकों (जैसे ऑक्साइड) में बदलकर नष्ट होना संक्षारण कहलाता है। जैसे लोहे पर जंग लगना। *उपाय:* धातु की सतह पर पेंट या ग्रीस लगाना अथवा यशदलेपन (जस्तीकरण) करना।
प्रश्न 5. अभिक्रिया की दर (वेग) और वेग स्थिरांक (k) में दो अंतर लिखिए।
उत्तर: (1) अभिक्रिया की दर समय के साथ अभिकारकों की सांद्रता में परिवर्तन को व्यक्त करती है, जबकि वेग स्थिरांक विशिष्ट दर है जब अभिकारक की सांद्रता इकाई हो। (2) अभिक्रिया की दर अभिकारकों की प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर करती है, परंतु वेग स्थिरांक सांद्रता पर निर्भर नहीं करता।
प्रश्न 6. अभिक्रिया की कोटि (Order of Reaction) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: किसी रासायनिक अभिक्रिया के दर नियम समीकरण में उपस्थित अभिकारकों के सांद्रता पदों की घातों के योगफल को उस अभिक्रिया की कोटि कहते हैं। यह प्रयोगात्मक मान है जो शून्य या भिन्नात्मक हो सकता है।
प्रश्न 7. छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया (Pseudo First Order Reaction) किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनकी आणविकता दो या अधिक होती है, परंतु वे बलगतिकी रूप से प्रथम कोटि की दर का पालन करती हैं, उन्हें छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया कहते हैं।
*उदाहरण:* एथिल एसीटेट का अम्लीय जलअपघटन: CH3COOC2H5 + H2O → CH3COOH + C2H5OH.
प्रश्न 8. संक्रमण तत्व रंगीन आयन क्यों बनाते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: संक्रमण तत्वों में आंशिक रूप से भरे d-कक्षक (d1 से d9) उपस्थित होते हैं। जब इन पर दृश्य प्रकाश पड़ता है, तो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन ऊर्जा अवशोषित कर एक d-कक्षक से दूसरे d-कक्षक में चले जाते हैं (d-d संक्रमण)। अवशोषित प्रकाश के पूरक रंग के कारण ये आयन रंगीन दिखाई देते हैं।
प्रश्न 9. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) किसे कहते हैं?
उत्तर: लैंथेनाइड श्रेणी में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ नाभिकीय आवेश बढ़ता जाता है, जिससे आने वाला नया इलेक्ट्रॉन बाह्य कक्षक में न जाकर आंतरिक (4f) कक्षक में प्रवेश करता है। f-इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव (Shielding Effect) बहुत कमजोर होने के कारण परमाणु और आयनिक त्रिज्या में क्रमिक कमी आती है, इसे लैंथेनाइड संकुचन कहते हैं।
प्रश्न 10. किलेट (Chelate) किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जब कोई द्विदंतुर या बहुदंतुर लिगैंड केंद्रीय धातु परमाणु को अपने दो या अधिक दाता परमाणुओं द्वारा इस प्रकार इलेक्ट्रॉन युग्म दान करता है कि एक बंद वलय (Ring) संरचना बनती है, तो इस संकुल को किलेट संकुल कहते हैं। जैसे: [Co(en)3]3+ में एथिलीनडाइएमीन (en) एक किलेटिंग लिगैंड है।
प्रश्न 11. प्रभावी परमाणु संख्या (EAN) की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: किसी उपसहसंयोजक संकुल यौगिक में केंद्रीय धातु परमाणु या आयन के पास उपस्थित कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या (धातु के मूल इलेक्ट्रॉन – ऑक्सीकरण अवस्था में खोए इलेक्ट्रॉन + लिगैंड्स से प्राप्त इलेक्ट्रॉन) को प्रभावी परमाणु संख्या कहते हैं।
प्रश्न 12. नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया (SN1 और SN2) में प्रयुक्त क्रियाधारों की क्रियाशीलता का क्रम लिखिए।
उत्तर:
– SN1 अभिक्रिया के लिए: 3° एल्किल हैलाइड > 2° एल्किल हैलाइड > 1° एल्किल हैलाइड।
– SN2 अभिक्रिया के लिए: 1° एल्किल हैलाइड > 2° एल्किल हैलाइड > 3° एल्किल हैलाइड।
प्रश्न 13. वुर्ट्ज़ अभिक्रिया (Wurtz Reaction) का रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर: जब एल्किल हैलाइड के दो अणुओं की क्रिया शुष्क ईथर की उपस्थिति में सोडियम धातु से कराई जाती है, तो उच्च एल्केन बनते हैं।
R-X + 2Na + X-R → R-R + 2NaX (जैसे: 2CH3Cl + 2Na → C2H6 + 2NaCl).
प्रश्न 14. फिनॉल, अल्कोहल की तुलना में अधिक अम्लीय क्यों होता है?
उत्तर: फिनॉल से H+ आयन निकलने के बाद बना फिनॉक्साइड आयन (Phenoxide ion) अनुनाद (Resonance) के कारण अत्यधिक स्थाई हो जाता है। इसके विपरीत, अल्कोहल से बना अल्कॉक्साइड आयन अनुनाद प्रदर्शित नहीं करता और कम स्थाई होता है, इसलिए फिनॉल अधिक अम्लीय है।
प्रश्न 15. ईथर का क्वथनांक समान अणुभार वाले अल्कोहल की तुलना में बहुत कम क्यों होता है?
उत्तर: अल्कोहलों में अणुओं के बीच अंतर-आणविक हाइड्रोजन बंध (Intermolecular Hydrogen Bonding) पाया जाता है, जिससे अणु आपस में संगुणित हो जाते हैं। ईथरों में हाइड्रोजन परमाणु सीधे ऑक्सीजन से न जुड़े होने के कारण हाइड्रोजन बंध नहीं बन पाता, इसलिए इनका क्वथनांक कम होता है।
प्रश्न 16. रीमर-टीमैन अभिक्रिया (Reimer-Tiemann Reaction) का समीकरण लिखिए।
उत्तर: जब फिनॉल की क्रिया क्लोरोफॉर्म और जलीय NaOH के साथ 340 K पर कराई जाती है, तो मुख्य उत्पाद के रूप में सैलिसिैल्डिहाइड बनता है।
C6H5OH + CHCl3 + 3NaOH → C6H4(OH)CHO + 3NaCl + 2H2O.
