कैसे होती है बोर्ड कॉपियों की जांच? जानिए आपकी Answer Sheet किन-किन स्टेप्स से होकर गुजरती है

जैसा कि आप सभी जानते है कक्षा 10वी व 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं समाप्त हो चुकी है अब सभी को जल्दी से जल्दी अपने परीक्षा परिणाम का इंतजार है , हम आशा करते है की आप सभी बेहतर अंक के साथ अपनी परीक्षाएं उत्तीर्ण करेगे | सभी छात्र-छात्राओं को हमारी ओर से ढेर सारी शुभकामनायें |

इस पोस्ट में हम उन छात्र-छात्राओं की भी बात करेगे जिन्हें लगता है कि उनकेपेपर अच्छे नहीं गये हैं और शायद उनका परीक्षा परिणाम उतना बेहतर नहीं आएगा जितनी वे अपेक्षा कर रहे थे और संभव हैं बहुत से विद्यार्थी किन्ही कारणों से वह यह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए , ऐसे छात्रो को निराश/हताश होने की आवश्यकता नहीं है क्योकि ऐसे छात्र – छात्राओं के लिए बोर्ड द्वारा जून में फिर से परीक्षाएं करने जा रहा है जिसे Second Exam कहा जाएगा I

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board copies evaluation

हर साल बोर्ड एग्जाम के बाद छात्रों के मन में एक ही सवाल घूमता रहता है —
“आखिर हमारी बोर्ड कॉपी कैसे चेक होती है?”

कई स्टूडेंट्स को लगता है कि शायद कॉपी जल्दी-जल्दी देख ली जाती होगी या फिर किस्मत पर नंबर मिलते होंगे।

लेकिन सच यह है कि बोर्ड कॉपियों की जांच एक तय प्रक्रिया (Process) से होकर होती है, जिसमें कई स्टेप्स शामिल होते हैं।

चलिए step-by-step समझते हैं कि आपकी बोर्ड कॉपी परीक्षा हॉल से लेकर रिज़ल्ट तक किन-किन स्टेप्स से गुजरती है।


    1. परीक्षा के बाद कॉपियों को सील किया जाता है

    जैसे ही परीक्षा खत्म होती है, सभी स्टूडेंट्स की answer sheets को इकट्ठा किया जाता है।

    • सभी कॉपियों को गिना जाता है
    • उन्हें बंडल बनाकर सील (Seal) किया जाता है
    • उस पर परीक्षा केंद्र की जानकारी लिखी जाती है

    इसका मकसद होता है कि कोई भी कॉपी रास्ते में बदली या खोई न जाए।


    2. कॉपियां बोर्ड के स्ट्रॉन्ग रूम में भेजी जाती है

    सील किए गए बंडल को सीधे बोर्ड के निर्धारित सेंटर या स्ट्रॉन्ग रूम में भेज दिया जाता है।

    यहां पर:

    • कॉपियों को सुरक्षित रखा जाता है
    • उनकी एंट्री की जाती है
    • किस विषय की कितनी कॉपियां हैं, उसका रिकॉर्ड रखा जाता है

    यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षा और निगरानी में होती है।


    3. कॉपियों को अलग-अलग एग्जामिनर्स में बांटा जाता है

    अब अगला स्टेप आता है evaluation center का।

    • हर विषय के लिए अलग-अलग शिक्षक (Examiner) चुने जाते हैं
    • उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है कि कॉपी कैसे चेक करनी है
    • फिर कॉपियों के बंडल अलग-अलग examiners को दिए जाते हैं

    यहीं से शुरू होती है असल जांच प्रक्रिया।


    4. Answer Key और Marking Scheme के अनुसार जांच

    जब examiner कॉपी चेक करता है तो वह अपने मन से नंबर नहीं देता।

    उसके पास होती है:

    ✔️ Answer Key
    ✔️ Marking Scheme

    इनके आधार पर वह देखता है:

    • क्या student ने सही concept लिखा है
    • क्या answer में जरूरी keywords हैं
    • क्या diagram या example दिया गया है

    अगर answer पूरा और सही होता है तो पूरे नंबर,
    अगर आधा या आंशिक सही होता है तो आधे अंक या उसी अनुपात में अंक दिए जाते हैं।


    5. दूसरी बार भी हो सकती है जांच (Moderation)

    कई बोर्ड्स में कॉपियों को cross checking या moderation के लिए भी भेजा जाता है। वास्तव में मूल्यांकन के दौरान ही एग्जामिनर द्वारा चेक की गई कापियों में से 10 प्रतिशत कापियां उप मुख्य परीक्षक ( Dypt. Head ) व् मुख्य परीक्षक द्वारा रेंडम रूप से चेक की जाती हैं

    इसका मतलब:

    • नंबरों को फिर से देखा जाता है
    • अगर कहीं बहुत ज्यादा या बहुत कम नंबर हैं तो उन्हें ठीक किया जाता है

    इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो।


    6. नंबरों को कंप्यूटर में अपलोड किया जाता है

    जब कॉपी पूरी तरह चेक हो जाती है, तब:

    • सभी नंबरों को रिकॉर्ड किया जाता है
    • उन्हें बोर्ड के सिस्टम में डिजिटल रूप से अपलोड किया जाता है

    यहां भी कई बार डबल चेकिंग की जाती है ताकि कोई गलती न रह जाए।


    7. इसके बाद तैयार होता है आपका रिज़ल्ट

    जब सभी विषयों के नंबर सिस्टम में आ जाते हैं, तब:

    • कुल अंक (Total Marks) निकाले जाते हैं
    • प्रतिशत (Percentage) बनती है
    • और फिर रिज़ल्ट घोषित किया जाता है।

    एक जरूरी बात जो हर छात्र को पता होनी चाहिए

    Examiner रोज़ सैकड़ों कॉपियां चेक करता है।
    ऐसे में वह सबसे पहले इन चीजों पर ध्यान देता है:

    ✔️ साफ और पढ़ने योग्य handwriting
    ✔️ सही headings और points
    ✔️ keywords underline
    ✔️ diagram और flowchart
    ✔️ to-the-point answer

    अगर आपकी कॉपी साफ, व्यवस्थित और समझने में आसान है, तो examiner पर अच्छा प्रभाव पड़ता है और अच्छे नंबर मिलने की संभावना बढ़ जाती है।


    अब बताइए क्या आपको पहले से पता था कि आपकी बोर्ड कॉपी इतनी लंबी प्रक्रिया से गुजरती है?

    अगर आप चाहें तो अगली पोस्ट में हम बताएंगे:

    “टॉपर्स अपनी बोर्ड कॉपी कैसे लिखते हैं कि examiner तुरंत प्रभावित हो जाता है|


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