प्रश्न 17. फॉर्मेलिन (Formalin) क्या है? इसका एक मुख्य उपयोग लिखिए।
उत्तर: फॉर्मेल्डिहाइड (HCHO) के 40% जलीय विलयन को फॉर्मेलिन कहते हैं। उपयोग: इसका उपयोग प्रयोगशाला में जैविक नमूनों (Biological Specimens) को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए परिरक्षक के रूप में किया जाता है।
प्रश्न 18. फेहलिंग विलयन परीक्षण क्या है? कौन से यौगिक यह परीक्षण देते हैं?
उत्तर: फेहलिंग विलयन के साथ गर्म करने पर जो यौगिक क्यूप्रस ऑक्साइड (Cu2O) का लाल अवक्षेप देते हैं, वह यह परीक्षण है। सभी एलिफैटिक एल्डिहाइड (जैसे CH3CHO) यह परीक्षण देते हैं, कीटोन्स यह परीक्षण नहीं देते।
प्रश्न 19. एमीन क्षारीय प्रकृति के क्यों होते हैं?
उत्तर: एमीनो समूह के नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone Pair of Electron) उपस्थित होता है, जिसे यह आसानी से प्रोटॉन (H+) को दान कर सकता है। लुईस अम्ल-क्षार सिद्धांत के अनुसार इलेक्ट्रॉन युग्म दाता होने के कारण ये क्षारीय होते हैं।
प्रश्न 20. ऐनिलीन, अमोनिया की तुलना में दुर्बल क्षारक क्यों है?
उत्तर: ऐनिलीन में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ अनुनाद (Resonance) में भाग लेता है, जिससे वह प्रोटॉन को दान करने के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता। अमोनिया में ऐसा कोई अनुनाद नहीं होता, इसलिए ऐनिलीन दुर्बल क्षारक है।
प्रश्न 21. जुइटर आयन (Zwitter Ion) किसे कहते हैं? संरचना बनाएँ।
उत्तर: अमीनो अम्लों में एक अम्लीय समूह (-COOH) और एक क्षारीय समूह (-NH2) दोनों उपस्थित होते हैं। आंतरिक प्रोटॉन स्थानांतरण के कारण ये एक आंतरिक लवण बनाते हैं जिसमें धनायन और ऋणायन दोनों होते हैं, इसे जुइटर आयन कहते हैं। [+NH3-CH(R)-COO–]
प्रश्न 22. पेप्टाइड बंध (Peptide Bond) किसे कहते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जब एक अमीनो अम्ल का कार्वोक्सिल समूह (-COOH) दूसरे अमीनो अम्ल के अमीनो समूह (-NH2) से क्रिया करता है, तो जल का एक अणु बाहर निकलता है और एक -CO-NH- बंध बनता है, इसे ही पेप्टाइड बंध कहते हैं। यह प्रोटीनों की मूल कड़ी है।
प्रश्न 23. डी.एन.ए. और आर.एन.ए. में उपस्थित शर्कराओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
– डी.एन.ए. (DNA) में: β-D-2-डीऑक्सीराइबोज शर्करा।
– आर.एन.ए. (RNA) में: β-D-राइबोज शर्करा।
प्रश्न 24. विकृतीकरण (Denaturation of Proteins) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जब प्रोटीन को उच्च ताप, अम्ल या क्षार के संपर्क में लाया जाता है, तो उसकी भौतिक और जैविक सक्रियता नष्ट हो जाती है। इसकी प्राथमिक संरचना अपरिवर्तित रहती है परंतु द्वितीयक और तृतीयक संरचनाएँ टूट जाती हैं। जैसे अंडे को उबालने पर उसका स्कंदन होना।
प्रश्न 25. न्यूक्लिक अम्ल के दो मुख्य कार्य लिखिए।
उत्तर: (1) आनुवंशिक सूचनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित करना (DNA द्वारा)। (2) कोशिकाओं में प्रोटीन संश्लेषण का नियंत्रण और संचालन करना (RNA द्वारा)।
🛑 भाग 3: 3 अंक वाले 20 महत्वपूर्ण प्रश्न (उत्तर व न्यूमेरिकल सहित)
प्रश्न 1. आदर्श विलयन और अनादर्श विलयन में कोई तीन मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1. आदर्श विलयन सभी सांद्रताओं और तापमान पर राउल्ट के नियम का पूर्णतः पालन करते हैं, जबकि अनादर्श विलयन राउल्ट के नियम से विचलन (धनात्मक या ऋणात्मक) प्रदर्शित करते हैं।
2. आदर्श विलयन के बनने पर एन्ट्रापी परिवर्तन को छोड़कर ΔHmixing = 0 और ΔVmixing = 0 होता है, जबकि अनादर्श विलयन में ΔHmixing ≠ 0 और ΔVmixing ≠ 0 होता है।
3. आदर्श विलयन में A-B आकर्षण बल A-A और B-B बलों के बराबर होता है (जैसे बेंजीन + टालूईन), अनादर्श में यह भिन्न होता है।
प्रश्न 2. अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative Properties) किसे कहते हैं? इसके चारों प्रकारों के नाम लिखिए।
उत्तर: विलयन के वे भौतिक गुण जो विलयन के निश्चित आयतन में उपस्थित विलेय के कणों (अणुओं या आयनों) की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि विलेय की रासायनिक प्रकृति पर, अणुसंख्यक गुणधर्म कहलाते हैं।
चारों प्रकार: (1) वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन, (2) क्वथनांक का उन्नयन, (3) हिमांक का अवनमन, (4) परासरण दाब।
प्रश्न 3. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) का सचित्र वर्णन कीजिए तथा इसकी एक सीमा लिखिए।
उत्तर: मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड में एक प्लेटिनम के तार पर प्लेटिनम ब्लैक की परत चढ़ी प्लेट लगी होती है, जो 1 M सांद्रता वाले H+ आयन (जैसे HCl) के विलयन में डूबी होती है। इसमें 298 K ताप और 1 वायुमण्डलीय दाब पर शुद्ध हाइड्रोजन गैस प्रवाहित की जाती है। इसका मानक विभव स्वेच्छा से 0.00 V स्वीकार किया गया है। यह एनोड और कैथोड दोनों की तरह कार्य कर सकता है। सीमा: प्रयोगात्मक रूप से पूरे समय हाइड्रोजन गैस का दाब ठीक 1 वायुमण्डल और H+ आयन की सांद्रता ठीक 1 M बनाए रखना अत्यंत कठिन होता है।
प्रश्न 4. शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए समाकलित वेग समीकरण (Integrated Rate Equation) स्थापित कीजिए।
उत्तर: माना एक शून्य कोटि की अभिक्रिया R → P है। दर नियम से, दर = -d[R]/dt = k[R]0 = k.
-d[R] = k dt ⇒ दोनों ओर समाकलन करने पर: [R] = -kt + I (जहाँ I समाकलन स्थिरांक है)।
यदि प्रारंभ में t = 0 हो, तो [R] = [R]0 (प्रारंभिक सांद्रता) होगी। अतः I = [R]0.
मान रखने पर: [R] = -kt + [R]0 ⇒ kt = [R]0 – [R] ⇒ k = ([R]0 – [R]) / t
प्रश्न 5. प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्द्धआयु काल (t1/2) का व्यंजक स्थापित कीजिए और सिद्ध कीजिए कि यह प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करता।
उत्तर: प्रथम कोटि की अभिक्रिया का समाकलित वेग समीकरण: k = (2.303 / t) log([R]0 / [R]).
अर्द्धआयु काल की परिभाषा से, जब t = t1/2 होगा, तब बची हुई सांद्रता [R] = [R]0 / 2 होगी।
मान रखने पर: k = (2.303 / t1/2) log([R]0 / ([R]0/2)) = (2.303 / t1/2) log 2.
चूँकि log 2 = 0.3010 होता है, अतः: k = (2.303 × 0.3010) / t1/2 = 0.693 / t1/2.
t1/2 = 0.693 / k. इस अंतिम समीकरण में प्रारंभिक सांद्रता [R]0 का कोई पद नहीं है, अतः सिद्ध होता है कि यह प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करता।
प्रश्न 6. d-ब्लॉक (संक्रमण तत्व) और f-ब्लॉक (अन्त:संक्रमण तत्व) में कोई तीन मुख्य अंतर लिखिए।
उत्तर:
1. d-ब्लॉक के तत्वों में विभेदी इलेक्ट्रॉन बाह्य कोश के उपांत्य (n-1)d उपकोश में प्रवेश करता है, जबकि f-ब्लॉक में इलेक्ट्रॉन बाह्य कोश से दो अंदर वाले (n-2)f उपकोश में प्रवेश करता है।
2. d-ब्लॉक के तत्व प्रकृति में सामान्यतः स्थाई होते हैं और भारी मात्रा में मिलते हैं, जबकि f-ब्लॉक के अधिकांश तत्व दुर्लभ मृदा तत्व हैं और कुछ कृत्रिम व रेडियोधर्मी हैं।
3. d-ब्लॉक के तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं में 1 का अंतर होता है (जैसे Fe+2, Fe+3), जबकि f-ब्लॉक के तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं में मुख्य रूप से +3 प्रधान होती है और अन्य अवस्थाओं में 2 का अंतर होता है।
प्रश्न 7. वर्नर का उपसहसंयोजन सिद्धांत (Werner’s Coordination Theory) के मुख्य तीन बिंदु लिखिए।
उत्तर:
1. उपसहसंयोजक यौगिकों में केंद्रीय धातु परमाणु दो प्रकार की संयोजकताएँ प्रदर्शित करता है: (i) प्राथमिक संयोजकता, (ii) द्वितीयक संयोजकता।
2. प्राथमिक संयोजकता आयननीय (Ionizable) होती है और यह केवल ऋणायनों द्वारा संतुष्ट होती है, यह धातु की ऑक्सीकरण संख्या को दर्शाती है।
3. द्वितीयक संयोजकता गैर-आयननीय होती है और यह उदासीन अणुओं या ऋणायनों (लिगैंड्स) द्वारा संतुष्ट होती है, यह धातु की उपसहसंयोजन संख्या (समन्वय संख्या) और ज्यामिति को निर्धारित करती है।
प्रश्न 8. क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत (CFT) के आधार पर मजबूत क्षेत्र लिगैंड और कमजोर क्षेत्र लिगैंड के कारण d-कक्षकों के विपाटन (Splitting) को समझाइए।
उत्तर: CFT के अनुसार, जब लिगैंड केंद्रीय धातु के समीप आते हैं, तो समभ्रंश (Degenerate) d-कक्षक दो भागों t2g (कम ऊर्जा) और eg (उच्च ऊर्जा) में टूट जाते हैं, इसे विपाटन कहते हैं।
– मजबूत क्षेत्र लिगैंड (जैसे CN–, CO): ये कक्षकों का अत्यधिक विपाटन करते हैं, जिससे विपाटन ऊर्जा (Δ0) का मान युग्मन ऊर्जा (P) से अधिक हो जाता है (Δ0 > P)। इसके कारण इलेक्ट्रॉन उच्च कक्षक में न जाकर नीचे ही युग्मित हो जाते हैं और निम्न चक्रण संकुल बनते हैं।
– कमजोर क्षेत्र लिगैंड (जैसे F–, Cl–): ये कम विपाटन करते हैं (Δ0 < P)। इलेक्ट्रॉन नीचे युग्मित होने के बजाय ऊपर चले जाते हैं और उच्च चक्रण संकुल बनते हैं।
प्रश्न 9. हेलोएल्केन की नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में SN1 और SN2 क्रियाविधि में कोई तीन अंतर लिखिए।
उत्तर:
1. SN1 अभिक्रिया दो चरणों में संपन्न होती है और इसमें कार्बधनायन (Carbocation) मध्यवर्ती बनता है, जबकि SN2 अभिक्रिया एक ही चरण में संपन्न होती है और इसमें एक संक्रमण अवस्था (Transition State) बनती है।
2. SN1 की दर केवल एल्किल हैलाइड की सांद्रता पर निर्भर करती है (प्रथम कोटि), जबकि SN2 की दर एल्किल हैलाइड और नाभिकस्नेही दोनों की सांद्रता पर निर्भर करती है (द्वितीयक कोटि)।
3. SN1 में अंतिम उत्पाद के रूप में रेसिमिक मिश्रण (Racemization) प्राप्त होता है, जबकि SN2 में विन्यास का पूर्ण प्रतिलोमन (Walden Inversion) होता है।
प्रश्न 10. प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°) और तृतीयक (3°) अल्कोहलों में विभेद करने की ल्यूकास परीक्षण विधि को समझाइए।
उत्तर: दिए गए अल्कोहल में कमरे के ताप पर ल्यूकास अभिकर्मक (सांद्र HCl + निर्जल ZnCl2) मिलाने पर एल्किल क्लोराइड बनने के कारण धुंधलापन या तैलिय परत बनती है:
1. तृतीयक (3°) अल्कोहल: ल्यूकास अभिकर्मक मिलाते ही तुरंत (सकंडों में) धुंधलापन या सफेद अवक्षेप देता है।
2. द्वितीयक (2°) अल्कोहल: लगभग 5 मिनट के बाद धुंधलापन प्रदर्शित करता है।
3. प्राथमिक (1°) अल्कोहल: कमरे के ताप पर कोई धुंधलापन नहीं देता, केवल गर्म करने पर ही धुंधलापन आता है।
प्रश्न 11. एल्डिहाइड और कीटोन में कोई तीन मुख्य रासायनिक अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1. एल्डिहाइड टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करके रजत दर्पण (Silver Mirror) बनाते हैं, जबकि कीटोन टॉलेन अभिकर्मक के साथ कोई क्रिया नहीं करते।
2. एल्डिहाइड फेहलिंग विलयन के साथ गर्म करने पर क्यूप्रस ऑक्साइड का लाल अवक्षेप देते हैं, जबकि कीटोन यह परीक्षण नहीं देते।
3. एल्डिहाइड ऑक्सीकृत होकर समान कार्बन संख्या वाला कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाते हैं, जबकि कीटोन्स का आसानी से ऑक्सीकरण नहीं होता और उग्र परिस्थितियों में कम कार्बन वाला अम्ल बनता है।
प्रश्न 12. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक एमीनों की पहचान करने की हिंसबर्ग परीक्षण विधि को समझाइए।
उत्तर: हिंसबर्ग अभिकर्मक— बेंजीन सल्फोनिल क्लोराइड (C6H5SO2Cl) के साथ एमीनों की क्रिया कराई जाती है:
1. प्राथमिक (1°) एमीन: जो सल्फोनेमाइड उत्पाद बनाते हैं, वह KOH विलयन में घुलनशील होता है (क्योंकि नाइट्रोजन पर अम्लीय हाइड्रोजन होता है)।
2. द्वितीयक (2°) एमीन: जो उत्पाद बनाते हैं, वह KOH विलयन में अघुलनशील होता है (क्योंकि नाइट्रोजन पर कोई हाइड्रोजन नहीं बचता)।
3. तृतीयक (3°) एमीन: यह हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ कोई क्रिया ही नहीं करता क्योंकि इसमें नाइट्रोजन पर सक्रिय हाइड्रोजन नहीं होता।
प्रश्न 13. ग्लूकोज की संरचना में (i) पाँच -OH समूह, (ii) एक -CHO समूह की उपस्थिति दर्शाने वाले रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
– (i) पाँच -OH समूह की पुष्टि: ग्लूकोज की क्रिया एसिटिक एनहाइड्राइड से कराने पर ग्लूकोज पेंटाएसिटेट बनता है, जो पाँच -OH समूहों को सिद्ध करता है।
[C6H12O6 + 5(CH3CO)2O → ग्लूकोज पेंटाएसिटेट + 5CH3COOH]
– (ii) -CHO समूह की पुष्टि: ग्लूकोज की क्रिया जब माइल्ड ऑक्सीकारक जैसे ब्रोमीन जल (Br2/H2O) से कराई जाती है, तो कार्बोक्सिलिक समूह में बदलकर ग्लुकोनिक अम्ल बनता है।
[CHO-(CHOH)4-CH2OH + [O] → COOH-(CHOH)4-CH2OH]
प्रश्न 14. डीएनए फिंगरप्रिंटिंग (DNA Fingerprinting) क्या है? इसके दो मुख्य व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
उत्तर: प्रत्येक मनुष्य के डीएनए के न्यूक्लियोटाइडों का क्रम विशिष्ट होता है जो किसी अन्य मनुष्य (सगे जुड़वा को छोड़कर) से मेल नहीं खाता, इस विशिष्ट अनुक्रम के आधार पर व्यक्ति की पहचान करना डीएनए फिंगरप्रिंटिंग कहलाता है। यह जीवनभर अपरिवर्तित रहता है।
उपयोग: (1) न्यायालयों में अपराधियों, खूनी या चोरों की अचूक पहचान करने के लिए। (2) पैतृकता (Parentage) के विवादों को सुलझाने और खोए हुए बच्चों के असली माता-पिता का पता लगाने के लिए।
प्रश्न 15. [न्यूमेरिकल] एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक k = 5.5 × 10-14 s-1 है। इस अभिक्रिया का अर्द्धआयु काल ज्ञात कीजिए।
हल: प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए सूत्र: t1/2 = 0.693 / k
t1/2 = 0.693 / (5.5 × 10-14) = (0.693 / 5.5) × 1014
t1/2 = 0.126 × 1014 s = 1.26 × 1013 सेकंड
प्रश्न 16. [न्यूमेरिकल] 2.5 ग्राम एथनोइक अम्ल (CH3COOH) को 75 ग्राम बेंजीन में घोला गया है। एथनोइक अम्ल की मोललता (Molality) की गणना कीजिए। (अणुभार: CH3COOH = 60 g/mol)
हल: विलेय का द्रव्यमान (wB) = 2.5 g, विलेय का अणुभार (MB) = 60 g/mol.
विलायक का द्रव्यमान (wA) = 75 g.
सूत्र: मोललता (m) = (wB × 1000) / (MB × wA)
m = (2.5 × 1000) / (60 × 75) = 2500 / 4500 = 25 / 45 = 0.556 mol/kg (या m)
प्रश्न 17. [न्यूमेरिकल] एक रासायनिक अभिक्रिया का वेग स्थिरांक ताप 293 K से 313 K करने पर दोगुना हो जाता है। अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Ea) की गणना कीजिए। (R = 8.314 J K-1 mol-1)
हल: T1 = 293 K, T2 = 313 K, k2/k1 = 2.
आरहेनियस सूत्र से: log(k2/k1) = (Ea / 2.303R) [(T2 – T1) / (T1T2)]
log 2 = (Ea / (2.303 × 8.314)) • [(313 – 293) / (293 × 313)]
0.3010 = (Ea / 19.147) • [20 / 91709]
Ea = (0.3010 × 19.147 × 91709) / 20 = 52863 J/mol = 52.86 kJ/mol
प्रश्न 18. [न्यूमेरिकल] एक वैद्युत अपघट्य के 0.05 M विलयन का प्रतिरोध 200 ओम है। यदि सेल स्थिरांक (l/A) का मान 1.0 सेमी-1 हो, तो विलयन की मोलर चालकता (Λm) ज्ञात कीजिए।
हल: M = 0.05 mol/L, R = 200 Ω, G* = 1.0 cm-1.
विशिष्ट चालकता (κ) = G* / R = 1.0 / 200 = 0.005 S cm-1.
मोलर चालकता (Λm) = (κ × 1000) / M = (0.005 × 1000) / 0.05 = 5 / 0.05 = 100 S cm2 mol-1
प्रश्न 19. कार्बोहाइड्रेट किसे कहते हैं? इनका वर्गीकरण (मोनोसैकेराइड, ओलिगोसैकेराइड, पॉलीसैकेराइड) उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: वे पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या कीटोन अथवा वे जटिल पदार्थ जो जलअपघटित होकर पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या कीटोन देते हैं, कार्बोहाइड्रेट कहलाते हैं।
1. मोनोसैकेराइड: जिनका और अधिक जलअपघटन नहीं हो सकता (जैसे- ग्लूकोज, फ्रक्टोज)।
2. ओलिगोसैकेराइड: जो जलअपघटन पर 2 से 10 मोनोसैकेराइड इकाइयाँ देते हैं (जैसे सुक्रोज, माल्टोज)।
3. पॉलीसैकेराइड: जो जलअपघटन पर अत्यधिक संख्या में मोनोसैकेराइड अणु देते हैं, ये अस्वादिष्ट और अघुलनशील होते हैं (जैसे- स्टार्च, सेल्यूलोज)।
प्रश्न 20. न्यूक्लीओसाइड और न्यूक्लीओटाइड में क्या मुख्य अंतर होता है? संरचनात्मक अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
– न्यूक्लीओसाइड: यह नाइट्रोजनयुक्त क्षार (Purine या Pyrimidine) और पेंटोज शर्करा के संयोग से बनता है। [न्यूक्लीओसाइड = क्षार + शर्करा]।
– न्यूक्लीओटाइड: जब न्यूक्लीओसाइड के शर्करा अणु के 5वें कार्बन के साथ फॉस्फोरिक अम्ल का अणु जुड़ जाता है, तो न्यूक्लीओटाइड बनता है। [न्यूक्लीओटाइड = क्षार + शर्करा + फॉस्फेट]। यह न्यूक्लिक अम्लों की बहुलक इकाई है।
🛑 भाग 4: 4 अंक वाले 15 दीर्घ उत्तरीय विश्लेषणात्मक प्रश्न (पूर्ण रासायनिक हल)
प्रश्न 1. राउल्ट का नियम लिखिए तथा अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन के लिए इसका गणितीय व्यंजक स्थापित कीजिए। इसकी सीमाएँ भी लिखिए।
हल:नियम: किसी निश्चित ताप पर अवाष्पशील विलेय युक्त विलयन के लिए वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन, विलयन में विलेय के मोल प्रभाज (Mole Fraction) के बराबर होता है।
गणितीय व्यंजक: माना शुद्ध विलायक का वाष्प दाब P0A तथा विलयन का वाष्प दाब PS है। वाष्प दाब का अवनमन = P0A – PS.
वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन = (P0A – PS) / P0A.
राउल्ट के नियम से: (P0A – PS) / P0A = xB (जहाँ xB विलेय का मोल प्रभाज है)।
xB = nB / (nA + nB). अत्यंत तनु विलयनों के लिए nB को हर में नगण्य मानने पर:
(P0A – PS) / P0A = nB / nA = (wB × MA) / (MB × wA). इस सूत्र द्वारा विलेय का अणुभार (MB) ज्ञात किया जा सकता है।
सीमाएँ: (1) यह केवल अत्यधिक तनु विलयनों पर लागू होता है। (2) यह केवल अवाष्पशील विलेय पदार्थों के विलयनों पर लागू होता है। (3) वैद्युत अपघट्यों (जो विलयन में आयनित या संगुणित होते हैं) के विलयनों पर यह नियम काम नहीं करता।
प्रश्न 2. वैद्युत रासायनिक सेल (गैल्वेनिक सेल / डेनियल सेल) का स्वच्छ नामांकित चित्र बनाइए तथा इसकी कार्यविधि, सेल आरेख (Representation) और लवण सेतु (Salt Bridge) के दो मुख्य कार्य लिखिए।
हल: डेनियल सेल में दो पात्र होते हैं। एक पात्र में Zn की छड़ ZnSO4 विलयन में डूबी होती है (एनोड, ऋणात्मक) और दूसरे में Cu की छड़ CuSO4 विलयन में डूबी होती है (कैथोड, धनात्मक)। दोनों विलयनों को एक लवण सेतु द्वारा जोड़ा जाता है।
कार्यविधि (रासायनिक अभिक्रियाएँ):
– एनोड पर (ऑक्सीकरण): Zn(s) → Zn2+(aq) + 2e–
– कैथोड पर (अपचयन): Cu2+(aq) + 2e– → Cu(s)
– पूर्ण सेल अभिक्रिया: Zn(s) + Cu2+(aq) → Zn2+(aq) + Cu(s)
सेल आरेख:Zn(s) | Zn2+(aq) || Cu2+(aq) | Cu(s)
लवण सेतु के कार्य: (1) यह दोनों अर्धसेलों के विलयनों के बीच विद्युत संपर्क स्थापित करके परिपथ को पूर्ण करता है। (2) यह दोनों विलयनों की विद्युत उदासीनता (Electrical Neutrality) को बनाए रखता है, जिससे सेल निरंतर कार्य करता रहता है।
प्रश्न 3. [न्यूमेरिकल] एक सेल का विद्युत वाहक बल (E0cell) ज्ञात कीजिए जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है:
Ni(s) + 2Ag+(0.002 M) → Ni2+(1.60 M) + 2Ag(s).
(दिया है: E0cell = 1.05 V, 298 K ताप पर नर्नस्ट समीकरण का उपयोग कीजिए)
हल: यहाँ n = 2 (स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या)।
नर्नस्ट समीकरण से: Ecell = E0cell – (0.0591 / n) log([Ni2+] / [Ag+]2)
Ecell = 1.05 – (0.0591 / 2) log(1.60 / (0.002)2)
Ecell = 1.05 – 0.02955 log(1.60 / (4 × 10-6)) = 1.05 – 0.02955 log(4 × 105)
Ecell = 1.05 – 0.02955 × (log 4 + log 105) = 1.05 – 0.02955 × (0.6020 + 5) = 1.05 – 0.02955 × 5.6020
Ecell = 1.05 – 0.165 = 0.885 वोल्ट
प्रश्न 4. रासायनिक अभिक्रिया के वेग पर प्रभाव डालने वाले निम्नलिखित कारकों की विस्तृत व्याख्या कीजिए: (i) अभिकारकों की सांद्रता, (ii) तापमान (ताप गुणांक), (iii) उत्प्रेरक की उपस्थिति, (iv) अभिकारक का पृष्ठ क्षेत्रफल।
हल:
– (i) अभिकारकों की सांद्रता: सांद्रता बढ़ाने पर प्रति एकांक आयतन में अभिकारकों के अणुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसके कारण उनके बीच प्रभावी टक्करों (Effective Collisions) की संख्या बढ़ती है, जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।
– (ii) तापमान (ताप गुणांक): सामान्यतः तापमान में 10°C की वृद्धि करने पर अभिक्रिया का वेग दोगुना या तिगुना हो जाता है। इसका कारण यह है कि ताप बढ़ाने पर सक्रिय अणुओं (अणु जिनकी ऊर्जा देहली ऊर्जा के बराबर या अधिक है) का अंश अत्यधिक बढ़ जाता है। [ताप गुणांक = kT+10 / kT].
– (iii) उत्प्रेरक की उपस्थिति: उत्प्रेरक रासायनिक अभिक्रिया के लिए एक वैकल्पिक नया मार्ग प्रदान करता है, जिसकी सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) का मान कम होता है। सक्रियण ऊर्जा कम होने से अधिक अणु आसानी से उत्पाद में बदल जाते हैं और वेग बढ़ जाता है।
– (iv) पृष्ठ क्षेत्रफल: यदि अभिकारक ठोस अवस्था में हो, तो उसका चूर्ण बनाने पर पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ जाता है। क्षेत्रफल बढ़ने से लिगैंड्स या अन्य अभिकारकों को क्रिया करने के लिए अधिक स्थान मिलता है, जिससे वेग तीव्र हो जाता है।
प्रश्न 5. लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स की निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत तुलनात्मक समीक्षा कीजिए: (i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, (ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, (iii) रासायनिक क्रियाशीलता, (iv) संकुल निर्माण की प्रवृत्ति।
हल:
– (i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: लैंथेनाइड्स में विभेदी इलेक्ट्रॉन 4f उपकोश में प्रवेश करता है और इनका सामान्य विन्यास [Xe] 4f1-14 5d0-1 6s2 होता है। एक्टिनाइड्स में इलेक्ट्रॉन 5f उपकोश में प्रवेश करता है और इनका विन्यास [Rn] 5f1-14 6d0-1 7s2 होता है।
– (ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ: लैंथेनाइड्स मुख्य रूप से +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं, कुछ तत्व सीमित रूप से +2 और +4 दर्शाते हैं। एक्टिनाइड्स +3 के अलावा +4, +5, +6 और +7 जैसी उच्च और विविध ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि 5f, 6d और 7s कक्षकों की ऊर्जा में बहुत कम अंतर होता है।
– (iii) रासायनिक क्रियाशीलता: लैंथेनाइड्स की तुलना में एक्टिनाइड्स अत्यधिक क्रियाशील होते हैं, विशेषकर चूर्ण रूप में। एक्टिनाइड्स के सभी तत्व रेडियोधर्मी (Radioactive) होते हैं, जबकि लैंथेनाइड्स में केवल प्रोमेथियम (Pm) ही रेडियोधर्मी है।
– (iv) संकुल निर्माण: लैंथेनाइड्स का आकार बड़ा और आवेश घनत्व कम होने के कारण इनमें संकुल (Complex) बनाने की प्रवृत्ति कम होती है। एक्टिनाइड्स का आकार छोटा और उच्च नाभिकीय आवेश होने के कारण ये आसानी से मजबूत संकुल और ऑक्सोआयन (जैसे UO22+) बनाते हैं।
प्रश्न 6. संयोजकता बन्ध सिद्धान्त (VBT) के आधार पर उपसहसंयोजक संकुल [Fe(CN)6]4- और [CoF6]3- की ज्यामिति, संकरण, चुम्बकीय प्रकृति और चक्रण रूप की सविस्तार व्याख्या कीजिए।
हल:
– 1. संकुल [Fe(CN)6]4-: यहाँ केंद्रीय धातु Fe2+ अवस्था में है (3d6 4s0 4p0)। चूंकि CN– एक मजबूत क्षेत्र लिगैंड (Strong Field Ligand) है, यह 3d कक्षकों के इलेक्ट्रॉनों का बलपूर्वक युग्मन (Pairing) कर देता है। इसके कारण दो 3d कक्षक खाली हो जाते हैं। संकरण d2sp3 होता है। ज्यामिति अष्टफलकीय (Octahedral) होती है। सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होने के कारण यह प्रतिचुम्बकीय (Diamagnetic) है और आंतरिक कक्षक होने के कारण यह निम्न चक्रण संकुल (Low Spin Complex) है।
– 2. संकुल [CoF6]3-: यहाँ केंद्रीय धातु Co3+ अवस्था में है (3d6 4s0 4p0 4d0)। चूँकि F– एक कमजोर क्षेत्र लिगैंड (Weak Field Ligand) है, यह 3d इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं कर पाता। अतः बाहरी 4d कक्षकों का उपयोग होता है। संकरण sp3d2 होता है। ज्यामिति अष्टफलकीय होती है। इसमें 4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होने के कारण यह अनुचुम्बकीय (Paramagnetic) है और बाह्य कक्षक प्रयुक्त होने से यह उच्च चक्रण संकुल (High Spin Complex) कहलाता है।
प्रश्न 7. निम्नलिखित कार्बनिक रासायनिक नामी अभिक्रियाओं (Named Reactions) के केवल संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए:
(i) सैंडमेयर अभिक्रिया, (ii) विलियमसन ईथर संश्लेषण, (iii) कोल्बे अभिक्रिया, (iv) रोजनमुण्ड अपचयन।
हल:
– (i) सैंडमेयर अभिक्रिया (Sandmeyer Reaction): बेंजीन डाइऐजोनियम क्लोराइड की क्रिया CuCl/HCl से कराने पर क्लोरोबेंजीन बनता है।
C6H5N2Cl μ (CuCl/HCl) → C6H5Cl + N2↑.
– (ii) विलियमसन ईथर संश्लेषण: सोडियम अल्कॉक्साइड की क्रिया एल्किल हैलाइड से कराने पर ईथर बनता है (SN2)।
R-ONa + R’-X → R-O-R’ + NaX (जैसे: C2H5ONa + CH3Cl → C2H5-O-CH3 + NaCl).
– (iii) कोल्बे अभिक्रिया (Kolbe’s Reaction): सोडियम फिनॉक्साइड को CO2 के साथ 400 K और उच्च दाब पर गर्म करने के बाद अम्लीकृत करने पर सैलिसिलिक अम्ल बनता है।
C6H5ONa + CO2 → C6H4(OH)COONa μ (H+) → C6H4(OH)COOH.
– (iv) रोजनमुण्ड अपचयन (Rosenmund Reduction): एसिड क्लोराइड का Pd/BaSO4 उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन द्वारा अपचयन करने पर एल्डिहाइड बनता है।
R-COCl + H2 μ (Pd/BaSO4) → R-CHO + HCl.
प्रश्न 8. एल्डिहाइड और कीटोनों में होने वाली निम्नलिखित नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिए: (i) HCN का योग, (ii) NaHSO3 का योग, (iii) ग्रिन्यार अभिकर्मक की क्रिया, (iv) हाइड्रॉक्सिलएमीन (NH2OH) की क्रिया।
हल: कार्बोनिल समूह (>C=O) ध्रुवीय होने के कारण नाभिकस्नेही योग दर्शाता है:
– (i) HCN का योग: एल्डिहाइड/कीटोन क्रिया करके सायनोहाइड्रिन बनाते हैं।
>C=O + HCN → >C(OH)(CN) [सायनोहाइड्रिन].
– (ii) NaHSO3 का योग: सोडियम बाइसल्फाइट का सफेद क्रिस्टलीय योगात्मक उत्पाद बनता है।
>C=O + NaHSO3 → >C(OH)(SO3Na).
– (iii) ग्रिन्यार अभिकर्मक की क्रिया: RMgX क्रिया करके मध्यवर्ती बनाता है जो जलअपघटन पर अल्कोहल देता है (HCHO से 1°, अन्य एल्डिहाइड से 2°, कीटोन से 3° अल्कोहल)।
>C=O + RMgX → >C(R)(OMgX) μ (H2O) → >C(R)(OH) + Mg(OH)X.
– (iv) हाइड्रॉक्सिलएमीन की क्रिया: जल का अणु बाहर निकलकर ऑक्सिम (Oxime) बनता है।
>C=O + NH2OH → >C=N-OH + H2O [ऑक्सिम]..
प्रश्न 9. ऐल्डोल संघनन (Aldol Condensation) और कैनिजारो अभिक्रिया (Cannizzaro Reaction) को रासायनिक समीकरण और मैकेनिज्म के मूल अंतर सहित विस्तार से समझाइए।
हल:
– 1. ऐल्डोल संघनन: यह उन एल्डिहाइड या कीटोनों में होता है जिनमें कम से कम एक α-हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित होता है। तनु NaOH की उपस्थिति में इसके दो अणु संघनित होकर β-हाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड (•ल्डोल) बनाते हैं, जिसे गर्म करने पर असंतृप्त एल्डिहाइड बनता है।
2CH3CHO μ (तनु NaOH) → CH3-CH(OH)-CH2-CHO μ (Δ) → CH3-CH=CH-CHO + H2O.
– 2. कैनिजारो अभिक्रिया: यह उन एल्डिहाइडों में होती है जिनमें α-हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता (जैसे HCHO, C6H5CHO)। सांद्र (50%) NaOH के साथ गर्म करने पर इसके दो अणुओं में स्वतः ऑक्सीकरण-अपचयन (Disproportionation) होता है; एक अणु अल्कोहल में अपचयित होता है और दूसरा कार्बोक्सिलिक अम्ल के लवण में ऑक्सीकृत होता है।
2HCHO + सांद्र NaOH → CH3OH (मेथिल अल्कोहल) + HCOONa (सोडियम फॉर्मेट)।
प्रश्न 10. कार्वोक्सिलिक अम्लों की अम्लीय प्रकृति को स्पष्ट कीजिए तथा इस पर इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह (-I प्रभाव) और इलेक्ट्रॉन दान करने वाले समूह (+I प्रभाव) के प्रभाव को विस्तार से समझाइए।
हल: कार्वोक्सिलिक अम्ल जलीय विलयन में आयनित होकर कार्वोक्सिलेट आयन (RCOO–) और H+ आयन देते हैं। कार्वोक्सिलेट आयन दो समान अनुनादी संरचनाओं के कारण अत्यधिक स्थाई होता है, जिससे ये प्रबल अम्लीय व्यवहार दर्शाते हैं।
– इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह (जैसे -Cl, -F, -NO2, -I प्रभाव): ये समूह कार्वोक्सिलेट आयन के ऋणआवेश को अपनी ओर खींचकर उसे पूरे अणु पर फैला (स्थानीकृत कर) देते हैं। इससे ऋणआवेश का घनत्व कम होता है और कार्वोक्सिलेट आयन का स्थायित्व बढ़ जाता है, जिससे अम्लीय प्रबलता बढ़ जाती है। (उदाहरण: CF3COOH > CCl3COOH > CH3COOH)।
– इलेक्ट्रॉन दान करने वाले समूह (जैसे एल्किल समूह -CH3, -C2H5, +I प्रभाव): ये समूह कार्वोक्सिलेट आयन की ओर इलेक्ट्रॉन ढकेलते हैं, जिससे ऑक्सीजन पर ऋणआवेश का घनत्व और बढ़ जाता है। इससे आयन का स्थायित्व घट जाता है और अम्लीय प्रबलता कम हो जाती है। (उदाहरण: HCOOH > CH3COOH > C2H5COOH)।
प्रश्न 11. एमीनों के संश्लेषण की निम्नलिखित दो प्रमुख रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए: (i) हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया, (ii) गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण।
हल:
– (i) हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण (Hoffmann Bromamide Reaction): जब किसी एसिड एमाइड की क्रिया ब्रोमीन और कास्टिक पोटाश (KOH) के जलीय विलयन से कराई जाती है, तो एक कम कार्बन वाला प्राथमिक एमीन बनता है।
R-CONH2 + Br2 + 4KOH → R-NH2 + K2CO3 + 2KBr + 2H2O.
– (ii) गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण (Gabriel Phthalimide Synthesis): इसका उपयोग शुद्ध प्राथमिक एलिफैटिक एमीन बनाने के लिए किया जाता है। थैलिमाइड की क्रिया पहले अल्कोहलीय KOH से कराने पर पोटेशियम थैलिमाइड बनता है, जो एल्किल हैलाइड (R-X) से क्रिया कर N-एल्किल थैलिमाइड बनाता है। अंत में जलीय NaOH द्वारा जलअपघटन करने पर प्राथमिक एमीन (R-NH2) प्राप्त होता है। ऐनिलीन (Aromatic 1° amine) इस विधि से नहीं बनाया जा सकता क्योंकि एरिल हैलाइड नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन नहीं दर्शाते।
प्रश्न 12. प्रोटीन की प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक संरचनाओं की विस्तृत विवेचना कीजिए।
हल: प्रोटीनों की जटिल संरचना को चार स्तरों पर समझा जा सकता है:
1. प्राथमिक संरचना (Primary Structure): यह प्रोटीन के पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला में अमीनो अम्लों के जुड़ने के एक निश्चित विशिष्ट रेखीय क्रम को दर्शाती है। यदि इस क्रम में एक भी अमीनो अम्ल बदल जाए, तो प्रोटीन का गुण बदल जाता है (जैसे सिकल सेल एनीमिया में)। इसमें केवल पेप्टाइड बंध होते हैं।
2. द्वितीयक संरचना (Secondary Structure): यह पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के त्रिविम आकार को दर्शाती है, जो हाइड्रोजन बंधों के कारण मुड़ जाती है। यह दो प्रकार की होती है: (i) α-हेलिक्स (α-Helix): कुण्डलीनुमा संरचना (जैसे कूटनीति/बालों के किरेटिन में)। (ii) β-प्लीटेड शीट (β-Pleated Sheet): परतदार चादर जैसी संरचना।
3. तृतीयक संरचना (Tertiary Structure): यह द्वितीयक संरचना की पूरी श्रृंखला के आगे और अधिक मुड़ने या कुण्डलित होने से बनी अंतिम त्रिविम आकृति को दर्शाती है, जिससे रेशेदार या गोलीय (Fibrous or Globular) प्रोटीन बनते हैं। इसमें हाइड्रोजन बंध, डाइसल्फाइड बंध, वाण्डरवाल्स बल और स्थिरवैद्युत आकर्षण बल पाए जाते हैं।
4. चतुर्थक संरचना (Quaternary Structure): कुछ प्रोटीन दो या दो से अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं (उपकूलों) से मिलकर बने होते हैं। इन उपकुलों की आपस में त्रिविम व्यवस्था को चतुर्थक संरचना कहते हैं, जैसे हीमोग्लोबिन अणु।
प्रश्न 13. [न्यूमेरिकल] एक विलेय के 1.00 ग्राम को 50 ग्राम बेंजीन में घोलने पर इसके हिमांक में 0.40 K की कमी आती है। विलेय का मोलर द्रव्यमान (MB) परिकलित कीजिए। (बेंजीन के लिए हिमांक अवनमन स्थिरांक Kf = 5.12 K kg mol-1)
हल: wB = 1.00 g, wA = 50 g, ΔTf = 0.40 K, Kf = 5.12 K kg mol-1.
हिमांक अवनमन का सूत्र: ΔTf = (Kf × wB × 1000) / (MB × wA)
MB = (Kf × wB × 1000) / (ΔTf × wA)
MB = (5.12 × 1.00 × 1000) / (0.40 × 50) = 5120 / 20 = 256 g/mol.
अतः विलेय का मोलर द्रव्यमान 256 ग्राम/मोल होगा।
प्रश्न 14. [न्यूमेरिकल] 298 K ताप पर 0.01 M एसिटिक अम्ल (CH3COOH) विलयन की मोलर चालकता 48.0 S cm2 mol-1 है। यदि इसी ताप पर अनन्त तनुता पर मोलर चालकता (Λ0m) का मान 400.0 S cm2 mol-1 हो, तो एसिटिक अम्ल के वियोजन की मात्रा (α) और वियोजन स्थिरांक (Kc) की गणना कीजिए।
हल: Λm = 48.0, Λ0m = 400.0, C = 0.01 M.
1. वियोजन की मात्रा (α) = Λm / Λ0m = 48.0 / 400.0 = 48 / 400 = 0.12 (या 12%)
2. वियोजन स्थिरांक (Kc) = Cα2 / (1 – α) = (0.01 × (0.12)2) / (1 – 0.12)
Kc = (0.01 × 0.0144) / 0.88 = 0.000144 / 0.88 = 1.63 × 10-4 mol/L
प्रश्न 15. न्यूक्लिक अम्लों की रासायनिक संरचना को विस्तार से समझाइए तथा स्पष्ट कीजिए कि डीएनए अणु की दोनों श्रृंखलाएं एक-दूसरे की पूरक (Complementary) क्यों होती हैं? वाटसन और क्रिक मॉडल का उल्लेख कीजिए।
हल: न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA) न्यूक्लीओटाइडों के लंबे बहुलक (Polymers) होते हैं। प्रत्येक न्यूक्लीओटाइड तीन घटकों से बना होता है: पेंटोज शर्करा, फॉस्फेट समूह और नाइट्रोजनयुक्त विषमचक्रीय क्षार। फॉस्फेट समूह एक शर्करा के 5वें कार्बन और दूसरी शर्करा के तीसरे कार्बन के बीच फॉस्फोडाइएस्टर बंध (Phosphodiester Bond) द्वारा जुड़कर रीढ़ की हड्डी (Backbone) बनाता है।
– वाटसन और क्रिक का द्विकुण्डलिनी मॉडल (Double Helix Model): इसके अनुसार डीएनए अणु दो पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं का बना एक दाएँ हाथ की ओर घूमा हुआ द्विकुण्डलीनुमा ढांचा है। दोनों श्रृंखलाएं विपरीत दिशाओं (Antiparallel, 5′ → 3′ और 3′ → 5′) में होती हैं।
– पूरकता का कारण (Complementary Nature): दोनों श्रृंखलाओं के नाइट्रोजनयुक्त क्षार आपस में विशिष्ट हाइड्रोजन बंधों (Hydrogen Bonds) द्वारा जुड़े होते हैं। नियम के अनुसार, एक प्यूरीन हमेशा एक निश्चित पिरिमिडीन से ही जुड़ता है:
1. एडेनीन (A) हमेशा थायमीन (T) के साथ दो हाइड्रोजन बंध बनाता है (A = T)।
2. गुआनीन (G) हमेशा साइटोसीन (C) के साथ तीन हाइड्रोजन बंध बनाता है (G ≡ C)।
इसी विशिष्ट युग्मन (Specific Base Pairing) के कारण यदि हमें डीएनए की एक श्रृंखला के क्षारों का क्रम पता हो, तो दूसरी श्रृंखला का क्रम स्वतः निर्धारित हो जाता है। अतः दोनों श्रृंखलाएं समरूप नहीं बल्कि एक-दूसरे की पूरक होती हैं।
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